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काजरी के वैज्ञानिकों ने देसी बेर के साथ थाई एप्पल को मिलाकर बनाई संकर प्रजाति, सूखे थार में लहलहाई थाई एप्पल

काजरी के वैज्ञानिकों ने देसी बेर के साथ थाई एप्पल को मिलाकर बनाई संकर प्रजाति, सूखे थार में लहलहाई थाई एप्पल

जोधपुर: राजस्थान की धरती जोधपुर जहां लगभग 45 से 50 डिग्री तापमान रहता है वहां पर सेब की फसल की बात करना ही अजूबा लगता है, लेकिन इस अजूबे को सच कर दिखाया है काजरी के वैज्ञानिकों ने. काजरी ने देसी बेर के साथ थाई एप्पल को मिलाकर संकर प्रजाति बनाई. इस प्रजाति में जड़ तो देसी बेर की रखी गई ताकि पौधा कम पानी में अथवा बिना पानी 2-3 दिन जैसी परिस्थितियों में भी उग सके. तने के ऊपर का हिस्सा थाई एप्पल से लिया गया जो मीठा व रसीले गुण लिए होता है. काजरी ने ऐसे दो हजार पौधे तैयार किए. सेव की तरह दिखने वाले इस थाई एप्पल के आकार और स्वाद के कारण इसकी डिमांड भी बढ़ी है. मीठा व रसीला होने से हर किसी को यह पसंद आने लगे हैं.

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एक पौधे पर करीब 250 रुपए की लागत आती है:
काजरी की प्रधान वैज्ञानिक डॉ प्रतिभा तिवारी और वैज्ञानिक प्रशांत कुम्भले के अनुसार एक पौधे पर करीब 250 रुपए की लागत आती है. यह पौधा सालाना ढ़ाई हजार रुपए की कमाई दे रहा है. इस थाई एप्पल बेर की साइज सेब से भी बड़ी होती है. स्थानीय किसान इसे 50-60 रुपए किलो होलसेल में बेच रहे है, जबकि बाजार में कीमत 70-90 रु. है. थाई या थार बेर का वजन 80-120 ग्राम तक होता है. दिखने में सेब से बड़ा और सेव की तरह ही मीठा और रस भरा होता है. इसमें विटामिन बी व सी जैसे पोषक तत्व होते हैं. जून-जुलाई में इसको उगाने का काम शुरू होता है, फसल फरवरी माह में बाजार में आ जाती है और पहले साल बाद इसकी फसल 30 से 35 किलो होती है. दूसरे वर्ष में यह 70 से 80 किलो फसल देता है. वहीं तीसरे साल 100 किलो के बाहर उत्पादन होता है.

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केन्द्र द्वारा लाए गए तीनों नये कृषि कानून किसान विरोधी - पायलट

केन्द्र द्वारा लाए गए तीनों नये कृषि कानून किसान विरोधी - पायलट

जयपुर: प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कई मुद्दों पत्रकारों से बात की.  केन्द्र सरकार द्वारा कृषि और कृषि व्यापार से संबंधित लाये गये तीन कानूनों पर प्रतिक्रिया देते हुए इन्हें कृषि एवं किसान विरोधी बताया, पायलट ने कहा कि कोरोना काल में अध्यादेशों के माध्यम से उक्त कानून लागू किये है, जबकि ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं थी. उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है जबकि केन्द्र सरकार ने इस संबंध में राज्यों से किसी प्रकार की सलाह नहीं ली. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा किसान संगठनों एवं राजनैतिक दलों से भी इस सम्बन्ध में कोई राय-मशविरा नहीं किया गया.

