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भाजपा वोट बैंक के लिए नही जनभावना में करती है काम - सतीश पुनिया

भाजपा वोट बैंक के लिए नही जनभावना में करती है काम - सतीश पुनिया

कोटा। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और विधायक सतीश पुनिया आज कोटा दौरे पर रहे। कोटा सर्किट हाउस पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुनिया का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान भाजपा विधायक मदन दिलावर,संदीप शर्मा,भाजपा जिलाध्यक्ष हेमंत विजय सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। सर्किट हाउस में पत्रकारो से बातचीत करते हुए पुनिया ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा औऱ केंद्र की मोदी सरकार का गुणगान किया। 

पुनिया ने कहा कि भाजपा वोट बैंक के लिए नही जनभावना के लिए काम करती है। स्वर्णो को 10 फीसदी आरक्षण को उन्होने ऐतिहासिक फैसला बताया तो कांग्रेस पर किसानो को कर्जमाफी,महाराणा प्रताप और अकबर में से महान कौन के सवाल पर भी पर जमकर कटाक्ष किए। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के बारे में पुछे गए सवाल पर पुनिया ने पर्यवेक्षको द्वारा 15 जनवरी से पहले नाम की तय होने की बात कही। 
पुनिया ने अंदेशा जताया कि कांग्रेस वोट बैंक के लिए शौर्य गाथाओ को पाठ्यक्रमो से हटाने,जनकल्याणकारी योजना को बंद करने के साथ जनहित के फैसलो पर रोक लगाने जैसे फैसले लेगी जिसका सड़क से लेकर सदन तक विरोध किया जाएगा। लोकसभा चुनाव को लेकर पुनिया ने कहा कि 50 साल तक देश में राज करने वाली कांग्रेस पार्टी की पोल अब खुल चुकी है और एक बार फिर जनता मोदी पर भरोसा जताएगी। 

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राज्यसभा चुनाव के बाद परवान चढ़ती आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स, अब मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का आरोप

राज्यसभा चुनाव के बाद परवान चढ़ती आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स, अब मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का आरोप

जयपुर: राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के बाद भी आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स परवान चढ़ती नजर आ रही है. अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ भाजपा विधायक अशोक लाहोटी, सुभाष पूनिया, रामलाल शर्मा और निर्मल कुमावत ने विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया है. विधायकों ने इसको लेकर विधानसभा सचिव को पत्र सौंपा है. इस पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के भी हस्ताक्षर है. 

जयपुर: मुख्यमंत्री निवास को बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस कंट्रोल रूम में आया फोन 

मुख्यमंत्री के 35 करोड़ वाले बयान को किया गया कोट: 
ऐसे में अब आखिर विशेषाधिकार हनन बनता है या नहीं इस पर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को फैसला करना है. आरोप में मुख्यमंत्री के 35 करोड़ वाले बयान को कोट किया गया है. इस बारे में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कटारिया के कक्ष में एक बड़ी बैठक भी हुई है. 

संयम लोढ़ा ने सतीश पूनिया पर लगाया था विशेषाधिकार हनन का आरोप:
वहीं इससे पहले निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने भी बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया पर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया. लोढ़ा ने शिकायत में कहा है कि, सतीश पूनिया ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस की बाड़ेबंदी के दौरान 23 विधायकों को वोट के बदले खान, रिको प्लॉट देने और कैश ट्रांजैक्शन से लाभान्वित किया गया है.

21 जून को विधानसभा में दी थी शिकायत:
दरअसल, कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय संयम लोढ़ा ने पूनिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत 21 जून को विधानसभा में दी थी. विधानसभा सचिवालय ने अध्यक्ष के समक्ष फाइल पुटअप किया था. ऐसे में अब दोनों ही मामलों में विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को फैसला करना है. 

