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किसानों को राहत, 19 फरवरी तक बढ़ाई गई मूंगफली की सरकारी खरीद की अवधि 

किसानों को राहत, 19 फरवरी तक बढ़ाई गई मूंगफली की सरकारी खरीद की अवधि 

जयपुर: प्रदेश के मूंगफली उत्पादक किसानों के लिए अच्छी और राहतभरी खबर सामने आई है. एमएसपी पर मूंगफली की खरीद सीमा को 19 फरवरी तक बढ़ा दिया है. प्रबंध निदेशक, राजफैड सुषमा अरोडा ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य के किसानों को राहत देते हुए मूंगफली की खरीद अवधि को 15 दिन और बढाया गया है. पहले मूंगफली खरीद 4 फरवरी तक होनी थी, जिसे बढ़ाकर अब 19 फरवरी कर दिया है. 

तीन दिन में किसानों के खातों में भुगतान:
राजफैड एमडी सुषमा अरोडा ने बताया कि मूंगफली, मूंग, उड़द एवं सोयाबीन कि समर्थन मूल्य पर उपज बेचने वाले किसानों में से 94 प्रतिशत किसानों का भुगतान उनके खातों में कर दिया गया है. साथ ही बताया कि मूंगफली खरीद अवधि बढ़ाने के लिए किसानों ने आग्रह किया था. राजफैड द्वारा भारत सरकार को मूंगफली की खरीद अवधि बढ़ाने हेतु पत्र लिखा गया था. जिस पर सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा मूंगफली खरीद की अवधि 19 फरवरी तक बढ़ाई है. उन्होंने बताया कि 16 जनवरी तक 1590.55 करोड़ रूपये की उपज किसानों से खरीदी गई है. जिसमें से 1497.74 करोड का भुगतान हो चुका है. उन्होंने बताया कि उपज बेचान के तीन दिन में किसानों के खातों में भुगतान किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि अब तक 2 लाख 57 हजार  57 किसानों ने समर्थन मूल्य पर मूंग, उडद, सोयाबीन एवं मूंगफली के लिए पंजीयन करा लिया है. 

मूंगफली के लिए 122410 किसानों ने कराया पंजीयन: 
मूंग के लिए 1 लाख 32 हजार 428 तथा मूंगफली के लिए 1 लाख 22 हजार 410 किसानों ने पंजीयन कराया है. मूंग एवं मूंगफली की 228 केन्द्रों पर 16 जनवरी तक 1 लाख 31  हजार 793  किसानों से 2 लाख 65 हजार 700 मीट्रिक टन की मूंग एवं मूंगफली की खरीद हो चुकी है. जिसकी राशि 1590 करोड़ रूपये है. उन्होंने बताया कि 1 लाख 24 हजार 45 किसानों को 1497.58 करोड़ रूपये का भुगतान किया जा चुका है. 16 जनवरी तक  69 हजार 161 किसानों से 855.99 करोड़ रूपये मूल्य का 1 लाख 21 हजार 416 मीट्रिक टन मूंग एवं 62 हजार 632 किसानों से 734.41 करोड़ रूपये मूल्य की 1 लाख 44 हजार 284 मीट्रिक टन मूंगफली की खरीद की जा चुकी है. उन्होंने बताया कि किसानों से निर्बाध रूप से खरीद की जा रही है. 

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Bharat Bandh: कृषि बिलों के विरोध में आज किसानों का भारत बंद, पंजाब और हरियाणा में ज्यादा असर

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नई दिल्ली: किसानों को लेकर हाल ही में संसद से पास तीन कृषि विधेयकों के विरोध में आज किसान संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है. इसमें 31 संगठन शामिल हो रहे हैं. किसान संगठनों को कांग्रेस, RJD, समाजवादी पार्टी, अकाली दल, AAP, TMC समेत कई पार्टियों का साथ भी मिला है. हालांकि आंदोलन का ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में दिख रहा है. इससे पहले पंजाब में तीन दिवसीय रेल रोको अभियान की गुरुवार से शुरुआत हो गई है. किसान रेलवे ट्रैक पर डटे हुए हैं और बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

शनिवार तक 20 विशेष ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द:
रेल रोको आंदोलन को देखते हुए रेलवे ने शनिवार तक 20 विशेष ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द और पांच को गंतव्य से पहले रोक दिया है. वहीं, हरियाणा में किसानों-आढ़तियों ने राजमार्ग जाम करने की भी चेतावनी दी है. उधर, यूपी में भी सपा ने किसान कर्फ्यू और जाम का आह्वान किया है. 

