रामनवमी विशेष: राजस्थान में देश का तीसरा ऐसा राम मंदिर जहां राम-लक्ष्मण की प्रतिमा के मूंछ, जानिए पूरी कहानी

रामनवमी विशेष: राजस्थान में देश का तीसरा ऐसा राम मंदिर जहां राम-लक्ष्मण की प्रतिमा के मूंछ, जानिए पूरी कहानी

झुंझुनूं: आज रामनवमी (Ramnavami) है. हर तरफ श्रीराम (Shriram) की पूजा अर्चना हो रही है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं राजस्थान के उसे अनूठे और अलग श्रीराम मंदिर के बारे में जहां पर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की प्रतिमा मूंछों वाली हैं. जी हां, एक जानकारी के मुताबिक देश में केवल तीन ही जगहों पर श्रीराम-लक्ष्मण की प्रतिमाएं मूंछों में है. जिनमें मध्यप्रदेश के इंदौर शहर तथा ओडिशा के ओडागांव के अलावा राजस्थान के झुंझुनूं का चिड़ावा कस्बा है. जहां पर मूंछों वाले श्रीराम-लक्ष्मण विराजमान है. 

ये है झुंझुनूं के चिड़ावा के हरिदास सेवा सदन परिसर में स्थित श्रीराम मंदिर. जहां पर श्रीराम और लक्ष्मण की मनमोहक प्रतिमा है. लेकिन यहां पर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण मूंछों में है. अभी तक पूरे देश में चिड़ावा से पहले केवल दो जगहों इंदौर शहर तथा ओडिशा के ओडागांव में ही ऐसी प्रतिमाएं सामने आई. जिनमें श्रीराम और लक्ष्मण मूंछों में प्रतिमा के रूप में स्थापित है. लेकिन अब राजस्थान के झुंझुनूं के चिड़ावा में भी ऐसी प्रतिमा करीब 250 सालों से विराजमान है. इसे लेकर मंदिर के पुजारी जयराम स्वामी ने बताया कि यह मंदिर 250 साल पहले स्वामी हरिदास ने बनवाया था. जो जीर्ण शीर्ण हो गया था. लेकिन अब इसका जीर्णोद्धार करवाया गया है. उन्होंने बताया कि श्रीराम-लक्ष्मण की प्रतिमा मूंछों में होने के पीछे तर्क यही है कि श्रीराम ने क्षत्रीय कुल में अवतार लिया था और वे सूर्यवंशी राजा था. इतिहास में आज तक क्षत्रीयों ने और सूर्यवंशियों ने हमेशा मूंछ रखी. इसलिए श्रीराम और लक्ष्मण के भी मूंछे थी.

ये मूर्तियां सभी को अपनी ओर आकर्षित भी करती है:
झुंझुनूं के चिड़ावा के मंदिरों पर शोध करने वाले वरिष्ठ लेखक पंडित महेश आजाद ने बताया कि चिड़ावा के नगरदेव बावलिया बाबा ने कस्बे को शिवनगरी का नाम दिया था. ऐसे में यहां के मंदिरों में खास बात है. हर एक मंदिर अपनी खासियत रखता है. इसी में शामिल हरिदास सेवा सदन में स्थित मंदिर है. जिसे किसी जमाने में रघुनाथ जी का मंदिर भी बोला जाता था और संत-साधु आदि यहां पर आकर अपना ध्यान करते थे. लेकिन यहां पर श्रीराम-लक्ष्मण की मूर्ति मूंछों में है. जो यहां की खास बात है. साथ ही ये मूर्तियां सभी को अपनी ओर आकर्षित भी करती है.

इतिहास में कलाकारों की गलतियों के कारण हमारे भगवान मूंछों वाले:
आपको बता दें कि महाराष्ट्र के कट्टर हिंदुवादी नेता संभाजी भिड़े ने भी अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर में मूंछों वाले श्रीराम की प्रतिमा स्थापित करने की मांग पिछले साल उठाई थी. उन्होंने यहां तक कहा था कि इतिहास में कलाकारों की गलतियों के कारण हमारे भगवान मूंछों वाले है. वहीं इसके जवाब में कुछ संतों ने जवाब भी दिया कि हमेशा भगवान को षोडषवर्षीय, यानि कि 16 साल का किशोर माना गया है. इसलिए किसी भी भगवान की मूंछे नहीं है. जिनमें श्रीराम, श्रीकृष्ण और श्रीशिव आदि शामिल है. लेकिन कुल मिलाकर यह बात तय है कि ओडिशा, मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान में ही एकमात्र श्रीराम मंदिर है. जहां पर भगवान श्रीराम-लक्ष्मण मूंछों में है. और उनकी प्रतिमाएं भक्तों को आकर्षित करती है.
 

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