क्या है विशेषाधिकार हनन?
देश में विधानसभा, विधानपरिषद और संसद के सदस्यों के पास कुछ विशेष अधिकार होते हैं, ताकि वे प्रभावी ढंग से अपने कर्तव्यों को पूरा कर सके. जब सदन में इन विशेषाधिकारों का हनन होता है या इन अधिकारों के खिलाफ कोई कार्य किया जाता है, तो उसे विशेषाधिकार हनन कहते हैं. इसकी स्पीकर को की गई लिखित शिकायत को विशेषाधिकार हनन नोटिस कहते हैं.

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कैसे लाया जा सकता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव?
नोटिस के आधार पर स्पीकर की मंजूरी से सदन में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जा सकता है. विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव संसद के किसी सदस्य द्वारा पेश किया जाता है, जब उसे लगता है कि सदन में झूठे तथ्य पेश करके सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया गया है या किया जा रहा है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए सुनिल शर्मा रिपोर्ट

अखिलेश, प्रियंका, दिग्विजय और सुरजेवाला ने उठाए विकास दुबे के एनकाउंटर पर सवाल, जमकर साधा निशाना

अखिलेश, प्रियंका, दिग्विजय और सुरजेवाला ने उठाए विकास दुबे के एनकाउंटर पर सवाल, जमकर साधा निशाना

लखनऊ: विकास दुबे के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद विपक्ष की ओर से लगातार एक के बाद एक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है. सबसे पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इसको लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज़ खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है. 

वहीं विकास दुबे के मारे जाने की खबर के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं. प्रियंका ने ट्वीट कर कहा कि अपराधी का अंत हो गया, अपराध और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों का क्या?

इसके साथ ही कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिसका शक था वह हो गया. विकास दुबे का किन किन राजनैतिक लोगों से, पुलिस व अन्य शासकीय अधिकारियों से उसका संपर्क था, अब उजागर नहीं हो पाएगा. पिछले 3-4 दिनों में विकास दुबे के 2 अन्य साथियों का भी एनकाउंटर हुआ है लेकिन तीनों एनकाउंटर का पैटर्न एक समान क्यों है?

विकास दुबे के मारे जाने की खबर के बाद ऱणदीप सुरजेवाला ने कहा कि विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया. कई लोगों ने पहले ही ये आशंका जताई थी. पर अनेकों सवाल छूट गए. उन्होंने पूछा- अगर उसे भागना ही था, तो उज्जैन में सरेंडर ही क्यों किया? उस अपराधी के पास क्या राज थे जो सत्ता-शासन से गठजोड़ को उजागर करते? पिछले 10 दिनों की कॉल डिटेल्ज़ जारी क्यों नहीं?

दूसरी ओर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कल जब विकास को जिंदा पकड़ा गया तो भी विपक्ष सवाल उठा रहा था आज जब मारा गया तब भी विपक्ष सवाल उठा रहा है.

विकास दुबे एनकाउंटर को लेकर अखिलेश यादव ने कसा तंज, कहा- कार नहीं पलटी, सरकार पलटने से बचाई गयी

विकास दुबे एनकाउंटर को लेकर अखिलेश यादव ने कसा तंज, कहा- कार नहीं पलटी, सरकार पलटने से बचाई गयी

लखनऊ: आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मास्टरमाइंड विकास दुबे का एनकाउंटर में अंत हो गया है. विकास दुबे का एनकाउंटर होते ही अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आना शुरू हो गई है. सबसे पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इसको लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज़ खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है. 

विकास दुबे ने की थी पुलिसकर्मी की पिस्‍टल छीनने की कोशिश, पुलिस वैन पलटी और फिर खेल खत्म 

गिरफ्तारी पर खड़े किए थे सवाल: 
इससे पहले भी अखिलेश यादव ने गुरुवार को विकास दुबे की गिरफ्तारी पर सवाल खड़े किए थे. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा था कि ख़बर आ रही है कि ‘कानपुर-काण्ड’ का मुख्य अपराधी पुलिस की हिरासत में है. अगर ये सच है तो सरकार साफ़ करे कि ये आत्मसमर्पण है या गिरफ़्तारी. साथ ही उसके मोबाइल की CDR सार्वजनिक करे जिससे सच्ची मिलीभगत का भंडाफोड़ हो सके.