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बिहार के हाजीपुर में भी खास असर:
कृषि बिल के विरोध में बुलाए गए भारत बंद का सबसे खास असर बिहार के हाजीपुर में देखने को मिल रहा है. गांधी सेतु के निकट NH 19 पर जाम लगाया गया है. सुबह से ही पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकार पार्टी के समर्थक सड़क पर डटे हैं. बंद समर्थकों ने NH 19 को बंद करा दिया है. सड़कों पर टायर जला कर नारेबाजी की जा रही है. 

दिल्ली-चंडीगढ़ बस सेवा को बंद कर दिया गया: 
वहीं भारत बंद के चलते दिल्ली-चंडीगढ़ बस सेवा को बंद कर दिया गया है. किसानों के विरोध के चलते ट्रेन के पहिये भी थमे हैं. पंजाब सरकार ने यह हिदायत भी दी है कि पंजाब बंद के दौरान किसानों के प्रति नरम रवैया अपनाया जाए और उन पर कोई सख्त जबरदस्ती न की जाए.

इन विधेयकों का हो रहा विरोध: 
केंद्र सरकार ने हाल ही में कृषि सुधारों से जुड़े तीन बिल संसद से पास कराए हैं. ये हैं कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) बिल-2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता बिल-2020 और कृषि सेवा विधेयक-2020। किसानों को आशंका है कि संसद से पारित बिल के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म करने का रास्ता खुल जाएगा और उन्हें बड़े कॉरपोरेट की दया पर रहना पड़ेगा. 


 

किसान बिल के विरोध में लंबे वक्त के बाद सियासी कार्यक्रम में दिखे नवजोत सिंह सिद्धू, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

किसान बिल के विरोध में लंबे वक्त के बाद सियासी कार्यक्रम में दिखे नवजोत सिंह सिद्धू, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

अमृतसर: केंद्र सरकार के द्वारा पारित किए गए कृषि बिलों के खिलाफ नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने अमृतसर में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. इस दौरान उनके साथ सैकड़ों की भीड़ में समर्थक भी दिखाई दिए. इस दौरान पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसान बिल से जमाखोरी को बढ़ावा मिलेगा. क्या सरकार रोटी को आवश्यक वस्तु नहीं मानती है? 

सिद्धू करीब एक साल बाद मैदान में उतरे:  
इस दौरान सिद्धू ट्रैक्टर पर सवार दिखे. साथ ही किसानों के हाथ में तख्तियां थीं और कुछ ने काले झंडे भी लिए हुए थे. सिद्धू करीब एक साल बाद मैदान में उतरे हैं. नवजोत सिंह सिद्धू पिछले काफी लंबे वक्त के बाद किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे हैं. उनका पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर के साथ रिश्ता सही नहीं रहा है, ऐसे में यही वजह है कि पंजाब की पॉलिटिक्स में कम एक्टिव हैं.  हालांकि, कोरोना संकट के दौरान भी वो लगातार सोशल मीडिया पर अपने वीडियो डाल मुद्दों पर बात रखते रहे. 

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पंजाब में किसान बिल का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ:
बता दें कि पंजाब में किसान बिल का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ है. इससे पहले शिरोमणी अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को विश्वास में लेने में कामयाब नहीं हुई. हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से लगातार इस बिल को लेकर विपक्ष पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है. और किसानों को विपक्ष की बातों में ना आने की सलाह दी जा रही है. 


 

सदन की कार्यवाही से विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़ा तीसरा बिल भी राज्यसभा से पास

सदन की कार्यवाही से विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़ा तीसरा बिल भी राज्यसभा से पास

नई दिल्ली: विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़ा तीसरा बिल आवश्यक वस्तु विधेयक, 2020 भी राज्यसभा से पास हो गया है. कृषि से जुड़े दो बिल पहले ही राज्यसभा से पास हो चुके हैं. लोकसभा ने 15 सितंबर को आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी थी.