मोदी सरकार प्रारम्भ से ही किसान विरोधी रही:  
पायलट ने कहा कि मोदी सरकार प्रारम्भ से ही किसान विरोधी रही हैं. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही किसानों के लिए भूमि मुआवजा कानून रद्द करने के लिए एक अध्यादेश प्रस्तुत किया. परन्तु राहुल गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस एवं किसानों के विरोध के कारण मोदी सरकार को पीछे हटना पड़ा. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन तीन नए कानूनों से किसान, खेत-मजदूर, कमीशन एजेंट, मण्डी व्यापारी सभी पूरी तरह से समाप्त हो जायेंगे. उन्होंने कहा कि एपीएमसी प्रणाली के समाप्त होने से कृषि उपज खरीद प्रणाली समाप्त हो जायेंगी. किसानों को बाजार मूल्य के अनुसार न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा और न ही उनकी फसल का मूल्य.  

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मण्डी सिस्टम खत्म होना किसानों के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा:
सचिन पायलट ने मीडिया से कहा कि यह दावा सरासर गलत है कि अब किसान देश में कहीं भी अपनी उपज बेच सकता हैं. पायलट ने कहा कि जनगणना के अनुसार देश में 86 प्रतिशत किसान 5 एकड से कम भूमि के मालिक है. ऐसी स्थिति में 86 प्रतिशत अपने खेत की उपज को अन्य स्थान पर परिवहन या फेरी नहीं कर सकते हैं. इसलिए उन्हें अपनी फसल निकट बाजार में ही बेचनी पड़ती है. मण्डी सिस्टम खत्म होना किसानों के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा. उन्होंने कहा कि अनाज-सब्जी बाजार प्रणाली की छंटाई के साथ राज्यों की आय का स्त्रोत भी समाप्त हो जाएगा. पायलट ने कहा कि केन्द्र सरकार से मांग की है कि राजनैतिक दलों, किसान संगठनों, मण्डी व्यापारियों और कृषि विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा कर इन कानूनों में संशोधन पर विचार करें जिससे देश के किसान की वास्तविक दशा में बदलाव आ सकें. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट
 

सीएम गहलोत ने 400 से अधिक किसानों से किया सीधा संवाद, कहा- किसान के बेटे अब गांव में रहकर ही उद्यमी बन सकते हैं

सीएम गहलोत ने 400 से अधिक किसानों से किया सीधा संवाद, कहा- किसान के बेटे अब गांव में रहकर ही उद्यमी बन सकते हैं

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज प्रदेश के 400 से अधिक किसानों से सीधा संवाद करके राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019 की समीक्षा की. मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योग लगाओ आय बढ़ाओ की थीम पर यह नीति लागू की गई है, जिसका किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहिए.  

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण चिकित्सकों की सलाह पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अगले एक महीने तक लोगों से मुलाकात के कार्यक्रम तो रद्द कर दिए है, लेकिन सुशासन के लिए वीसी के माध्यम से संवाद व बैठकों का दौर जारी है. इसी क्रम में सीएम गहलोत ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास से वीसी के माध्यम से राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019 की समीक्षा की. इस वीसी में कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना, राज्य मंत्री टीकाराम जूली, मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, एसीएस वित्त निरंजन आर्य, प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा, सिद्धार्थ महाजन भी मौजूद थे. 

428 किसानों और 144 मंडियों के सचिवों के साथ चला संवाद:
करीब दो घंटे तक 428 किसानों और 144 मंडियों के सचिवों के साथ चले इस संवाद में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई नीति यदि कागजों तक सीमित रहती है, तो उसका महत्व नहीं है, ऐसे में किसानों की नीति काफी विचार विमर्श के बाद बनाई गई है और किसानों को इस नीति के तहत अपने कृषि से जुड़े उद्योग स्थापित करके सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का फायदा उठाना चाहिए. सीएम ने कहा किसान के बेटे अब अपने गांव में रहकर ही उद्यमी बन सकते हैं, क्योंकि कई बार खेती में तो लागत मूल्य भी नहीं मिलता, ऐस में अब किसानों को खुद को थोड़ा डाइवर्ट करना चाहिए. कोविड के कारण प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था खराब है, इसलिए हमें खुद के पैरों पर ही खड़ा होना पड़ेगा. सीएम ने कहा कि प्रंस्करण नीति के तहत बनने वाले उत्पादों की मार्केटिंग के लिए सभी जिलों में प्रकोष्ठ बनेगा. 

