VIDEO: जेडीए की नींदड़ आवासीय योजना पर फिर बवाल, किसानों ने शुरू किया जमीन समाधि सत्याग्रह

Abhishek Shrivastava Published Date 2020/01/08 10:00

जयपुर: जयपुर विकास प्राधिकरण की नींदड़ आवासीय योजना की भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ एक बार फिर प्रभावित खातेदारों ने विरोध का बिगुल बजा दिया. खातेदारों ने आज फिर जमीन समाधि सत्याग्रह शुरू कर दिया. उधर जेडीए का तर्क है कि खातेदारों की मांग पर ही योजना को मूर्त रूप देने का काम तेजी से किया जा रहा है. 

नींदड आवासीय योजना 327 हैक्टेयर में प्रस्तावित: 
प्रस्तावित नींदड आवासीय योजना 327 हैक्टेयर में प्रस्तावित है. योजना हेतु 286.27 हैक्टेयर भूमि अवाप्त की गयी है, तथा शेष 41.45 हैक्टेयर भूमि जविप्रा की स्वंय की भूमि है. खातेदारों द्वारा जविप्रा के पक्ष में 122 हैक्टेयर भूमि समर्पित की जा चुकी है, तथा 41.27 हैक्टेयर भूमि का नकद मुआवजा सिविल कोर्ट में जमा कराया जा चुका है. अवाप्ति के विरोध में पिछली भाजपा सरकार में भी काश्तकारों ने जमीन समाधि सत्याग्रह कर आंदोलन किया था. तब जेडीए व सरकार में समझौते के बाद आंदोलन खत्म किया गया. काश्तकारों का अब आरोप है कि इस समझौते की पालना किए बिना ही जेडीए ने जबरन जमीन लेना शुरू कर दिया है. इसको लेकर आज काश्तकारों ने मौके पर ही जमीन समाधि सत्याग्रहण फिर से शुरू कर दिया. 

नए भूमि अवाप्ति अधिनियम के तहत मुआवजे की मांग:
काश्तकारों की मांग है कि उन्हें वर्ष 2014 में लागू किए गए नए भूमि अवाप्ति अधिनियम के तहत मुआवजा दिया जाए. पुराने कानून के अनुसार की गई अवाप्ति की कार्यवाही प्रभाव शून्य हो गई. उधर जेडीए की ओर से औपचारिक तौर पर मामले में तथ्य रखे गए हैं. जेडीए की ओर से कहा गया है कि नींदड आवासीय योजना से प्रभावित काश्तकार जिनके द्वारा भूमि समर्पित की जा चुकी है, उनको जल्द ही आरक्षण पत्र जारी किये जाएंगे तथा ऐसे काश्तकार जिन्होनें भूमि समर्पित नही की है, उन्हें सहमति के आधार पर समर्पण करवाकर आरक्षण पत्र जारी किये जाएंगे. आपको बताते हैं कि मामले में जेडीए की ओर क्या तर्क दिए गए हैं. 

योजना को लेकर जेडीए के तर्क:
- भूमि अवाप्ति के लिए अवाप्ति की पहली अधिसूचना 4 जनवरी 2010 को लगभग 10 वर्ष पूर्व जारी की गयी थी.
- भूमि अवाप्ति का अवार्ड दिनांक 31 मई  2013 को जारी किया गया.  
- अवाप्ति के खिलाफ काश्तकारों की ओर से दायर याचिकाओं को हाईकोर्ट खारिज कर चुका है. 
- सुप्रीम कोर्ट ने भी 4 सितम्बर 2018 के अपने आदेश में अवाप्ति की प्रक्रिया को सही माना है. 
- किसानों की ओर से 25 प्रतिशत विकसित भूमि का मुआवजा मांगा जा रहा था. 
- किसानों का कहना था कि योजना शुरू नहीं होने से उन्हें आर्थिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है. 
- किसानों के हित में जेडीए ने 1 जनवरी 2020 से योजना का काम दुबारा शुरू किया गया.  
- योजना की मुख्य 200 फीट चौड़ी सडक का कार्य प्राथमिकता से किया जाएगा. 
- काश्तकारों को उनकी भूमि की आस-पास ही 25 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा.  
- ऐसे काश्तकार जिनके मकान बने हुए है, तथा सर्वे में शामिल है, उनकों प्राथमिकता से पूर्व में सृजित ब्लॉक में भूखण्ड आंवटित किया जाएगा

जेडीए का दावा है कि किसानों के हित में पारदर्शिता के साथ योजना पर काम किया जा रहा है. किसानों से लगातार बातचीत की जा रही है, तथा उनके द्वारा उठायें गये उचित सवालों का लगातार जवाब दिया जा रहा है. किसानों को यह भी सलाह दी गयी है कि कुछ लोगों द्वारा फैलाये जा रहे भ्रम मे ना फंसे. जविप्रा किसानों की उचित समस्या समाधान के लिए तत्पर है.  
 

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in