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VIDEO: संकट में राजस्थान रोडवेज ! मात्र 3100 बसें ही बची हैं रोडवेज के बेड़े में अब

VIDEO: संकट में राजस्थान रोडवेज ! मात्र 3100 बसें ही बची हैं रोडवेज के बेड़े में अब

जयपुर: राजस्थान रोडवेज के सामने पहली बार ऐसा संकट खड़ा हो गया है, जो अब तक कभी नहीं हुआ. रोडवेज के बेड़े में पहली बार बसों की संख्या इतनी कम हो गई है. इस कारण हर रोज बसों का संचालन 1 लाख किलोमीटर कम हो गया है. रोडवेज की आय में भी गिरावट हुई है. यदि जल्द ही बसें नहीं खरीदी गईं तो हालात और विकट हो जाएंगे. 

दिनों दिन खराब हो रहे रोडवेज के हालात: 
राजस्थान रोडवेज में इन दिनों हालात ज्यादा खराब हो गए हैं. सबसे बड़ी समस्या है बसों की कमी, यानी रोडवेज का मूलभूत आधार ही अब बिखरने लगा है. आमतौर पर राजस्थान रोडवेज के बेड़े में 4500 से 5000 बसें रहती आई हैं. बेड़े में बसों की यह संख्या पिछले कई वर्षों से स्थिर रखी जाती है. लेकिन पिछली सरकार के समय में नई बसों की खरीद नहीं किए जाने से हालात गड़बड़ाने लगे हैं. पिछले 5 वर्षों में मात्र 500 नई बसें ही खरीदी गई थीं, जबकि हर वर्ष ही रोडवेज को 500 नई बसों की जरूरत पड़ती है. यानी जहां 2500 नई बसें खरीदी जानी चाहिए थीं, उस अवधि में केवल 500 बसें ही खरीदी गईं. इस कारण रोडवेज के बेड़े में शामिल कुल बसों की संख्या लगातार घटती जा रही है. बेड़े को बरकरार रखने के लिए रोडवेज प्रशासन उन पुरानी बसों को भी घसीटे जा रहा है, जो कि कंडम होने के मानदंडों को पूरा कर चुकी हैं. आमतौर पर 8 साल पुरानी होने पर बस संचालन योग्य नहीं रहती और उसे कंडम घोषित कर दिया जाता है, लेकिन रोडवेज में फिलहाल 9 से 10 साल पुरानी बसों को भी चलाया जा रहा है. 

समझिए, कितने विकट हालात हैं रोडवेज में- 
- रोडवेज के पास 5000 बसें होनी चाहिए, लेकिन अभी केवल 3459 हैं
- रोज करीब 350 बसें खराब रहती हैं, 3100 बसें ही हैं चालू हालत में
- इनमें से भी करीब 1400 बसें कंडम योग्य हो चुकी हैं
- बसों की औसत उम्र 6.58 वर्ष, यानी ज्यादातर बसें बूढ़ी हो चुकीं,
- दिसंबर 2019, यानी कि 5 माह बाद केवल 1950 बसें ही बचेंगी
- बसों की कमी पूरा करने के लिए रोडवेज प्रशासन ने निजी बसें अनुबंध पर लीं
- 960 बसें अनुबंध पर लेकर काम चला रहा रोडवेज प्रशासन

बसों की संख्या कम होने के चलते रोडवेज प्रशासन को नकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं. पूर्व में जब बेड़े में 4500 से 5000 बसें चल रही थीं तब बसों के करीब 5000 शेड्यूल चल रहे थे. लेकिन अब करीब 3800 शेड्यूल ही संचालित हो रहे हैं. इस कारण कई ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बसें बंद कर दी गई हैं. रूट कम करने से ग्रामीण क्षेत्रों के बस यात्रियों को परेशानी हो रही है. वहीं रोडवेज बसें नहीं चलने से निजी बस संचालक इसका फायदा उठा रहे हैं. बसें घटने से रोडवेज के संचालन किमी कम हो गए हैं. विकट हालातों को देखते हुए रोडवेज प्रशासन ने पिछले दिनों बोर्ड बैठक में 1152 नई बसें खरीदने का फैसला किया है. 

नुकसान क्या, समाधान कैसे संभव ?
- पिछले साल अगस्त में रोडवेज बसें रोज 16.29 लाख किमी चल रही थीं
- लेकिन इस साल अगस्त में रोज 15.40 लाख किमी ही चल रही हैं
- यानी पिछले साल की तुलना में रोज 90 हजार किमी संचालन घटा
- संचालन किमी कम होने से रोडवेज की आय गिरी, यात्रीभार भी कम हुआ
- अब 1152 बसें खरीदने का फैसला तो किया, लेकिन फंड की कमी बड़ी बाधा
- दरअसल रोडवेज प्रशासन लोन लेने पर निर्णय नहीं कर पा रहा
- खरीद के लिए करीब 250 करोड़ रुपए की दरकार रोडवेज को

इन हालात में यह सबसे ज्यादा जरूरी है कि रोडवेज में बिना देरी किए नई बसों को शामिल किया जाए. 50 बसें इलेक्ट्रिक बैटरी युक्त होंगी, जिनके लिए सब्सिडी केन्द्र सरकार मुहैया करवाएगी, लेकिन शेष बची हुई एक्सप्रेस और डीलक्स बसों की खरीद जल्द नहीं की गई तो रोडवेज के लिए हालात और विकट हो जाएंगे. क्योंकि दिसंबर आते-आते रोडवेज के पास 2000 बसें भी नहीं बचेंगी. अब देखना होगा कि इस पूरे हालात में राज्य सरकार रोडवेज को बचाने के लिए हाथ बढ़ाती है या नहीं. 

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

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