करीब एक दर्जन किसानों व किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा की:
वीसी के माध्यम से हुए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के करीब एक दर्जन किसानों व किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा की. गोकुलपुरा (सीकर) के बनवारी, जोधपुर की मनीषा, फलौदी के गजेंद्र सिंह व खींवसर के धर्मराज सहित कई किसानों से सीएम ने चर्चा की. जोधपुर के महेश सोनी का ग्वार से हाई प्रोटीन निकालने के प्लांट का प्लान मुख्यमंत्री को काफी पसंद आया और उन्होंने सोनी से इस बारे में लंबी चर्चा की. वहीं हनुमानगढ़ के दयाराम जाखड़ ने खजूर की खेती को लेकर सीएम से बात की और कुछ मांगे मुख्यमंत्री के सामने रखी. मुख्यमंत्री ने भी तुरंत मांग मानने का वादा किया. इस दौरान खजूर को लेकर कृषि मंत्री लालचंद कटारिया व मुख्यमंत्री गहलोत ने चुटकी भी ली. 

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कृषि विभाग के प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा ने प्रजेंटेशन दिया:
इससे पहले कृषि विभाग के प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा ने राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति 2019 के बारे में प्रजेंटेशन दिया. उन्होंने नीति के तहत किसानों को परिवहन, बिजली व सौर ऊर्जा सयंत्र पर मिलनी वाली सब्सिडी की जानकारी दी और बताया कि महिलाओं के लिए अलग से ब्याज अनुदान का प्रावधान है. कुंजीलाल ने बताया कि नीति के तहत अब तक 137 आवेदन आए हैं, जिनमें से 53 आवेदन स्वीकृत हो गए हैं और 84 प्रक्रियाधीन है. अब तक 247 करोड़ के निवेश राशि के आवेदन आए है. 53 प्रकरणों में 18.12 करोड़ की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है. 

अब किसानों की नई पीढ़ी अपना रोजगार खुद विकसित कर सकती है:
वीसी में किसानों को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि अब किसानों की नई पीढ़ी अपना रोजगार खुद विकसित कर सकती है. वहीं सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि चुनाव में कई नेता कृषि आय बढाने की बात करते है, लेकिन किसानों की असली पीड़ा गहलोत ने समझी है. आंजना ने सहकारिता के मामले में आगे बढ़ने की अपील की. राज्यमंत्री टीकाराम जूली ने सुझाव दिया कि प्रोसेसिंग यूनिट को लेकर सरकार को अपने स्तर पर क्षेत्रवार अध्ययन कराना चाहिए, क्योंकि प्रदेश के हर जिले की अपनी विशेष खूबी है. ऐसे में प्रत्येक जिले में यूनिट का लक्ष्य निर्धारित होना चाहिए. 

किसान अब उद्यमी बन सकता है:
राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय व कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति पिछले साल दिसंबर में आई थी और किसानों के लिए यह क्रांतिकारी साबित हो सकती है. इस नीति के तहत अब किसान अपनी जमीन पर ही कृषि से जुड़े उत्पादों की प्रोसेसिंग यूनिट लगा सकता है, किसान अब उद्यमी बन सकता है. यानी अब किसान भी उद्योग लगाओ और खूब कमाओ. बस जरूरत है सरकारी सिस्टम को सुधारकर इस नीति का जमीनी स्तर तक प्रचार प्रसार करने का, ताकि असली किसान इस नीति के तहत सरकार की योजना का फायदा उठा सके. 

