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गहलोत मंत्रिमंडल विस्तार पर गंभीर संशय, विस्तार से पहले सरकार को हासिल करना होगा विश्वासमत!

जयपुर: राजस्थान में लगातार चल रहे सियासी उठापटक के बीच गहलोत मंत्रिमंडल विस्तार पर अभी गंभीर संशय बरकरार है. जानकार सूत्रों ने इसको लेकर संकेत दिए हैं. मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सरकार को विश्वासमत हासिल करना होगा. इसके लिए विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करना होगा. ऐसे में अब संभवत: इसके बाद ही मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है. 

कांग्रेस के बगावती विधायकों को सदस्यता खत्म करने का नोटिस जारी, 17 जुलाई तक जवाब प्रस्तुत करने की कही बात 

गवर्नर के औपचारिक फैसले का इंतजार: 
इसके लिए मंगलवार को गुलाबचंद कटारिया-सतीश पूनिया-राजेंद्र राठौड़ और हनुमान बेनीवाल ने एक स्वर में मांग की थी. गहलोत सरकार को पहले ही बहुमत साबित करना चाहिए और इसके बाद ही मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार करें. कल पायलट समर्थक विधायकों ने भी ऐसी ही मांग की थी. अब हर किसी को गवर्नर कलराज मिश्र के औपचारिक फैसले का इंतजार है. 

गहलोत नाराज विधायकों को साधने में जुट गए: 
दूसरी ओर सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त करने के बाद अब अशोक गहलोत नाराज विधायकों को साधने में जुट गए हैं. सूत्रों के अनुसार, नए घटनाक्रम में अशोक गहलोत अब 16 जुलाई को मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं. इसमें उन विधायकों को जगह मिल सकती है, जो नाराज हैं. 

प्रदेश में जल्द होगा मंत्रिमंडल फेरबदल-विस्तार ! दो डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा 

मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि मैंने सभी के काम किए:  
मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि मैंने सभी के काम किए है, जो मांगा सभी को देने की कोशिश की है. उसके बाद भी बीजेपी के साथ हॉर्स ट्रेडिंग की बात आई. पार्टी तोड़ने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है. जो गए हैं, उन पर बहुत बड़ा प्रेशर है, जो फैसला जनता द्वारा दिया गया है, वह हमारे लिए शिरोधार्य है. 


 

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VIDEO: ऑपरेशन मिसिंग टाइगर पर सबसे बड़ा खुलासा, 10 साल में 30 बाघ हुए लापता, लेकिन जिम्मेदारों ने मूंद ली आंखें

जयपुर: रणथंभौर को बाघों की नर्सरी बता दंभ भरने वाला जंगलात महकमा मिसिंग टाइगर्स को लेकर कठघरे में है. एक दशक में एक एक करके 30 बाघ लापता हो गए लेकिन वन विभाग मौन रहा.कौन सा बाघ कब गायब हुआ? इसे लेकर फर्स्ट इंडिया न्यूज़ कर रहा है आज सबसे बड़ा खुलासा.पेश है बाघों के लापता होने की रहस्यमय दास्तान सिर्फ और सिर्फ फर्स्ट इंडिया न्यूज़ पर.

जब सारे बाघ खत्म हो जाएंगे तो पर्यटकों को दिखाओगे क्या? :
राजस्थान में कितने बाघ लापता है इसपर 1st इंडिया न्यूज़ की पड़ताल के बाद सामने आया है कि पिछले वर्ष की एक गोपनीय रिपोर्ट के मुताबिक वास्तव में 25 से ज्यादा बाघ लापता हैं, जिनमें से कुछ के मर या मारे जाने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है. राजस्थान में फिलहाल 3 टाइगर रिज़र्व हैं. सरिस्का, रणथंभौर और मुकुंदरा.  यह प्रोजेक्ट टाइगर के तहत बाघों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन टूरिज्म से होती इनकम के आगे इनकी सुरक्षा फीकी पड़ती दिखाई दे रही है लेकिन विभाग को यह समझ नहीं आ रहा है कि जब सारे बाघ खत्म हो जाएंगे तो पर्यटकों को दिखाओगे क्या? 

तो आइए... बात करते हैं राजस्थान में 10 सालों के भीतर मिसिंग टाइगर्स की.

1. सरिस्का से कुछ वर्ष पहले एसटी 5 बाघिन लापता हुई थी जिसका शिकारियों द्वारा शिकार कर लिया गया.

