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राजस्थान में 5 साल से नहीं हुई पशु चिकित्सकों की भर्ती, करीब 1035 पद खाली

राजस्थान में 5 साल से नहीं हुई पशु चिकित्सकों की भर्ती, करीब 1035 पद खाली

जयपुर। राजस्थान में पिछले पांच साल से पशु चिकित्सकों की भर्ती नहीं होने से करीब 60 फीसदी इनके पद खाली पड़े हैं । जिससे सरकार के पशुधन को बढावा देने और पशुओं के अच्छे ईलाज के दावे खोखले साबित हो रहे हैं । फिलहाल राजस्थान में करीब एक हजार पैंतीस पशु चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं । पिछली भाजपा सरकार ने जाते जाते 900 पशु चिकित्सकों की भर्ती करने की बजट में घोषणा की थी । लेकिन मामला अभी भी नियमों के भंवरलाजल के चलते फाइलों में अटका पड़ा है । 

भर्ती की बाट जोह रहे बेरोजगार पशु चिकित्सा संगर्ष समिति लगातार इसको लेकर विरोध कर रही है । वित्त विभाग ने भी भर्ती के लिए बजट की मंजूरी दे रखी है । लेकिन आरपीएससी और पशुपालन विभाग के बीज भर्ती नियमों में संशोधन की फाइल अटकने के चलते बेरोजगारों की हसरत पूरी नहीं हो पा रही । अब इनको नई कांग्रेस सरकार से जल्द भर्ती की विज्ञप्ति जारी होने की उम्मीद है । समिति महासचिव जोरावार सिंह का कहना है कि लोकसभा चुनाव से पहले सरकार यह भर्ती प्रक्रिया शुरु करें। 

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मुख्यमंत्री गहलोत का फैसला, जरूरतमंद 4.14 लाख परिवारों को मिलेगा निशुल्क खाद्यान्न

मुख्यमंत्री गहलोत का फैसला, जरूरतमंद 4.14 लाख परिवारों को मिलेगा निशुल्क खाद्यान्न

जयपुर: प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया है. सीएम गहलोत ने कोविड-19 महामारी की वजह से आर्थिक संकट का सामना कर रहे 4 लाख 14 हजार जरूरतमंद परिवारों को खाद्यान्न सुरक्षा के रूप में प्रति व्यक्ति 10 किलोग्राम गेहूं और प्रति परिवार एक किलोग्राम दाल निशुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय किया है. सीएम गहलोत ने इसके लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष से 37.74 करोड़ रूपए उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. 

निराश्रित एवं जरूरतमंद लोगों को मिलेगा खाद्यान्न:
गौरतलब है कि सीएम गहलोत ने कोरोना महामारी की वजह से आजीविका संकट का सामना कर रहे ऐसे निराश्रित एवं जरूरतमंद लोगों को खाद्यान्न सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे, जिन्हें खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता है और जो किन्हीं कारणों के चलते पूर्व में हुए सर्वे से वंचित रह गए थे.

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प्रति व्यक्ति 10 किलोग्राम गेहूं मिलेगा:
सीएम गहलोत के इस निर्देश पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के माध्यम से 22 जुलाई से 15 अगस्त के दौरान कराए गए पुनः सर्वे में 4 लाख 14 हजार 303 परिवारों के 15 लाख 36 हजार 28 व्यक्तियों ने रजिस्ट्रेशन कराया. मुख्यमंत्री ने इन सभी को प्रति व्यक्ति 10 किलोग्राम गेहूं और प्रति परिवार एक किलो दाल निशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.