भूमि पुत्रों के लिए अच्छी खबर, 6000 करोड़ रुपये के फसली ऋण वितरण की प्रक्रिया हुई प्रारम्भ

भूमि पुत्रों के लिए अच्छी खबर, 6000 करोड़ रुपये के फसली ऋण वितरण की प्रक्रिया हुई प्रारम्भ

जयपुर: राज्य के भूमि पुत्रों के लिए अच्छी खबर है. प्रदेश के किसानों को रबी के लिए ब्याज मुक्त फसली ऋण वितरण की प्रक्रिया 1 सितम्बर से प्रारम्भ कर दी गई है. 31 मार्च 2021 तक रबी सीजन में 6000 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त फसली ऋण का लक्ष्य रखा गया है. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बताया कि वर्ष 2020-21 में राज्य के किसानों को 16 हजार करोड़ रुपये के अल्पकालीन फसली ऋण का लक्ष्य रखा गया है और 25 लाख से अधिक किसानों को इससे लाभान्वित किया जा रहा है. रबी सीजन के लिए जिलेवार ऋण राशि वितरण के लक्ष्य तय कर दिये है.

केन्द्रीय सहकारी बैंक जयपुर सर्वाधिक फसली ऋण का वितरण करेगा: 
उन्होने बताया की रबी सीजन में केन्द्रीय सहकारी बैंक जयपुर सर्वाधिक 430 करोड़ रुपये फसली ऋण का वितरण करेगा. भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, सीकर एवं श्रीगंगानगर के केन्द्रीय सहकारी बैंक 300-300 करोड़ रुपये के ऋण वितरित करेंगे. इसी प्रकार जोधपुर में 290 करोड़ रुपये, हनुमानगढ़़ जिले में 260 करोड़ रुपये, झुंझुनू, जालौर एवं बाड़मेर जिलों में 250-250 करोड़ रुपये, झालावाड़ एवं नागौर के सीसीबी द्वारा 240-240 करोड़ रुपये के ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है. 

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केन्द्रीय सहकारी बैंक कोटा एवं अलवर द्वारा 220-220 करोड़ रुपये वितरण करेगा:
इसी प्रकार केन्द्रीय सहकारी बैंक कोटा एवं अलवर द्वारा 220 -220 करोड़ रुपये, पाली एवं बीकानेर जिलों में 200-200 करोड़ रुपये, उदयपुर, सवाईमाधोपुर, एवं अजमेर जिलों में 190-190 करोड़ रुपये, भरतपुर में 170 करोड़ रुपये, बूंदी एवं चूरू के द्वारा 150-150 करोड़ रुपये, दौसा में 140 करोड़ रुपये, बारां में 120 करोड़ रुपये, टोंक में 110 करोड़ रुपये, बांसवाड़ा एवं जैसलमेर के केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा 100-100 करोड़ रुपये, सिरोही में 90 करोड़ रुपये तथा डूंगरपुर में 50 करोड़ रुपये के फसली ऋण वितरण के लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं. 

किसानों के लिए मुख्यमंत्री ने किए बड़े फैसले, सहकारी संस्थाओं में 1,000 पदों पर भी भर्ती जल्द शुरू होगी

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जयपुर: प्रदेश में कोविड का प्रकोप है और आर्थिक स्थिति खराब है, इसके बावजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के किसानों को एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए प्रेरित करने का फैसला किया है. इसके लिए जिला स्तर पर अभियान चलाया जाएगा. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री ने किसानों को रबी फसल के बीमा क्लेम के शीघ्र भुगतान के लिए 250 करोड़ रूपए प्रीमियम कृषक कल्याण कोष से स्वीकृत करने का फैसला किया है. सीएम गहलोत ने मंगलवार को अपने आवास पर  कृषि, सहकारिता एवं अन्य विभागों की समीक्षा बैठक करके कई अहम फैसले किए. 