2. उम्रदराज़ बाघिन T-14 दिसंबर 2010 से रणथंभौर से लापता.

3. बाघिन T-17 सुंदरी मार्च 2013 से रणथंभौर से लापता (संभवतः शिकार कर लिया गया)

4. रेडियो कॉलर टी-21 बाघ रणथंभौर से वर्ष 2010 से लापता. 

5. टी-22 नागडी फीमेल वर्ष 2015 से रणथंभौर से लापता.

6. टी-26 खातोला फीमेल वर्ष 2015 से रणथंभौर से लापता. 

7. टी-27 गिलासागर फीमेल वर्ष 2010 से रणथंभौर से लापता. 

8. टी-29 मंडूप मेल बाघ वर्ष 2010 से रणथंभौर से लापता. 

9. टी-31 इंडाला फीमेल वर्ष 2013 से रणथंभौर से लापता.

10. टी-40 बेरधा नर शावक वर्ष 2010 से रणथंभौर से लापता.

11. टी-42 फतेह पिछले कुछ समय से रणथंभौर से लापता.

12. टी-43 भैरोंपुरा मेल 2015 से रणथंभौर से लापता.

13. टी-47 मोहन कुछ समय पहले से रणथंभौर से लापता.  

14. टी-49 शावक वर्ष 2011 से रणथंभौर से लापता.

15. टी-50 शावक वर्ष 2011 से रणथंभौर से लापता. 

16. टी-53 किला खंडार फीमेल , वर्ष 2014 से रणथंभौर से लापता. 

17. टी-55 भीड़ नर बाघ वर्ष 2014 से रणथंभौर से लापता.

18. टी-67 दर्रा फीमेल शावक 2013 से रणथंभौर से लापता.

19. टी-68 दर्रा नर शावक 2013 से रणथंभौर से लापता.

20. टी-70 गिलासागर फीमेल शावक नम्बर 2 रणथंभौर से 2014 से लापता.

21. टी-71 रणथंभौर से लापता.

22. टी-76 चिरौली टी 41 का शावक वर्ष 2014 से रणथंभौर से लापता.

23. टी-88 कालिया बाघ झूमरबावड़ी रणथंभौर से लापता.

24. टी-90 फीमेल शावक टी-30 की रणथंभौर से मां की मौत के बाद से लापता.

25, 26 : टी-39 नूर के दो नर शावक कालू और धोलू रणथंभौर से लापता.

27. T-92  रणथंभौर से लापता.

28. एमटी-1 नर बाघ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिज़र्व से लापता.

29. एमटी-2 का एक शावक मुकुंदरा से लापता.

30. एमटी-4 का एक शावक मुकुंदरा से लापता (एमटी 4 का एक शावक कैमरा ट्रैप में आ गया था जबकि ग्रामीण इसके 2 शावक बता रहे थे)

वन विभाग लगा लीपापोती करने और मामले को दबाने में:
तो रणथंभौर, मुकुंदरा और सरिस्का तीनों टाइगर रिज़र्व से बाघ लापता क्या हुए वन विभाग लग गया लीपापोती करने व मामले को दबाने में. अब जब गुप्त सूत्रों से लापता बाघों की जानकारी सामने आ गई है तो वन महकमे को. जवाब तो देना पड़ेगा. राजस्थान में बाघों की वर्तमान हालात को देखते हुए सबसे पहला सवाल टाइगर मॉनिटरिंग पर खड़ा होता है उसके बाद सवालों की लंबी फेहरिस्त है.

1. जब सभी टाइगर रिज़र्व में बेहतरीन टाइगर मोनिटरिंग और ट्रेकिंग का हवाला दिया जाता है तो इतने बाघ गायब कैसे हो गए ?

2. क्या करोड़ों रुपए का एन्टी पोचिंग और सरवेलांस सिस्टम फेल हो गया? 

3. क्या कैमरा ट्रैप मोनिटरिंग भी कारगर सिद्ध नहीं हो रही ?

4. क्या टाइगर प्रोटेक्टक्शन फ़ोर्स के गठन में कोई कमी रह गई?

5. क्या अधिकारियों का पूरा फोकस टूरिज्म पर है टाइगर की सुरक्षा पर नहीं ? 

6. क्या बाघ को लापता बता कर इतिश्री कर ली जाती है और उसे ढूंढने के प्रयासों को ताक पर रख दिया जाता है ? 

7. बड़ा सवाल क्या ये खेल केवल नौकरी बचाने के लिए खेला जाता है? 

8. टाइगर्स की मौत औऱ लापता होने की रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?

