सरहदी बाड़मेर-जैसलमेर में परंपरागत जल स्त्रोत 'बेरियों' को होगा जीर्णोद्धार 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/27 08:23

जैसलमेर: सदियों से प्यासे रेगिस्तान में ग्रामीणों की प्यास बुझाने वाले पारम्परिक पेयजल स्त्रोतों, तालाबों आदि का महत्व अब समझ में आने लगा हैं. अब उसकी सुध ली जाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं. भले ही कितनी गर्मी हो, पानी का कितना ही संकट हो हमेशा यही पुराने पेयजल स्त्रोत ग्रामीणों के काम आए हैं, लेकिन गांव-गांव पहुंची जलदाय विभाग की पेयजल योजनाएं पाईपलाईन आदि से इन प्राचीन पेयजल स्त्रोतों का महत्व कम हो गया था. अब अकाल व भीषण पेयजल संकट में इन पारम्परिक बेरियों तालाबों की याद आई हैं.

जैसलमेर व बाड़मेर में हुई शुरुआत:
जैसलमेर व बाड़मेर जिला प्रशासन ने इन प्राचीन तालाबों व बेरियों को सरंक्षित व उन्हें वापस पुर्नजीवित करने की बहुमहत्वकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है. जहां जैसलमेर जिला कलेक्टर नमित मेहता द्वारा प्रथम फेज में कई ग्रामीण इलाकों में 141 पुराने तालाबों को मॉडल तालाब के रूप में विकसित कर उसके लिये धनराशि स्वीकृत की हैं. जबकि बाड़मेर जिला कलेक्टर द्वारा कुल 1790 प्राचीन बेरियों को चिन्हित कर उसमें प्रथम फेज में 1000 बेरियों को पुर्नजीवित व वापस सरंक्षित करने की योजना पर कार्य करना शुरू कर दिया है. बाड़मेर जिला कलक्टर हिमांशु गुप्ता के मुताबिक 1790 में से 432 बेरियों का इस्तेमाल ग्रामीणों की ओर से जल स्त्रोत के रूप में किया जा रहा हैं. मनरेगा में परंपरागत जलस्त्रोत बेरियां के जीर्णोद्वार की कार्य योजना तैयार की गई है. इन बेरियां में जमा हो चुकी मिटटी यथा गाद निकालने का कार्य करवाया जाएगा. इनके ऊपर बेसमेंट का निर्माण कराने के साथ घिरनी लगाई जाएगी. ताकि ग्रामीणां को बाल्टी से पानी निकालने में सहुलियत हो. इस योजना से ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट से काफी हद तक निजात मिल सकेगी. जिला कलेक्टर हिमांशु गुप्ता ने संबंधित विकास अधिकारियां को इसके प्रस्ताव भिजवाने के निर्देश दिए. 

क्या है बेरियां:
उल्लेखनीय है कि बाड़मेर जिले की शिव, गडरारोड़, सेड़वा, धनाउ समेत कुछ अन्य पंचायत समितियां के कई गांवों में ग्रामीण पानी के लिए परंपरागत जल स्त्रोत बेरियां पर निर्भर है. आमतौर पर इसमें भूमिगत जल नहीं होता, लेकिन रिस-रिसकर सेजे का पानी का एकत्रित होता है. इसमें कई बेरियां में 15 से 20 मटकी तो कुछ में इससे अधिक मात्रा में पानी उपलब्ध हो जाता है. इसमें पानी समाप्त होने के 3-4 घंटे बाद वापिस सेजे का पानी रिसकर एकत्रित हो जाता है. बाड़मेर जिले के कई अधिकारी बेरियां के जीर्णोद्वार के लिए जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहनदान रतनू, मनरेगा के अधिशाषी अभियंता भेराराम विश्नोई, सहायक अभियंता राजेन्द्रसिंह के साथ कई पंचायत समितियां के विकास अधिकारी एवं तकनीकी अधिकारी पिछले कुछ दिनां से लगातार ग्रामीण इलाकां के दौरे पर रहे. करीब एक सप्ताह तक परंपरागत जल स्त्रोतां बेरियां का सर्वे किया गया. उन्हांने मौके पर बेरियां की स्थिति का जायजा लेने के साथ पानी की आवक के बारे में ग्रामीणां से जानकारी ली।

योजनाबद्ध होगा काम:
वहीं दूसरी तरफ जैसलमेर जिला कलेक्टर नमित मेहता ने बताया कि योजना के अंतर्गत प्रत्येक तालाब के 35 से 40 लाख रूपए स्वीकृत किए हैं. यह कार्य शुरू हो चुका हैं. इसमें तेजी आ सकेगी तथा यह तालाब ग्रामीणों के जीवन रेखा का मुख्य आधार बन सकेगा. उन्होंने बताया कि जैसलमेर जिले में गुमनाम हुई या रेत में दबी हुई प्राचीन बेरियों को भी सरंक्षित करने व उन्हें बाहर निकालने के लिये एक योजना बनाई जा रही हैं. इसके लिये अतिशीघ्र सर्वे अभियान शुरू किया जाएगा, ताकि रेत में दबी हुई प्राचीन बेरियों की खुदाई की जाएगी ताकि इसमें पानी निकल सकेगा. 

... जैसलमेर संवाददाता सुर्यवीर सिंह तंवर की रिपोर्ट 
 

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