जलदाय विभाग में चल रहा गड़बड़झाला, टेंडर में मनमर्जी के रचे जा रहे खेल

Naresh Sharma Published Date 2018/09/22 06:37

जयपुर। भ्रष्टाचार के लिए बदनाम रहे, राजस्थान के जलदाय विभाग में फिर से गड़बड़झाले चल रहे हैं। पहले खेल बड़े प्रोजेक्टस के लिए होते थे और अब छोटे प्रोजेक्ट में बड़े खेल चल रहे हैं। जिम्मेदार अफसर चहेतों को ठेके देने के लिए नियम तार तार कर रहे हैं। जानिए फर्स्ट इंडिया की यह एक्सक्लुसिव रिपोर्ट। 

- चहेतों को ठेका देने का चल रहा षडयंत्र
- अफसर बदल रहे टेंडर की शर्ते
- छुट्टी के दिन बुलाए जाते हैं ठेकेदार
- बड़े अफसरों तक पहुंच रही है शिकायत
- लेकिन फिर भी नहीं हो रही कार्रवाई
- क्या सब कुछ चल रहा मिलीभगत से

जयपुर नॉर्थ में टेंडर प्रक्रिया में दो अधिकारियों के नपने का का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि टेंडर में ही खेल करने के अलग अलग और भी मामले सामने आ रहे हैं। खेल भी ऐसे कि आप देखोगे तो आंखे खुली की खुली रह जाएगी। बात जब अपनों को ठेके देने की हो, तो यहां न कोई नियम होता है और न ही कोई कायदा। छुट्टी के दिन भी ऑफिस खुलवाने के आदेश जारी हो जाते हैं।

परत दर परत खुलासे

केस नंबर एक
- नगर खंड चतुर्थ (उत्तर) का मामला
- 5 निविदाएं जारी करने का हुआ एलान
- निविदा संख्या 36 से 40 तक का मामला
- 5 करोड़ से अधिक के ठेके का है मामला
- लेकिन एक्सईन ने कर दी यहां मनमर्जी
- निविदा 36 व 39 के लिए अलग नियम
- रविवार के दिन भुगतान जमा कराने को कहा
- रविवार को ऑफिस खोलने का भी आदेश जारी किया
- निविदा 37, 38 व 40 के लिए अलग नियम
- सोमवार तक भुगतान का दिया गया समय

पहला केस आप देखिए। जयपुर के नगर खंड चार नॉर्थ में पांच निविदाओं से जुड़ा हैं यह मामला। एक्सईन अजय सिंह राठौड़ ने पांच निविदाओं के दो ग्रुप बनवा दिए और दो निविदाओं के लिए रविवार को भी ऑफिस खोलने के भी आदेश दे दिए। जबकि तीन अन्य के लिए सोमवार के दिन तय हुए। अब बड़ा सवाल यह है कि इन दो निविदाओं में ऐसा क्या है कि इनके लिए डीडी जमा कराने का दिन छुट्टी का दिन चुना है। क्या यह काम कार्यदिवस पर नहीं हो सकता था, जैसा अन्य तीन के लिए होगा।

केस नंबर दो
नगर खंड चतुर्थ (उत्तर) का मामला
निविदा संख्या 32/2018-19 का मामला
ठेके की दौड़ के लिए नियम तार तार
अनुभवी कंपनी को बाहर किया रेस से
और चहेती कंपनी को दे दिया ठेका
एक ही दिन में खोल दी सभी बिड
अब मुख्य अभियंता तक पहुंची शिकायत

अब आइये आपको दूसरा किस्सा बताते हैं। दफ्तर वहीं, बस ठेका बदल गया है। काम था झोटवाड़ा में ऑपरेशन व मैंटीनेंस का। अफसर ने बिना कोई कारण बताए ही एक फर्म को निविदा से बाहर कर दिया, जबकि एक ऐसी कंपनी को जिसको नलकूपों के संचालन का अनुभव नहीं है, को काम दे दिया। इस कंपनी ने जो दस्तावेज लगाए थे उनमे कई सूचनाएं पूर्ण नहीं मानी जा रही। पूरे मामले की शिकाय मुख्य अभियंता आईडी खान तक पहुंच गई है, लेकिन देखना है कि खान साहब इस मामले पर सख्त होते है या नहीं।

किस्सा नंबर तीन
- ठेका लेने के लिए गलत शपथ पत्र
- सरवाड अजमेर में ठेके का मामला
- 920 लाख रुपए के ठेक का है मामला
- 5 निविदाएं आई थी इस काम के लिए
- तीन फर्म को रेन्पोन्सिव घोषित किया गया
- दो फर्म को नॉन रेन्पोन्सिव बताया गया
- मैसर्स बालाजी कन्स्ट्रक्शन, मैसर्स राजा राम बिश्नोई, 
- मैसर्स सुल्तान अहमद मंसूरी को रेन्पोन्सिव बताया
- फिर मैसर्स राजा राम बिश्नोई को नॉन रेन्पोन्सिव घोषित किया
- मैसर्स सुल्तान अहमद मंसूरी ने की आपत्ति
- मैसर्स बालाजी कन्स्ट्रक्शन के खिलाफ हुई शिकायत
- गलत शपथ पत्र दिया मैसर्स बालाजी कन्स्ट्रक्शन ने
- अधिकारियों ने कर दी थी इस कंपनी पर मेहरबानी
- शिकायत के बाद जांच से खुला मामला
- और नॉन रेस्पोन्सिव घोषित करने की सिफारिश

यह मामला अजमेर के सरवाड में 920 लाख रुपए के ठेके देना का है। यहां पर अफसरों ने एक ऐसी कंपनी को ठेका देने की तैयारी कर ली थी, जिसने शपथ पत्र में गलत जानकारी दी थी। खास बात यह है कि इस टेंडर के लिए एक अन्य कंपनी को इसलिए नॉन रेस्पोन्सिव घोषित कर दिया था, क्योंकि उसने बकाया कार्यों के लिए शपथ पत्र में जानकारी नहीं दी थी। वहीं दूसरी तरफा जयपुर की मैसर्स बालाजी कन्स्ट्रक्शन को रेस्पोन्सिव घोषित कर दिया। बिड में शामिल एक अन्य कंपनी ने जब इस मामले की शिकायत की, तब जाकर मामला खुला और अब मैसर्स बालाजी कन्स्ट्रक्शन को नॉन रेस्पोन्सिव घोषित करने की सिफारिश की है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि कोई शिकायत नहीं करता, तो क्या अफसर गलत तरीके से ठेका दे देते?

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