9. क्यों नहीं स्टेट वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल बयूरो का गठन किया जाता है? क्यों नहीं एडवाइजरी कमेटी में वन्यजीव मामलों के जानकार एवं अनुभवी लोगों को जगह नहीं दी जाती?

10 क्यों 33 जिलों में मानद वन्यजीव प्रतिपालकों की नियुक्तियां बीते सात वर्षों से नहीं की जाती जबकि वाइल्डलाइफ प्रोटेक्टक्शन एक्ट में इसका प्रावधान है।

11. क्यों नहीं कुंभलगढ़, रामगढ़, विषधारी और धौलपुर में नए टाइगर रिज़र्व की स्थापना की जाती है ? कुंभलगढ़ की फ़ाइल सी.एमओ तक पहुंचने पर भी इसे आगे क्यों नहीं बढ़ाया जाता है ? 

12. अहम सवाल क्या अधिकारी किसी राजनैतिक अथवा तथाकथित होटल या माइनिंग लॉबी के दबाव में काम कर रहे हैं ?

13. क्या वन मंत्री जी वन महकमे को ठीक तरीके से संभाल नहीं पा रहे ?

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बरहाल वन विभाग को इन सब सवालों का न केवल जवाब देना पड़ेगा वरुण एक नजीर भी पेश करनी होगी जिम्मेदार अफसरों पर कठोर कार्रवाई करके. अब देखना होगा फर्स्ट इंडिया न्यूज़ के खुलासे के बाद सरकार गैर जिम्मेदार अफसरों पर क्या कार्रवाई करती है और मिसिंग टाइगर्स को लेकर क्या सीबीआई जैसी एजेंसीय से उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी.

BJP नेताओं पर सीएम गहलोत का पलटवार, कहा-महामारी के दौर में नकारात्मक राजनीति से बाज आये भाजपा

 BJP नेताओं पर सीएम गहलोत का पलटवार, कहा-महामारी के दौर में नकारात्मक राजनीति से बाज आये भाजपा

जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी के प्रादेशिक नेताओं पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को उन्हें इससे बाज आने को कहा. सीएम गहलोत के मुताबिक राज्य की कांग्रेस सरकार की स्थिरता व भविष्य को लेकर भाजपा नेताओं के बयान उनकी लोकतंत्र विरोधी सोच को दिखाते हैं.

BJP नेताओं ने बनाया प्रदेश में नकारात्मक राजनीति का माहौल:
मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा कि पिछले दिनों में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश में नकारात्मक राजनीति का माहौल बनाया हुआ है. वैश्विक महामारी के दौर में जहां राजस्थान सरकार पक्ष, विपक्ष और समाज के सभी तबकों को साथ लेकर काम कर रही है वहीं भाजपा नेताओं के बयान राज्य में राजनीति का स्तर गिराने वाले हैं. उनके मुताबिक भाजपा नेताओं ने पिछले दिनो में राजस्थान सरकार के कोरोना प्रबंधन और सरकार के भविष्य को लेकर अनर्गल बयानबाजी की है और उनकी इस नकारात्मक राजनीति से जनता में विपक्ष के प्रति रोष का माहौल पैदा हुआ है.

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BJP की लोकतंत्र विरोधी सोच उजागर:
गहलोत के मुताबिक बीते दिनों राजस्थान भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने बयान दिये हैं कि आने वाले समय में राजस्थान में सरकार गिर जायेगी. नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि राजस्थान में छह महीने में सरकार गिर जायेगी. केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि राजस्थान में सरकार डगमगाने लगी है. वहीं एक सांसद ने कहा कि पैसे के खातिर विधायक सरकार को छोड़कर कभी भी जा सकते हैं. गहलोत के अनुसार ये सभी बयान भाजपा की लोकतंत्र विरोधी सोच को उजागर करते हैं.

