लॉकडाउन 4 के बीच राज्यसभा चुनाव की कवायद, राजनीतिक गतिविधियां तेज

लॉकडाउन 4 के बीच राज्यसभा चुनाव की कवायद, राजनीतिक गतिविधियां तेज

जयपुर: कोरोना संकट के चलते स्थगित किए गए राज्यसभा चुनाव की कवायद एक बार फिर से शुरू हो गई है. 18 मई से लागू  होने वाले लॉकडाउन 4 के दौरान प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव कराए जा सकते हैं. हालांकि चुनाव की तारीखों का ऐलान केंद्रीय चुनाव आयोग को करना है. सूत्रों की माने तो  केंद्रीय चुनाव आयोग राजस्थान सहित कई राज्यों की राज्यसभा सीटों के लिए जून में चुनाव कराने का ऐलान कर सकता है. हालांकि कांग्रेस के अंदर एक खेमा नीरज डांगी के नाम पर खुश नहीं है. 

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लॉकडाउन के बावजूद राजनीतिक गतिविधियां तेज: 
प्रदेश में लॉकडाउन के बावजूद राजनीतिक गतिविधियां तेज है. प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चार उम्मीदवार मैदान में हैं. कांग्रेस से पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी हैं तो वहीं भाजपा की ओर से राजेंद्र गहलोत और ओंकार सिंह लखावत को मैदान में उतारा है. संभावना जताई जा रही है कि जून में राज्यसभा के चुनाव हो सकते हैं. 

तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया 6 मार्च को शुरू हुई थी:
प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया 6 मार्च को शुरू हुई थी. नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 मार्च थी 16 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच  हुई थी, राज्‍यसभा की तीन सीटों के लिए चार उम्‍मीदवारों की ओर से तेरह नामांकन पत्र दाखिल किये गये थे, जांच में सभी नामांकन पत्र सही पाये गये थे. ओंकार सिंह लखावत का पर्चा वापस नहीं लेने के चलते 26 मार्च को तीन सीटों पर मतदान तय था, लेकिन इसी बीच कोरोना संकट और सोशल डिस्टेंसिंग के चलते केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव स्थगित कर दिए थे. मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को ऐलान करना है, वे स्वदेश लौट चुके है , हालांकि अभी आयोग में कामकाज पूरी तरह शुरु नहीं हो पाया है. 

वोट के गणित में अशोक गहलोत सेफ जोन में:
राजस्थान की कांग्रेस में नीरज डांगी के नाम को लेकर एक खेमा खुश नहीं इनमें अधिकांश सचिन पायलट के समर्थक है. लेकिन आलाकमान के निर्णय के विरोध की संभावना कम है. वोट के गणित में अशोक गहलोत सेफ जोन में. गहलोत के पास 122वोटों का साथ है. 

एक सीट को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के लिए 51 वोट चाहिए:
प्रदेश की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव को लेकर पूरे 200 विधायकों के वोट हैं. प्रदेश की इन तीनों सीटों की बात करें तो हर एक सीट को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के लिए 51 वोट चाहिए. कांग्रेस के पास है 107 विधायकों के वोट हैं तो भाजपा के पास है 72 विधायकों के वोट हैं. कांग्रेस के पास 13 निर्दलियों में से अधिकतर का समर्थन भी है. अन्य छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायक की संख्या 21 है. 2 सीटों पर कांग्रेस, एक सीट बीजेपी को जाने की संभावना है. 

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कांग्रेस को 2 सीट जीतने के लिए 102 वोट चाहिए:
तय फॉर्मूले के अनुसार कांग्रेस को 2 सीट जीतने के लिए 102 वोट चाहिए जो कि पर्याप्त रूप से उसके पास हैं. वहीं भाजपा के पास सदन में 72 विधायक हैं, ऐसे में प्रथम वरीयता के 51 वोट चाहिए लिहाजा भाजपा के खाते में भी एक सीट आने वाली है. हालांकि भाजपा ने ओंकार सिंह लखावत का पर्चा वापस न लेकर मतदान कराए जाने की स्थिति पैदा कर दी है. विधानसभा सचिवालय के पास अभी चुनाव को लेकर कोई नई गाइडलाइन नहीं मिली है.

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की  रिपोर्ट

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