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लालफिताशाही और व्यवस्थागत उदासीनता के चलते बिना शादी के मां बनने को मजबूर हुई दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग— हाईकोर्ट

लालफिताशाही और व्यवस्थागत उदासीनता के चलते बिना शादी के मां बनने को मजबूर हुई दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग— हाईकोर्ट

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में दुष्कर्म के चलते गर्भवती होने वाली पीड़िताओं को समय पर कानूनी और मेडीकल सहायता प्रदान कर उनके गर्भपात को लेकर एक गाईडलाईन बनाने के आदेश दिये है. ताकि कोई भी दुष्कर्म पीड़िता एमटीपी एक्ट के तहत गर्भपात या बच्चा पैदा करने को लेकर अपनी निर्णय कर सके. हाईकोर्ट ने ये आदेश राज्य सरकार की ओर से दायर कि गयी अपील पर सुनवाई करते हुए दिये है.

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एकलपीठ ने पीड़िता के गर्भपात की अनुमति देने से इंकार कर दिया था:
जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस डा.पुष्पेंद्रसिंह भाटी की खंडपीठ ने एकलपीठ के 17 अक्टूबर 2019 के फैसले को भी अपास्त कर दिया है. इस फैसले में एकलपीठ ने एकलपीठ ने कहा था कि दुष्कर्म पीड़िता के जीवन के अधिकार का संरक्षण जरूरी है, लेकिन जन्म लेने वाले बच्चे के जीवन के अधिकार की भी अनदेखी नहीं की जा सकती. इसके साथ ही एकलपीठ ने पीड़िता के गर्भपात की अनुमति देने से इंकार कर दिया था.

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खण्डपीठ ने की मामले में सख्त टिप्पणी:
खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस प्रकरण में लालफीताशाही और व्यवस्थागत उदासीनता के कारण बिना वजह के गर्भपात में देरी हुई. जिसके चलते नही चाहते हुए भी पीड़िता को  बिना शादी के जन्म देने के लिए मजबूर हुई, अब उसे अनंत काल के लिए मानसिक रूप से परेशान कर देगा. यह आघात उसकी मानसिकता पर अमिट बन कर रह जाएगा. हमारे समाज की रूढि़वादी समाज में इस गर्भ के चलते पीड़िता के वैवाहिक अवसर भी प्रभावित हुए है. शुरूआत में होने वाली देरी के कारण गर्भावस्था के चिकित्सीय समापन का विकल्प अपनाने की इच्छुक पीडि़ता को अपने अधिकारों को लेकर बहुत निराशा हुई. पीड़िता ने समय पर अपनी गर्भावस्था को समाप्त करने की मांग की, लेकिन लालफिताशाही ने ये नही होने दिया.

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जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सचिन पायलट की राहुल गांधी-प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल से मुलाकात हुई है. इस दौरान चारों के बीच करीब दो घंटे तक चर्चा हुई. मुलाकात के बाद राहुल और प्रियंका सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे. उसके बाद अब राहुल-सोनिया और प्रियंका के बीच मुलाकात जारी है. 

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तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की कही गई बात: 
मिली जानकारी के अनुसार इस दौरान तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की बात कही गई है. ऐसे में तीनों सदस्य पूरे मामले पर विचार विमर्श करने के बाद ही विधायकों की वापसी पर फैसला लेंगे. फिलहाल सचिन पायलट की बातों को नहीं माना गया है. शायद यह मीटिंग बहुत कामयाब नहीं रही. आलाकमान पायलट की मूल मांग मानने के मूड में नहीं है. आलाकमान ने राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन से साफ इनकार किया है. ऐसे में अब आखिर कैसे होगी पायलट और बागियों की सम्मानजनक घर वापसी? फिलहाल किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा है. शायद आज रात तक कुछ स्थिति स्पष्ट हो जाए. 

एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही:  
बता दें कि 14 अगस्त से ही राजस्थान में विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है, इस पर सचिन पायलट गुट ने सत्र में शामिल होने के संकेत दे दिए थे. ऐसे में अब प्रियंका और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही है कि सचिन पायलट अपनी नाराजगी भूलकर पार्टी में वापस आएंगे. पहले भी प्रियंका गांधी वाड्रा ने सचिन पायलट से कई बार फोन पर बात की थी और उन्होंने मसला सुलझाने का प्रयास किया था. 