राजस्थान की सरकार को अस्थिर करने का प्रयास:
गहलोत ने कहा है, भाजपा नेताओं के इन बयानों से यह स्पष्ट होता है कि भाजपा धनबल और बाहुबल के आधार पर राजस्थान की सरकार को अस्थिर करने के प्रयास कर रही है. भाजपा ने पहले भी ऐसे प्रयास किये लेकिन कांग्रेस विधायकों की एकजुटता और प्रतिबद्धता के चलते इन्हें मुंह की खानी पड़ी.(भाषा)

सीएम गहलोत बोले, हर व्यक्ति ले अंगदान का संकल्प, समाज में भ्रांतियां दूर कर बनाएं जन आन्दोलन

 सीएम गहलोत बोले, हर व्यक्ति ले अंगदान का संकल्प, समाज में भ्रांतियां दूर कर बनाएं जन आन्दोलन

जयपुर: प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि अंगदान एक पुनीत कार्य है. एक व्यक्ति के अंगदान से कई लोगों के जीवन को बचाया जा सकता है. सीएम गहलोत ने कहा कि अंगदान को लेकर समाज में भ्रांतियों को दूर कर इसे जन आंदोलन का रूप देने की आवश्यकता है और हर व्यक्ति को अंगदान का संकल्प लेना चाहिए. सीएम गहलोत शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अंगदान दिवस के अवसर मोहन फाउण्डेशन जयपुर सिटीजन फोरम (एमएफजेसीएफ) के तत्वावधान में जयपुर में बनाए गए अंगदाता स्मारक के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे.

50 हजार लोगों को हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत:
गहलोत ने कहा कि भारत में वर्तमान में अंगदान की दर प्रति दस लाख जनसंख्या पर मात्र 0.08 ही है, जबकि स्पेन में यह 35.01, अमरीका में 21.9, ब्रिटेन में 15.5 प्रति मिलियन है. देश में हर साल करीब दो लाख लोगों को किडनी, इतने ही लोगों को लिवर तथा 50 हजार लोगों को हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है. अंगदान के प्रति जागरूकता में कमी के कारण बहुत कम लोगों में ही अंग प्रत्यारोपित हो पाते हैं. उन्होंने कहा कि हमें अंगदान तथा अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में और अधिक समर्पित भाव से कार्य करने की आवश्यकता है.

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ऑर्गन ट्रांसप्लांट की दिशा में हर संभव प्रयास:
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं. सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में पिछले साल मानव अंग एवं उतक प्रत्यारोपण केन्द्र तथा कार्डियोथोरासिक हृदय प्रत्यारोपण ऑपरेशन थिएटर एवं गहन चिकित्सा इकाई का उदघाटन किया गया था. यह केन्द्र लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करने का भी काम कर रहा है. सीएम गहलोत ने इस अवसर पर स्मारक से संबंधित पोस्टर का विमोचन किया. उन्होंने प्रदेश में अंगदान के प्रति सामाजिक जागरूकता लाने के लिए जयपुर सिटीजन फोरम के चैयरमेन राजीव अरोडा तथा एमएफजेसीएफ की कन्वीनर भावना जगवानी की सराहना करते हुए कहा कि यह स्मारक आमजन में अंगदान के प्रति प्रेरणा जगाने तथा पीड़ित मानवता की सेवा का वातावरण तैयार करने में सहायक सिद्ध होगा.

अंगदान के लिए प्रोत्साहित करना आसान कार्य नहीं :
समारोह की अध्यक्षता करते हुए नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि सामाजिक मान्यताओं के कारण लोगों को अंगदान के लिए प्रोत्साहित करना आसान कार्य नहीं है, लेकिन ऎसी संस्थाओं के प्रयासों से इस नेक काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि अंगदान तथा अंग प्रत्यारोपण चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऎसी क्रांति है जिससे लोगों के जीवन को बचाया जा सकता है. एक ब्रेन डेड घोषित व्यक्ति के शरीर से कॉर्निया, किडनी, लिवर, दिल, पैंक्रियाज, फेफडे, हार्ट वाल्व का प्रत्यारोपण कर लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है.

अंगदान को मनाया जाना चाहिए उत्सव के रूप में:
जयपुर ग्रेटर मेयर सौम्या गुर्जर ने कहा कि अंगदान को उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए. जयपुर सिटीजन फोरम के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री की प्रेरणा से जयपुर में भारत का पहला अंगदान स्मारक बन सका है. उन्होंने कहा कि राजस्थान ऎसा पहला राज्य है जहां ड्राइविंग लाइसेंस पर अंगदाता होने का चिन्ह अंकित करना प्रारंभ किया गया है. यह अपने आप में बड़ी पहल है. उन्होंने कहा कि राजस्थान पूरे उत्तर भारत में अंगदान के क्षेत्र में आगे आने वाला प्रमुख राज्य बन गया है.