स्कूल फीस मामले में अब सरकार भी एकलपीठ के आदेश को देगी चुनौती

स्कूल फीस मामले में अब सरकार भी एकलपीठ के आदेश को देगी चुनौती

जयपुर: निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस का 70 फिसदी वसूल करने की छूट देने के आदेश को अब राज्य सरकार भी खण्डपीठ में चुनौती देगी. राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश महर्षि ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दोरान ये जानकारी दी है. सरकार के अपील करने के लिए समय मांगे जाने पर मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ ने मामले की सुनवाई 30 सितंबर को तय की है. इसके साथ ही खण्डपीठ ने निशा फाउण्डेशन सहित 5 अन्य की ओर से पक्षकार बनने के प्रार्थना पत्रों को भी मंजूर कर दिया है. 

निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस का सत्तर फीसदी वसूलने की छूट दी थी: 
राजस्थान हाईकोर्ट ने 16 सितंबर को  प्रमुख माध्यमिक शिक्षा सचिव, माध्यमिक शिक्षा निदेशक और सोसायटी ऑफ कैथोलिक एजुकेशन्स इंस्टीट्यूशन इन राजस्थान को नोटिस जारी जवाब मांगा था. हाईकोर्ट की एकलपीठ ने निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस का सत्तर फीसदी वसूलने की छूट दी थी. जिसके खिलाफ अधिवक्ता सुनील समदडिया ने अपील दायर कर कहा कि राज्य सरकार ने गत 9 अप्रैल और 7 जुलाई को आदेश जारी कर स्कूल खुलने तक फीस को स्थगित कर अभिभावकों को राहत दी थी.

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फाइनल रिलीफ को अंतरिम आदेश में नहीं दिया जा सकता:
वहीं एकलपीठ ने गत 7 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी कर स्कूल बंद रहने और प्रभावी शिक्षा नहीं देने के बावजूद स्कूलों को ट्यूशन फीस का 70 फीसदी हिस्सा वसूलने की छूट दे दी. जबकि नियमानुसार याचिका में मांगी गई फाइनल रिलीफ को अंतरिम आदेश में नहीं दिया जा सकता. इसके अलावा एकलपीठ ने प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन को मुख्य याचिकाकर्ता मानते हुए आदेश दिया था, जबकि यह एसोसिएशन पंजीकृत ही नहीं है. मामले पर अब 30 सितंबर को सुनवाई होगी. 

VIDEO: विधायकों के लिए बनेंगे 160 बहुमंजिला आवास, आवासन मंडल ने की प्रोजेक्ट की आज से शुरुआत

जयपुर: विधायकों के लिए बहुमंजिला आवास निर्माण के लिए आज विधायक नगर पश्चिम में मौजूदा संरचनाओं को तोड़ने का कार्य शुरू किया गया. आवासन मंडल की ओर से यहां 160 बहुमंजिला आवासों का निर्माण विधायकों के लिए किया जाएगा. 

पुराने स्ट्रक्चर तोड़ने की आज से शुरुआत: 
करीब 250 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट की शुरुआत के तौर पर मौजूदा संरचनाओं को हटाने के काम की शुरुआत के दौरान आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा और आवासन मंडल के अन्य अधिकारी मौजूद रहे आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा ने प्रोजेक्ट की विस्तार से जानकारी दी.

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विधायकों के लिए बड़ा पार्क भी विकसित किया जाएगा:
आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा ने प्रोजेक्ट की विशेषताओं की जानकारी देते हुए बताया कि यहां विधायकों के लिए बड़ा पार्क भी विकसित किया जाएगा. इसके अलावा बहुमंजिला आवासों के हर टावर में विधायकों से मिलने वाले आगंतुकों की भी व्यवस्था की जाएगी.
 

SMS सहित राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी क्यों ना शुरू हो कोरोना इलाज - हाईकोर्ट

SMS सहित राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी क्यों ना शुरू हो कोरोना इलाज - हाईकोर्ट

जयपुर: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस सहित विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज करने...कोरोना से जुड़े सभी टेस्ट और इलाज निशुल्क करने, राज्य के निजी अस्पतालों और होटलों को सरकार के नियत्रंण में लेने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया है. मोहनसिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव, एसीएस चिकित्सा और एसएमएस अधीक्षक को नोटिस जारी किये है. याचिका में बीपीएल, गरीब और जरूरमंदों कोरोना मरीजों का निशुल्क इलाज करने की गुहार की गयी है. 

