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राजस्थान सियासी घटनाक्रम पर बड़ा अपडेट! सचिन पायलट की राहुल गांधी-प्रियंका गांधी से मुलाकात

राजस्थान सियासी घटनाक्रम पर बड़ा अपडेट! सचिन पायलट की राहुल गांधी-प्रियंका गांधी से मुलाकात

नई दिल्ली: राजस्थान में विधानसभा का सत्र शुरू होने से पहले राजस्थान सियासी घटनाक्रम पर बड़ा अपडेट सामने आया है. पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की है. तीनों के बीच दो घंटे तक चर्चा हुई. मुलाकात के बाद राहुल और प्रियंका सोनिया से मिलने पहुंचे. अब राहुल-सोनिया और प्रियंका के बीच मुलाकात जारी हैं.

मांगों पर नहीं बनी सहमति:
पायलट की तीनों के साथ दो घंटे तक हुई विभिन्न मसलों पर चर्चा हुईं. जानकार सूत्रों के हवाले से खबर सामने आई हैं कि बैठक में सचिन पायलट ने कुछ मांगें रखी, लेकिन फिलहाल पायलट की रखी गई मांगों पर सहमति नहीं बनी हैं. अब तीन सदस्यीय कमेटी इस पर फैसला लेगी. 

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14 अगस्त से राजस्थान विधानसभा सत्र:
आपको बता दें कि 14 अगस्त से ही राजस्थान में विधानसभा का सत्र चलेगा. उससे पहले सचिन पायलट गुट ने सत्र में शामिल होने के संकेत दे दिए थे. इससे पहले भी जब सचिन पायलट ने बगावत की थी, तब प्रियंका गांधी वाड्रा से उनकी कई बार फोन पर बात हुई थी और उन्होंने मसला सुलझाने की कोशिश की थी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सचिन पायलट के साथ करीब 22 विधायक थे. राज्य सरकार ने उनपर सरकार गिराने का आरोप लगाया था और राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था. जिससे सचिन पायलट खासा नाराज हुए थे, उनकी बगावत के बाद ही कांग्रेस ने सचिन से उपमुख्यमंत्री-प्रदेश अध्यक्ष का पद छीन लिया था.

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टोंक से तीन बार विधायक और पूर्व मंत्री रही ज़किया इनाम का निधन

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जयपुर: टोंक से तीन बार विधायक और पूर्व मंत्री रही ज़किया इनाम नहीं रही, देर रात जयपुर में उनका निधन हो गया. पिछले कई दिनों से वे बीमार चल रही थी. कल शाम को ही उनको आरयूएचएस में भर्ती कराया था. देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली. उनकी मौत की खबर के बाद टोंक कांग्रेसियों ने शोक व्यक्त किया है. कांग्रेस पार्टी से टोंक से ज़किया इनाम 3 बार विधायक रही. 1985-1989 के बीच चिकित्सा मंत्री रही. उन्होने महिला और बाल विकास मंत्री समेत विभिन्न मंत्रालय संभाले. 

1985 में पहली बार कांग्रेस उम्मीदवार के रुप में भाग्य आजमाया:
साल 1985 में पहली बार कांग्रेस उम्मीदवार के रुप में भाग्य आजमाया तथा विधायक चुनने के बाद चिकित्सा मंत्री भी बनी थी. 1993 के चुनाव में उनको टिकट नहीं मिला. 1985, 1990, 1998, 2003, 2008 एवं 2013 में वे कांग्रेस उम्मीदवार रहीं. 1998, 2008 में विधायक फिर से विधायक चुनी. 2013 के चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा तथा उनकी जमानत भी नहीं बच पाई. जिले में अब तक जकिया ही ऐसी महिला उम्मीदवार थी, जो तीन बार विधायक बनी.

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कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच शोक की लहर:  
उनके निधन की खबर मिलते ही टोंक और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच शोक की लहर दौड़ गई. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा, पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट समेत प्रमुख नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया.   

राज्यसभा के सभी आठ निलंबित सांसदों का धरना खत्म, विपक्ष ने किया पूरे मानसून सत्र के बहिष्कार का फैसला

राज्यसभा के सभी आठ निलंबित सांसदों का धरना खत्म, विपक्ष ने किया पूरे मानसून सत्र के बहिष्कार का फैसला

नई दिल्ली: मौजूदा मानसून सत्र में कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला किए जाने के बाद सभी आठ निलंबित सांसदों ने अपना धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया है. विपक्षी दलों के राज्यसभा सांसदों ने राज्यसभा का वॉकआउट किया है. इसमें कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), डीएमके, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप), वामदल, आरजेडी, टीआरएस और बीएसपी ने भी कार्यवाही का बहिष्कार किया है.

