जयपुर Sawan Shivratri 2021: सावन की शिवरात्रि होती है अति विशेष, इस बार सर्वार्थसिद्धि योग में होगी चार प्रहर शिव पूजा

Sawan Shivratri 2021: सावन की शिवरात्रि होती है अति विशेष, इस बार सर्वार्थसिद्धि योग में होगी चार प्रहर शिव पूजा

Sawan Shivratri 2021: सावन की शिवरात्रि होती है अति विशेष, इस बार सर्वार्थसिद्धि योग में होगी चार प्रहर शिव पूजा

जयपुर: इस समय सावन का पावन माह चल रहा है. यह माह भोलेनाथ को समर्पित होता है. इस माह में विधि-विधान से भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की जाती है. हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. सावन के माह में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि का महत्व बहुत अधिक होता है. शुक्रवार 6 अगस्त को सावन महीने का शिवरात्रि पर्व रहेगा. इस दिन शिव पूजा का विशेष फल मिलता है. ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि पूजा के लिए पूरा दिन शुभ रहेगा लेकिन शिवरात्रि होने के कारण सूर्यास्त के बाद 4 प्रहर में पूजा की परंपरा है. यानी पूरी रात हर 3 घंटे में पूजा की जाएगी. 

सावन शिवरात्रि पर सर्वार्थसिद्धि नाम का शुभ योग भी बन रहा है जो सूर्योदय से शुरू होगा और पूरे दिन-रात रहेगा. इस शुभ योग में की गई पूजा और भी फलदायी होगी. साथ ही दिनभर में नए कामों की शुरुआत और खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त रहेंगे. हर महीने कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि होती है. इस तरह साल में 12 बार ये पर्व मनाया जाता है. लेकिन फाल्गुन और सावन महीने में आने वाली शिवरात्रि पर भोलेनाथ की विशेष पूजा और व्रत की परंपरा है. सनातन मान्यता है कि शिवरात्रि, रात की आराधना का पर्व है. इसलिए इसमें पूरी रात शिवलिंग का अभिषेक और विशेष पूजन होता है.

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि सावन में भगवान शिवजी की पूजा का खास महत्व बताया गया है. शुक्रवार को सावन महीने की शिवरात्रि रहेगी. शिवपुराण के मुताबिक ये दिन भोलेनाथ की पूजा के लिए बहुत खास माने गए हैं. इन तिथियों पर की गई शिव पूजा से कई गुना शुभ फल मिलता है. इनमें जल और दूध से शिवलिंग की पूजा-अभिषेक करने से बीमारियां दूर होती हैं और उम्र भी बढ़ती है. साथ ही हर तरह की परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है.

जल और दूध चढ़ाने से दूर होती है परेशानियां:
कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि सावन महीने में शिवलिंग पर पानी का कलश या घड़ा स्थापित किया जाता है. माना जाता है कि जैसे घड़े से पानी की बूंद-बूंद शिवलिंग पर गिरती है, उसी तरह परेशानियां भी पानी की तरह बहकर दूर हो जाती है. साथ ही इस महीने में शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की परंपरा भी है. ऐसा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसलिए इन दो दिनों में शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए.

मिलता है शिव महापूजा का फल:
भविष्यवक्ता अनीष व्यास ने बताया कि सावन महीने में शिव चतुर्दशी पर सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद भगवान भोलेनाथ का जल और दूध से अभिषेक करने की परंपरा है. साथ ही फलों के रस से भी अभिषेक करना चाहिए. शिवपुराण में बताया गया है कि फलों के रस से शिवजी का अभिषेक करने से हर तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियां दूर होती हैं. इसके बाद शिवलिंग पर मदार, धतूरा और बेलपत्र चढ़ाना चाहिए. साथ ही शिवजी को मौसमी फलों का भोग लगाएं और इन दो दिनों तक व्रत रखें. इससे शिव महापूजा का फल मिलता है.

सावन शिवरात्रि:
कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इस साल सावन शिवरात्रि शुक्रवार 6 अगस्त को है. शुक्रवार को त्रयोदशी तिथि शाम तकरीबन 6.40 से शुरू होगी और अगली तारीख की शाम तक रहेगी. शुक्रवार की प्रदोष काल (सूर्यास्त) और निशिथ काल (मध्यरात्रि ) में चतुर्दशी तिथि होने से इसी दिन सावन शिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा.

चतुर्दशी तिथि:

चतुर्दशी तिथि की शुरुआत: 6 अगस्त को शाम 06:30 से
चतुर्दशी तिथि के खत्म होने का समय: 7 अगस्त को शाम 07:13 पर

4 प्रहरों में शिव पूजा:
विख्यात कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि स्कंदपुराण और शिवपुराण में सावन महीने की शिवरात्रि पर शिवजी की पूजा का विशेष महत्व बताया है. इन ग्रंथों के मुताबिक रात के 4 प्रहरों में शिवजी की पूजा करनी चाहिए. रात में भूत, प्रेत, पिशाच, शक्तियां जो कि शिवजी के गण हैं, इनके साथ खुद शिवजी भी भ्रमण करते हैं; इसलिए उस वक्त इनकी पूजा से अकाल मृत्यु नहीं होती और हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं. इसके साथ ही ईशान संहिता में भी कहा गया है कि रात में भगवान शिव प्रकट हुए थे. इसलिए रात में शिव पूजा का ज्यादा महत्व है.

रात के 4 प्रहर की पूजा के मुहूर्त:

पहले प्रहर की पूजा का समय- शाम 07:10 से रात 09:50 तक (प्रदोष काल)
रात के दूसरे प्रहर की पूजा का समय- रात 09:50 से 12:30 तक (अगस्त 07)
तीसरे प्रहर में पूजा का मुहूर्त- 12:30 से 03:08 तक
चौथे और आखिरी प्रहर में पूजा का समय- 03:08 से सुबह 05:50 तक

शिव पूजा-सामग्री:
भविष्यवक्ता अनीष व्यास ने बताया कि पुष्प, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें,तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री आदि.

सावन शिवरात्रि की पूजन विधि:
कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि सुबह सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं. फिर व्रत और शिव पूजा का संकल्प लें. दिन भर व्रत रखें और ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें. सूर्यास्त के पहले फिर से नहाएं और किसी मंदिर या घर पर ही शिवलिंग की पूजा करें. पूजा के वक्त पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह रखकर बैठें.4 प्रहर की पूजा में शुद्ध पानी में गंगाजल मिलाकर शिवजी का अभिषेक करें. इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शकर मिलाकर इस पंचामृत से भी अभिषेक करें. शिवलिंग पर चंदन, फूल, बिल्वपत्र, धतूरा, सुगंधित सामग्री और मौसमी फल चढ़ाएं. फिर शिवजी को धूप और दीपक लगाकर नैवेद्य लगाएं. इसी क्रम से 4 प्रहरों की पूजा करें.

और पढ़ें