प्रदेश के कई स्थानों पर मरीजों को अस्पताल में बैड नहीं मिल रहे: 
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता समीर जैन ने अदालत को बताया कि देश और प्रदेश में लगातार कोरोना महामारी का प्रभाव बढ़ रहा है. राज्य में प्रतिदिन कोरोना संक्रमितों की संख्या कई गुना बढ़ रही है. प्रतिदिन बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों के चलते जयपुर सहित प्रदेश के कई स्थानों पर मरीजों को अस्पताल में बैड नहीं मिल रहे हैं. राज्य के सबसे बड़े एसएमएस सहित कई जिलों के सरकारी अस्पतालों को सरकार ने कोरोना फ्री अस्पताल के लिए आरक्षित कर रखे हैं. जिसके चलते इन अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज नहीं किया जा रहा है. जबकि वर्तमान में बिगड़ते हालात के चलते सरकार को एसएमएस सहित राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज शुरू किया जाना चाहिए. 

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सरकार को निजी होटलों को अपने नियत्रंण में लिया जाना चाहिए:
साथ ही सरकार को सभी निजी अस्पतालों को अपने अधीन नियत्रंण में लेकर युद्ध स्तर पर कार्य किया जाना चाहिए. आईसोलेशन के लिए भी सरकार को निजी होटलों को अपने नियत्रंण में लिया जाना चाहिए. याचिका में कहा गया कि निजी और सरकारी अस्पतालों में बैड की व्यवस्था नहीं होने से बीपीएल, गरीब और जरूरतमंदों लोग को होम आईसोलेशन में ही इलाज कराना पड़ रहा है जो उनके लिए संभव नहीं है. याचिका मे राज्यभर में कोरोना मरीजों की सहायता के लिए हैल्थ सेंटर बनाने की भी गुहार लगायी गयी है. बहस सुनने के बाद खण्डपीठ ने मुख्य सचिव सहित अन्य को नोटिस जारी कर 12 अक्टूबर तक जवाब पेश करने के आदेश दिये है. 

VIDEO: राजस्थान में खतरे में बघेरों की जान! आखिर कब जागेगा वन विभाग

जयपुर: प्रदेश में एक ओर जहां बघेरों का कुनबा बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर जंगल में भोजन के प्रोपर इंतजाम न होने से बघेरों की आबादी क्षेत्र में लगातार घुसपैठ बढ़ रही है, जोकि इनके लिए खतरनाक साबित हो रही है. जिम्मेदार बघेरों की समस्याओं से बेखबर है. वन विभाग के आंकड़े देखे तो राज्य में 8 साल में करीब दो दर्जन बघेरों को लोगों ने घेरकर मार दिया है. 

- प्रदेश भर में 600 से ज्यादा बघेरे हैं.

- 250 से ज्यादा सेंचुरी तो 300 से ज्यादा जंगल में कर रहे प्रवास.

- बीते 5 साल में 35 से 40 फीसदी बढ़ी संख्या.  

- वाहन की टक्कर, करंट या फंदा लगने, आपसी टकराव, लोगों ने घेरकर मारने, शिकार सहित कई वजह से बीते 8 साल में 300 से ज्यादा बघेरों की मौत हुई है. 