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गहलोत गुट के विधायकों ने की थी एक्शन की मांग:
इससे पहले सोमवार को ही ये बात सामने आई थी कि राजस्थान में गहलोत गुट के विधायकों ने मांग की है कि बागी विधायकों पर एक्शन होना चाहिए, जिसपर सीएम गहलोत ने फैसला आलाकमान पर छोड़ने की बात कही थी. साथ ही कहा था कि इस बारे में सबको आलाकमान का फैसला मानना चाहिए. 

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जयपुर: बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय को चुनौती देने वाली बसपा और भाजपा विधायक की याचिकाओं पर राजस्थान हाईकोर्ट में कल सुनवाई होगी. हाईकोर्ट में सुनवाई से पूर्व अब कांग्रेस की ओर मामले में पक्षकार बनने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया गया है. प्रार्थना पत्र में राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष और मुख्य सचेतक महेश जोशी को पक्षकार बनाने की गुहार लगायी गयी है. 

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एडवोकेट वरूण के चौपड़ा और शाश्वत पुरोहित के जरिए पेश किये गये प्रार्थना पत्र में कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि चुकि राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष ने 18 सिंतबर 2019 को एक आदेश के जरिए बसपा के सभी 6 विधायकों का कांग्रेस में विलय कर दिया है. इसलिए अब ये सभी 6 विधायक बसपा के नही होकर राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस के विधायक है. 

सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है 6 बसपा विधायक: 
याचिका में कहा गया है कि बसपा की ओर से दायर याचिका में इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने और वोटिंग अधिकार पर रोक लगाने की गुहार की गयी है. अगर हाईकोर्ट ऐसा आदेश देता है तो वर्तमान सरकार के लिए मुश्किल होगा. इससे कांग्रेस और मुख्य सचेतक के हित प्रभावित होते हैं. ये विधायक कांग्रेस की वर्तमान सरकार का सबसे मजबूत पक्ष है. राज्य की सरकार के लिए ये सभी 6 विधायक बेहद महत्वपूर्ण और प्रमुख सदस्य है. इसलिए इस मामले में कोई भी आदेश देने से पूर्व कांग्रेस और मुख्य सचेतक का पक्ष भी सुना जाये. 

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विधानसभा अध्यक्ष के 18 सिंतबर 2019 के चुनौती दी गयी: 
याचिका में कहा गया है कि विधानसभा अध्यक्ष के 18 सिंतबर 2019 के चुनौती दी गयी है. अध्यक्ष का ये आदेश इंडियन नेशनल कांग्रेस को प्रभावित करता है. इसलिए कांग्रेस और मुख्य सचेतका का भी पक्ष सुना जाये. बसपा की ओर से दायर याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ कल सुनवाई करेगी. सुनवाई से एक दिन पूर्व कांग्रेस ने राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की ओर से ये अर्जी पेश की है. इसके साथ ही मुख्य सचेतक महेश जोशी की ओर से भी मामले में पक्षकार बनने की अर्जी पेश की है. 

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जयपुर: प्रदेश में खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में आने वाले गरीब परिवारों को कोरोना का निजी अस्पतालों में फ्री इलाज मिलेगा. कोरोना नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अहम फैसला किया है, जिसके तहत इन परिवारों को निजी अस्पताल में ईलाज का पूरा खर्चा का रिमेम्बरसमेंट किया जाएगा. 

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गहलोत सरकार ने कई अहम फैसले लेकर मरीजों को राहत दी:  
राजस्थान में कोरोना की रोकथाम के प्रति गहलोत सरकार स्वास्थ्य ही फ्रंट फुट पर काम कर रही है. फिर चाहे वह जांच का दायरा बढ़ाने की बात हो या फिर कोरोना मरीजों की सुविधाओं को लेकर फैसले. हर मोर्चे पर गहलोत सरकार ने कई अहम फैसले लेकर मरीजों को राहत दी है. इसी कड़ी में खाद्य सुरक्षा के दायरे में आने वाले परिवारों को बड़ी सौगात दी गई है. चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा ने बताया कि प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा से जुड़े लोग कोरोना पॉजिटिव चिन्हित पाए जाते हैं तो वह किसी भी निजी अस्पताल में भी इलाज ले सकते हैं. इस दौरान आने वाले खर्च का पूरा पुनर्भरण सरकार द्वारा किया जाएगा.   

