राजस्‍थान में अनाथ, उपेक्षित बच्चों की देखरेख के लिए सामूहिक देखरेख योजना

राजस्‍थान में अनाथ, उपेक्षित बच्चों की देखरेख के लिए सामूहिक देखरेख योजना

राजस्‍थान में अनाथ, उपेक्षित बच्चों की देखरेख के लिए सामूहिक देखरेख योजना

जयपुरः राजस्‍थान में अनाथ व उपेक्षित बच्चों की देखरेख, संरक्षण और पुनर्वास के लिए जिला स्तर पर सामूहिक देखरेख योजना शुरू की जाएगी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अभिनव पहल करते हुए सभी जिला मुख्यालयों पर एनजीओ व नागरिक समाज के समन्वय से ‘गोराधाय ग्रुप फोस्टर केयर योजना’ के संचालन को मंजूरी दी है.

बजट 2021-22 में घोषित योजना के दिशा-निर्देशों का अनुमोदनः
एक सरकारी बयान के अनुसार गहलोत ने राज्य बजट 2021-22 में घोषित इस योजना के दिशा-निर्देशों का अनुमोदन कर दिया है. योजना के तहत, 0-18 वर्ष आयुवर्ग के ऐसे बालक-बालिकाएं, जिन्हें लम्बे समय तक परिवार आधारित देखरेख की आवश्यकता है, लाभान्वित होंगे. बयान के अनुसार समेकित बाल संरक्षण सेवाएं (आईसीपीएस) योजना के अंतर्गत गठित जिला बाल संरक्षण इकाई संबंधित क्षेत्र में स्वयं सेवी संस्थानों को सेवा प्रदाता के रूप में चिन्हित व चयनित करके जिला बाल कल्याण समिति को अनुशंसा भेजेगी, जिसके आधार पर संस्थान को बच्चों की देखरेख के लिए मान्यता दी जाएगी.

बालकों की देखरेख और संरक्षण आदर्श अधिनियम-2016 सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत देय होगी सुविधाएंः
प्रस्तावित योजना में जिला बाल कल्याण समिति द्वारा बच्चों की देखरेख के लिए स्वयंसेवी संस्थान अथवा सेवा प्रदाता को शुरूआत में तीन वर्ष के लिए मान्यता देने का प्रावधान है. यह अवधि संस्थान की कार्यशैली और योजना के लिए अनुकूलता के आधार पर आगामी तीन वर्ष तक बढ़ाई जा सकेगी. इस विषय में बाल कल्याण समिति का निर्णय अंतिम होगा. पोष्य बच्चों को किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) आदर्श अधिनियम-2016 सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत सुविधाएं देय होंगी.

बाल संरक्षण इकाई की ओर से दी जाएगी वित्तीय सहायताः
योजना के प्रस्ताव के अनुसार, एक ग्रुप फोस्टर केयर में अधिकतम आठ बच्चे रखे जा सकेंगे. संचालक संस्थान को बच्चों के पालन-पोषण हेतु बाल संरक्षण इकाई द्वारा वित्तीय सहायता दी जाएगी. पोषण, वस्त्र, शिक्षण-प्रशिक्षण एवं दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु प्रति बालक अथवा बालिका 4 हजार रुपए तथा दो देखभाल कर्ताओं को मानदेय या पारिश्रमिक के रूप में प्रति देखभाल कर्ता 20 हजार रुपए प्रतिमाह देय होंगे. साथ ही, विविध व्यय हेतु 10 हजार रुपए प्रतिमाह वित्तीय सहायता दी जाएगी.
सोर्स भाषा

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