प्रदेशभर के फॉरेस्ट रिजर्व और जंगलों में बघेरों की आबादी पांच साल में 35 से 40 फीसदी तक बढ़ी है, लेकिन सरकार और अफसर ने इनके प्रे बेस यानी सुरक्षा, प्रवास और भोजन के इंतजाम ढंग से नहीं कर पा रहे हैं. जो इनके लिए काफी नुकसान दायक साबित हो रहा है. यह लेपर्ड टेरिटोरियल फाइट और भूख-प्यास से व्याकुल होकर आए दिन आबादी क्षेत्र में जा रहे है, जहां या तो इनको मार दिया जाता है या फिर शिकारियों के फंदे में फंस जाते हैं. अजमेर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमंद, प्रतापगढ़, उदयपुर समेत कई जिलों में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही है. राजधानी से जुड़े जंगल में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही है. जिसे रोकना विभाग के लिए चुनौती साबित हो रहा है. वन विभाग के अफसरों ने कई बार इनको लेकर मंथन भी किए, योजनाएं भी बनाई, लेकिन वो कभी फाइलों से बाहर ही नहीं निकल पाई. जिसका खामियाजा वन्यजीवों को भुगतना पड़ रहा है.  

बघेरों के लिए सौगात अधूरी ही रह गई: 
पिछली राज्य सरकार ने वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन और ट्यूरिज्म के रूप शुरू विकसित करने के लिए लेपर्ड प्रोजेक्ट की शुरूआत की. इसमें झालाना, बस्सी सीतामाता, खेतड़ी बांसिलायल, माउंटआबू और कुंभलगढ(रावली टॉडगढ) अभयारण्य को शामिल किया गया,,, यहां ग्रासलैंड, चारदीवारी, सुरक्षा, सर्विलांस समेत कई सुविधाएं विकसित करनी थी, लेकिन फंड नहीं मिलने से झालाना के अलावा कहीं भी काम पूरा नहीं हुआ. सरकार ने कोई रूचि भी नहीं दिखाई जिससे बघेरों के लिए सौगात अधूरी ही रह गई है.

झालाना जंगल में भी आए दिन बघेरे बेघर हो रहे: 
बघेरे के प्रवास से देशभर से ख्याति पा चुके झालाना जंगल में भी आए दिन बघेरे बेघर हो रहे हैं. यहां वर्चस्व की लड़ाई और भोजन की कमी है. जिससे आए दिन यहां से बघेरे जंगल से आबादी इलाकों में जा रहे हैं. 20 वर्ग किलोमीटर के इस जंगल में 30 बघेरे प्रवास कर रहे हैं. इस ओर भी जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है. 

प्रे बेस की कमी लेपर्ड्स पर भारी पड़ रही:
जंगलात महकमें के अधिकारी भी मानते है कि प्रे बेस की कमी लेपर्ड्स पर भारी पड़ रही है. अब विभाग नए लेपर्ड रिजर्व तैयार करने के साथ ही जो फॉरेस्ट रिजर्व हैं उनमें प्रे बेस बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द ही लेपर्ड्स के लिए माकूल व्यवस्था करने में वन विभाग कामयाब होगा. 
 

प्रदेश कांग्रेस का पैदल मार्च हुआ स्थगित, अब दो ही नेता सौंपेंगे राज्यपाल को ज्ञापन

प्रदेश कांग्रेस का पैदल मार्च हुआ स्थगित, अब दो ही नेता सौंपेंगे राज्यपाल को ज्ञापन

जयपुर: कृषि अध्यादेशों के खिलाफ 24 सितंबर से शुरू हुए कांग्रेस के विरोध पखवाड़े के तहत आज प्रस्तावित पैदल मार्च अब स्थगित कर दिया गया है. यह पैदल मार्च कोरोना संक्रमण के कारण जयपुर में लगाई गई धारा 144 के चलते स्थगित किया गया है. 

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जयपुर में धारा 144 के चलते पैदल मार्च स्थगित किया गया:  
प्रदेश कांग्रेस ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी. पीसीसी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि जयपुर में धारा 144 के चलते पैदल मार्च स्थगित किया गया है. अब केवल दो ही नेता सोमवार दोपहर 12:30 बजे राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात कर उन्हें राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेंगे. 