कार्यवाही का बहिष्कार करने के बाद खत्म किया धरना: 
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य और निलंबित सांसदों में शामिल राजीव सातव ने कहा कि विपक्ष इस सत्र में उच्च सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेगा. ऐसे में हमने धरना खत्म कर दिया है. अब हम सड़क पर आंदोलन करेंगे. इससे पहले, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जब तक उच्च सदन के आठ सदस्यों का, मानसून सत्र की शेष अवधि से निलंबन वापस नहीं लिया जाता तब तक विपक्ष कार्यवाही का बहिष्कार करेगा.

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सांसदों को निलंबित करने पर सरकार पर साधा था निशाना:
दरअसल, विपक्षी दलों ने रविवार को राज्यसभा में हुए हंगामे के चलते सोमवार को आठ विपक्षी सदस्यों को निलंबित किए जाने को लेकर सरकार पर निशाना साधा था. इस कदम के विरोध में वे संसद भवन परिसर में ‘‘अनिश्चितकालीन’’ धरने पर बैठ गए थे. बता दें कि सभापति वेंकैया नायडू ने तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन, कांग्रेस के राजीव सातव, रिपुन बोरा, नासिर हुसैन, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, के.के. रागेश और माकपा के ई. करीम को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया था. इसके विरोध में सभी सांसद, गांधी प्रतिमा के पास धरने पर थे और पूरी रात संसद परिसर में गुजार दी.


 

किसान अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस का चौतरफा विरोध, तैयार की खास रणनीति

जयपुर: केंद्र सरकार के कृषि अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस का चौतरफा विरोध जारी है. अब 24 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्याल में प्रेसवार्ता रखी गई है. इस दौरान प्रदेश प्रभारी अजय माकन के साथ PCC चीफ गोविंद डोटासरा मौजूद रहेंगे. 

28 सितंबर को PCC से राजभवन तक पैदल मार्च:  
इसके साथ ही कांग्रेस 28 सितंबर को PCC से राजभवन तक पैदल मार्च भी करेगी. हालांकि धारा-144 के मद्देनजर कार्यक्रम में बदलाव भी हो सकता है. पैदल मार्च के बाद राज्यपाल को ज्ञापन दिया जाएगा. 

2 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस मनाएगी 'किसान मजदूर दिवस':
वहीं, 2 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस किसान मजदूर दिवस मनाएगी. 2 अक्टूबर को विधानसभा क्षेत्रों और जिला मुख्यालयों पर कृषि विधेयकों के खिलाफ धरने प्रदर्शन भी होंगे. 10 अक्टूबर को जयपुर सहित अन्य जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस किसान सम्मेलन आयोजित करेगी. 

सोमवार को भी जिला कलेक्टर्स को ज्ञापन सौंपे थे:
गौरतलब है कि सोमवार को भी कृषि विधेयकों के खिलाफ कांग्रेस ने प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर्स को ज्ञापन सौंपे थे. कृषि से जुड़े वर्गों की सहानुभूति बंटोरने के लिए कांग्रेस एक पखवाड़े के कार्यक्रम तय करते हुए सभी राज्य ईकाइयों को विभिन्न टास्क दिए गए हैं.
 

Rajasthan Panchayat Election: पहले चरण में 13 सरपंच और 4468 पंच चुने गये प्रत्याशी निर्विरोध

Rajasthan Panchayat Election: पहले चरण में 13 सरपंच और 4468 पंच चुने गये प्रत्याशी निर्विरोध

जयपुर: पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के पहले चरण में नाम वापसी की अवधि पूरी होने के बाद 1002 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए 5388 और पंच पदों के लिए 11890 उम्मीदवार चुनाव मैदान में बच गए हैं. पहले चरण में 13 सरपंच और 4468 पंच प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए हैं. पहले चरण के पंच सरपंच चुनाव में नाम वापसी के बाद अब तस्वीर साफ हो गई है. इसके तहत...