सरकार कोरोना टेस्ट क्षमता और टेस्टिंग संख्या में लगातार बढ़ोतरी कर रही: 
राजस्थान में कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि प्रदेश भर में 30 हजार से ज्यादा कोरोना जांचें प्रतिदिन की जा रही हैं. सरकार कोरोना टेस्ट क्षमता और टेस्टिंग संख्या में लगातार बढ़ोतरी कर रही है. एग्रेसिव टेस्टिंग का ही परिणाम है कि कोरोना के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. लेकिन सर्विलांस की दृष्टि से ये अच्छे संकेत हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश में कोरोना से होने वाली मृत्युदर शून्य पर आ सके. इसके लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि सुकून देने वाली बात यह रही कि जुलाई-अगस्त में प्रदेश में कोरोना से होने वाली मृत्युदर घटकर 1 प्रतिशत तक आ गई. वर्तमान में कोरोना से होने वाली मृत्युदर 1.5 फीसद है. उन्होंने कहा कि प्लाज्मा थेरेपी और जीवनरक्षक इंजेक्शन के जरिए इसे और भी कम किया जा रहा है.  

एंटीजन टेस्ट की विश्वसनीयता पर सवाल !
- चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा ने फिर केन्द्र पर साधा निशाना
- कहा - केंद्र सरकार से एंटीजन किट की लगातार कर रहे है मांग
- लेकिन चिकित्सा विभाग को अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए किट
- मजबूरन एक निजी अस्पताल से सैम्पल टेस्ट के लिए मंगवाए गए 200 किट
- इसमें से जांच में 48.6 फीसदी किट ही मानकों पर उतरे खरे
- 200 में से 89 उन मरीजों के टेस्ट बताए गए नेगेटिव
- जो RTPCR टेस्ट में भी पाए गए नेगेटिव
- लेकिन शेष बची 111 किट में से 57 रिपोर्ट बताई गई नेगेटिव
- जबकि RTPCR टेस्ट में यह सभी पाए गए थे पॉजिटिव
- इसमें चिकित्सा मंत्री ने केंद्र को एक बार फिर पत्र लिखने का किया जिक्र

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सरकार कोरोना की रोकथाम के लिए सजग और सतर्क है. राजधानी के निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों का इलाज बेहतर तरीके से हो सके इसके लिए अस्पतालों के प्रबंधकों की मुख्य सचिव के साथ बैठक प्रस्तावित है. उन्होंने कहा कि आरयूएचएस अस्पताल में कोरोना के मरीजों की सुविधाओं को भी बढ़ाया जाएगा. उन्होंने कहा कि कोरोना मरीजों के बेहतर उपचार के लिए 1300 नए वेंटीलेटर प्रोक्योर किए गए हैं. हालांकि प्रदेश सरकार के पास वेंटीलेटर्स की कोई कमी नहीं थी लेकिन पॉजिटिव्स केसों की बढ़ती संख्या के चलते यह वेंटीलेटर्स खासे उपयोगी होंगे.  

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केवल सावधानियों से ही कोरोना को हराया जा सकता:
स्वास्थ्य मंत्री ने एक बार फिर आमजन से अपील करते हुए कहा कि कोरोना का अभी तक कोई पुख्ता इलाज या कोई वैक्सीन नहीं खोजी जा सकी है, ऐसे में केवल सावधानियों से ही कोरोना को हराया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार अपने स्तर पर कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही लेकिन आमजन को भी कोरोना प्रोटोकॉल का ध्यान में रखते हुए मास्क लगाने, भीड़ में ना जाने, बार-बार साबुन से हाथ धोने जैसे नियमों की पालना जरूर करनी चाहिए. 