डोटासरा और सीएम गहलोत सौंप सकते हैं ज्ञापन:
बताया जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंप सकते हैं. गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से लागू  किए गए कृषि अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस ने 24 सितंबर से 10 अक्टूबर तक विरोध पखवाड़ा शुरू किया है जिसके तहत 28 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से राजभवन तक पैदल मार्च रखा गया था. 

VIDEO: राजस्थान पुलिस ने घूसखोरी में तोड़ा रिकॉर्ड, पिछले 4 सालों से नंबर 1 पर कायम

जयपुर: प्रदेश में इन दिनों एंटी करप्शन ब्यूरो बड़े बड़े घूसखोरो को सलाखों के पीछे पहुंचाती जा रही है. एसीबी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि घूसखोरी में राजस्थान पुलिस पिछले 4 सालों से  नंबर वन है. दूसरे नंबर पर राजस्व विभाग, तीसरे नंबर पर पंचायत विभाग में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियो ने रिकॉर्ड बनाया है. प्रदेश की खाकी ही राजस्थान सरकार को शर्मसार कर रही है. ये सभी कार्रवाई एसीबी के डीजी डॉक्टर आलोक त्रिपाठी और एडीजी दिनेश एमएन लगातार भ्रष्टाचारियों पर एक से बढ़कर एक कार्रवाई करते हुए जा रहे हैं. 

पुलिस विभाग रिश्वत खोरी के धंधे में सबसे अव्वल: 
एसीबी की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है पुलिस विभाग रिश्वत खोरी के धंधे में सबसे अव्वल है तो राजस्व विभाग का इस पूरे मामले में नंबर दो पर है. स्वच्छ और बेदाग छवि के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लोगों के बीच भ्रष्टाचार मुक्त माहौल पैदा करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं. वहीं दूसरी और शांति व्यवस्था स्थापित करने वाली पुलिस मुख्यमंत्री  की छवि को बदनाम करने में लगी है. हाल में ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने एक रिपोर्ट तैयार की है. इसमें सामने आया है कि राजस्थान पुलिस के हाथ घूस की रकम से लाल-काले हुए हैं. आइये हम आपको बताते है घूसखोरी में किस विभाग का कौनसा नंबर है...

- घूसखोरी में राजस्थान पुलिस नंबर वन के रिकॉर्ड पर

- दूसरे नंबर पर राजस्व विभाग

- तीसरे नंबर पर पंचायत विभाग में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियो ने रिकॉर्ड बनाया

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एसीबी डीजी आलोक त्रिपाठी के नेतृत्व में एसीबी की टीम लगातार बड़े बड़े घूसखोरों पर कार्रवाई करती जा रही है. एसीबी डीजी आलोक त्रिपाठी ने सभी चौकी प्रभारियों को फ्री हेंड छोड़ रखा है. जिसके चलते एसीबी की टीम लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई करती जा है. एसीबी ने बजरी में लिप्त पुलिसकर्मियों पर भी शिकंजा कसा है. एसीबी ने अवैध वसूली करने वालों पर भी बड़ी कार्रवाई की है. एसीबी ने  कई बड़े अधिकारियो को रंगें हाथों गिरफ्तार किया है और काला धन इकट्ठा कर अकूत संपत्ति बनाने वाले अधिकारियों को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया है. आइये अब आकड़ो के हिसाब से समझते है ट्रैप की कार्रवाइयों को...

- एसीबी ने पुलिस विभाग में पिछले 4 सालों में 263 पुलिसकर्मियों को रिश्वत लेते ट्रैप किया

- राजस्व विभाग में पिछले 4 सालो में 171 कर्मचारियों अधिकारियो को ट्रैप किया

- ऊर्जा विभाग में पिछले 4 सालो में 84 अधिकारी-कर्मचारियों को ट्रैप किया

- मेडिकल विभाग में पिछले 4 सालो में 52 अधिकारी-कर्मचारियों को ट्रैप किया

- पंचायत विभाग में पिछले 4 सालो में  115 अधिकारी-कर्मचारियों को ट्रैप किया

एसीबी लगातार बजरी में लिप्त पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई करती जा रही है. एसीबी के आकड़े जारी करने के बाद ये साबित हो गया है की एसीबी कार्रवाई के बाद पुलिस का भ्रस्टाचार उजागर हुआ है. 