- पहले चरण के पंच सरपंच चुनाव में राज्य की 1002 ग्राम पंचायतों में 9042 प्रत्याशियों ने कुल 9066 नामांकन पत्र दाखिल किए. जांच के बाद 8875 नामांकन पत्र वैध पाए गए हैं.   

- इनमें से नाम वापसी के आखिरी दिन 3474 उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया.  

- अब राज्य में पंचायत चुनाव-2020 में सरपंच पद के लिए अंतिम रूप से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या 5388 रह गई है.  

- इसी तरह 1002 ग्राम पंचायतों के 9688 वार्डों के लिए 21542 उम्मीदवारों ने 21557 नामांकन पत्र दाखिल किए गए. इनमें से 20961 नामांकन पत्र वैध पाए गए.  

- 4571 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस लिए, जबकि 4468 पंचों को निर्विरोध चुन लिया गया. उन्होंने बताया कि नाम वापसी के बाद अब 11890 उम्मीदवार वार्ड पंच के लिए चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमाएंगे. 

आगे का कार्यक्रम रहेगा इस तरह: 

- इन ग्राम पंचायतों पर चुनाव कराने के लिए 27 सितंबर तक मतदान दल निर्वाचन स्थल पर पहुंच जाएंगे.  

- इन पंचायतों पर 28 सितंबर सोमवार सुबह 7.30 से सायं 5.30 बजे तक मतदान होगा.  

- मतदान समाप्ति के बाद इन पंचायत मुख्यालयों पर मतगणना करवाई जाएगी.  

- 29 सितंबर को उपसरपंच का चुनाव होगा.  

- गौरतलब है कि पहले चरण में 50 पंचायत समितियों की 1002 ग्राम पंचायतों के 4679 मतदान केंद्रों पर मतदान कराया जाएगा.  
इन पंचायतों में कुल 33 लाख 40 हजार 35 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिनमें से 17 लाख 48 हजार 670 पुरुष, 15 लाख 91 हजार 347 महिलाएं और 18 अन्य मतदाता शामिल हैं.  

राज्य निर्वाचन आयुक्त पी एस मेहरा ने प्रदेश के समस्त मतदाताओं से केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण से बचाव संबंधी सभी प्रोटोकॉल की पालना के साथ अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील की है.  
 

धरना दे रहे सांसदों को चाय पिलाने पहुंचे उपसभापति हरिवंश की पीएम मोदी ने की तारीफ, कहा- इससे खूबसूरत संदेश और क्या हो सकता है

धरना दे रहे सांसदों को चाय पिलाने पहुंचे उपसभापति हरिवंश की पीएम मोदी ने की तारीफ, कहा- इससे खूबसूरत संदेश और क्या हो सकता है

नई दिल्ली: राज्यसभा से कृषि बिल पर चर्चा के दौरान हंगामा करने पर निलंबित हो चुके आठ सांसदों से आज सुबह उपसभापति हरिवंश मुलाकात करने पहुंचे. इस दौरान हरिवंश सभी सांसदों के लिए चाय लेकर पहुंचे थे. ऐसे में अब पीएम मोदी ने भी उनके इस व्यवहार की तारीफ की है. 

बिहार सदियों से देश को लोकतंत्र की ताकत का एहसास कराते आया:
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि जिन्होंने कुछ दिन पहले उनका अपमान किया, अब हरिवंश जी उनके लिए ही चाय लेकर पहुंचे हैं. पीएम मोदी ने मंगलवार सुबह ट्वीट कर लिखा कि बिहार सदियों से देश को लोकतंत्र की ताकत का एहसास कराते आया है. आज सुबह राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश जी ने जिस तरह का व्यवहार किया है, वह लोकतंत्र के चाहने वालों को गर्व महसूस कराएगा. 

यह हरिवंश जी की उदारता और महानता को दर्शाता है:
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि हर किसी ने देखा कि दो दिन पहले लोकतंत्र के मंदिर में उनको किस प्रकार अपमानित किया गया, उन पर हमला किया गया और फिर वही लोग उनके खिलाफ धरने पर भी बैठ गए. लेकिन आपको आनंद होगा कि आज हरिवंश जी ने उन्हीं लोगों को सवेरे-सवेरे अपने घर से चाय ले जाकर पिलाई. यह हरिवंश जी की उदारता और महानता को दर्शाता है. लोकतंत्र के लिए इससे खूबसूरत संदेश और क्या हो सकता है. मैं उन्हें इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं.  