इस बिल में खाद्य पदार्थों को नियंत्रण मुक्त करने का प्रावधान:
इस बिल में खाद्य पदार्थों जैसे अनाज, दालें और प्याज को नियंत्रण मुक्त करने का प्रावधान है. बिल पास होने के बाद अब अनाज, दलहन, खाद्य तेल, आलू-प्याज आवश्यक वस्तु नहीं होंगे. उत्पादन, स्टोरेज, डिस्ट्रीब्यूशन पर सरकारी नियंत्रण खत्म होगा. फूड सप्लाई चेन के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी. उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी. सब्जियों की कीमतें दोगुनी होने पर स्टॉक लिमिट लागू होगी.

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सरकार बता रही कृषि क्षेत्र की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: 
इससे पहले 20 सितंबर को कृषि से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयकों को राज्यसभा ने विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच ध्वनिमत से अपनी मंजूरी दे दी थी. सरकार द्वारा इन दोनों विधेयकों को देश में कृषि क्षेत्र से जुड़े अबतक के सबसे बड़े सुधार की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है.

राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला:  
वहीं इससे पहले मौजूदा मानसून सत्र में कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला किए जाने के बाद सभी आठ निलंबित सांसदों ने अपना धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया है. विपक्षी दलों के राज्यसभा सांसदों ने राज्यसभा का वॉकआउट किया है. इसमें कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), डीएमके, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप), वामदल, आरजेडी, टीआरएस और बीएसपी ने भी कार्यवाही का बहिष्कार किया है.

राज्यसभा में किसान बिल पर जोरदार हंगामा, 8 सांसद एक हफ्ते के लिए हुए निलंबित

राज्यसभा में किसान बिल पर जोरदार हंगामा, 8 सांसद एक हफ्ते के लिए हुए निलंबित

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का आज आठवां दिन है. राज्यसभा में आज विपक्षी सांसदों के हंगामे का मुद्दा उठा. सभापति ने हंगामा करने वाले सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की है. उन्होंने हंगामा करने वाले आठ विपक्षी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें एक हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया है. यानी वे एक हफ्ते तक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. निलंबित होने वाले सांसदों में डेरेक ओ ब्रायन, संजय सिंह, रिपुन बोरा, नजीर हुसैन, केके रागेश, ए करीम, राजीव साटव, डोला सेन हैं. 

अविश्‍वास प्रस्‍ताव नियमों के हिसाब से सही नहीं: 
सभापति ने कहा कि कहा कि उपसभापति के खिलाफ विपक्षी सांसदों की तरफ से लाया गया अविश्‍वास प्रस्‍ताव नियमों के हिसाब से सही नहीं है. सभापति की कार्रवाई के बाद भी सदन में हंगामा जारी रहा.

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कल राज्यसभा के लिए सबसे खराब दिन था:
राज्यसभा के सभापति ने कल की घटना पर कहा कि राज्यसभा के लिए सबसे खराब दिन था. कुछ सांसदों ने पेपर को फेंका. माइक को तोड़ दिया. रूल बुक को फेंका गया. इस घटना से मैं बेहद दुखी हूं. उपसभापति को धमकी दी गई. उनपर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई.

किसानों को उनकी फसल का पूरा समर्थन मूल्य मिलेगा:
कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि सरकारी खरीद जारी रहेगी और किसानों को उनकी फसल का पूरा समर्थन मूल्य मिलेगा. ये बिल पूरी तरह किसानों के हित में है और किसी को कोई आशंका नहीं होनी चाहिए. किसान वैश्विक मानदंडों के तहत कार्य कर पाएगा और उनकी पहुंच पूरी तरह से बाजार पर अपनी आजादी के तहत होगी.


 

केन्द्र द्वारा लाए गए तीनों नये कृषि कानून किसान विरोधी - पायलट

केन्द्र द्वारा लाए गए तीनों नये कृषि कानून किसान विरोधी - पायलट

जयपुर: प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कई मुद्दों पत्रकारों से बात की.  केन्द्र सरकार द्वारा कृषि और कृषि व्यापार से संबंधित लाये गये तीन कानूनों पर प्रतिक्रिया देते हुए इन्हें कृषि एवं किसान विरोधी बताया, पायलट ने कहा कि कोरोना काल में अध्यादेशों के माध्यम से उक्त कानून लागू किये है, जबकि ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं थी. उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है जबकि केन्द्र सरकार ने इस संबंध में राज्यों से किसी प्रकार की सलाह नहीं ली. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा किसान संगठनों एवं राजनैतिक दलों से भी इस सम्बन्ध में कोई राय-मशविरा नहीं किया गया.

