VIDEO: फिर शुरू होगी ग्रामीण बस सेवा, राज्य सरकार की घोषणा के बाद परिवहन विभाग की कवायद

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/07 09:11

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पिछले कार्यकाल में राजस्थान ग्रामीण परिवहन बस सेवा जोर-शोर से शुरू हुई थी, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे वर्ष 2017 में बंद कर दिया था. अब फिर से राज्य सरकार इसे शुरू करने जा रही है. कैसे शुरू होगी ग्रामीण बस सेवा, कितनी बसें चलेंगी, कब तक शुरू हो सकेगा संचालन, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट:

रोडवेज ने रूटों का सर्वेक्षण कर रिपोर्ट सौंपी:
राज्य में ग्रामीण परिवहन बस सेवा फिर से जीवंत होगी. हरे रंग में रंगी बसें फिर से ग्रामीण क्षेत्रों में सवारियों को बिठाते हुए दिखेंगी. राज्य सरकार ने इसके लिए कवायद शुरू कर दी है. दरअसल ग्रामीण परिवहन बस सेवा की शुरुआत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पिछले कार्यकाल में हुई थी. उस समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उदयपुर से ग्रामीण बस सेवा का उद्घाटन किया था. राजस्थान रोडवेज के साथ करार के तहत निजी बस संचालकों द्वारा बसें चलाई गईं. प्रदेशभर में करीब 625 बसों का संचालन शुरू किया गया था. हालांकि अप्रैल 2017 में वित्त विभाग द्वारा आर्थिक सहायता बंद करने पर रोडवेज प्रशासन ने बसों को किए जाने वाले वायबिलिटी गैप फंड का भुगतान करने में असमर्थता जताई थी और जून 2017 में प्रदेशभर में इन बसों का संचालन बंद हो गया था. अकेले जयपुर जिले में ग्रामीण परिवहन बस सेवा की 58 बसें चल रही थीं. लेकिन अब राज्य सरकार इसे दुबारा शुरू करने जा रही है. दरअसल कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में इसे शामिल किया था और वादा किया था कि सरकार आने पर ग्रामीण बस सेवा का पुन: संचालन होगा. इसके लिए अब राज्य सरकार के निर्देश पर परिवहन विभाग और रोडवेज प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है. 

कैसे चल रही तैयारी ?
—राज्य सरकार के निर्देश पर रोडवेज प्रशासन ने बसों के रूटों का सर्वेक्षण किया
—ऐसे रूट चुने जा रहे, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रोडवेज बसें नहीं चलतीं
—न ही निजी बस संचालकों की बसों को परमिट दिए हुए हैं
—प्रदेशभर में ऐसे करीब 363 रूट चिन्हित किए गए
—परिवहन विभाग अब रोडवेज की रिपोर्ट का परीक्षण करवा रहा है
—परिवहन विभाग के उड़नदस्ते रूटों का परीक्षण कर विभाग को रिपोर्ट देंगे
—रोडवेज प्रशासन करीब 1500 बसें प्रदेशभर में चला सकता है
—हालांकि पिछले कार्यकाल में करीब 625 बसें ही संचालित हो रही थीं
—अकेले जयपुर जिले में पूर्व में 58 बसों का हो रहा था संचालन

ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने की कवायद:
ग्रामीण बस सेवा को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शुरू से ही तत्पर रहे हैं. गहलोत का मानना है कि प्रदेश में प्रत्येक ग्रामीण क्षेत्र या पिछड़े इलाके तक आवागमन के साधन होने ही चाहिए. इसी कन्सेप्ट पर ग्रामीण बस सेवा की शुरुआत हुई थी. पिछले कार्यकाल में भी मुख्यमंत्री ने जब इस सेवा को शुरू करवाया था तो बसों के पेटे निजी बस संचालकों को किए जाने वाले भुगतान का पुनर्भरण राज्य सरकार ही कर रही थी. ऐसे में इस बार भी बसों का संचालन रोडवेज के मार्फत हो सकता है, और इसका पुनर्भरण राज्य सरकार करेगी. राज्य सरकार पर इसके पेटे करीब 2 कराेड़ रुपए प्रतिमाह का आर्थिक भार आ सकता है. 

हालांकि ये आ सकती है परेशानी ?
—पिछली बार 6 साल का अनुबंध था, लेकिन 4 साल में ही तोड़ दिया गया
—कॉन्ट्रैक्ट बीच में तोड़ते हुए अप्रैल 2017 में भुगतान रोक दिया गया
—इसलिए निजी बस संचालक इस बार बसें लगाने से पीछे हट सकते हैं
—पिछली बार के अनुबंध में वीजीएफ का भुगतान अत्यधिक देरी से मिलता था
—रोडवेज की आर्थिक स्थिति अभी भी खराब, इसलिए भी परेशानी रहेगी
—वीजीएफ अलग-अलग जिलों के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है

रोडवेज जारी करेगा टेंडर:
परिवहन विभाग की परीक्षण रिपोर्ट के बाद रोडवेज प्रशासन निजी बस संचालकों से अनुबंध के लिए टेंडर जारी करेगा. परिवहन विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अगले 3 माह में बसों को हायर करने की टेंडर प्रक्रिया पूरी हो सकती है. यानी इस साल के अंत तक ग्रामीण बसें फिर से दौड़ती नजर आ सकती हैं. 

... संवाददाता काशीराम चौधरी की रिपोर्ट 

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