टाइगर के हमले से बकरी पालक की मौत, वन विभाग की मॉनिटरिंग पर किए कई सवाल खड़े?

टाइगर के हमले से बकरी पालक की मौत, वन विभाग की मॉनिटरिंग पर किए कई सवाल खड़े?

टाइगर के हमले से बकरी पालक की मौत, वन विभाग की मॉनिटरिंग पर किए कई सवाल खड़े?

जयपुर: रणथंभौर से बाहर निकल कालेटी के बीहड़ों में बाघ के हमले में पप्पू गुर्जर की मौत ने वन विभाग की मॉनिटरिंग पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. इसके साथ ही एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या ट्रेकर्स को सुविधा संपन्न किया जाना चाहिए, उन्हें अत्याधुनिक उपकरण दिए जाएं, कम्युनिकेशन के बेहतर साधन उपलब्ध कराए जाएं. कालेटी में हुई घटना विभाग के लिए सबक है, टाइगर का मूवमेंट दो दिन से बनास की कराइयों, बांगड़दा कलां, कालेटी, बिचपुरी गाँव के आसपास जंगल एवं खेतों के पास होते हुए भी गांव में चेतावनी स्वरूप मुनादी नहीं की गई. कई चरवाहों को स्वयं ट्रैकर्स नें जंगल से बाहर भगाया लेकिन पप्पू गुर्जर तक वन विभाग अपनी आवाज़ नहीं पहुंचा पाया. टाइगर नें चरवाहे पर अटैक कर उसे वहीँ छोड़ दिया और जब उसकी बकरियां इधर उधर भटकने लगीं तो अन्य चरवाहों नें सूचना दी इसपर जान का खतरा होते  हुए भी पप्पू गुर्जर की लाश खोजकर ट्रैकर्स नें ग्रामीणों को उपलब्ध करवाई.

टाइगर ट्रैकर्स, ग्रामीणों एवं टाइगर तीनों के लिए बेहद घातक साबित:
विभाग की ऐसी लापरवाहीयां टाइगर ट्रैकर्स, ग्रामीणों एवं टाइगर तीनों के लिए बेहद घातक साबित हो रही हैं. एक दो एनजीओ की मोनोपोली भी खत्म हो ज्यादा लोगों को जोड़ कर हम टाइगर को भी बचा सकते हैं और इंसानों को भी. हालांकि पूरे मामले में फर्स्ट इंडिया न्यूज़ पर खबर प्रसारित होने के बाद खुद विभाग की प्रमुख सचिव श्रेया गुहा ने चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन के जरिए टाइगर रिजर्व प्रबंधन को मौके पर भेजने के निर्देश दिए. इसके बाद चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन मोहन लाल मीणा ने पूरी घटना की जानकारी ली और लापरवाही बरतने पर टाइगर रिजर्व प्रबंधन को लताड़ भी लगाई. इधर वन्यजीव विशेषज्ञ अनिल रोज़र्स नें बताया कि ये एक दुखद घटना है, मृतक के परिजनों को तुरंत मुआवजा देना चाहिए एवं मांग की है कि प्राइवेट ट्रैकर्स को बजट अलॉट करने के साथ आवश्यक सुरक्षा एवं ट्रैकिंग उपकरण जल्द से जल्द उपलब्ध करवाए जाने चाहिए. जिससे टाइगर का मूवमेंट जल्दी ट्रेस हो सके और ग्रामीणों को सचेत किया जा सके.

अवैध रूप से चराई अथवा अवैध गतिविधियों में लिप्त:
टाइगर का मूवमेंट बाहर होते ही तुरंत प्रभाव से सम्बंधित गावों में चेतावनी स्वरूप मुनादी करवाई जानी चाहिए. वहीं जो लोग जंगल में अवैध रूप से चराई अथवा अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं उनपर कठोर से कठोर काईवाई की जानी चाहिए. रोज़र्स नें कहा कि हम एक भी अनुभवी टाइगर ट्रैकर को खोने का खतरा नहीं उठा सकते. एक टाइगर ट्रैकर के साथ हादसे का मतलब है टाइगर पर भी खतरा बढ़ना. सरकार को कमसे कम अब तो टाइगर ट्रैकर्स की सुध लेनी चाहिए. वहीं 1st इंडिया की खबर के बाद कुछ एनजीओ भी  ट्रैकर्स की मदद के लिए सामने आए हैं, लेकिन सरकार को भी अब टाइगर ट्रैकर्स की मदद के लिए सामने आना होगा.

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