ट्रिपल तलाक कानून पर रोक लगाने से SC का इनकार, वैधता पर सुनवाई के लिए तैयार

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/23 11:45

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक कानून के खिलाफ दाखिल जनहित याचिकाओं की सुनवाई को दौरान केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन सर्वोच्च न्यायलय तीन तालक कानून की वैधता का परिक्षण करने के लिए तैयार है. 

कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा: 
इसके लिए कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई धार्मिक प्रैक्टिस को गलत करार दिया हो, जैसे दहेज/सती आदि. ऐसे में क्या इसे अपराध की सूची में नहीं रखेंगे?  कोर्ट ने कहा कि पाबंदी और अपराध घोषित होने के बाद भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं. इसमें अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान भी है. 

जमीयत उलेमा-ए-हिंद दी चुनौती: 
बता दें कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने तीन तलाक कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने इसपर रोक की मांग की है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मुताबिक तीन तलाक कानून का एकमात्र उद्देश्य मुस्लिम पतियों को दंडित करना है. ये भी कहा गया है कि मुस्लिम पतियों के साथ अन्याय है.

तीन तलाक भारत में अपराध: 
तीन तलाक भारत में अपराध है. तीन तलाक बिल में तीन तलाक को गैर कानूनी बनाते हुए 3 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान शामिल है. अगर मौखिक, लिखित या किसी अन्य माध्यम से पति अगर एक बार में अपनी पत्नी को तीन तलाक देता है तो वह अपराध की श्रेणी में आएगा. तीन तलाक देने पर पत्नी स्वयं या उसके करीबी रिश्तेदार ही इस बारे में केस दर्ज करा सकेंगे.


 

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