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लोकगीतों में बिखरी धारा 370 की सुगंध, लोक कलाकार बढा रहे सैनिकों का हौंसला

लोकगीतों में बिखरी धारा 370 की सुगंध, लोक कलाकार बढा रहे सैनिकों का हौंसला

जैसलमेर: धरती के स्वर्ग कश्मीर में धारा 370 हटाये जाने के बाद जहां देशभर में जश्न का माहौल बना हुआ है और लोग अपने अपने तरीकों से खुशियां मना रहे हैं, उसी बीच राजस्थान के पश्चिमी इलाके जैसलमेर में सर पर रंग-बिरंगे साफे बांधे लंगा मागणियार जाति के बाल कलाकार अपने गीतों के माध्यम से सैनिकों और अपनी सरकार का हौंसला बढा रहे है. अपनी ओर से शुभकामनाएं भी दे रहे हैं और देशभर को ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि देश को एकसूत्र में बांधने के सरकार के इस निर्णय को उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिये. 

लंगा मांगणियार बढा रहे सैनिकों का हौंसला:
रंग बिरंगी पगडियां बांधे लोक कलाकारों की टोली और परम्परागत साज के साथ एक सुर में लय और ताल को सजाते हुए बड़े ही सुरीले तरीके से गा रहे हैं कि... 'सौ वर्ष अपना अदा किजिये... जवानों के वास्ते दुआ किजिये' , '370 धारा खुशी हम मनायेंगे... जवानों के वास्ते दुआ किजिये' केन्द्र की मोदी सरकार के कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाने को लेकर धारा 370 की समाप्ती के निर्णय पर राजनेता भले ही अपने नफे नुकसान के हिसाब से बयानबाजी कर रहे हो, पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान इस निर्णय के बाद खिसीयानी बिल्ली की तरह खंभा नोच रहा है, लेकिन इन सब के बीच हर देशवासी का फर्ज बनता है कि आजादी के बाद से लगातार गुलामी की जंजीरों के जकड़े कश्मीर को असली आजादी अब मिली है और इसी आजादी को जश्न के रूप में मनाते हुए जैसलमेर के लंगा मांगणियार जाति के लोक कलाकारों ने सरकार और सैनिकों को समर्पित एक राजस्थानी लोक संगीत की सुगंध से महकता एक गीत प्रस्तुत किया है. जिसमें जवानों का हौंसला बढाते हुए इन लोक कलाकारों ने कहा है कि ‘‘कह दो इन जवानों से डरने की क्या बात है.... तन मन से सेवा करने हम तुम्हारे साथ हैं’’ वहीं दूसरी पंक्ति में कहा है कि ‘‘दुश्मनों को चीर फाड सुखा दीजिये... जवानों के वास्ते दुआ किजिये’’ कश्मीर की वादियों में फिर से अमन और सकून की फिजां सजे, इसके लिये इन लोक कलाकारों ने कहा कि ‘‘हर एक कश्मीर वासी फिर से हम सजायेंगे और जरूरत पडेगी तो कारगिल भी जायेंगे.’’

घाटी में लोक संस्कृति की खुशबु:
सरहदी जिले जैसलमेर की पहचान के रूप में दुनिया भर में जाने जाते हैं यहां के लंगा मांगणियार. अगर इन्हें लोक संगीत का सारथी भी कहा जाये तो कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी, क्योंकि जैसलमेर के गांव ढाणियों से लोक संगीत को निकालकर ये लोग इसे देश ही नहीं वरन् दुनियाभर में लेकर गये और इस संगीत को एक नहीं पहचान भी दिलाई है. जैसलमेर के लंगा मांगणियारों का कहना है कि उन्होंने अपने लोक संगीत की प्रस्तुतियां यहां पर्यटकों के सामने दी है, बॉलीवुड में भी दी है और दुनिया के कई देशों में दी है, लेकिन अब कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने के बाद जब कश्मीर पर्यटकों से गुलजार होगा तो ये लोग वहां जाकर भी अपनी लोक संस्कृति की खुशबु वहां की फिजाओं में घोलना चाहते हैं. 

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