मोदी सरकार प्रारम्भ से ही किसान विरोधी रही:  
पायलट ने कहा कि मोदी सरकार प्रारम्भ से ही किसान विरोधी रही हैं. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही किसानों के लिए भूमि मुआवजा कानून रद्द करने के लिए एक अध्यादेश प्रस्तुत किया. परन्तु राहुल गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस एवं किसानों के विरोध के कारण मोदी सरकार को पीछे हटना पड़ा. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन तीन नए कानूनों से किसान, खेत-मजदूर, कमीशन एजेंट, मण्डी व्यापारी सभी पूरी तरह से समाप्त हो जायेंगे. उन्होंने कहा कि एपीएमसी प्रणाली के समाप्त होने से कृषि उपज खरीद प्रणाली समाप्त हो जायेंगी. किसानों को बाजार मूल्य के अनुसार न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा और न ही उनकी फसल का मूल्य.  

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मण्डी सिस्टम खत्म होना किसानों के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा:
सचिन पायलट ने मीडिया से कहा कि यह दावा सरासर गलत है कि अब किसान देश में कहीं भी अपनी उपज बेच सकता हैं. पायलट ने कहा कि जनगणना के अनुसार देश में 86 प्रतिशत किसान 5 एकड से कम भूमि के मालिक है. ऐसी स्थिति में 86 प्रतिशत अपने खेत की उपज को अन्य स्थान पर परिवहन या फेरी नहीं कर सकते हैं. इसलिए उन्हें अपनी फसल निकट बाजार में ही बेचनी पड़ती है. मण्डी सिस्टम खत्म होना किसानों के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा. उन्होंने कहा कि अनाज-सब्जी बाजार प्रणाली की छंटाई के साथ राज्यों की आय का स्त्रोत भी समाप्त हो जाएगा. पायलट ने कहा कि केन्द्र सरकार से मांग की है कि राजनैतिक दलों, किसान संगठनों, मण्डी व्यापारियों और कृषि विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा कर इन कानूनों में संशोधन पर विचार करें जिससे देश के किसान की वास्तविक दशा में बदलाव आ सकें. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट
 

सीएम गहलोत ने 400 से अधिक किसानों से किया सीधा संवाद, कहा- किसान के बेटे अब गांव में रहकर ही उद्यमी बन सकते हैं

सीएम गहलोत ने 400 से अधिक किसानों से किया सीधा संवाद, कहा- किसान के बेटे अब गांव में रहकर ही उद्यमी बन सकते हैं

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज प्रदेश के 400 से अधिक किसानों से सीधा संवाद करके राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019 की समीक्षा की. मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योग लगाओ आय बढ़ाओ की थीम पर यह नीति लागू की गई है, जिसका किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहिए.  

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण चिकित्सकों की सलाह पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अगले एक महीने तक लोगों से मुलाकात के कार्यक्रम तो रद्द कर दिए है, लेकिन सुशासन के लिए वीसी के माध्यम से संवाद व बैठकों का दौर जारी है. इसी क्रम में सीएम गहलोत ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास से वीसी के माध्यम से राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019 की समीक्षा की. इस वीसी में कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना, राज्य मंत्री टीकाराम जूली, मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, एसीएस वित्त निरंजन आर्य, प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा, सिद्धार्थ महाजन भी मौजूद थे. 

428 किसानों और 144 मंडियों के सचिवों के साथ चला संवाद:
करीब दो घंटे तक 428 किसानों और 144 मंडियों के सचिवों के साथ चले इस संवाद में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई नीति यदि कागजों तक सीमित रहती है, तो उसका महत्व नहीं है, ऐसे में किसानों की नीति काफी विचार विमर्श के बाद बनाई गई है और किसानों को इस नीति के तहत अपने कृषि से जुड़े उद्योग स्थापित करके सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का फायदा उठाना चाहिए. सीएम ने कहा किसान के बेटे अब अपने गांव में रहकर ही उद्यमी बन सकते हैं, क्योंकि कई बार खेती में तो लागत मूल्य भी नहीं मिलता, ऐस में अब किसानों को खुद को थोड़ा डाइवर्ट करना चाहिए. कोविड के कारण प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था खराब है, इसलिए हमें खुद के पैरों पर ही खड़ा होना पड़ेगा. सीएम ने कहा कि प्रंस्करण नीति के तहत बनने वाले उत्पादों की मार्केटिंग के लिए सभी जिलों में प्रकोष्ठ बनेगा. 