Rajasthan Panchayat Election: प्रथम चरण के लिये मतदान शुरू, 947 ग्राम पंचायतों में 31 लाख से ज्यादा मतदाता कर सकेंगे वोटिंग

Rajasthan Panchayat Election: प्रथम चरण के लिये मतदान शुरू, 947 ग्राम पंचायतों में 31 लाख से ज्यादा मतदाता कर सकेंगे वोटिंग

जयपुर: राजस्थान पंचायत चुनाव-2020 के प्रथम चरण के लिये आज वोट डाले जा रहे हैं. इस चरण में आज 947 ग्राम पंचायतों में 31 लाख से ज्यादा मतदाता वोटिंग कर सकेंगे.  वोटिंग और चुनाव प्रक्रिया  सही ढंग से करने के लिए 23 पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं. राज्य निर्वाचन आयुक्त प्रेम सिंह मेहरा ने मतदाताओं और सभी कर्मचारियों को कोरोनावायरस का पालन करते हुए निष्पक्ष शांतिपूर्ण मतदान की अपील की है. कोरोना के चलते 1 घंटे के बढ़ाए समय के तहत अब मतदान सुबह 7:30 से शाम 5:30 बजे तक हो सकेगा. कानून व्यवस्था के बिगड़े हालात के चलते उदयपुर की सराडा और गोगुंदा पंचायत समितियों की 55 ग्राम पंचायतों के चुनाव स्थगित कर दिए गए हैं.  

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इससे पहले पंचायती राज चुनाव के पहले चरण के आज होने वाले मतदान के लिए राज्य निर्वाचन आयुक्त पीएस मेहरा ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी कोरोना से संबंधित सभी दिशा-निर्देशों की पालना करते हुए निर्भय होकर मतदान करें. 

प्रत्येक मतदाता अपने घर से मास्क लगाकर मतदान के लिए जाएं: 
मेहरा ने कहा कि प्रत्येक मतदाता अपने घर से मास्क लगाकर मतदान के लिए जाएं. उन्होंने केंद्र में प्रवेश से पूर्व मास्क लगाना अनिवार्य होने, मतदान केंद्र में जाने से पहले हाथों को साबुन पानी या सेनेटाइजर से जरूर साफ करने, मतदान करते समय मतदाता पंक्ति में खड़े रहने के दौरान चिन्हित गोलों पर खड़े रहकर या सामाजिक दूरी बनाते हुए अपनी बारी का इंतजार करने के लिए कहा है.

- उन्होंने कहा कि मतदान के दौरान सीनियर सिटीजन और दिव्यांगजनों को प्राथमिकता दें. उन्होंने मतदाता, उम्मीदवार या उनके समर्थकों से मतदान केंद्र या आसपास भीड़ या समूह में खड़े नहीं रहने की भी अपील की. 

- पहले चरण में कुल 31 लाख 95 हजार 691 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे. 

- मतदान समाप्ति के बाद सभी पंचायत मुख्यालयों पर मतगणना करवाई जाएगी और 29 सितंबर को उपसरपंच का चुनाव होगा. 

गौरतलब है कि उदयपुर की सराडा और गोगुंदा पंचायत समितियों की 55 ग्राम पंचायतों के चुनाव स्थगित कर दिए गए हैं. 
आयुक्त ने मतगणना के तुरंत बाद मतगणना स्थल पर भीड़ ना करने और अपने-अपने घर समय पर लौट पुलिस प्रशासन और सथानीय प्रशासन का सहयोग करने की भी अपील की है. चुनाव के लिए पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था की गई है.