कांग्रेस का 'मिशन पंचायत '! अदालती आदेशों के बाद पायलट कैंप सक्रिय 

विकास दुबे ने पुलिस के एक जवान से हथियार छिनने का किया प्रयास: 
बता दें कि आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मास्टरमाइंड विकास दुबे का एनकाउंटर में अंत हो गया है. विकास को कमर में गोली लगी है जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. एनकाउंटर में STF के दो जवान भी घायल हुए हैं. दरअसल, कानपुर आते ही पुलिस के गाड़ी रास्ते में पलट गई. इसी दौरान विकास दुबे ने पुलिस के एक जवान से हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसे 3 गोलियां लगीं. 


 

कांग्रेस का 'मिशन पंचायत '! अदालती आदेशों के बाद पायलट कैंप सक्रिय

कांग्रेस का 'मिशन पंचायत '! अदालती आदेशों के बाद पायलट कैंप सक्रिय

जयपुर: पंचायत चुनावों को लेकर अदालती आदेश ने कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को उफान पर ला दिया है. पहले से ही पंचायत चुनाव समय पर कराने की सोच रखने वाले डिप्टी सी एम और पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने सक्रियता बढ़ा दी है, वे ग्रामीण विकास और पंचायती राज महकमे के मंत्री भी है. गांव की राजनीति करने की पसंद रखने वाले पायलट की शायद ये सोच है कि उनके प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहते हुये पंचायत चुनाव भी हो जाये. 

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कांग्रेस के अंदर की सियासत को उफान पर:
अक्टूबर तक पंचायत चुनाव कराये जाने के सर्वोच्च अदालत के फरमान ने राज्य की कांग्रेस के अंदर की सियासत को उफान पर ला दिया. डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट पक्ष धर रहे है पंचायत चुनाव सही वक्त पर कराने के लेकिन कोविड के कारण ऐसा नहीं हो पाया था. जाहिर है पायलट कैम्प की सोच है कि पीसीसी अध्यक्ष पद पर काबिज रहते हुये पंचायत ओर निकाय दोनों चुनाव संपन्न हो जाये.

कांग्रेस के लिये यह सदैव पसंदीदा चुनाव कहे जाते रहे: 
सरपंच, पंच, पटेल, प्रधान और प्रमुख.. कांग्रेस के लिये यह सदैव पसंदीदा चुनाव कहे जाते रहे है. कांग्रेस पार्टी इन चुनावों को दमखम से साथ लड़ती है. पहला टारगेट होता है विचारधारा आधारित सरपंच और फिर प्रधान और जिला प्रमुख जीते. गांव और किसान की सियासत पर सदैव कांग्रेस का फोकस रहा है. पायलट कैम्प चाहता है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी जल्द ही पंचायतीराज चुनाव को लेकर जिला और पंचायत स्तर पर चुनाव पर्यवेक्षक या प्रभारी की नियुक्ति करेगी. सचिन पायलट कैम्प की गणित .

--- समय पर पंचायत चुनाव हो जाये 
---प्रदेश कांग्रेस की कमान सचिन पायलट के हाथों में रहे
---संगठन चीफ होने से टिकट वितरण में पूरा दखल रहे
----पंचायत चुनाव में जीत का क्रेडिट खाते में आये 
---समर्थक प्रमुख और प्रधान बनाने में मिले कामयाबी
--स्व जातीय वोटों का साथ मिलने का भरोसा 

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गहलोत सरकार में सचिन पायलट के पास ग्रामीण विकास और पंचायती राज महकमा है. पसंद के मुताबिक पायलट ने ये महकमा चुना था जिससे ग्रामीण राजनीति में धाक कायम रहे. जाहिर है सत्ता में होने के कारण और ग्रामीण इलाकों में पकड़ के कारण पंचायत चुनावों में कांग्रेस को बड़ी जीत मिल सकती है.  लिहाजा है जंग है इस विजय का श्रेय लेने की. सब कुछ टिका है पीसीसी के नये भविष्य पर.

... फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

VIDEO: नवाचारों में जुटे विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी, सालों बाद विधानसभा कार्मिकों को मिली सौगात

जयपुर: विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी नवाचारों में जुटे है. उन कामों को कर रहे जो वर्षों से नहीं हुये इन्हीं में से एक रहा विधानसभा के कार्मिकों की डीपीसी के जरिये प्रमोशन किया जाना, इनमें कुछ ऐसे रहे जिन्हें 30 सालों बाद सौगात मिली. नवाचारों की कड़ी में डॉ सीपी जोशी ने विधायकों को online प्रश्न लगाने की बड़ी पहल की है. 

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स्पीकर पद संभालने के बाद डॉ सीपी जोशी ने विधानसभा की कार्यप्रणाली में आमूल चूल परिवर्तन किये और कीर्तिमान बनाये. सबसे पहले उस पहल के बारे में बताते है जो जुड़ी विधानसभा के कार्मिकों से, बरसों बाद कार्मिकों की डीपीसी हुई और बरसों से एक सीट पर बैठे कार्मिकों के हुये तबादलें. 

विधानसभा में सालों से अटके पड़े कार्मिकों के तबादले किये:  

- ऐसे कार्मिक भी जो 30 सालों से एक ही सीट पर बैठे थे 

- 82 कार्मिकों के तबादलें किये गये

- वहीं 42 कार्मिकों की डीपीसी करके प्रमोशन किया गया

- विधानसभा सचिवालय ने कार्मिकों के हित में फैसले लिये 

विधानसभा स्पीकर डॉ सीपी जोशी ने ऑनलाइन पर्ची सिस्टम के बाद ऑनलाइन प्रश्न लगाने की सुविधा विधायकों को दी है. ये सुविधा अभी से चालू हो गई है. विधानसभा सचिव प्रमिल कुमार माथुर के निर्देशों पर विधानसभा को अत्याधुनिक बनाने से जुडी सेल काम कर रही है. 

विधानसभा की पहल: 

- Online प्रश्न लगा सकते है विधायक

- इंटर सेशन में भी सवाल लगा सकते है

- मेम्बर्स लॉग इन करना होगा

- फिर प्रश्न टाइप करके देने होंगे 

- मोबाइल नम्बर पर वेरिफिकेशन के लिये ओटीपी आयेगा

- विधायक को विस आकर सवाल लगाने की जरुरत नहीं पड़ेगी

- वे अपने घर बैठे ही सवाल लगा सकता है

- इंटर सेशन में सात दिन में एक सवाल दे सकते है

- पर्ची ऑनलाइन सिस्टम पहले ही चालू कर दिया था 

विकास दुबे के दो और साथियों का एनकाउंटर, कानपुर में प्रभात तो इटावा में रणबीर ढेर 

अब डॉ सीपी जोशी का ड्रीम प्रोजेक्ट है विधायकों के लिये बनने वाला बहुमंजिला अपार्टमेंट. इमारत खड़ी होने में समय लगेगा लेकिन नींव डॉ सीपी जोशी के कार्यकाल में रख दी जाएगी.

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट

राजीव गांधी फाउंडेशन मामले में बोले राहुल, कहा- सच्चाई के लिए लड़ने वालों की कोई कीमत नहीं होती

राजीव गांधी फाउंडेशन मामले में बोले राहुल, कहा- सच्चाई के लिए लड़ने वालों की कोई कीमत नहीं होती

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन सहित नेहरू-गांधी परिवार से संबंधित तीन ट्रस्ट की जांच के लिए एक कमेटी बनाई है. यह कमेटी इन फाउंडेशन की फंडिंग और इनके द्वारा किए गए उल्लंघनों की जांच करेगी. वहीं कांग्रेस ने इसे डराने वाली कार्रवाई बताया है. 

