VIDEO: रोडवेज CMD ने उठाये परिवहन विभाग की नीतियों पर गंभीर सवाल,घाटे के लिए गलत नीतियों को बताया जिम्मेदार, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: रोडवेज CMD ने उठाये परिवहन विभाग की नीतियों पर गंभीर सवाल,घाटे के लिए गलत नीतियों को बताया जिम्मेदार, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: परिवहन विभाग में मंत्री के बदलते ही अब परिवहन विभाग और राजस्थान रोडवेज आमने-सामने हैं. राजस्थान रोडवेज के सीएमडी संदीप वर्मा ने रोडवेज को हो रहे आर्थिक नुकसान के लिए परिवहन विभाग की गलत नीतियों को जिम्मेदार बताया है. रोडवेज के सीएमडी ने प्रमुख सचिव परिवहन को पत्र लिखकर बताया है कि उनकी कौन सी गलत नीतियों के कारण रोडवेज को आर्थिक नुकसान हो रहा है.

विदेश में रोडवेज की बुरी स्थिति किसी से छिपी हुई नहीं है. तमाम प्रयासों के बाद भी राजस्थान रोडवेज की हालत सुधर नहीं रही है और रोडवेज का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है जब राजस्थान रोडवेज के सीएमडी ने रोडवेज की खराब और बिगड़ती हुई हालत के लिए अपने प्रशासनिक प्रभाग यानी कि परिवहन विभाग को ही जिम्मेदार ठहरा दिया है.रोडवेज के सीएमडी संदीप वर्मा ने परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव अभय कुमार को एक पत्र लिखकर परिवहन विभाग की उन गलत नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं जिन से रोडवेज को नुकसान हो रहा है. 

 

रोडवेज के सीएमडी ने परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव को जो पत्र लिखा है उसमें उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए यह लिखा है कि परिवहन विभाग की नीतियों में राजस्थान रोडवेज का हित शामिल ही नहीं किया जा रहा है जिससे रोडवेज ना तो नई बसों की खरीद कर पा रहा है और ना ही अपने कार्मिकों को सातवें वेतनमान का भुगतान कर पा रहा है. रोडवेज सीएमडी के इस पत्र के बाद परिवहन विभाग में खलबली मच गई है. क्योंकि जिस तरह की भाषा का प्रयोग पत्र में रोडवेज के सीएमडी ने किया है उस तरह की भाषा का प्रयोग आमतौर पर सरकार पर हमला करने के लिए विपक्षी नेता करते हैं अब सवाल यह खड़ा हो रहा है क्या प्रदेश के अफसर आपस में मनमुटाव के इतने बड़े दौर से गुजर रहे हैं.

कुछ दिनों पहले ही सीएम अशोक गहलोत ने राजस्थान रोडवेज की समीक्षा बैठक भी ली थी इस बैठक में भी परिवहन विभाग और रोडवेज के अधिकारी शामिल हुए थे लेकिन इस बैठक में रोडवेज सीएमडी की ओर से परिवहन विभाग की नीतियों पर कोई सवाल खड़े नहीं किए गए थे. पूर्वज के सीएमडी संदीप वर्मा ने प्रमुख सचिव परिवहन को उनकी नीतियों पर सवाल उठाते हुए जो पत्र लिखा है उसमें उन्होंने बिंदुवार बताया है कि किस तरह परिवहन विभाग रोडवेज के हितों की अनदेखी कर रहा है.

CMD ने किस तरह परिवहन विभाग को किया कटघरे में खड़ा :

1- रोडवेज सीएमडी ने अपने पत्र में लिखा है के रोडवेज का किराया बढ़ाने के प्रस्ताव को परिवहन मंत्री मंजूरी दे चुके हैं, इसके बाद भी परिवहन विभाग किराया बढ़ाने की अधिसूचना जारी नहीं कर रहा है. डीजल की दरें लगातार बढ़ने के कारण  रोडवेज को बहुत घाटा हो रहा है.

2- पटवारी भर्ती परीक्षा में निजी बसों को अधिग्रहित करने के लिए परिवहन विभाग ने रोडवेज से अधिक भुगतान निजी बसों को किया इसको लेकर भी रोडवेज के सीएमडी ने सवाल उठाए हैं.

3- निजी बसों में छतों पर अवैध माल ढुलाई पर भी सीएमडी ने परिवहन विभाग को कटघरे में खड़ा किया है. सीएमडी ने लिखा है कि 3 नवंबर को परिवहन विभाग ने जो सर्कुलर निकाला है उसमें कॉन्टेक्ट कैरिज की बसों में माल ढुलाई पर कोई नियम व शर्तें लागू नहीं की गई है, जब कि स्टेट कैरिज की बसों पर तमाम तरह के नियम और शर्तें परिवहन विभाग ने लागू किए हैं. रोडवेज की बसों का बेड़ा कॉन्ट्रैक्ट कैरिस की बसों का ही है इससे भी रोडवेज को काफी नुकसान हो रहा है.

4- सीएमडी ने अपने पत्र में रोडवेज बस स्टैंडों के आसपास से चल रही अवैध बसों के संचालन पर भी सवाल खड़े किए हैं, सीएमडी ने लिखा है कि पुलिस की इंटेलिजेंस से सूचना मिलने के बाद भी अवैध बसों का संचालन पहले जैसा बना हुआ है इससे भी रोडवेज को नुकसान हो रहा है.

5- पत्र के आखिरी हिस्से में रोडवेज के सीएमडी संदीप वर्मा ने परिवहन विभाग की सभी नीतियों पर ही सवाल खड़े करते हुए लिखा है कि परिवहन विभाग के नीतिगत निर्णयों में रोडवेज का हित शामिल नहीं किया जा रहा इससे रोडवेज के राजस्व पर विपरीत असर पड़ रहा है.

रोडवेज सीएमडी ने प्रमुख सचिव परिवहन को जो पत्र भेजा है उसकी टाइमिंग पर भी ध्यान देना जरूरी है.कुछ दिन पहले ही परिवहन विभाग में नए मंत्री बृजेंद्र ओला ने काम संभाला है. उनके काम संभालते ही परिवहन विभाग को कटघरे में खड़ा करते हुए इस तरह का पत्र हैरान करने वाला है. क्योंकि इससे पहले हुई रोडवेज और परिवहन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त दर्जनों बैठकों में रोडवेज सीएमडी ने इन मसलों को कभी नहीं उठाया है.अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नए मंत्री बृजेंद्र ओला रोडवेज सीएमडी के इस पत्र पर क्या रुख दिखाते हैं.

...शिवेंद्र सिंह परमार की रिपोर्ट

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