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कांग्रेस ने किया सदन के मानसून सत्र का 'बायकॉट': 
वहीं कांग्रेस ने सदन के मानसू सत्र का 'बायकॉट' कर दिया है. कांग्रेस ने MSP की मांग नहीं मानने पर संसद की कार्यवाही का बहिष्कार किया है. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सांसदों का निलंबन वापस हो, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश पर MSP की गारंटी मिले. ऐसे में मांगें माने जाने तक हम सदन से बायकॉट करेंगे.

कृषि बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने राज्यसभा में हंगामा किया था:  
बता दें कि कृषि बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने राज्यसभा में हंगामा किया था. इस दौरान कई सांसदों ने उपसभापति की टेबल पर कागज फाड़े थे, माइक तोड़ दिया था. साथ ही उपसभापति पर पक्षपात करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद एक अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया था. इसी पर एक्शन लेते हुए राज्यसभा चेयरमैन वेंकैया नायडू ने विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया था. जिसके बाद सभी सांसद सोमवार शाम से ही संसद परिसर में धरने पर बैठे हैं. सभी सांसद पूरी रात संसद परिसर के बाहर ही बैठे रहे.

राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में हस्तक्षेप करने से किया इंकार, लक्ष्मणगढ पंचायत समिति के चुनाव पर रोक लगाने की याचिका खारिज

राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में हस्तक्षेप करने से किया इंकार, लक्ष्मणगढ पंचायत समिति के चुनाव पर रोक लगाने की याचिका खारिज

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने अधिसूचना जारी होने और एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद चुनाव में किसी प्रकार से हस्तक्षेप से इंकार करते हुए अलवर की लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति के चुनाव पर रोक लगाने को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस सतीश कुमार शर्मा की एकलपीठ ने ये आदेश भरतसिंह की ओर से दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए दिये है.

दोबारा आरक्षण सूची जारी किये बिना ही चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया:
भरतसिंह की ओर से एडवोकेट प्रकाश ठकुरिया ने याचिका दायर कर अदालत को बताया कि 3 फरवरी 2020 को लक्ष्मणगढ पंचायत समिति के लिए जारी कि गयी कुछ पंचायतों को नगरपालिका लक्ष्मणगढ़ में शामिल कर लिया गया. ऐसे में लक्ष्मणगढ़ में आने वाली पंचायतों की दोबारा आरक्षण सूची जारी किये बिना ही चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है. 

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अधिसूचना जारी होने के बाद उसमें हस्तक्षेप किया जाना विधिविरूद्ध: 
याचिका में लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति के चुनाव पर रोक लगाने और नए सिरे से दोबारा आरक्षण सूची तैयार करने के बाद ही चुनाव कराने की गुहार लगायी गयी. लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने के बाद उसमें हस्तक्षेप किया जाना विधिविरूद्ध है. इस मामले में भी अधिसूचना जारी होने और 28 सितंबर को चुनाव तय होने के चलते अदालत ने याचिका को खारिज करने के आदेश दिये है. 

PCC चीफ गोविंद डोटासरा का बयान, कहा- तीनों कानून किसानों की जमीनों पर पूंजीपतियों के कब्जा करवाने का षड्यंत्र

जयपुर: भारत सरकार के कृषि विधेयकों के विरोध में पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को जिला कलेक्टर को राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया. डोटासरा के साथ परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, राजस्व मंत्री हरीश चौधरी सहित अन्य कांग्रेस नेता मौजूद रहे. इस अवसर पर पीसीसी चीफ डोटासरा ने कहा कि तीनों केंद्रीय कानूनों के खिलाफ कलेक्टर को ज्ञापन दिया. तीनों कानून किसान विरोधी है, यह किसानों की जमीनों पर पूंजीपतियों के कब्जा करवाने का षड्यंत्र हैं. सुषमा स्वराज के बयान का उल्लेख करते हुए डोटासरा ने कहा कि बीजेपी की सोच किसानों के बारे में बदल गई है. डोटासरा ने कहा कि केंद्र तीनों कानूनों को वापस ले. ये कानून बिना किसी से सलाह के लाए गए, कांग्रेस ने पहले भी विरोध किया था आगे भी विरोध करेगी. 

