हुकुम खम्मागणी, हुकुम धोक दे रह्यो हूं... मारो मुजरो सा, जस्टिस अहलूवालिया का विदाई समारोह

Nizam Kantaliya Published Date 2019/05/30 04:14

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश कवंलजीतसिंह अहलूवालिया आज सेवानिवृत हो गये. जस्टिस अहलूवालिया की सेवानिवृति पर राजस्थान हाईकोर्ट में विदाई रेफरेंस का आयोजन किया गया. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कक्ष में आयोजित हुए इस समारोह ने हाईकोर्ट के इतिहास की कई घटनाओं को पिछे छोड़ दिया है. राजस्थान हाईकोर्ट में ये किसी जज का ऐसा पहला विदाई रेफरेंस रहा जिसमें देश के अलग अलग हाईकोर्ट के जजों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट दो सिटिंग जज भी मौजुद रहे. जस्टिस अहलूवालिया के इस विदाई समारोह का ऐसा समा बंधा कि करीब डेढ़ घण्टे तक चले समारोह में 44 बार जमकर तालिया बजी.

हुकुम खम्माघणी से की शुरूआत...
हुकुम खम्मागणी, हुकुम धोक दे रह्यो हूँ,,, मारो मुजरो सा...कुछ ऐसे ही आत्मियता से भरे शब्दों से जस्टिस के एस अहलूवालिया ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपने अंतिम कार्यदिवस पर आयोजित विदाई समारोह को संबोधित किया. जस्टिस अहलूवालिया की सेवानिवृति पर उनके सम्मान में मुख्य न्यायाधीश कक्ष में आयोजित हुए इस समारोह में जस्टिस अहलूवालिया ने दिल खोलकर बातें की और राजस्थान से जुड़े अपने बेहतरीन अनुभवों को साझा किया. उन्होने राजस्थान की संस्कृति, यहां का खान पान, लोगों से मिले स्नेह, साथी जजों, अधिवक्ताओं और स्टाफ से लेकर जस्टिस अजय रस्तोगी के पारिवारिक संबंधों को भी अपने चुटिले अंदाज में बयां करते हुए सभी का आभार जताया.

पहला मौका जब सुप्रीम कोर्ट जज भी रहे मौजूद
राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस के एस अहलूवालिया को सबसे लोकप्रिय जज के रूप में देखा जाता है. यही कारण है उनकी सेवानिवृति के मौके पर आयोजित इस समारोह में मुख्य न्यायाधीश कक्ष पूरी तरह से भर गया. वहीं उनके सम्मान जताने के लिए देशभर से उनके करीब मित्र, जज और पारिवारिक सदस्य भी खासतौर से समारोह के लिए जयपुर पहुंचे. राजस्थान हाईकोर्ट के इतिहास में किसी जज के विदाई समारोह का यह पहला मौका था जब विदाई रेफरेसं में ना केवल राजस्थान हाईकोर्ट के सिटिंग जज बल्कि देश के सर्वोच्च न्यायालय से लेकर अन्य हाईकोर्ट के सिटिंग जज भी मौजुद रहे. सुप्रीम कोर्ट जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस इंदिरा बनर्जी खास तौर सपरिवार इस समारोह में मौजुद रहे. वहीं कलकत्ता, केरल, गुजरात और पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से भी कई सिटिंग जज और जस्टिस अहलूवालिया के परिजन मौजुद रहे. समारोह में मुख्य न्यायाधीश के साथ जस्टिस मोहम्मद रफीक, जस्टिस सबीना, जस्टिस आलोक शर्मा, जस्टिस संदीप मेहता, जस्टिस वी एस सिराधना जस्टिस प्रकाश गुप्ता, जस्टिस एस पी शर्मा, जस्टिस महेन्द्र माहेश्वरी, जस्टिस जी आर मूलचंदानी, जस्टिस पंकज भण्डारी, जस्टिस अशोक गौड़, जस्टिस इंद्रजीत सिंह, जस्टिस गोवेर्धन बारधार, जस्टिस नरेंद्रसिंह ढड्ढा रेफरेन्स मौजुद रहे. वहीं पूर्व न्यायाधिशों में जस्टिस महेशचन्द्र शर्मा, जस्टिस जे के रांका, जस्टिस के एस राठौड़, जस्टिस दलीपसिंह भी मौजुद रहे.

किसने क्या कहा... 

जस्टिस एस रविन्द्र भट्टट, मुख्य न्यायाधीश राजस्थान- जस्टिस के एस अहलूवालिया एक बेहतरीन दोस्त होने के साथ साथ एक नेकदील इंसान है ये जहां भी रहते है अपनी मुस्कान से सभी का दिल जीत लेते है. मैं उम्मीद करता हॅू कि जस्टिस अहलूवालिया ऐसे ही अपना प्यार लोगो में बाटते रहेंगे.

महेन्द्रसिंह सिंघवी, महाधिवक्ता राजस्थान सरकार- जोधपुर और जयपुर में सिटिंग के दौरान जस्टिस अहलूवालिया की बैंच का गवाह रहा हॅू कि कभी वकील अपने केस में एडजॉर्नमेंट लेते हो. राजस्थान में जज के रूप में उन्होंने करीब 34 हजार से अधिक हत्या से जुड़ी अपीलों का निस्तारण किया है जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. वहीं खण्डपीठ में 2 हजार से अधिक अपीलों का निस्तारण किया है. आसाराम बापू केस, छबड़ा थर्मल पांवर प्लांट केस, ममता स्वामी केस, बनवाली लाल कुशवाहा केस में दिये गये उनके फैसले हमेशा नजीर की तरह याद किये जायेंगे.

चिरंजीलाल सैनी, चैयरमेन राजस्थान बार काउंसिल- जस्टिस के एस अहलूवालिया हमारे लिए एक रिश्तेदार की तरह भी है राजस्थान से उनका जुड़ाव ना वो अलग कर सकते है ना हम अलग कर सकते है. युवा अधिवक्ताओं के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में सबसे बड़े पक्षकार उनके मार्गदर्शक है. कई युवा अधिवक्ता उनकी अदालत से आज पेशेवर हो चुके है. फौजदारी के मेरूदण्ड की तरह रहे. अधिवक्ताओं के लिए सबसे अधिक लोकप्रिय ना केवल व्यवहार में बल्कि फैसलो के लिए समान रूप से लोकप्रिय रहे.

अनिल उपमन, अध्यक्ष राजस्थान हाईकोर्ट बार अध्यक्ष- एक जज के रूप में खड्डा बस्ती जैसे केस में 10 हजार लोगों को शांतिपूर्वक दूसरे स्थान पर शिफ्ट करा दिया. राजस्थान में जज रहते हुए करीब 2076 खण्डपीठ की अपीले निस्तारित की है जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. अधिवक्ताओं में इसलिए भी खासे लोकप्रिय थे क्योकि  अपनी मिठास से ही अधिवक्ता को शांत कर देते है.

राजेश कर्नल, अध्यक्ष दी बार एसोसिएशन जयपुर- एक हाईकोर्ट जज होते हुए हम अधिवक्ता उन्हे प्यार से प्रधानजी कहते रहे है. ये उनका आत्मीय स्वभाव है जो एक डॉक्टर की तरह आधा काम उनका व्यवहार ही कर देता था. बार और बैंच के बीच रिश्तों को मजबूत करने के लिए हमेशा जस्टिस अहलूवालिया एक प्रेरणास्रोत बने रहेंगे.
 

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