जयपुर VIDEO: राजस्थान में मौसमी बीमारियों की दस्तक, पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार ज्यादा मरीज आ रहे सामने, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: राजस्थान में मौसमी बीमारियों की दस्तक, पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार ज्यादा मरीज आ रहे सामने, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान में कोरोना महामारी अभी शांत भी नहीं हुई और अन्य दूसरी मौसमी बीमारियों ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए है.बरसाती सीजन खत्म होने के साथ ही राजस्थान की जनता एकबार फिर मौसमी बीमारियों की चपेट में है.डेंगू के साथ ही जहां स्क्रब टाइफस के केस लगातार बढ़ रहे है, वहीं दूसरी ओर चिकनगुनिया के बढ़ते केसों ने भी चिकित्सा विभाग की चिंता बढ़ा दी है.आखिर प्रदेश में मौसमी बीमारियों की क्या है स्थिति, क्यों बेलगाम हो रही बीमारियां और कैसे रखे लोग स्वयं को बीमारियों से दूर.

ये है प्रदेश का सबसे बड़ा एसएमएस अस्पताल.कोविड की दूसरी लहर के दौरान यहां ओपीडी 1000 से 1500 के आसपास हो रहा था, लेकिन इनदिनों मौसमी बीमारियों के चलते ओपीडी "मेले" के रूप में तब्दील हो गई है.अकेले एसएमएस में ओपीडी 8000 के आंकड़े को पार गया गया है.यह तो सिर्फ एक बानगी है.प्रदेश के कमोबेश हर अस्पताल में ऐसा ही आलम है.कारण है बरसात सीजन के बाद मौसम में आए बदलाव के बाद बढ़ी मौसमी बीमारियां.हालांकि, राहत की बात ये है कि मौसमी बीमारियों का आंकड़ा जरूर बढ़ा है, लेकिन मौतों का ग्राफ काफी कम है.इस बारे में चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना के केस कम जरूर हुए है, लेकिन मौसमी बीमारियों के केस बढ़ रहे है.ऐसे में जरूरी है कि लोग सावधानी बरते.

राजस्थान में इस साल का बीमारियों का रिपोर्ट कार्ड:
-राजस्थान में डेंगू का बड़ा डंक !
-इस साल दो लोगों की मौत, अब तक 2072 पॉजिटिव केस
-जबकि पिछले साल यह आंकड़ा रहा महज 717
-स्क्रब टाइफस के अब तक सामने आ चुके 804 केस, पिछले साल ये आंकड़ा रहा 915
-हालांकि, इस साल स्वाइन फ्लू के केस रहे कम, लेकिन पिछले कुछ दिनों में एकाएक आए केस
-पिछले एक माह में स्वाइन फ्लू के छह पॉजिटिव केस किए जा चुके है चिन्हित
-इस साल अब तक मलेरिया के 490 केस, चिकनगुनिया के सामने आए 695 केस

चिंता की बात ये है कि कुछ बीमारियों के एकाएक केस बढ़े है.अकेले एसएमएस के आंकड़ों की बात की जाए तो पिछले 1 दिन में 30 केस स्क्रब टाइफस के सामने आए है.वहीं इस दरमियान 10 केस डेंगू के चिन्हित किए गए है.हालांकि, सूबे के चिकित्सकों का इस बारे में कहना है कि वे मौसमी बीमारियों के प्रति घबराए नहीं, बल्कि जागरूकता रखे.जैसे ही किसी बीमारी के लक्षण दिखे तो तत्काल नजदीकी अस्पताल में चिकित्सक से परामर्श लें.  

बड़ी बीमारियों के लक्षण और बचाव:
-डेंगू के ये लक्षण : अचानक बुखार आना, सिर में आगे की तरफ तेज दर्द, आंखों के पीछे व आंखों के हिलने में दर्द, मांसपेशियों जोड़ों में दर्द, स्वाद का पता न चलना व भूख न लगता
-डेंगू से बचाव : घर में मच्छरों को न पनपने दें.किसी भी जगह पानी एकत्र न होने दें.पूरे शरीर को ढककर रहे.बीमारी के लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सक से सम्पर्क करें.

-स्वाइन फ्लू के ये लक्षण : तीन से चार दिन तक खांसी, जुखाम, बुखार, सांस लेने में कठिनाई, उल्टी, दस्त, पेटदर्द, बलगम में रक्त आना, नाखूनों में नीलापन
-स्वाइन फ्लू से बचाव : भीडभाड वाले स्थान पर जाने से बचे, यदि किसी भी तरह के लक्षण नजर आए तो तत्काल चिकित्सक से परामर्श ले.

-स्क्रब टाइफस के ये लक्षण : सर्दी लगकर अचानक बुखार आना, सिर में दर्द, शरीर के ऊपर दाने, आंखों में जलन, मांसपेशियों में दर्द, सूखी खासी,  
-स्क्रब टाइफस से बचाव : यह बीमारी माइट या पिस्सू के काटने से फैलती है...ऐसे में जरूरी है कि खेतों में काम करते वक्त पूरी बाहों के कपड़े पहने, कीटों से बचाने वाली क्रीम त्वचा पर लगाए.घर या घर के आसपास चूहे ना होने दें.क्योंकि, चूहों के शरीर पर वे कीट रहते है, जिनसे स्क्रब टाइफस बैक्टीरिया फैलते है.

-मलेरिया के ये लक्षण : बुखार, पसीना आना, शरीर में दर्द और उल्टी आना
-मलेरिया से बचाव :  अपने आस-पास गंदगी और पानी इकठ्ठा न होने दें.बुखार जैसे लक्षण दिखते ही तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें.

ऐसा नहीं है कि मौसमी बीमारियों के प्रति विभाग अलर्ट नहीं है.सूबे के चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा से लेकर प्रमुख चिकित्सा सचिव अखिल अरोड़ा, चिकित्सा सचिव वैभव गालरिया रोजाना प्रदेशभर के मामलों की मॉनिटरिंग कर रहे है.साथ ही फील्ड अधिकारियों को सख्ती से सर्विलांस के निर्देश दिए गए है.ऐसे में अब देखना ये होगा कि ये सख्ती फील्ड में मौसमी बीमारियों पर कितना लगाम लगा पाती है.

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