करीब एक दर्जन किसानों व किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा की:
वीसी के माध्यम से हुए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के करीब एक दर्जन किसानों व किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा की. गोकुलपुरा (सीकर) के बनवारी, जोधपुर की मनीषा, फलौदी के गजेंद्र सिंह व खींवसर के धर्मराज सहित कई किसानों से सीएम ने चर्चा की. जोधपुर के महेश सोनी का ग्वार से हाई प्रोटीन निकालने के प्लांट का प्लान मुख्यमंत्री को काफी पसंद आया और उन्होंने सोनी से इस बारे में लंबी चर्चा की. वहीं हनुमानगढ़ के दयाराम जाखड़ ने खजूर की खेती को लेकर सीएम से बात की और कुछ मांगे मुख्यमंत्री के सामने रखी. मुख्यमंत्री ने भी तुरंत मांग मानने का वादा किया. इस दौरान खजूर को लेकर कृषि मंत्री लालचंद कटारिया व मुख्यमंत्री गहलोत ने चुटकी भी ली. 

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कृषि विभाग के प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा ने प्रजेंटेशन दिया:
इससे पहले कृषि विभाग के प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा ने राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019 के बारे में प्रजेंटेशन दिया. उन्होंने नीति के तहत किसानों को परिवहन, बिजली व सौर ऊर्जा सयंत्र पर मिलनी वाली सब्सिडी की जानकारी दी और बताया कि महिलाओं के लिए अलग से ब्याज अनुदान का प्रावधान है. कुंजीलाल ने बताया कि नीति के तहत अब तक 137 आवेदन आए हैं, जिनमें से 53 आवेदन स्वीकृत हो गए हैं और 84 प्रक्रियाधीन है. अब तक 247 करोड़ के निवेश राशि के आवेदन आए है. 53 प्रकरणों में 18.12 करोड़ की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है. 

अब किसानों की नई पीढ़ी अपना रोजगार खुद विकसित कर सकती है:
वीसी में किसानों को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि अब किसानों की नई पीढ़ी अपना रोजगार खुद विकसित कर सकती है. वहीं सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि चुनाव में कई नेता कृषि आय बढाने की बात करते है, लेकिन किसानों की असली पीड़ा गहलोत ने समझी है. आंजना ने सहकारिता के मामले में आगे बढ़ने की अपील की. राज्यमंत्री टीकाराम जूली ने सुझाव दिया कि प्रोसेसिंग यूनिट को लेकर सरकार को अपने स्तर पर क्षेत्रवार अध्ययन कराना चाहिए, क्योंकि प्रदेश के हर जिले की अपनी विशेष खूबी है. ऐसे में प्रत्येक जिले में यूनिट का लक्ष्य निर्धारित होना चाहिए. 

किसान अब उद्यमी बन सकता है:
राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति पिछले साल दिसंबर में आई थी और किसानों के लिए यह क्रांतिकारी साबित हो सकती है. इस नीति के तहत अब किसान अपनी जमीन पर ही कृषि से जुड़े उत्पादों की प्रोसेसिंग यूनिट लगा सकता है, किसान अब उद्यमी बन सकता है. यानी अब किसान भी उद्योग लगाओ और खूब कमाओ. बस जरूरत है सरकारी सिस्टम को सुधारकर इस नीति का जमीनी स्तर तक प्रचार प्रसार करने का, ताकि असली किसान इस नीति के तहत सरकार की योजना का फायदा उठा सके. 

भूमि पुत्रों के लिए अच्छी खबर, 6000 करोड़ रुपये के फसली ऋण वितरण की प्रक्रिया हुई प्रारम्भ

भूमि पुत्रों के लिए अच्छी खबर, 6000 करोड़ रुपये के फसली ऋण वितरण की प्रक्रिया हुई प्रारम्भ

जयपुर: राज्य के भूमि पुत्रों के लिए अच्छी खबर है. प्रदेश के किसानों को रबी के लिए ब्याज मुक्त फसली ऋण वितरण की प्रक्रिया 1 सितम्बर से प्रारम्भ कर दी गई है. 31 मार्च 2021 तक रबी सीजन में 6000 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त फसली ऋण का लक्ष्य रखा गया है. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बताया कि वर्ष 2020-21 में राज्य के किसानों को 16 हजार करोड़ रुपये के अल्पकालीन फसली ऋण का लक्ष्य रखा गया है और 25 लाख से अधिक किसानों को इससे लाभान्वित किया जा रहा है. रबी सीजन के लिए जिलेवार ऋण राशि वितरण के लक्ष्य तय कर दिये है.

