VIDEO: विधानसभा में आज आरटीडीसी होटल्स को प्राइवेट हाथों में देने पर बरपा हंगामा

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/15 08:09

जयपुर: विधानसभा में आज प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया. प्रदेश की आरटीडीसी होटल्स को निजी कंपनियों को देने के मुद्दे पर भाजपा विधायकों ने सदन में हंगामा करके वेल में धरना दिया. हंगामा होने के कारण प्रश्नकाल में आधे से ज्यादा प्रश्नों का नंबर ही नहीं आया और सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

पूरा प्रश्नकाल रहा हंगामेदार:
विधानसभा में प्रश्नकाल का अंजाम वैसा ही हुआ जिसकी पहले से आशंका थी, पूरा प्रश्नकाल हंगामेदार रहा. नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने वेल में आकर पर्यटन मंन्त्री विश्वेन्द्र सिंह व सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और धरना दिया. प्रश्नकाल में कोटा शहर में नहरों के जीर्णोद्धार के मामले पर पहला प्रश्न पूरा हुआ, लेकिन दूसरा प्रश्न आते ही हंगामा हो गया. पूर्व मंन्त्री कालीचरण सराफ ने प्रदेश की आरटीडीसी होटल्स को निजी हाथों को देने की योजना के बारे में सवाल पूछा था. मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने इसका जवाब दिया, तो कालीचरण सराफ ने कहा की मंत्री ने सदन को गुमराह करने वाला जवाब दिया है. 

मंन्त्री विश्वेन्द्र और कालीचरण सराफ आमने-सामने:
कालीचरण ने कहा कि 29 अप्रैल 2019 को डीबी गुप्ता की अध्यक्षता में एक मीटिंग हुई थी, उस मीटिंग में पीपीपी प्रोजेक्ट की समीक्षा की गई थी और पुराने प्रोजेक्ट का रिव्यू किया गया था. इस मीटिंग के बाद मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए थे कि राज्य सरकार के अधीन आने वाले गढ़, किले और आरटीडीसी के होटल के संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को दी जाए. इस पर मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि यह निर्णय 2015 में आप की सरकार के दौरान ही लिया गया था. जब यह मीटिंग मुख्य सचिव ने की तो आचार संहिता लग गई. मंन्त्री ने कहा कि निर्णय सरकार के होते हैं, अधिकारी मीटिंग करते हैं, ऐसे में मीटिंग करने से निर्णय नहीं हो जाते हैं. 

'मंशा' पर हंगामा:
हंगामा तब हुआ जब मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने विधायक कालीचरण की सवाल को पूछने का की मंशा जान ली. बस यहीं से हंगामा और नारेबाजी का सदन में वातावरण बन गया. विपक्ष ने आरोप लगाया कि मंशा शब्द का उपयोग करके मंत्री ने विधायक पर ही सवाल उठा दिया. इस दौरान भाजपा विधायक वेल में आये और नारेबाजी करते रहे. स्पीकर सीपी जोशी ने विपक्षी विधायकों को अपनी सीट पर जाने के लिए कहा, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ. इसके बाद स्पीकर ने प्रश्नकाल जारी रखा, लेकिन हंगामे के कारण 25 में से 13 प्रश्न पूछे ही नहीं जा सके. प्रश्नकाल 12 बजे तक होता है, लेकिन 25 मिनट पहले ही प्रश्नकाल खत्म हो गया. इसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी.

महज उपस्थित दर्ज कराने के लिए ही हंगामा ?
इसके बाद 12 बजे सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई, तो भाजपा के विधायक वेल में ही बैठे रहे. नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने मंत्री से अपने बयान के बारे में सफाई मांगी. इस पर मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी किसी विधायक के खिलाफ कोई गलत मंशा नहीं थी. स्पीकर सीपी जोशी ने भी पूरा मामला समझाकर हंगामे को शांत कराया. हंगामा खत्म कराने में स्पीकर सीपी जोशी के अलावा मुख्य सचेतक महेश जोशी व उप मुख्य सचेतक महेंद्र चोधरी की भूमिका अहम रही. जोशी ने फ्लोर मैनेजमेंट सभालते हुए राजेन्द्र राठौड़ व गुलाब चंद कटारिया से चर्चा की. मामला तो शांत हो गया, लेकिन मंशा शब्द के कारण आज सदन का महत्वपूर्ण प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया. 25 मिनट पहले प्रश्नकाल खत्म करना पड़ा. इसके बाद महज एक लाइन बोलने से हंगामा खत्म हो गया. ऐसे में सवाल यह है, क्या महज उपस्थित दर्ज कराने के लिए ही हंगामा बरपाया गया ? 

... संवाददाता योगेश शर्मा, ऐश्वर्य प्रधान के साथ नरेश शर्मा की रिपोर्ट 

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