एसटीपी नहीं मिलने से अटका कोटा-बारां नेशनल हाईवे का पुनर्निर्माण 

Nirmal Tiwari Published Date 2019/09/17 07:19

जयपुर: एसटीपी देने में मिलीभगत करने के लिए बदनाम कोटा और बारां के खनिज अभियंताओं ने हाड़ौती में सड़क विकास को ठप कर दिया है. कोटा-बारां नेशनल हाईवे के पुनर्निर्माण में खान विभाग सबसे बड़ी बाधा बन गया है. यह अलग बात है कि खुद खान मंत्री प्रमोद जैन भाया और सरकार के कद्दावर मंत्री शांति धारीवाल के लिए यह प्रोजेक्ट उनकी सियासी जमीन को मजबूती देने के लिए अहम है. बावजूद इसके एनएचएआई के बार बार आग्रह करने पर भी खान विभाग के दोनों कार्यालय निर्माण एजेंसी को एसटीपी देने से पीछे हट गए हैं. इससे इस नेशनल हाईवे का पुनर्निर्माण अटक गया है. एक रिपोर्ट:

आखिर कौन अटका रहा कोटा-बारां नेशनल हाईवे निर्माण..?
—105 किलोमीटर लंबा है नेशनल हाईवे
—एनएचएआई ने दिया 208 करोड रुपए का वर्क आर्डर
—हरियाणा की दत्तरवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया वर्क आर्डर
—लेकिन खान विभाग नहीं कर रहा निर्माण के लिए एसटीपी जारी
—कोटा और बारां खनिज अभियंता में अटका रखी एसटीपी
—क्या विकास में बाधक जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई ?

खराब हालत को देखते हुए पुनर्निर्माण का फैसला:
हाड़ौती क्षेत्र के लिए कोटा-बारां नेशनल हाईवे को अहम माना जाता है. करीब 105 किलोमीटर लंबे इस हाईवे को इस क्षेत्र के दो सौ से अधिक गांव के विकास की धुरी समझा जाता है. एनएचएआई ने इस हाईवे की खराब हालत को देखते हुए इसके पुनर्निर्माण का फैसला किया. इसके बाद केंद्र की अनुमति मिलते ही इस हाईवे के 208 करोड़ रुपए के टेंडर जारी कर दिए. हरियाणा की दत्तरवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए, लेकिन सबकुछ होने के बाद भी कोटा और बारां के खनिज अभियंताओं को यह प्रोजेक्ट पता नहीं क्यों नागवार गुजरा और दोनों अभियंताओं ने प्रोजेक्ट पर अघोषित रोक लगा दी है. यह बात अलग है कि खान मंत्री के क्षेत्र में उनके ही विभाग के दो खनिज अभियंता खुद मंत्री के सियासी विकास और क्षेत्र की जनता के हक़ को रोकने का दुस्साहस कर रहे हैं. हालांकि इस बात की भी अफवाह है कि सरकार के लिए इतने अहम प्रोजेक्ट में खान विभाग दो अभियंता ऐसा कैसे कर सकते हैं..? और अचरज तब होता है कि इसी क्षेत्र से सरकार की कद्दावर मंत्री शांति धारीवाल भी आते हैं और इस हाईवे के पुनर्निर्माण से उनकी राजनीतिक जमीन को मजबूती मिलेगी. इसके बाद भी खान विभाग द्वारा निर्माण कंपनी को एसटीपी ने देने से मामला उलझता जा रहा है. 

जब तक एसटीपी नहीं मिलेगी, निर्माण संभव नहीं:
आपको बता दें कि कोटा खनन कार्यालय के रिटायर्ड बाबू लेखराज मीणा की बिना मर्जी के खान विभाग की वर्क्स विंग एसटीपी जारी नहीं करती थी, लेकिन अब लेखराज रिटायर हो चुका है और पिछले एक महीने से इस विंग के कोटा खनिज अभियंता कार्यालय के कमरे में ताला लगा हुआ है. अब जब तक निर्माण कंपनी को एसटीपी नहीं मिलेगी, कोटा- बारां नेशनल हाईवे का निर्माण संभव नहीं. क्योंकि सड़क निर्माण के लिए पत्थर, रोडी, बजरी सभी एसटीपी पर निर्भर हैं. एनएचएआई के सीजीएम एमके जैन की माने तो हाड़ौती क्षेत्र में सड़क विकास के इस अहम प्रोजेक्ट को खान विभाग जानबूझकर एसटीपी नहीं दे रहा है. ऐसे में प्रोजेक्ट डिले हो रहा है और निर्माण कंपनी को नुकसान भी हो रहा है. जैन का कहना है कि वे खुद इस संबंध में खान विभाग से आग्रह कर चुके हैं, लेकिन एसटीपी नहीं देने कारण तक नहीं बताया जा रहा. उधर सूत्रों का कहना है कि खान विभाग के दोनों जिले के अफसरों की मनमानी का इल्म सरकार को होने के बाद भी उन पर कार्रवाई न होना और निर्माण कंपनी को एसटीपी नहीं देने का मामला सीएमओ तक पहुंच गया है. अब देखना होगा कि पूरे मामले में सीएमओ के सतर पर क्या कार्रवाई की जाती है.  

... संवाददाता निर्मल तिवारी की रिपोर्ट 

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