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मोदी को लगता है कि सारी दुनिया उनके जैसी: 
कांग्रेस सांसद और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसको लेकर ट्वीट करते हुए कहा कि मिस्टर मोदी को लगता है कि सारी दुनिया उनके जैसी है. वो सोचते हैं कि हर किसी की कोई कीमत होती है या हर किसी को डराया जा सकता है. वो ये कभी नहीं समझेंगे कि जो सच्चाई के लिए लड़ते हैं उनकी कोई कीमत नहीं होती है और उन्हों डराया नहीं जा सकता है. 

गहलोत ने राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताया: 
वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बताया है. उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार पीएम केयर फंड में पारदर्शिता की आवश्यकता का मुद्दा पचा नहीं पाई. तीनों ट्रस्टों के खिलाफ कार्रवाई इसका प्रत्यक्ष परिणाम है. इसके साथ ही सीएम गहलोत ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को चुप कराने और विपक्षी नेताओं को राष्ट्रीय हित के मुद्दों को उठाने से रोकने के लिए यह रणनीति बनाई गई है. 

अभिमानी रवैये के कारण सरकार ने आर्थिक संकट पर ध्यान नहीं दिया: 
मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ने NDA की गलत नीतियों के कारण गहरे आर्थिक संकट के बारे में चेतावनी दी थी और अब हम दुर्भाग्य से वहीं देख रहे हैं. सोनिया गांधी, डॉ मनमोहन सिंह और राहुल जी ने पिछले महीनों में आम लोगों, MSMEs, उद्यमों और बैंकों के सामने आने वाली कठिनाइयों को उठाया. कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई सुझावों की पेशकश की लेकिन सरकार ने उनके अभिमानी रवैये के कारण कोई ध्यान नहीं दिया. 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालय कमेटी का गठन किया: 
वहीं इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट कर जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्रालय कमेटी का गठन किया है, जो कि राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की जांच करेगी. इस जांच में इनकम टैक्स एक्ट, PMLA एक्ट और FCRA एक्ट के नियमों के उल्लंघन के बारे में जांच की जाएगी. 

मुख्यमंत्री गहलोत की राज्यपाल से मुलाकात ने बढ़ाई राजनीति की धड़कनें, मंत्रिमंडल फेरबदल की सुगबुगाहट तेज ! 

यह है पूरा विवाद: 
भारत और चीन के बीच जारी विवाद के चलते कांग्रेस पार्टी लगातार केंद्र सरकार पर हमला बोल रही है तो बीजेपी ने इसके उलट कांग्रेस को ही घेर लिया. बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से आरोल लगाया गया कि राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन से फंडिंग मलिती थी. इसके साथ ही देश के लिए प्रधानमंत्रा राहत कोष बनाया गया था, उससे भी यूपीए सरकार ने पैसा राजीव गांधी फाउंडेशन को दिया था. बीजेपी का आरोप है कि 2005-08 तक PMNRF की ओर से राजीव गांधी फाउंडेशन को यह राशि मिली थी. 

मुख्यमंत्री गहलोत की राज्यपाल से मुलाकात ने बढ़ाई राजनीति की धड़कनें, मंत्रिमंडल फेरबदल की सुगबुगाहट तेज !

मुख्यमंत्री गहलोत की राज्यपाल से मुलाकात ने बढ़ाई राजनीति की धड़कनें, मंत्रिमंडल फेरबदल की सुगबुगाहट तेज !

जयपुर: राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल को लेकर एक बार चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसकी वजह आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात मानी जा रही है. हालांकि इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है. लेकिन राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़कर देख रहे हैं. सीएम गहलोत के राजभवन पहुंचते ही चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. विधायक एक-दूसरे को फोन करने लगे हैं. इसके साथ ही सीएम की राजभवन यात्रा के कारण पूछे जा रहे हैं. लेकिन फिलहाल सीएम गहलोत व राज्यपाल कलराज मिश्र को ही इस बारे में जानकारी है. 