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प्रदेश के खराब आर्थिक हालातों के बीच राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का अभियान चलाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियो को निर्देश दिए हैं कि इस योजना के तहत बैंक से ऋण दिलाने में किसानों की सहायता की जाए. यूनिट लगाने पर किसानों को एक करोड़ रूपये तक ऋण मिल सकता है जिस पर राज्य सरकार द्वारा 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. इस योजना से न केवल किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी बल्कि फसल उत्पादों में वैल्यू एडिशन होने से उनकी कीमत भी बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. मुख्यमंत्री आवास पर हुई अहम बैठक में कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया, सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना, कृषि राज्यमंत्री भजनलाल जाटव, सहकारिता राज्यमंत्री टीकाराम जूली वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े थे. वहीं मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, एसीएस वित्त निरंजन आर्य, राजस्थान राज्य भण्डारण निगम के सीएमडी पीके गोयल, रजिस्ट्रार सहकारिता  मुक्तानन्द अग्रवाल, प्रबंध निदेशक राजफैड सुषमा अरोड़ा, निदेशक कृषि विपणन बोर्ड ताराचन्द मीणा मुख्यमंत्री आवास पर मौजूद थे. एक नजर डालते है कि बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए अहम फैसलों पर...

- किसानों के लिए मुख्यमंत्री ने किए बड़े फैसले
- बीमा प्रीमियम भुगतान के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी
- कृषक कल्याण कोष से 250 करोड़ रूपए मंजूर किए गहलोत ने
- प्रदेश के 2.50 लाख किसानों को मिलेगा इसका फायदा
- 750 करोड़ रूपए के बीमा क्लेम का जल्द भुगतान होगा
- विभिन्न जिलों में 3,723 डिग्गियों के निर्माण को लेकर भी हुआ फैसला
- कृषक कल्याण कोष से 95.87 करोड़ रूपए के भुगतान आदेश
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी का गठन
- कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड का लाभ किसानों को दिलाने के लिए बनी कमेटी
- राजस्थान में इस फण्ड से 9 हजार करोड़ आवंटन का लक्ष्य रखा गया
- मण्डी में किसानों की सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भूखण्डों का आवंटन होगा
- पशुपालकों को पशुधन के आधार पर अधिकाधिक केसीसी जारी किए जाएंगे
- जमीन व पशुधन वाले किसानों के लिए केसीसी की सीमा 3 लाख तक होगी
- 1,000 सहकारी समितियों को इसी वर्ष निजी गौण मण्डी का दर्जा दिया जाएगा
- दूर के गांवों में भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद हो सकेगी

इस बैठक में मुख्यमंत्री ने मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटियों के द्वारा आम जनता को निवेश के नाम पर धोखा देकर उनकी गाढ़ी मेहनत की कमाई लूटने पर चिंता जताई. सीएम ने अधिकारियों को ऎसा मैकेनिज्म तैयार करने के निर्देश दिए कि भविष्य में प्रदेश में ऎसी कोई भी को-ऑपेरटिव सोसायटी गरीब जनता को झांसे में नहीं ले सके. साथ ही गहलोत ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं में 1,000 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को जल्द शुरू करने के आदेश दिए. इसके लिए अगले तीन महीनों में विभाग के सेवा एवं भर्ती नियमों में संशोधन भी कर लिया जाएगा. बैठक में मौजूद कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा ने बताया कि सहकारिता विभाग द्वारा वर्ष 2019-2020 में 21.86 लाख कृषकों को 9541 करोड़ रूपये का अल्पकालीन सहकारी फसली ऋण वितरित किया है. वर्ष 2020-21 में खरीफ सीजन के लिए 23.91 लाख किसानों को 7343.71 करोड़ रूपये का ऋण वितरित किया गया है, इसमें 2.25 लाख नए कृषकों को 393.80 करोड़ रूपये का ऋण बांटा गया.

