जलदाय अधिकारियों के भ्रष्टाचार के कारनामे, बिना काम किए ही ठेकेदारों को दिया जा रहा पेमेंट

जलदाय अधिकारियों के भ्रष्टाचार के कारनामे, बिना काम किए ही ठेकेदारों को दिया जा रहा पेमेंट

जयपुर: भ्रष्टाचार के लिए बदनाम प्रदेश के जलदाय विभाग में अफसरों के एक के बाद एक कई कारनामें सामने आ रहे हैं. कहीं पर बिना काम किए ही ठेकेदारों को पेमेंट दिया जा रहा है, तो कहीं पर चहेतों को फायदा पहुंचानें के लिए वर्क ऑर्डर ही बदले जा रहे हैं. देखिए जलदाय विभाग में भ्रष्टाचार की पोल खोलती यह एक्सक्लुसिव रिपोर्ट. 

जलदाय विभाग में एक एक्सईन के कारनामे !
-एक फर्म पर मेहरबान हुए एक्सईन साहब
-हाथ की सफाई से काम करने की तारीख ही बदल डाली
-कनिष्ठ लेखाकार के पत्र से हुआ मामले का खुलासा
-करीब 32 फीसदी कम रेट में दे दिया फर्म को ठेका
-ऐसे में काम की क्वालिटी पर भी उठ खड़े हुए सवाल
-अब मुख्यमंत्री गहलोत तक पहुंची मामले की शिकायत
-लेकिन उच्च अधिकारी पर्दा डालने की कोशिश में
-गांधी नगर शराब कांड मामले में भी चर्चित थे एक्सईन

एक्सईन ने दिखाई हाथ की सफाई:
ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए एक्सईन की सफाई का पहला नमूना आपको दिखाते हैं. फर्स्ट इंडिया के पास मौजूद दस्तावेज के अनुसार जयपुर के नगर खंड चतुर्थ दक्षिण में मैसर्स सैनी इंडस्ट्रीज को पाइपलाइन काम काम दिया गया था. आदेश के अनुसार 17 जून 2020 को काम शुरू होना था, लेकिन एक्सईन ने हाथ की सफाई दिखाते हुए इस तारीख को 27 अप्रैल कर दिया. मामले का खुलासा तो तब हुआ, जब कनिष्ठ लेखाकार ने पत्र लिखकर अपनी असहमति जताई. कनिष्ठ लेखाकार ने साफ लिखा है कि बिना लेखाकर्मी की जानकारी के एक्सईन ने यह बदलाव किया है, ऐसे में इस प्रकरण की जांच होनी चाहिए.

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यह एक ही मामला नहीं:
यह एक ही मामला नहीं है. अब आगे आगे देखिए इन एक्सईन साहब के और कारनामें. जलदाय विभाग के स्टाफ क्वार्टर, एईन दफ्तर में मैंटीनेंस, इलेक्ट्रिक व सेनेट्री काम के लिए तीन निविदाओं 44, 45 व 46 के माध्यम से आदेश दिए गए, लेकिन नोटशीट पढ़कर ही समझ में आ जाता है कि साहब व ठेकेदार के बीच क्या खेल हुआ है. निविदा संख्या 44/2019-20 में 21 फीसदी कम रेट पर काम देने का फैसला हुआ, लेकिन खास बात यह है कि इसी काम के लिए जब पहले टेंडर किया था, तब 16 फीसदी रेट पर काम इसलिए देने से मना कर दिया कि इससे गुणवत्ता वाला काम नहीं होता. आप खुद नोटशीट देखिए, जिसमें साफ लिखा है कि 16 फीसदी रेट पर किसी के लिए भी गुणवत्ता पूर्वक काम करना संभव नहीं है और निविदा कमेटी ने इसे उचित नहीं माना. 30 लाख रुपए की निविदा संख्या 45/2019-20 में भी ऐसा ही खेल हुआ. इस काम के लिए पहले जब निविदा जारी की थी, तब रेट 14.22 बिलो आई थी, लेकिन कमेटी ने इसे सही नहीं माना, लेकिन अब इसकी रेट 22 फीसदी बिलो है. करीब 25 लाख रुपए के काम की निविदा संख्या 46/2019-20 में 21 फीसदी बिलो रेट को गुणवता पूर्ण काम के लिए उचित नहीं माना, लेकिन अब दोबारा निविदा निकाली तो 26 फीसदी बिलो रेट को भी उचित मान लिया. सवाल बिलकुल साफ है. इन तीनों टेंडर में जब पहले की बजाय अब और भी बिलो (below) रेट आई है, तो उसे उचित कैसे मान लिया. इतनी कम रेट में गुणवत्ता वाला काम कैसे होगा.

जलदाय विभाग के आला अफसरों की मेहरबानी:
गांधी नगर शराब कांड मामले में चर्चित थे इन एक्सईन साहब को एक और कारनामा बताते हैं. दिसंबर 2019 में एक आदेश के द्वारा भरतपुर की एक फर्म को ट्यूबवेल का काम दिया गया था, लेकिन नोट शीट में साफ लिखा है कि इस फर्म ने निर्धारति समयावधि में APS राशि, स्टाम्प व अनुबंध पत्र संपादित नहीं किए. ऐसे में सिफारिश की गई कि जुर्माना लगाकर जमानत राशि भी जब्त कर ली जाए. इस सिफारिश के बाद सभी एईन को निर्देश दिए गए कि फर्म के काम रोक दिए जाए. लेकिन फर्म से मिलकर साहब ने ऐसा खेल रचा कि न केवल उनके काम का मेजरमेंट कर लिया, बल्कि बिल बनाकर भुगतान के आदेश दे दिए. अब सवाल यह उठता है कि फर्म को सजा देने की बजाय अफसर की मेहरबानी क्यों है. खास बात यह है कि संबंधित अफसर पहले भी विवादों में रहा है, लेकिन जलदाय विभाग के आला अफसरों की मेहरबानी इस कदर है कि यहां पर खुला खेल चल रहा है. अब देखना है कि विभाग के प्रमुख सचिव इस खेल को रोककर प्रभावी कार्रवाई करेंगे या फिर जलदाय विभाग को ढर्रा पहले की तरह चलता रहेगा.

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