केन्द्रीय सहकारी बैंक जयपुर सर्वाधिक फसली ऋण का वितरण करेगा: 
उन्होने बताया की रबी सीजन में केन्द्रीय सहकारी बैंक जयपुर सर्वाधिक 430 करोड़ रुपये फसली ऋण का वितरण करेगा. भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, सीकर एवं श्रीगंगानगर के केन्द्रीय सहकारी बैंक 300-300 करोड़ रुपये के ऋण वितरित करेंगे. इसी प्रकार जोधपुर में 290 करोड़ रुपये, हनुमानगढ़़ जिले में 260 करोड़ रुपये, झुंझुनू, जालौर एवं बाड़मेर जिलों में 250-250 करोड़ रुपये, झालावाड़ एवं नागौर के सीसीबी द्वारा 240-240 करोड़ रुपये के ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है. 

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केन्द्रीय सहकारी बैंक कोटा एवं अलवर द्वारा 220-220 करोड़ रुपये वितरण करेगा:
इसी प्रकार केन्द्रीय सहकारी बैंक कोटा एवं अलवर द्वारा 220 -220 करोड़ रुपये, पाली एवं बीकानेर जिलों में 200-200 करोड़ रुपये, उदयपुर, सवाईमाधोपुर, एवं अजमेर जिलों में 190-190 करोड़ रुपये, भरतपुर में 170 करोड़ रुपये, बूंदी एवं चूरू के द्वारा 150-150 करोड़ रुपये, दौसा में 140 करोड़ रुपये, बारां में 120 करोड़ रुपये, टोंक में 110 करोड़ रुपये, बांसवाड़ा एवं जैसलमेर के केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा 100-100 करोड़ रुपये, सिरोही में 90 करोड़ रुपये तथा डूंगरपुर में 50 करोड़ रुपये के फसली ऋण वितरण के लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं. 

किसानों के लिए मुख्यमंत्री ने किए बड़े फैसले, सहकारी संस्थाओं में 1,000 पदों पर भी भर्ती जल्द शुरू होगी

किसानों के लिए मुख्यमंत्री ने किए बड़े फैसले, सहकारी संस्थाओं में 1,000 पदों पर भी भर्ती जल्द शुरू होगी

जयपुर: प्रदेश में कोविड का प्रकोप है और आर्थिक स्थिति खराब है, इसके बावजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के किसानों को एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए प्रेरित करने का फैसला किया है. इसके लिए जिला स्तर पर अभियान चलाया जाएगा. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री ने किसानों को रबी फसल के बीमा क्लेम के शीघ्र भुगतान के लिए 250 करोड़ रूपए प्रीमियम कृषक कल्याण कोष से स्वीकृत करने का फैसला किया है. सीएम गहलोत ने मंगलवार को अपने आवास पर  कृषि, सहकारिता एवं अन्य विभागों की समीक्षा बैठक करके कई अहम फैसले किए. 

संस्कृत शिक्षा विभाग का ऑनलाइन पढ़ाई के लिए एप लॉन्च, संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ.सुभाष गर्ग ने की एप लॉन्च

प्रदेश के खराब आर्थिक हालातों के बीच राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का अभियान चलाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियो को निर्देश दिए हैं कि इस योजना के तहत बैंक से ऋण दिलाने में किसानों की सहायता की जाए. यूनिट लगाने पर किसानों को एक करोड़ रूपये तक ऋण मिल सकता है जिस पर राज्य सरकार द्वारा 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. इस योजना से न केवल किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी बल्कि फसल उत्पादों में वैल्यू एडिशन होने से उनकी कीमत भी बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. मुख्यमंत्री आवास पर हुई अहम बैठक में कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया, सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना, कृषि राज्यमंत्री भजनलाल जाटव, सहकारिता राज्यमंत्री टीकाराम जूली वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े थे. वहीं मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, एसीएस वित्त निरंजन आर्य, राजस्थान राज्य भण्डारण निगम के सीएमडी पीके गोयल, रजिस्ट्रार सहकारिता  मुक्तानन्द अग्रवाल, प्रबंध निदेशक राजफैड सुषमा अरोड़ा, निदेशक कृषि विपणन बोर्ड ताराचन्द मीणा मुख्यमंत्री आवास पर मौजूद थे. एक नजर डालते है कि बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए अहम फैसलों पर...