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बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी सहकारी भण्डारों के मेडिकल विक्रय केन्द्र ऑनलाइन होंगे जिससे प्रदेश के 4.15 लाख पेंशनरों को सहुलियत मिलेगी. प्रदेश में टिड्डियों के संकट पर भी विचार विमर्श किया गया. अब तक प्रदेश में 5 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण के लिए दवा छिड़काव किया गया. इस वर्ष प्रदेश के 33 में से 32 जिलों में टिड्डियों का प्रकोप रहा. आने वाले दिनों में टिड्डियों के नए दलों के आक्रमण की आंशका है. सोमवार की बैठक को विधानसभा सत्र से जोड़कर भी देखा जा रहा है. दरअसल, 21 अगस्त से फिर से सदन की कार्यवाही शुरू होनी है, जिसमें किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठ सकते हैं, लेकिन इससे पहले ही मुख्यमंत्री ने तमाम मुद्दों पर चर्चा करके विपक्ष के हमलों के जवाब तैयार कर लिए है और साथ ही किसानों की विभिन्न मांगों को स्वीकार कर लिया है.  
 

प्रदेश के किसानों के लिए अच्छी खबर, 3.50 लाख डिफॉल्टर किसानों को भी मिलेगा फसली ऋण

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जयपुर: फसली ऋण से जुड़े करीब 3.50 लाख अवधिपार ऋणी किसानों को भी फसली ऋण प्रदान किया जाएगा. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ऋण माफी के अपात्र इन किसानों को भी अब शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसली ऋण मिल सकेगा. आंजना ने बताया कि ऐसे सभी किसान जो ऋण माफी में अपात्र थे और उन्होंने समय पर अपना फसली ऋण चुका दिया था. उन्हें अब भी फसली ऋण दिया जा रहा है. लेकिन कई किसान ऐसे थे जो ऋण माफी में अपात्र थे तथा उन्होंने अपना फसली ऋण देरी से चुकाया था वे अवधिपार श्रेणी में आए थे. ऐसे किसानों को भी अब फसली ऋण मिल सकेगा.

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मूल राशि के बराबर पुनः फसली ऋण ले सकेंगे: 
सहकारिता मंत्री ने बताया कि जिन किसानों ने अभी तक अपना फसली ऋण नहीं चुकाया है तथा जो अवधिपार हो चुके है. ऐसे किसान अब अवधिपार मूल राशि एवं ब्याज चुकाकर पात्रता की स्थिति में मूल राशि के बराबर पुनः फसली ऋण ले सकेंगे. उन्होंने बताया कि ऐसे किसानों के हित में राज्य सरकार के शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसली ऋण का लाभ देने के उदेद्श्य से यह निर्णय लिया गया है.

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इस वर्ष लगभग 3 लाख नए किसानों को भी फसली ऋण दिया जा रहा:
आंजना ने बताया कि 16 अप्रेल से प्रारम्भ हुए खरीफ सीजन के फसली ऋण में अब तक 23 लाख 79 हजार किसानों को 7 हजार 321 करोड़ रूपये का फसली ऋण का वितरण किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष लगभग 3 लाख नए किसानों को भी फसली ऋण दिया जा रहा है. खरीफ सीजन में फसली ऋण 31 अगस्त तक वितरित होगा. 


 

टिड्डियों के हमले को लेकर कृषि विभाग अलर्ट

टिड्डियों के हमले को लेकर कृषि विभाग अलर्ट

बिसाऊ(झुंझुनू): बिसाऊ क्षेत्र में टिड्डयों का नियंत्रण जब तक किसान सहयोग नहीं करेगे तब तक विभाग अकेला कुछ नहीं कर सकता है. इस लिये किसान टिड्‌डी नियंत्रण टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करे. सुबह क्षेत्र में विभाग द्वारा चलाये जा रहे टिड्‌डी नियंत्रण कार्य का निरक्षण करने आये कृषी विभाग के आयुक्त डॉ ओमप्रकाश ने किसान गोष्टी में कही. यह किसान गोष्टी कस्बे के राणासर रोड पर स्थीत अरविंद आश्रम फार्म हाउस पर पालिकाध्यक्ष मुस्ताक खान की अध्यक्षता में हुई जिसमें क्षेत्र के निराधनू, टांई, बाडेट, श्यामपुरा, पूनीया का बास सहित एक दर्जन गांवों से आये किसानों ने भाग लिया. 