भारत में किसान को 15 हजार रुपए से कम सब्सिडी मिलती है:
राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की सोच शहर और कॉरपोरेट को मजबूत करने की है. भारत में किसान को 15 हजार रुपए से कम सब्सिडी मिलती है. अमेरिका में हर किसान को 44 लाख रुपए की सब्सिडी मिलती है. हम अंतिम दम तक लड़ेंगे. परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने कहा कि केंद्र सरकार तानाशाही पर उतर आई है. तीन बिलों के खिलाफ किसान सड़कों पर आ गया है. किसान किसी की गुलामी बर्दाश्त नहीं करेगा. मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने कहा कि जुल्म और आतंक के जोर पर आप बिल पास करवा सकते हैं, लेकिन आप किसान का दिल नहीं जीत सकते, मोदी सरकार तानाशाही पर उतर आई है. 

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धारा 144 का उल्लंघन नजर आया:
राज्य सरकार ने कोरोना संक्रमण के चलते राजधानी जयपुर सहित 11 जिला मुख्यालय पर धारा 144 लगा रखी है जिसमें नियमानुसार 5 से अधिक व्यक्ति एक जगह इकट्ठे नहीं हो सकते. लेकिन जयपुर कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देने के समय इसका उल्लंघन साफ नजर आया. ज्ञापन देने वालों में तीनों मंत्रियों के अलावा विधायक कृष्णा पूनिया, पुष्पेंद्र भारद्वाज, मुमताज मसीह व मनोज मुद्गल सहित अन्य कांग्रेसी नेता भी मौजूद थे. 

कृषि मंडियों में जैसे काम पहले होता था, वैसे ही अब भी होगा - PM मोदी

कृषि मंडियों में जैसे काम पहले होता था, वैसे ही अब भी होगा - PM मोदी

नई दिल्ली: बिहार को विधानसभा चुनाव से पहले सौगात मिलने का सिलसिला जारी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बिहार के सभी 45,945 गांवों को ऑप्टिकल फाइबर इंटरनेट सेवाओं से जोड़ने के प्रोजेक्ट और राजमार्गों से जुड़ी 9 परियोजनाओं का उद्घाटन किया है. इस दौरान उन्होंने कहा कि देश के गांवों में इंटरनेट उपयोग करने वालों की संख्या शहरों से ज्यादा हो जाएगी. किसान, गांव के युवा, महिलाएं आसानी से इंटरनेट का इस्तेमाल करेंगे इस पर भी लोग सवाल उठाते थे, लेकिन अब सारी स्थितियां बदल गई है.

ये सुधार 21वीं सदी के भारत की जरूरत:  
इस दौरान कृषि बिल पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कल देश की संसद ने, देश के किसानों को नए अधिकार देने वाले बहुत ही ऐतिहासिक कानूनों को पारित किया है. मैं देश के लोगों को, देश के किसानों, देश के उज्ज्वल भविष्य के आशावान लोगों को भी इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं. ये सुधार 21वीं सदी के भारत की जरूरत हैं.

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ये कानून, ये बदलाव कृषि मंडियों के खिलाफ नहीं: 
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं यहां स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि ये कानून, ये बदलाव कृषि मंडियों के खिलाफ नहीं हैं. कृषि मंडियों में जैसे काम पहले होता था, वैसे ही अब भी होगा. बल्कि ये हमारी ही एनडीए सरकार है जिसने देश की कृषि मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए निरंतर काम किया है. 

नए कृषि सुधारों ने किसान को ये आजादी दी:
उन्होंने कहा कि हमारे देश में अब तक उपज बिक्री की जो व्यवस्था चली आ रही थी, जो कानून थे, उसने किसानों के हाथ-पांव बांधे हुए थे. इन कानूनों की आड़ में देश में ऐसे ताकतवर गिरोह पैदा हो गए थे, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे. आखिर ये कब तक चलता रहता? नए कृषि सुधारों ने किसान को ये आजादी दी है कि वो किसी को भी, कहीं पर भी अपनी फसल अपनी शर्तों बेच सकता है. उसे अगर मंडी में ज्यादा लाभ मिलेगा, तो वहां अपनी फसल बेचेगा. मंडी के अलावा कहीं और से ज्यादा लाभ मिल रहा होगा, तो वहां बेचने पर भी मनाही नहीं होगी.


 

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