Rajasthan Political Crisis: सुप्रीम कोर्ट में अब कल होगी सुनवाई, भाजपा और बसपा विधायकों की ट्रांसफर याचिकाओं पर एक साथ होगी सुनवाई

Rajasthan Political Crisis: सुप्रीम कोर्ट में अब कल होगी सुनवाई, भाजपा और बसपा विधायकों की ट्रांसफर याचिकाओं पर एक साथ होगी सुनवाई

जयपुर: बसपा के 6 विधायको के कांग्रेस में विलय मामले में अब सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट भाजपा विधायक की एसएलपी के साथ ही बसपा विधायकों की ट्रांसफर पीटीशन पर एकसाथ सुनवाई करेगा. जस्टिस अरूण मिश्रा, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस कृष्णमुरारी की तीन सदस्य बैंच में भाजपा विधायक मदन दिलावर की याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान दिलावर के वकील हरीश साल्वे ने बसपा विधायको की ओर से दायर ट्रांसफर पीटीशन का जिक्र किया. जिस पर अदालत ने दोनों ही याचिकाओं पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई करने के निर्देश दिये है. 

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भाजपा विधायक मदन दिलावर ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है. इस याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने अदालत को बताया कि विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी शिकायत को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया है. जबकि बसपा विधायको का कांग्रेस में विलय असंवैधानिक है क्योकि खुद बसपा की ओर से कहा गया है कि उसने कांग्रेस में विलय की अनुमति नहीं दी है. सुप्रीम कोर्ट में मदन दिलावर की ओर से दायर याचिका में बसपा विधायकों की विधानसभा में वोटिंग पर रोक की मांग की है. बसपा के 6 विधायकों ने भी सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर याचिका दाखिल कर राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित मामले को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की है. बसपा विधायकों की ट्रांसफर पीटीशन पर भी अब सुप्रीम कोर्ट कल सुनवाई करेगा. 

राजस्थान हाईकोर्ट में भी सुनवाई कल: 
बीजेपी विधायक मदन दिलावर और बसपा की ओर से दायर याचिका पर भी राजस्थान हाई कोर्ट में कल सुनवाई होगी. बसपा और दिलावर ने याचिका दायर कर बसपा के 6 विधायकों का कांग्रेस में विलय असंवैधानिक बताया है. जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने 30 जुलाई को आदेश देते हुए विधानसभा अध्यक्ष, सचिव और बसपा विधायको को नोटिस जारी किये थे. 

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एकलपीठ के आदेश के खिलाफ बसपा और दिलावर की ओर से अपील दायर कि गयी थी. जिस पर मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत मोहंती और न्यायमूर्ति प्रकाश गुप्ता की खंडपीठ ने 6 अगस्त को आदेश देते हुए बसपा विधायको को नोटिस तामिल कराने की व्यवस्था की थी. इसके साथ ही एकलपीठ को मामले की सुनवाई कर उसी दिन फैसला करने को कहा था. पीठ ने कहा कि एकल पीठ 11 अगस्त को भाजपा और बसपा की अपील पर सुनवाई करेगी. कल ही अब इस मामले पर राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट ने कोई निर्देश जारी नही किये है. ऐसे में हाईकोर्ट मामले पर सुनवाई कर सकता है. 

कोटा: एक के बाद एक दो युवकों के शव मिलने से फैली सनसनी

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कोटा: जिले के उद्योग नगर थाना इलाके की दायीं मुख्य नहर में आज एक के बाद एक दो युवकों के शव मिलने से सनसनी फैल गई. पहला शव डीसीएम शनि मंदिर के पीछे से नहर मिला है, मौके पर पहुंचे नगर निगम गोताखोरों नहर से शव को बाहर निकाला. जिसकी पहचान नहीं हो सकी है. मृतक के हाथ पर एस.के ज्योति नाम गुदा हुआ है, साथ ही हाथ पर कट के निशान भी मिले.

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दूसरा शव उम्मेदगंज के पास नहर में मिला: 
उधर, दूसरा शव उम्मेदगंज के पास नहर में मिला है, मृतक के कपड़ों की जेब से पहचान के कई दस्तावेज मिले है. जिसके आधार पर मृतक की पहचान जयपुर के फुलेरा निवासी गोविंद के रूप में हुई है. दोनों युवकों ने आत्महत्या की है या फिर उनके साथ कोई हादसा हुआ है, इसकी फिलहाल उद्योग नगर थाना पुलिस जांच कर रही है.  

