VIDEO: Scam 80,00,00,000: अजमेर नगर निगम में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/09 07:08

अजमेर: अजमेर नगर निगम इन दिनों भ्रष्टाचार निगम बन चुका है. यह हम नहीं कह रहे बल्कि भाजपा बोर्ड के खिलाफ भाजपा के ही पार्षद चन्द्रेश सांखला कह रहे हैं. चन्द्रेश सांखला ने जो आरोप लगाए हैं, यदि उन आरोपों पर गौर किया जाए तो अजमेर नगर निगम चारो तरफ से भ्रष्टाचार से जकड़ चुका है. आइए हम आपको बताते हैं कि सांखला ने किन मामलों को उठाया है.

पूरा मामला 50 से 80 करोड़ के राजस्व नुकसान का:
मामला आनंदम समारोह स्थल के पास वैशाली नगर स्थित 8000 गज जमीन का है. नगर निगम को यह जमीन एडीए से मिली थी. नगर निगम ने एक समिति के नाम इस भूमि को आवंटित कर दिया और वह भी महज 21 हजार गज से. यह आवंटन मार्च 2018 में किया गया, जबकि पार्षद चन्द्रेश सांखला का आरोप है कि यहां जमीन की कीमत 1 लाख रुपये प्रति गज है. पूरा मामला सामने आने के बाद जिला कलेक्टर ने जांच कमेटी बनाई, लेकिन जांच कमेटी में एक ऐसे सदस्य को शामिल कर लिया गया जो इस भ्रष्टाचार में शामिल है. हजारी राम सीरवी नगर निगम के अधिकारी हैं और वे इस समिति में सदस्य थे. 5 सदस्य इस कमेटी में एक अधिकारी एडीए से, दो कर्मचारी नगर निगम से और एक तहसीलदार शामिल थे. कमेटी ने 20 जून को अपनी रिपोर्ट सौंपी और इस पूरे मामले में क्लीनचिट दे दी गई है. पूरा मामला 50 से 80 करोड़ के राजस्व नुकसान का है.

दूसरा मामला बहुमंजिला अपार्टमेंट का:
दूसरा मामला चौरसिया 60 फीट रोड रॉयल कैसल अपार्टमेंट से जुड़ा है, यहां एक बहुमंजिला अपार्टमेंट बनाया गया. सबसे पहले 90 फीट सड़क बताकर अजमेर विकास प्राधिकरण से 7 मंजिला इमारत का नक्शा पास करवाया गया. कुछ ही दिनों बाद इस जगह पर 105 फीट सड़क बता कर नगर निगम से भी 10 मंजिल इमारत का नक्शा पास करवा लिया गया. साथ ही सरकारी नाले की जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया. पूरा मामला सामने आने के बाद नगर निगम आयुक्त ने नोटिस थमा दिए, लेकिन उस नोटिस के बाद आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस मामले में करोड़ों का घोटाला किया गया है. 

तीसरा मामला यूको बैंक के पास 100 गज जमीन का:
जगह पुरानी मंडी यूको बैंक के पास 100 गज की यह जमीन नगर निगम ने इस खांचा भूमि को 72 लाख में बेच दिया गया. जबकि पार्षद चंद्रेश सांखला का आरोप है कि इस कमर्शियल जगह पर दुकानें बनाकर यदि नगर निगम बेचता तो नगर निगम को 20 करोड़ का राजस्व मिलता. इस तरह नगर निगम को बड़ा नुकसान पहुंचाया गया. मामला सामने आने के बाद नगर निगम में फाइल को खोजा गया, तो फाइल नगर निगम से गायब थी. नगर निगम आयुक्त सर्च आदेश भी जारी किया. आखिरकार फाइल नहीं मिलने पर एफआईआर दर्ज करवा दी गई है. 

चौथा मामला 7 दुकानों के अवैध निर्माण से जुड़ा:
चौथा मामला बीकानेर मिष्ठान भंडार के सामने 7 दुकानों के अवैध निर्माण से जुड़ा है. शिकायत नगर निगम के पास पहुंची. नगर निगम ने यहां निर्माण कार्य रुकवा दिया और नोटिस भी जारी कर दिए, लेकिन निर्माण कार्य यूं ही चालू रहा. शिकायत आला अधिकारियों तक पहुंची, लेकिन आला अधिकारी भी मूकदर्शक बने रहे. बताया जा रहा है कि इन प्रत्येक दुकान को एक से 2 करोड रुपए में बेच दिया जा रहा है. इस मामले की जांच जिला कलेक्टर तक भी पहुंच रही है.

बहरहाल पार्षद चंद्रेश सांखला के आरोप गंभीर है. इन आरोपों की तह तक जाने की आवश्यकता है. आवश्यकता है इस पूरे मामले की एक एक फाइल की जांच करने की और यदि कोई दोषी है तो उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाने की, क्योंकि प्रत्येक मामला करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान से जुड़ा है.

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