VIDEO: बुजुर्गों की बीमारी का 'दर्द' बढ़ा रही एमएसएम अस्पताल की सहकारी दवा दुकानें 

Vikas Sharma Published Date 2019/06/11 10:11

जयपुर: एसएमएस समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में चल रही सहकारी दवा उपभोक्ता भंडार राहत के बजाय बुजुर्गों की बीमारी का "दर्द" बढ़ा रहे है. कॉनफेड और दवा कंपनियों के बीच भुगतान विवाद के चलते दुकानों पर दवाओं का बड़ा टोटा चल रहा है. हालात ये है कि प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल के बाहर चल रही दुकानों में से किसी पर भी मरीज को पूरी दवाएं उपलब्घ नहीं है. मजबूरी में भीषण गर्मी में घंटों इंतजार के बाद बुजुर्ग बाजारों से दवाएं खरीदने को मजबूर है. आखिर क्या है समस्या और बुजुर्ग पेशनर्स को कैसे झेलनी पड़ रही है दिक्कत, पेश है फर्स्ट इंडिया की रिपोर्ट:

कौन सुनेगा, किसको सुनाए, इसलिए चुप रहते है... जी हां कुछ ऐसी ही पीड़ा है बुजुर्ग पेंशनर्स की. जिन्हें घंटों इंतजार के बाद भी सहकारी दवा दुकानों से दवाएं उपलब्ध नहीं हो रही है. अकेले एसएमएस की बात की जाए तो बाहर संचालित सात दुकानों पर रोजाना एक हजार से अधिक मरीज दवाओं के लिए इधर से उधर भटकने को मजबूर है. इन्हीं बुजुर्गो की पीड़ा जानने के लिए फर्स्ट इंडिया की टीम ने जब अस्पताल का दौरा किया तो पता चला कि बुजुर्ग पेंशनर्स को नौ दवाओं में से एक भी दुकान पर नहीं मिली. एक घंटे के लम्बे इंतजार के बाद दवा के बजाय एनओसी का बिल दिया गया. 

आइए आपको बताते है बुजुर्गो की पीड़ा:
केस 1. जेपी गोयल 

—उम्र : 84 साल 
—दवा दुकान पर एक घंटे इंतजार 
—डॉक्टर ने लिखी 11 दवाओं में से महज 2 मिली 

केस 2. ओम प्रकाश गौतम 
—उम्र : 76 साल 
—दवा दुकान पर डेढ़ घंटे इंतजार 
—डॉक्टर ने लिखी 9 दवाओं में से एक भी नहीं मिली 

फर्स्ट इंडिया की टीम ने जब बुजुर्गो की मार्मिक पीड़ा से जुड़े मामले की पड़ताल की तो पता चला कि कानफ्रेड के जरिए दवा कम्पनियां दुकानों पर सप्लाई करती है. पिछले कुछ समय से कम्पनियों का करीब 60 करोड़ के आसपास का भुगतान अटका हुआ है, जिसके चलते दवाओं की आपूर्ति पर अघोषित रोक लग हुई है. इसका खामियाजा पेंशनर्स को दिक्कतों के रूप में उठाना पड़ रहा है. 

क्या है हकीकत:
—60 करोड़ के भुगतान विवाद में हर माह हजारों पेंशनर्स चक्करधिन्नी 
—अकेले जयपुर में हर माह 25 से 30 हजार पेंशनर्स लेते है उपभोक्ता भंडार से दवाएं 
—पिछले एक साल में बकाया चल रहा है दवा कम्पनियों का 60 करोड़ का भुगतान
—सर्वाधिक डिमाण्ड वाली 50 से अधिक दवा कम्पनियों ने आपूर्ति से खड़े कर रखे है हाथ 
—यदि पेंशनर्स उपभोक्ता भंडार से एनओसी बनाकर खरीदते है बाजार से दवाएं 
—तो उन्हें इस बिल का भुगतान एक-एक साल बाद जाकर किया जा रहा है 
—अभी जुलाई 2018 के एनओसी बिलों का किया जा रहा है भुगतान 

बुजुर्गों की दिक्कतों की सूचना मिलने पर कॉपरेटिव रजिस्ट्रार नीरज के पवन भी आज एसएमएस अस्पताल के दवा काउंटरों पर पहुंचे और दवाओं की आपूर्ति को लेकर फीडबैक लिया. इस दौरान उन्होंने दुकानदारों को सख्त हिदायत दी कि पेंशनर्स को यथासंभव सभी दवाएं उपलब्घ कराई जाए. साथ ही भुगतान के विवाद को लेकर सरकार स्तर पर बातचीत का भी आश्वासन लोगों को दिया. अब देखना ये है कि रजिस्ट्रार का दौरान व्यवस्थाओं को कितना सुधार पाता है और बुजुर्ग पेंशनर्स की पीड़ा कब खत्म होती है.  

... संवाददाता विकास शर्मा की रिपोर्ट 


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