VIDEO: अजमेर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में सत्ता का रुतबा!...दादागिरी के साथ पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय 

राजभवन आने से पहले 4 मंत्री मिले मुख्यमंत्री से: 
मुख्यमंत्री गहलोत के राजभवन आने से पहले 4 मंत्री मुख्यमंत्री से मिले थे. आंजना, जाटव, जूली व प्रताप सिंह ने सीएम से मुलाकात की. उसके बाद सीएम की राज्यपाल से मुलाकात होने पर चर्चाओं को बल मिल गया है. ऐसे में संभवतया जल्द ही मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है. मुख्यमंत्री व राज्यपाल की मुलाकात के बाद संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर कई मंत्रियों व विधायकों की धड़कनें बढ़ गई है. हालांकि फिलहाल इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है. लेकिन शाम तक ही मुलाकात की स्थिति साफ हो पाएगी. वहीं राजनीतिक नियुक्तियों व कुलपति नियुक्ति को लेकर चर्चा होने की भी संभावना जताई जा रही है. 

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किसी भी समय मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल संभव:
यह बिल्कुल साफ है कि प्रदेश में अब किसी भी वक्त कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियों के तोहफे के साथ मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल हो सकता है. उसके मद्देनजर यह देखना दिलचस्प होगा कि सीएम गहलोत की राज्यपाल से मुलाकात के क्या मायने सामने आते हैं? लेकिन इसके लिए फिलहाल आधिकारिक बयान सामने आने तक इंतजार करना होगा. 


 

VIDEO: अजमेर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में सत्ता का रुतबा!...दादागिरी के साथ पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय

अजमेर: शहर कांग्रेस ओर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा आज जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर दादागिरी दिखाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया. अजमेर दक्षिण के कांग्रेस नेता हेमंत भाटी के नेतृत्व में कार्यकर्ता जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपना मांग पत्र देने की मांग रखी जिस पर पुलिस ने कुछ ही कार्यकर्ताओं को कार्यालय पर जाने की अनुमति दी, लेकिन कांग्रेसी कार्यकर्ता अपनी सत्ता का रुतबा दिखाते हुए शिक्षा अधिकारी के कक्ष में जाकर वहां पर खड़े होकर के नारेबाजी करने लगे. 

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मेरी रिकॉर्डिंग कर लो मैं डरता नहीं:  
वहीं उसी समय शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर एलडीसी भर्ती की काउंसलिंग भी चल रही थी लेकिन सत्ता के घमंड में चूर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को वह बच्चे नहीं दिखाई दिए और उनकी नारेबाजी लगातार जारी रही. हद तो तब पार हो गई जब यूथ कांग्रेस शहर अध्यक्ष यासीन चिश्ती ने जिला शिक्षा अधिकारी देवी सिंह कच्छावा को खुले में धमकी दे डाली और कुछ अपशब्द तक कह डाले. उन्होंने यह भी कहा कि मेरी रिकॉर्डिंग कर लो मैं डरता नहीं उन्होंने सत्ता का रोब झाड़ते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार है और हमारे ही आदमियों को नियुक्ति दी जाएगी. 

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पुलिस ने सभी कार्यकर्ताओं को कक्ष से बाहर निकाला:
मामला बढ़ता देख मौके पर पुलिस पहुंची और पुलिस ने सभी कार्यकर्ताओं को कक्ष से बाहर निकाला. साथ ही शिक्षा अधिकारी से जब बात की तो उन्होंने कहा कि इस तरह से कार्यकर्ताओं का कक्षा में आ कर नारेबाजी करन गलत है और राजकार्य में बाधा का काम किया है. वहीं पुलिस भी मौके पर थी और उनके सामने ही यह सब कृत्य किए गए है. लेकिन एक यूथ कांग्रेस के पदाधिकारी को इस तरह से खुल्ले में एक अधिकारी को धमकी देना कितना शोभा देता है यह वह ही जान सकता है. देखना यह होगा को अब इस मामले पर आगे क्या कार्यवाही की जाती है. 

...अजमेर से फर्स्ट इंडिया के लिए शुभम जैन की रिपोर्ट

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