शोधार्थी पर्यटकों के लिए खासा उपयोगी साबित हो रहा राव जोधा डेजर्ट पार्क

शोधार्थी पर्यटकों के लिए खासा उपयोगी साबित हो रहा राव जोधा डेजर्ट पार्क

जोधपुर। देश में चाहे कितने ही राजघराने क्यो ना हो मगर जोधपुर ही एक ऐसा अकेला राजघराना है जिसके पूर्व महाराज गजसिंह नवाचार करने के लिए काफी प्रसिद्ध है। जोधपुर के मेहरानगढ किले के पास स्थित राव जोधा डेजर्ट पार्क जो किसी जमाने में सिर्फ जंगल ही रहता था मगर जिस तरह पूर्व नरेश गजसिंह द्वारा इस पार्क को न केवल पर्यटन के लिहाज से विकसित किया गया है बल्कि इस पार्क में जिस तरह से यहां ऐसे पेड पौधे भी विकसित किए गए है जो शायद कहीं देखने को नही मिलते है। शहर के शोर शराबे से दूर इस पार्क में आने वाले देशी विदेशी पर्यटक इसको काफी पसंद भी कर रहे है। खास बात तो यह है कि यह शोधार्थी पर्यटकों के लिए खासा उपयोगी साबित हो रहा है। 

जोधपुर के मेहरानगढ़ किले की तलहटी में स्थित प्राकृतिक दृश्यों को सहेजने व इकोलॉजिकल बेलेंस बनाने के लिए राव जोधा पार्क की स्थापना 2006 में की गयी थी। जोधपुर के राव जोधा डेज़र्ट पार्क को वर्ष 2015 के एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। मेहरानगढ़ ट्रस्ट द्वारा संचालित इस पार्क को जोधपुर आने वाले देशी-विदेशी सैलानी काफी पसंद करते हैं। इस अवॉर्ड के लिए पार्क का सिलेक्शन ट्रिप एडवाईजर यात्रियों के रिव्यू के आधार पर किया गया है, जिसमें पार्क में लगाई गयी वनस्पति, यहाँ पाए जाने वाले प्रकृतिक जलस्रोतों, पशु पक्षियों और यहाँ की मेंटेनेंस को शामिल किया गया है। ये पार्क मेहरानगढ़ किले से विद्याशाला की ओर जाने वाले रास्ते में पड़ता है। 

मेहरानगढ़ म्युजियम ट्रस्ट के निदेशक करणीसिंह जसोल ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा मेहरानगढ़ किले की तलहटी में स्थित प्राकृतिक दृश्यों को सहेजने व इकोलॉजिकल बेलेंस बनाने के लिए राव जोधा पार्क की स्थापना 2006 में की गयी थी। यहां गूगल, कुम्भट, गांगेढी, वज्रदंती, अश्वगंधा, बेर, शंखपुष्पी, गूंदा, गोखरु, खीप समेत कई तरह की वनस्पतियां लगायी गयी हैं। राव जोधा डेजर्ट पार्क के रखरखाव सहायक हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि 12 साल पहले यह पहाड़ी क्षेत्र विलायती बबूल से भरा पड़ा था, जिन्हें हटाकर इस क्षेत्र में प्राकृतिक वनस्पतियां लगाई गयी। 

उन्होंने बताया कि इस उद्यान पर ‘राव जोधा पार्क की तितलियां’ एवं ‘वानस्पतिक चट्टानें’ नामक पुस्तकें भी प्रकाशित की गई हैं। वही इस पार्क को देखने आने वाले पर्यटक भी इसको काफी पसंद करते है और इसकी तस्वीरे लेने से नही चूकते है। गौरतलब है कि 70 हेक्टेयर में फैले इस पार्क में रानीसर, पदमसर व जसवंतधड़ा के नीचे स्थित देवी कुण्ड आदि प्राकृतिक झीलें शामिल हैं, साथ ही इसमें लोटस पोंड व सींगोडीया पहाड़ी सैलानियों को काफी आकर्षित करती है। इस पार्क में तीन नेचुरलिस्ट भी मौजूद हैं, जो सैलानियों को पार्क की ख़ूबियों के बारे में जानकारियां उपलब्ध करवाते हैं। पार्क में माइग्रेटरी बर्ड्स को मिलाकर करीब 164 तरह की प्रजातियों के पक्षी पाये जाते हैं। तितलियों के लिए खास तौर से मशहूर इस उद्यान में लगभग तीस तरह की तितलियाँ पायी जाती हैं, साथ ही यहां रेगिस्तानी खरगोश, नेवले, पोरक्यूपाइन व मॉनिटर लिजार्ड देखने को मिलते हैं। 
राजीव गौड़ फर्स्ट इंडिया न्यूज जोधपुर

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