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जैसलमेर: राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच विधायक संयम लोढ़ा का बड़ा बयान सामने आया है. फर्स्ट इंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट बसपा के विधायकों का वोट फ्रीज नहीं कर सकता. कोर्ट अधिकाधिक बसपा के विलय को रोक सकता है, तब नया दल बसपा लोकतांत्रिक या कोई और दल बनाने से नहीं रोका जा सकता है. 

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मदन दिलावर जाने क्यों परेशान? 
इसके साथ ही संयम लोढ़ा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा तो फड़फड़ा रही है, मानसकिता संकीर्ण रही है. इसके साथ ही आदिवासी लीडरशिप का अपमान किया है. लोढ़ा ने कहा कि मदन दिलावर जाने क्यों परेशान है उन्होंने लिखा है कि उन्हें अपूरणीय क्षति हुई है. लेकिन ये समझ नहीं आता कि बसपा के विलय से उन्हें कैसे क्षति हुई है. ऐसे में सत्य की जीत होगी और सत्य अशोक गहलोत के साथ है. राजस्थान के चप्पे चप्पे से जनता का आशीष है. संवाददाता लक्ष्मण राघव ने विधायक संयम लोढा से खास बातचीत की...

 

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बीकानेर: जिले के लूणकरणसर थाना क्षेत्र के साधेरा गांव के पास जिंदा बम मिलने से हड़कम्प मच गया. कल रात्रि को साधेरा गांव के पास जमीन गड़ा हुआ जिंदा बम ग्रामीणों को मिला. ग्रामीणों ने इसकी सूचना लूणकरणसर थाना पुलिस को दी. सूचना पर लूणकरणसर पुलिस मौके पर पहुंची और आर्मी को बम की सूचना दी गई.

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आर्मी के बम निरोधक दस्ते ने जिंदा बम को किया डिफ्यूज:  
आज सुबह आर्मी के बम निरोधक दस्ता साधेरा गांव पहुंचा. आर्मी के बम निरोधक दस्ते ने जिंदा बम को अपने कब्जे में लेकर गांव से दूर ले जाकर खेतों में बम को डिफ्यूज किया. बम को डिफ्यूज करते समय तेज धमाका भी हुआ. 

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नई दिल्ली: भारत में तेजी से कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय की ताजा जानकारी के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में कोरोना के 62,064 नए मामले सामने आए हैं. वहीं, इस दौरान 1,007 मरीजों की कोविड-19 से मौत हुई है. देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 22,15,075 पहुंच गई है. इसमें से 15,35,744 मरीज इलाज के बाद ठीक हो गए हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. वहीं, देश में कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 6,34,945 है. आंकड़ों के अनुसार, कोरोना वायरस से अब तक भारत में 44,386 लोगों की मौत हुई है. 

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रविवार को देश में कोरोना के 4,77,023 सेंपल टेस्ट किए गए: 
रविवार को देश में कोरोना के 4,77,023 सेंपल टेस्ट किए गए. इसी के साथ भारत में कोरोना के टेस्ट का आंकड़ा 2,45,83,558 पहुंच गया है. इससे पहले शनिवार को कोरोना वायरस के लिए जांच की क्षमता को बढ़ाते हुए एक दिन में 7 लाख से अधिक नमूनों की जांच की गई थी. देश में सबसे ज्यादा एक्टिव केस महाराष्ट्र में हैं. इसके बाद दूसरे नंबर पर तमिलनाडु, तीसरे नंबर पर दिल्ली, चौथे नंबर पर गुजरात और पांचवे नंबर पर पश्चिम बंगाल है. इन पांच राज्यों में सबसे ज्यादा एक्टिव केस हैं.  

 जोधपुर के देचू में 11 पाक विस्थापितों की मौत का प्रकरण, सभी की कोरोना रिपोर्ट आई नेगेटिव 

दुनिया का तीसरा सबसे प्रभावित देश:
भारत कोरोना संक्रमितों की संख्या के हिसाब से दुनिया का तीसरा सबसे प्रभावित देश है. अमेरिका, ब्राजील के बाद कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित भारत है. लेकिन अगर प्रति 10 लाख आबादी पर संक्रमित मामलों और मृत्युदर की बात करें तो अन्य देशों की तुलना में भारत की स्थिति बहुत बेहतर है. देश में कोरोना मामले बढ़ने की रफ्तार भी दुनिया में तीसरे नंबर पर बनी हुई है.


 

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