- किसानों के लिए मुख्यमंत्री ने किए बड़े फैसले
- बीमा प्रीमियम भुगतान के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी
- कृषक कल्याण कोष से 250 करोड़ रूपए मंजूर किए गहलोत ने
- प्रदेश के 2.50 लाख किसानों को मिलेगा इसका फायदा
- 750 करोड़ रूपए के बीमा क्लेम का जल्द भुगतान होगा
- विभिन्न जिलों में 3,723 डिग्गियों के निर्माण को लेकर भी हुआ फैसला
- कृषक कल्याण कोष से 95.87 करोड़ रूपए के भुगतान आदेश
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी का गठन
- कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड का लाभ किसानों को दिलाने के लिए बनी कमेटी
- राजस्थान में इस फण्ड से 9 हजार करोड़ आवंटन का लक्ष्य रखा गया
- मण्डी में किसानों की सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भूखण्डों का आवंटन होगा
- पशुपालकों को पशुधन के आधार पर अधिकाधिक केसीसी जारी किए जाएंगे
- जमीन व पशुधन वाले किसानों के लिए केसीसी की सीमा 3 लाख तक होगी
- 1,000 सहकारी समितियों को इसी वर्ष निजी गौण मण्डी का दर्जा दिया जाएगा
- दूर के गांवों में भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद हो सकेगी

इस बैठक में मुख्यमंत्री ने मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटियों के द्वारा आम जनता को निवेश के नाम पर धोखा देकर उनकी गाढ़ी मेहनत की कमाई लूटने पर चिंता जताई. सीएम ने अधिकारियों को ऎसा मैकेनिज्म तैयार करने के निर्देश दिए कि भविष्य में प्रदेश में ऎसी कोई भी को-ऑपेरटिव सोसायटी गरीब जनता को झांसे में नहीं ले सके. साथ ही गहलोत ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं में 1,000 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को जल्द शुरू करने के आदेश दिए. इसके लिए अगले तीन महीनों में विभाग के सेवा एवं भर्ती नियमों में संशोधन भी कर लिया जाएगा. बैठक में मौजूद कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा ने बताया कि सहकारिता विभाग द्वारा वर्ष 2019-2020 में 21.86 लाख कृषकों को 9541 करोड़ रूपये का अल्पकालीन सहकारी फसली ऋण वितरित किया है. वर्ष 2020-21 में खरीफ सीजन के लिए 23.91 लाख किसानों को 7343.71 करोड़ रूपये का ऋण वितरित किया गया है, इसमें 2.25 लाख नए कृषकों को 393.80 करोड़ रूपये का ऋण बांटा गया.

अब शहरी क्षेत्रों में भी जल्द लगाए जाएंगे स्वास्थ्य मित्र, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने दी जानकारी

बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी सहकारी भण्डारों के मेडिकल विक्रय केन्द्र ऑनलाइन होंगे जिससे प्रदेश के 4.15 लाख पेंशनरों को सहुलियत मिलेगी. प्रदेश में टिड्डियों के संकट पर भी विचार विमर्श किया गया. अब तक प्रदेश में 5 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण के लिए दवा छिड़काव किया गया. इस वर्ष प्रदेश के 33 में से 32 जिलों में टिड्डियों का प्रकोप रहा. आने वाले दिनों में टिड्डियों के नए दलों के आक्रमण की आंशका है. सोमवार की बैठक को विधानसभा सत्र से जोड़कर भी देखा जा रहा है. दरअसल, 21 अगस्त से फिर से सदन की कार्यवाही शुरू होनी है, जिसमें किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठ सकते हैं, लेकिन इससे पहले ही मुख्यमंत्री ने तमाम मुद्दों पर चर्चा करके विपक्ष के हमलों के जवाब तैयार कर लिए है और साथ ही किसानों की विभिन्न मांगों को स्वीकार कर लिया है.