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टिड्‌डी नियंत्रण कार्य के बारे में जानकारी ली:  
आयुक्त ने किसानों से टीम द्वारा किये जा रहे टिड्‌डी नियंत्रण कार्य के बारे में जानकारी ली व सुझाव भी मांगे. आयुक्त ने किसानों को फसल पर होने वाले टिड्डीयों के हमले से कैसे बचा जाऐ उसके बारे में जानकारी दी और कहा की टिड्डियों के हमले के समय धुआं व आवाज करें. यह टिड्डियां 150 से 200 किलो मिटर की रफतार से उड़ती है. यह समय इनके मेटिंग का है जहां भी पड़ाव डालेगी वहां अंडे देगी. इन अंडो से निकलने वाला फाका 8 से 10 दिन में चलने लग जाता है. इन से फसलों को बचाने के लिये पारम्परिक तरिके अपनाये. टिडिडयों के नियंत्रण के लिये विभाग ट्रेक्टर, पानी के टेंकर, हेलिकाप्टर भी लगा रखे हैं. सर्वे के लिये अधिकारियों को गाडियां उपलब्ध करवा रखी है. गौष्टी में विभाग के संयुक्त सचिव डॉ एसपी सिंह ने भी किसानो को टिड्‌डी दल व फाके से फसलों के बचाव हेतू कई जानकारिया दी.

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90 प्रतिशत टिड्‌डी दल पर नियत्रंण कर लिया: 
सिंह ने बताया की विभाग ने नई टेक्नोलोजी अपना कर 90 प्रतिशत टिड्‌डी दल पर नियत्रंण कर लिया है. किसान ध्यान रखे फसलों व सब्जियों में स्प्रे के 10 दिन बाद ही काम करे. फाके को मारने के लिये खेतों में एक से डेढ फुट गहरी व एक फुट चोडी खाई खोदे जिसमें फाका खाई में गिरकर मर जाएगा. सिंह ने बताया की टिड्‌डी दल को हवा से एनर्जी पावर मिलता है. पड़ाव के समय इन्हे मारने के लिये नीम व उनकी निबोंली को पानी में उबाल उसका छीड़काव भी कारगर है. पालिकाध्यक्ष खान ने टिड्‌डी दल नियंत्रण में विभाग को पालिका की और से सहयोग देने का आश्वासन दिया है. गोष्टी से पूर्व आयुक्त व संयुक्त सचिव ने सहायक निदेशक डॉ विजयपाल कंस्वा व अन्य अधिकारियों के साथ आश्रम के फार्म हाउस पर टिड्‌डयों द्वारा दिये गये अंडो को व उनमें से निकलने वाले जीवो को देखा. इस मौके पर सीकर के कृषी संयुक्त निदेशक प्रमोद कुमार, उपनिदेशक कृषी डॉ. राजेद्र लांबा, सहायक निदेशक विजयपाल कंस्वा, सीकर के कृषी अधिकारी सर्जनसिंह व फार्म हाउस की देखरेख करने वाले मैनेजर ओमप्रकाश जोशी व आश्रम के पदाधिकारी भी मोजूद रहे. 

खेत में फव्वारा लाइन बदलते समय करंट लगने से मां-बेटे की मौत

खेत में फव्वारा लाइन बदलते समय करंट लगने से मां-बेटे की मौत

चूरू: जिले के बूटिया गांव में आज मां-बेटे की खेत में पानी के फव्वारे बदलते समय करंट लगने से मौत हो गई. बताया जा रहा है कि बूटिया गांव का एक किसान परिवार अपने खेत में सिंचाई कर रहा था उसी दौरान जब पानी के फव्वारे की लाइन बदल रहे मां बेटे को करंट लगा और दोनों की मौत हो गई. 

