मिलिए असली बजरंगी भाईजान से, 13 साल से भटक रहे रंजीत को परिवार से मिलवाया

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/08/02 09:34

शाहजहांपुर। बजरंगी भाई जान का नाम आता है तो सबसे बात सलमान खान की होती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे बजरंगी भाईजान के बारे मे बताएंगे जो पिछले कई दिनों से जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश व यूपी में सिर्फ इस लिए भटक रहा था की 13 साल से भटक रहे एक युवक को उसके परिवार से मिलवा सके,और आखिरकार इस रियल बजरंगी भाईजान ने युवक को उसके परिवार से मिला ही दिया।

ये बजरंगी भाई जान हैं जम्मू में रह कर राजमिस्त्री का काम करने वाले धनीराम। धनीराम की मुलाकात कुछ महीने पहले 21 साल के रंजीत से हुई, रंजीत 13 साल पहले यूपी के अपने गांव से भाग कर भटक गया था राज मिस्त्री धनीराम ने बेसहारा रंजीत को काम दिया, रहने के लिए घर दिया और खाना भी दिया। लेकिन इसी बीच युवक रंजीत को अपने घर परिवार से मिलने की दिल मे बेचैनी हुइ तो रंजीत ने परिवार से मिलाने की गुहार लगाई। फिर क्या था राज मिस्त्री अपना काम धंधा छोङकर निकल पड़ा फिल्मी बजरंगी भाईजान सलमान खान की तरह रंजीत को उसके परिवार से मिलवाने। 

दरअसल रंजीत वर्मा जनपद अम्बेडकर नगर के ब्लाक जलालपुर के ग्राम सुराही का रहने वाला है। रंजीत के पिता राम सिधार वर्मा गांव मे चाय का होटल चलाते थे। रंजीत जब पांचवी क्लास मे था। तो उस वक्त उसकी उम्र करीब 10 वर्ष रही होगी। पढ़ाई में मन न लगने की वजह से रंजीत स्कूल कम जाता था और जब जाता तो टीचर उसे मारते थे। और उधर घर जाने पर होमवर्क न करने की वजह से पिता जी भी पिटाई लगाते थे।

गुस्से में भागा था घर छोड़कर
एक दिन पिता की मार से तंग आकर गुस्से में रंजीत घर से भाग गया। 10 साल के रंजीत को तो ये भी नही पता था कि उसे जाना कहा है बस वो एक ट्रेन में बैठ गया जो कि हिमाचल प्रदेश जा रही थी हिमाचलप्रदेश पहुंचने के बाद भूखे प्यासे रंजीत को एक शख्स ने पनाह दी और उसे अपने साथ रख लिया। तब तक यूपी के अम्बेडकर नगर का रहने वाला रंजीत ये भी भूल चुका था कि वो कहा से आया है। 2 साल हिमाचल में रहने के बाद रंजीत को जम्मू जाना पड़ा फिर जम्मू में ही रहकर वो काम करने लगा। जहां 12 साल बाद रंजीत की धनीराम से मुलाकात हुई। दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए और साथ रहने लगे। 

अब बात करते है देश के असली बजरंगी भाई जान राजमिस्त्री धनीराम की। धनीराम मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले का रहने वाला है। वह जम्मू मे रहकर राज मिस्त्री का काम करता है। उनका कहना है जब रंजीत ने कहा कि उसे परिवार से मिलना है लेकिन उसे कुछ याद नही वो कहा से आया है सिर्फ गांव का नाम जनता है और केवल गाँव के नाम से रंजीत घर ढूंढना मुश्किल था फिर भी धनीराम ने ठान लिया कि रंजीत को उसके परिवार से ज़रूर मिलाएगा और निकल पड़ा बजरंगी भाईजान की तरह धनीराम। इस मकसद को पूरा करने के लिए दोनों पहले मध्यप्रदेश गए जहा रंजीत के परिवार को ढूंढने की नाकाम कोशिश की। उसके बाद वह ट्रेन से जिला महोबा फिर सीतापुर गए कोई कामयाबी न मिलने पर वो दोनों  ट्रेन से शाहजहांपुर पहुंचे जहां उन्हें ई रिक्शा चालक मुल्ला जी से मिले, धनीराम ने मुल्ला जी को पूरी दास्तां बताई।

अब इस काम मे मुल्ला जी भी दोनों का साथ देने और परिवार ढूढने निकल पड़े 

रंजीत को अपने जनपद का नाम नही पता था। थाने का नाम नही पता था इतना ही नही जनपद की कोई फेमस जगह भी याद नही थी। अपनी मां का नाम तक भूल चुका था। लेकिन बडे भाई मंजीत, बडी बहन प्रियंका, छोटी बहन शिल्पा और चाचा का नाम याद था। और अगर कुछ याद था तो वह था सुराली गांव मे लगने वाली बाजार सहजादपुर का नाम । धनीराम कहीं भी जाता तो वह जिला शहजादपुर का पूछता था जिसका कोई कुछ नही बता पाता था। धनीराम को  फ़िल्म बजरंगी भाईजान का वो सीन जिसमे मीडिया से मदद मिलती है याद आया, फिर क्या मुल्ला जी की मदद से तीनों एक टीवी चैनल के ऑफिस पहुचे और जहां धनीराम ने पूरा मामला पत्रकारों को बताया और उसके बाद पत्रकारो ने इन्टरनेट पर 1 दिन की मेहनत के  बाद परिवार का पता लगा लिया और उसके परिवार से बात कराई तथा दोनों को अम्बेडकर नगर के लिए दून एक्सप्रेस से रवाना किया। 

इस तरह रंजीत के लिए राजमिस्त्री धनीराम बजरंगी भाई जान बना और मूवी के बजरंगी भाई जान से दो कदम आगे बढ़कर रंजीत को 13 साल बाद उसके परिवार से मिलवा दिया। 

ट्रेन से उतरते ही रंजीत को उसके परिवार ने पहचान लिया और मां ने फौरन रंजीत को गले लगा लिया। उधर गांव मे रंजीत के लौट आने की खबर आग की तरह से फैल गई। तो देखते ही देखते रंजीत के घर उसको देखने के लिए पूरा गांव इकट्ठा हो गया। रंजीत के घर त्योहार जैसा माहौल हो गया। वही रंजीत के परिजन शाहजहांपुर में पत्रकारो और बजरंगी भाई जान बने धनीराम का शुक्रिया अदा नही करते थक रहे हैं।
 

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