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दिवाली पर भी रोडवेज की जेब खाली! पिछले साल के मुकाबले भी दिवाली पर कम रही आय
दिवाली पर भी रोडवेज की जेब खाली! पिछले साल के मुकाबले भी दिवाली पर कम रही आय

जयपुर: दिवाली पर जब निजी बस संचालक जमकर चांदी कूट रहे थे, तब भी राजस्थान रोडवेज प्रशासन अपनी आय में कोई खास बढ़ोतरी दर्ज नहीं कर पाया है. राजस्थान रोडवेज के अधिकारियों की कार्यप्रणाली में ढिलाई के चलते रोडवेज बसों का संचालन कम रहा, इस वजह से रोडवेज पिछले साल के बराबर भी आय अर्जित नहीं कर सका है. 

दिवाली से 4 दिन पहले से बसों में यात्रीभार बढ़ना शुरू हो गया था: 
दिवाली से 4 दिन पहले से बसों में यात्रीभार बढ़ना शुरू हो गया था और छोटी दिवाली के दिन तक यात्रीभार काफी अच्छा रहा था. वहीं दिवाली के बाद कल तक यात्रियों की काफी आवाजाही रही है. लेकिन राजस्थान रोडवेज प्रशासन दिवाली के इस पीक सीजन में भी अच्छी आय अर्जित करने में पीछे रहा है. दरअसल राजस्थान रोडवेज के पास वर्तमान में बसों की काफी कमी चल रही है. ऐसे में भरसक प्रयास के बावजूद रोडवेज के संचालन किलोमीटर पिछले साल से करीब 2 लाख किलोमीटर प्रतिदिन कम रहे हैं. रोडवेज की बसों का संचालन अक्टूबर माह के शुरुआत में 15 लाख किमी से ज्यादा हो रहा था, जबकि दिवाली के दिनों में रोडवेज की बसों का संचालन औसतन 14.80 लाख किमी प्रतिदिन ही हुआ है. यह दर्शाता है कि रोडवेज अधिकारियों ने दिवाली को लेकर विशेष तैयारी नहीं की थी, इसी कारण बड़ी संख्या में बसें त्योहार के दिनों में भी खराब रहीं. बसों का समय पर मेंटीनेंस नहीं किए जाने से संचालन किलोमीटर काफी कम रहे हैं. 

दिवाली पर पिछले साल से तुलनात्मक कितनी हुई आय: 
- इस साल 27 अक्टूबर, पिछले साल 7 नवंबर को थी दिवाली
- 23 अक्टूबर को 463 लाख आय हुई, 3 नवंबर को थी 518 लाख रुपए आय
- 24 अक्टूबर को 495 लाख आय हुई, 4 नवंबर को थी 524 लाख रुपए आय
- 25 अक्टूबर को 519 लाख आय हुई, 5 नवंबर को थी 523 लाख रुपए
- 26 अक्टूबर को 536 लाख आय हुई, 6 नवंबर को थी 535 लाख रुपए आय
- 27 अक्टूबर को 418 लाख आय हुई, 7 नवंबर को थी 455 लाख रुपए
- 28 अक्टूबर को 221 लाख आय हुई, 8 नवंबर को थी 252 लाख रुपए आय
- 29 अक्टूबर को 439 लाख आय हुई, 9 नवंबर को थी 468 लाख रुपए
- 30 अक्टूबर को 579 लाख रुपए आय, 10 नवंबर को थी 588 लाख रुपए

राजस्थान रोडवेज की बसों का संचालन कम होने के बावजूद यात्रीभार में बढ़ोतरी देखी गई है. दरअसल रोडवेज की बसों की संख्या कम होने की वजह से यात्रियों को मजबूरन इन बसों में ठूंस-ठूंसकर बैठकर सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ा. रोडवेज के बेड़े में पिछले साल जहां करीब 4600 बसें चल रही थीं, वहीं इस साल इनकी संख्या करीब 4000 ही रह गई है. इनमें से भी करीब 250 से 300 बसें रोजाना खराब रहती हैं. 

आइए जानते हैं पिछले साल के मुकाबले कितनी कम चलीं रोडवेज की बसें: 
- पिछले साल 3 नवंबर को बसें 17.38 लाख किमी चलीं, इस साल 23 अक्टूबर को 14.55 लाख किमी
- 4 नवंबर को 17.36 लाख किमी चलीं, जबकि 24 अक्टूबर को 14.83 लाख किमी ही चलीं
- 5 नवंबर को 17.43 लाख किमी बसें चलीं, 25 अक्टूबर को 14.86 लाख किमी ही चलीं
- 6 नवंबर को 17.18 लाख किमी बसें चलीं, 26 अक्टूबर को 15.10 लाख किमी ही चलीं
- 7 नवंबर को 17.37 लाख किमी बसें चलीं, 27 अक्टूबर को 13.71 लाख किमी ही चलीं
- 8 नवंबर को 17.6 लाख किमी बसें चलीं, 28 अक्टूबर को 7.06 लाख किमी ही चलीं
- 9 नवंबर को 17.76 लाख किमी बसें चलीं, 29 अक्टूबर को 11.73 लाख किमी ही चलीं
- 10 नवंबर को 17.13 लाख किमी बसें चलीं, 30 अक्टूबर को 14.52 लाख किमी ही चलीं

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि रोडवेज बसों का संचालन पिछले साल की तुलना में रोजाना 2 से ढाई लाख किमी कम हुआ है. संचालन किलोमीटर कम होने की वजह से ही रोडवेज की आय गिरी है. कुलमिलाकर यदि रोडवेज प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाता और समय रहते खराब पड़ी बसों का मेंटीनेंस कर चलाया जाता तो दिवाली पर रोडवेज प्रशासन बड़ा लाभ उठा सकता था. 

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

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