VIDEO: राजनीति में भाषा मर्यादित होनी चाहिए, मैंने कोई मांग आलाकमान के सामने नहीं रखी- सचिन पायलट

जयपुर: आखिर एक महीने की सियासी जंग के बाद पायलट की फिर घर वापसी हो गई. इसके बाद आज सचिन पायलट काफी लंबे वक्त बाद मीडिया से रूबरू हुए. इस दौरान उन्होंने कहा कि राजनीति में भाषा मर्यादित होनी चाहिए. हमने जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया है हर नेता और हर समाज को साथ लेकर काम किया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैंने आलाकमान के सामने कोई मांग नहीं रखी. मैंने आलाकमान के ऊपर सारा फैसला छोड़ दिया है. हाईकमान ने हमारी बातों को गंभीरता से सुना है. समस्याओं के निराकरण के लिए 3 सदस्यीय कमेटी बनाई है.

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कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान को लेकर इश्यू था:  
पायलट ने कहा कि जिसका सरकार बनाने में योगदान हो उसे सम्मान मिलना चाहिए. मैंने गहलोत जी के साथ मिलकर संघर्ष किया है. इसके साथ ही उन्होंने ने कहा कि झूठ फैलाने वालों को सच्चाई का सामना करना पड़ेगा. सचिन पायलट ने कहा कि कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान को लेकर इश्यू था. मुझे सौभाग्य मिला कि 6 साल तक कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष रहा. जब हमारी सरकार नहीं थी तब हमने 5 साल तक लगातार मेहनत की. धरने, भूख हड़ताल कर हमने जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए. 2018 में कड़ी मेहनत के कारण 21 से बढ़कर 100 तक सीटें पहुंची है. लेकिन डेढ़ साल में उस गति से काम नहीं कर पाए. 

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जब-जब पार्टी ने मुझे दायित्व दिया है मैंने निष्ठा के साथ निभाया:
उन्होंने कहा कि हमने सबको साथ लेकर काम किया है. कठिन परिस्थितियों में किसानों और युवाओं को साथ में लेकर मेहनत की. समयबद्ध तरीके से सभी इश्यू का निराकरण किया जाएगा. मैंने कभी भी किसी के लिए अमार्यादित भाषा का इस्तेमाल नहीं किया. अशोक गहलोत जी मेरे से उम्र में बड़े है लेकिन जिस तरह टीका टिपण्णी हुई उससे मुझे भी दुख हुआ है. जिस तरह के आरोप लगाए है वो सच आपके सामने है. पायलट ने कहा कि सत्ता और संगठन को मिलकर काम करना चाहिए. मुझे दुख है कि देशद्रोह का नोटिस भेजा गया, ACB, SOG की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी. लेकिन पार्टी आलाकमान ने हमारी बातों को सुना है. जब-जब पार्टी ने मुझे दायित्व दिया है मैंने निष्ठा के साथ निभाया है. दूसरे दल क्या करते है क्या नहीं वो जाने. मैंने पार्टी विचारधारा और पार्टी के खिलाफ कोई बात नहीं बोली. 


 

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