राज्यसभा चुनाव के बाद परवान चढ़ती आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स, अब मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का आरोप 

ट्रांसफार्मर के अर्थिंग से जमीन में आया करंट: 
खेत में लगे हुए ट्रांसफार्मर के अर्थिंग से जमीन में करंट आना प्रथम दृष्टया कारण माना जा रहा है जिससे फव्वारे की लाइन में भी करंट आया और लाइन बदलते समय यह हादसा हुआ है. सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों के शव राजकीय डीबी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाये, बाद में शवों का पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए हैं अब सदर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है.

जयपुर: मुख्यमंत्री निवास को बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस कंट्रोल रूम में आया फोन 

हवा में उड़ती आफत टिड्डियों को लेकर विभाग अलर्ट, अगस्त में पाकिस्तान के रास्ते देश में एंट्री करेगा करोड़ों टिड्डियों का दल

हवा में उड़ती आफत टिड्डियों को लेकर विभाग अलर्ट, अगस्त में पाकिस्तान के रास्ते देश में एंट्री करेगा करोड़ों टिड्डियों का दल

जैसलमेर: पाकिस्तान के रास्ते भारत आया टिड्डी दल फसलों को काफी नुकसान पहुंचा रहा है. खासतौर पर राजस्थान के कई जिलों में इनका असर सबसे ज्यादा है. कई किलोमीटर लंबे टिड्डी दल राजस्थान के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में बार-बार हमला कर रहे हैं. टिड्डी दल के हमले से अब पाकिस्तान बॉर्डर से लगे राजस्थान के जिलों में किसानों पर आफत आ गई है. अब अगस्त में एक बार फिर पाकिस्तान के रास्ते कारोड़ों टिड्डियों का दल भारत में आ सकता है. राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार जुलाई और अगस्त में टिड्डी दल के हमलों में बढ़ोतरी हो सकती है. मानसून का सीजन शुरू हो चुका है, और बारिश में टिड्डियां ज्यादा अंडे देती हैं. 

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अब तक 2 लाख हैक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी:  
टिड्डी दलों के हमले से अब तक 2 लाख हैक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है. राजस्थान के कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अब हमले ज्यादा बड़े और लगातार होंगे. इन हमलों से यदि प्रदेश की 10 प्रतिशत फसल भी बर्बाद हुई तो नुकसान का आंकड़ा लगभग 4 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है. कृषि विशेषज्ञों एवं अधिकारियों की आशंका और अब तक हुए हमलों को ध्यान में रखते हुए टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए कारगर कदम उठाए जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने हेलीकॉप्टर से कीटनाशक स्प्रे कराने का प्रबंध किया है. वहीं राज्य सरकार जमीनी स्तर पर कीटनाशक का स्प्रे कराने के साथ ही अन्य आवश्यक कदम उठा रही है. फायर ब्रिगेड, ड्रोन व ट्रेक्टर का सहारा लेकर इन पर नियंत्रण का प्रयास किया जा रहा है. 

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टिड्डी नष्ट करने के लिये हेलिकॉप्टर की मदद ली गई:
जैसलमेर में टिड्डी नियंत्रण अधिकारी राजेश कुमार व कृषि उपनिदेशक राधेश्याम नारवाल ने बताया कि जैसलमेर जिले में आज  टिड्डी नष्ट करने के लिये हेलिकॉप्टर की मदद ली गई. जैसलमेर जिले के धनाना क्षेत्र में 140 आर.डी क्षेत्र में हेलिकॉप्टर से कीटनाशक का स्प्रे कर 50 से ज्यादा हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण किया गया. इसके साथ ही जिले में रविवार को कुल 351 हेक्टेयर क्षेत्र मे टिड्डी नियंत्रण किया गया जिनमें पोकरण, डेलासर, एकां, अमीरों की बस्ती प्रमुख रूप से शामिल है. उन्होंने बताया कि जैसलमेर में 908 हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण की कार्यवाही की गई. जिले के मुल्ताना, फतेहगढ़, बांधा, ओला, सोढ़ाकर पोकरण, दूधिया आदि क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर, ड्रोन, व्हीकल माउंटेन स्प्रेयर के जरिए टिड्डी नियंत्रण किया गया. 

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