VIDEO: समलेटी बम कांड के मास्टर माइंड अब्दुल हमीद की फांसी की सजा बरकरार, 6 आरोपी बरी 

Nizam Kantaliya Published Date 2019/07/22 07:33

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने समलेटी बम कांड के मास्टर माइंड और जेकेआईएफ आतंकी संगठन के खूंखार आतंकी डा. अब्दुल हमीद की फांसी की सजा को बरकरार रखा है. आतंकी हमीद के साथी आरोपी पप्पू उर्फ सलीम की आजीवन उम्रकैद की सजा को भी बहाल रखा गया है. वहीं इस मामले के 6  आरोपियों की आजीवन उम्रकैद की सजा को रद्द करते हुए बरी कर दिया है. जस्टिस सबीना और जस्टिस गोवर्धन बारधार की खण्डपीठ ने राज्य सरकार और आरोपियों की अपीलो पर सुनवाई करते हुए ये फैसला दिया है. 

सिधीं कैंप बस स्टैण्ड को विस्फोट से उड़ाने की थी साजिश:
गौरतलब है कि अपर जिला एवं सेशन न्यायालय बांदीकुई ने 29 सितंबर 2014 को आतंकी डा. अब्दुल हमीद को फांसी की सजा सुनाई थी. राजस्थान हाईकोर्ट ने बांदीकुई एडीजे कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए खूखांर आतंकी डॉ अब्दुल हमीद को फांसी की सजा बरकरार रखी है. आतंकी हमीद ने 22 मई 1996 को आगरा से बीकानेर आ रही राजस्थान रोडवेज की बस में बम विस्फोट कर जयपुर के सिधीं कैंप बस स्टैण्ड को उड़ाना चाहता था, लेकिन बस खराब हो जाने के चलते निर्धारित समय पर जयपुर नहीं पहुंच पाई. जिससे दौसा और महुआ के बीच ही बम विस्फोट हो गया. इस विस्फोट में 14 लोगों की दर्दनाक मौत हुई और 39 लोग घायल हो गये थे. आतंक के पर्याय डॉ हमीद को लेकर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अब्दुल हमीद की इस विस्फोट में मुख्य भूमिका थी. आतंकी ने बम विस्फोट कर देश में आतंक फैलाया है, इसलिए उसे फांसी दी जानी चाहिए. 

22 मई 1996 से अब तक क्या-क्या हुआ:
—सीआईडी ने किया था 11 आरोपियो के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल
—जेकेआईएफ के 10 आतंकियो के नाम थे आरोप पत्र में शामिल 
—कुलविन्द्रजीत सिंह और चन्द्रप्रकाश को एडीजे कोर्ट ने किया था बरी
—ट्रायल के दौरान ही आरोपी रियाज अहमद शेख की हो चुकी है मौत
—मौत होने के चलते 24 अगस्त 1999 को कार्यवाही कि गयी ड्रॉप 
—एडीजे कोर्ट ने 29 सितंबर 2014 को सुनाया था मामले में फैसला
—एडीजे कोर्ट 1 को फांसी 6 आतंकियो को सुनाई थी उम्रकैद की सजा
—जावेद खान उर्फ जावेद जूनियर, अब्दुल गनी उर्फ असादुल्लाह 
—लतीफ अहमद बाजा उर्फ निसार, मोहम्मद अली भट्ट उर्फ महमूद किले
—मिर्जा निसार हुसैन और रहीश बेग को सुनायी थी उम्रकैद की सजा 
—समलिटी बम काण्ड में कुल 7 आरोपियो को सुनायी गयी थी मामले में सजा 
—बाद में एडीजे कोर्ट ने 7 मार्च 2017 को पप्पू को भी सुनायी आजीवन उम्रकैद
—आरोप पत्र में पप्पू उर्फ सलीम बन गया था मामले में सरकारी गवाह 
—लेकिन 25 जुलाई 2014 को अपने ही बयानो से मुकर गया था पप्पू
—19 सितंबर 2014 को मामले में पप्पू के खिलाफ भी दर्ज हुआ मामला

करीब 22 साल से जेल में बंद 6 आरोपी रिहा:
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले के अन्य आरोपियो में से पप्पू उर्फ सलीम की सजा को बरकरार रखा है, लेकिन इसमें 6 आरोपियों की आजीवन उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट ने जावेद खान उर्फ जावेद जूनियर, अब्दुल गनी उर्फ असादुल्लाह, लतीफ अहमद बाजा उर्फ निसार, मोहम्मद अली भट्ट उर्फ महमूद किले, मिर्जा निसार हुसैन और रहीश बेग के खिलाफ सबूतों का अभाव मानते हुए उन्हें बरी करने के आदेश दिये हैं. हाईकोर्ट ने इन आरोपियों के खिलाफ कोई अन्य केस नहीं होने पर 25—25 हजार के जमानत मुचलकों पर रिहा करने को कहा है. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद करीब 22 साल से जेल में बंद ये 6 आरोपी रिहा होंगे. वहीं राज्य सरकार इस फैसले का अध्ययन करने के बाद अपील करने का फैसला कर सकती है. 

अधिवक्ताओं सुरक्षा के चलते सुनवाई से किया था इंकार:
समलिटी बम काण्ड से राजस्थान के साथ ही पुरा देश हिल गया था. इस मामले की सुनवाई के दौरान भी कई सरकारी अधिवक्ताओं ने सुरक्षा के चलते सुनवाई से इंकार कर दिया था. जिसके चलते करीब आधा दर्जन सरकारी अधिवक्ताओं को पुलिस तक मुहैया कराई गई थी. बाद में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अधिवक्ता पैरवी करने के लिए हायर किये थे. सरकार के लिए ये फैसला एक बड़े झटके की तरह है, क्योंकि जिन आरोपियों की फांसी की सजा की मांग कि थी हाईकोर्ट उनकी आजीवन उम्रकैद की सजा को भी रद्द कर दिया है.

... संवाददाता निजाम कण्टालिया की रिपोर्ट 

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