VIDEO: मरने के बाद भी दिलों में ज़िंदा रहेगी रणथंभौर की मशहूर बाघिन 'मछली'

VIDEO: मरने के बाद भी दिलों में ज़िंदा रहेगी रणथंभौर की मशहूर बाघिन 'मछली'

VIDEO: मरने के बाद भी दिलों में ज़िंदा रहेगी रणथंभौर की मशहूर बाघिन 'मछली'

जयपुर: मगरमच्छों का काल कही जाने वाली रणथंभौर की बाघिन 'मछली' भले ही अब दुनिया में नहीं है, लेकिन एक दशक तक मछली के साथ रहे वाइल्डलाइफ फिल्म मेकर नल्लामुथु ने मछली को देश दुनिया के वन्यजीव प्रेमियों के दिल में अमर कर दिया है. नल्लामुथु की मछली पर बनाई फिल्म 'वर्ल्ड मोस्ट फेमस टाइगर' को 65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट एनवायरनमेंट फिल्म ऑफ द ईयर का अवॉर्ड मिला है. आइए आपको बताते हैं मछली और नल्लामुथु के एक दशक के साथ पर खास रिपोर्ट:

दस साल बाघिन मछली के साथ:
देश और दुनिया में अपनी विशेष छाप छोडऩे वाली बाघिन ‘मछली’ एक बार फिर से लोगों के दिलों पर पर्दे के जरिए राज कर रही है. हालांकि मछली के लिए जितना लिखा जाए उतना ही कम है. मछली के जीवन को लेकर फिल्म मेकर नल्ला मुत्थु ने अपने जीवन के दस साल बाघिन मछली की जीवनी अपने कैमरे में कैद करने के लिए गुजार दी. जी हां हम बात कर रहे हैं रणथंभौर की बाघिन मछली की, जिसके नाम दुनिया में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सबसे अधिक देखे जाने समेत कई रिकॉर्ड दर्ज हैं. वह मौत के 2 वर्ष बाद फिर नजर आई, लेकिन रजत पट पर. 4 बार के नेशनल अवॉर्ड विजेता और दुनियाभर में भारत के बाघों पर मूवी बनाकर ख्यात हुए नल्ला मुथु ने उस पर मूवी बनाई है. 22 फरवरी को जयपुर में स्क्रीनिंग हुई और पूरे देश में 26 फरवरी को रिलीज किया गया. 

‘सेव द टाइगर’:
नल्ला ने करीब 9-10 वर्ष तक रणथंभौर में सबसे बड़े राजपाट वाली इस बाघिन पर बारीकी से नजर रखी. इस बाघिन ने अपनी अंतिम सांस भी नल्ला के सामने ही छोड़ी थी. नल्ला के जरिए टाइगर वल्र्ड में अमर हो जाएगी. नल्ला का कहना है कि संरक्षण को बढ़ावा देने के अलग-अलग तरीके होते हैं. इनमें एक तरीका कुछ तथ्यों के साथ मूवी बनाना है, जिसे आप सीधे तौर पर ‘सेव द टाइगर’ कह सकते हैं. मुझे इसके व्यापक प्रभाव का अहसास तब होता है, जब लोग बाघ को बेहद संवेदनशील एवं जागरूक जीव के तौर पर देखते हैं और इनके साथ गहराई से जुड़ते हैं. यहीं वजह है कि मैं ‘सेव द टाइगर’ नहीं कहता, बल्कि मैं लोगों को यह दिखाता हूं कि बाघों के साथ मानवीय संबंध बनाकर आपको क्यों इन जीवों को बचाना चाहिए. इस डॉक्यूमेंट्री के जरिए लोगों का इन असाधारण जीवों से जुड़ाव बढ़ेगा और लोग इनकी वह कहानियां देखेंगे, जो मैंने गत दस वर्षों में एकत्रित की हैं. 

मछली ने अगस्त 2016 में ली अंतिम सांस:
साल 1997 में जन्मी राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर अभयारण्य की बाघिन मछली ने अगस्त 2016 में अंतिम सांस ली थी. मूवी में मछली की डेटिंग, मेटिंग, हंटिंग, ह्यूमन रिलेशनशिप सहित कई अनछुए लम्हें दिखाए गए हैं. मूवी नेशनल जियोग्राफिक चैनल पर अमेरिका में रिलीज हो चुकी है. इस चैनल ने इसे 37 भाषाओं में 147 देशों में प्रसारित किया. 9 बच्चों की मां मछली को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिल चुका है.  इतना ही नहीं गहलोत सरकार ने इस बाघिन पर एक डाक टिकट भी जारी किया है. आपको बता दें कि दुनिया में सबसे ज्यादा फोटो मछली के खींचे गए हैं. एक रॉयल बंगाल टाइगर की उम्र 10 से 15 साल होती है. ऐसे में मछली ने 19 साल तक राज किया. नल्ला मुत्थु इससे पहले रणथंभौर-सरिस्का के बाघों पर ‘टाइगर क्वीन’, ‘टाइगर डायनेस्टी’, ‘टाइगर रिवेंज’ बना चुके हैं. बाघिन ‘मछली’ उनकी चौथी मूवी है. अब नल्लामुथु महाराष्ट्र की बाघिन माया के ऊपर फिल्म तैयार कर रहे हैं. टाइगर लवर सुनील मेहता के मुताबिक मछली ने बाघ संरक्षण में अपना अहम योगदान दिया है. वहीं वाइल्ड लाइफर धीरेंद्र गोधा के अनुसार बाघिन मछली को यह सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है. 

सांस्कृतिक राजदूत:
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मछली इस दुनिया से जाने के बावजूद भी राजस्थान के लिए देश-विदेश में एक सांस्कृतिक राजदूत का काम कर रही है. दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों के लिए मछली का जीवन किसी किवंदती से कम नहीं और जिस तरह नल्लामुथु ने मछली को अजर अमर कर दिया है उससे प्रदेश के वन्य जीव सिस्टम ने पूरे दुनिया में अपनी छाप छोड़ी है. 

... संवाददाता निर्मल तिवारी की रिपोर्ट 

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