सात समंदर पार से आई कुरजां की कलरव से गूंज रही रामदेवरा नगरी

सात समंदर पार से आई कुरजां की कलरव से गूंज रही रामदेवरा नगरी

सात समंदर पार से आई कुरजां की कलरव से गूंज रही रामदेवरा नगरी

रामदेवरा(जैसलमेर): सात समंदर पार से आई कुरजां का कलरव रामदेवरा में न सिर्फ स्थानीय लोगों को बल्कि देश भर से रामदेवरा आने वाले लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. सुबह 6 बजे कुरजाओं का आगमन रामदेवरा के जैन मंदिर के पास मैदान में हो जाता हैं. कुरजांओं कि ये कलरव सुबह 11 बजे तक लगातार रहती हैं. स्थानीय लोगों के द्वारा कुरजांओं को दाना डालने पर कुरजांओं के द्वारा सामूहिक रूप से दाना चुगा जाता हैं. कुरजांओं के कलरव के बीच स्थानीय लोगों के साथ देशभर से आये यात्रियों के दारा कुरजांओं के साथ सेल्फी ली जाती हैं. 

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राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में शीत प्रवास के लिए आते हैं:
दक्षिणी पूर्वी यूरोप, साइबेरिया, उत्तरी रूस, यूक्रेन व कजाकिस्तान से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर कुरजां के समूह गुजरात व राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में शीत प्रवास के लिए आते हैं. अक्टूबर से फरवरी तक कुरजांओं का समूह राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में शीतकालीन प्रवास करके वापस अपने गतंव्य स्थलों की तरफ उड़ा भरता हैं. इन 5 महीनों में कुरजांओं के समूहों का स्थानीय लोगों के साथ आत्मीयता के साथ जुड़ाव हो जाता हैं. 

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कुरजां की गजब की टाइमिंग के कायल है सभी:
हजारों किलोमीटर लम्बा सफर तय कर प्रवासी पक्षी कुरजां(डेमोसाइल क्रेन) एक बार फिर मारवाड़ की धरा पर पहुंच गई है. खासियत की बात यह है कि साइबेरिया से लेकर मारवाड़ तक का करीब छह हजार किलोमीटर लम्बा सफर तय करने वाले ये पक्षी न तो अपनी राह भटकते है और न ही इनके यहां पहुंचने का समय गड़बड़ाता है. कुछ बरस से ये पक्षी ठीक तीन सितम्बर को यहां पहुंचते है. इस बार भी ये ठीक तीन सितम्बर को जोधपुर जिले के खींचन गांव पहुंच गए. पक्षी विशेषज्ञ भी इनकी गजब की टाइमिंग के कायल है.

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