घोड़ी चढ़े दूल्हे का कटा चालान ...जानिए पूरी खबर

घोड़ी चढ़े दूल्हे का कटा चालान ...जानिए पूरी खबर

जयपुर: शहनाई की गूंज देवउठनी एकादशी से शुरू हो गई, लेकिन कोरोना की वजह से अब शादियों की रौनक फिकी नजर आ रही हैं. अब शादी समारोह में कोरोना की वजह से मेहमानों की संख्या राज्य सरकार ने तय कर दी हैं. साथ ही शादी समारोह में कोरोना गाइडलाइन का पालन करना होगा. शादी समारोह की ऑनलाइन सूचना देनी होगी. पहले की शादियों की अलग बात थी, लेकिन जब महामारी का दौर चल रहा है, तो शादी समारोह में सावधानियां भी जरूरी हैं.

शहनाई की गूंज में कार्रवाई की गूंज:
सरकार की ओर से शादी समारोह में कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन करने पर जुर्माना तय किया गया हैं. अब शहनाई की गूंज में प्रशासन की कार्रवाई की गूंज भी सुनाई दे रही हैं. ताजा मामला प्रदेश की राजधानी जयपुर का हैं, जहां पर दूल्हे राजा का 4 हज़ार का चालान कट गया. बात ये थी कि दूल्हे राजा शादी में बिना मास्क नजर आये. 

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दूल्हे का कटा 4 हजार रुपए का चालान:
फिर क्या था दूल्हे का 4 हज़ार रुपए का चालान कट गया. आपको बता दें कि प्रशासन की शादी समारोह पर पैनी नजर हैं, क्योंकि सबसे ज्यादा कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन वहीं होता हैं. इसलिए शादी पार्टियों में प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी नजरें बनाए हुए हैं. जब नगर निगम की टीम एक शादी समारोह में पहुंची तो वहां पर दूल्हा बिना मास्क के नजर आया. तो नगर निगम की टीम ने दूल्हे का 4 हज़ार का चालान कर दिया. ग्रेटर मेयर सौम्या गुर्जर के आदेश के बाद निगम सक्रिय हुआ. 

100 से ज्यादा लोग नहीं हो सकते शामिल:
गौरतलब हैं कि राजस्थान में होने वाली शादी में अब ज्यादा से ज्यादा 100 लोग ही शामिल हो सकते हैं. अगर इसकी संख्या बढ़ती है 25 हजार के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अधिकारियों को शादियों जैसे किसी भी कार्यक्रम में 100 से अधिक लोगों के जमा होने पर जुर्माना राशि को 10,000 से बढ़ाकर 25,000 करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा, उन्होंने अधिकारियों से वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सभी दिशा-निर्देशों और आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है.

जयपुर में हाईटेंशन लाइन के टकराने से निजी बस में लगी आग, 3 यात्रियों की मौत, 5 झुलसे

जयपुर: राजधानी जयपुर के अचरोल थाना इलाके में आज सुबह एक भीषण अग्निकांड हो गया. यहां एक निजी बस हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गयी. इससे बस में करंट दौड़ने से आग लग गई. जब तक आग को काबू किया जाता और बस में सवार सवारियों को बाहर निकाला जाता तब तक तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और पांच यात्री झुलस गये. 

हादसे की शिकार हुई निजी बस दिल्ली से जयपुर जा रही बताई जा रही है. हादसा करीब साढ़े ग्यारह बजे हुआ. करंट लगने से झुलसी सवारियों को दिल्ली रोड स्थित निम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 

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मौके पर पहुंची पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ के आधार पर बताया कि अचरोल क्षेत्र के नजदीक एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त सड़क के बीच पडा था. उसे हटाने के लिए क्रेन मशक्कत कर रही थी. इसी दौरान बस वहां से गुजरी. लेकिन रोड पर कम जगह होने के कारण बस चालक ने बस को बैक लिया और बैग लेते समय बस कच्ची सड़क पर उतर गई. बस चालक उस पर काबू कर पाता इससे पहले ही बस पीछे से पिछले के पोल पर जा टकराई. बस के टकराते ही बस के उपर ग्यारह हजार केवी का तार टूटकर गिया गया और देखते ही देखते बस में आग लग गई. पुलिस और विद्युत विभाग की टीम जब तक पहुंच पाती तीन लोगों की मौत हो चुकी थी. 


 

अब आखिर क्या होगा सचिन पायलट कैंप के मुद्दों के निपटारे का? अहमद पटेल के चले जाने के बाद अब पूरी पार्टी में अनिश्चितता

जयपुर: वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद अहमद पटेल के निधन के बाद अब पूरी कांग्रेस पार्टी में अनिश्चितता का माहौल है. अगर राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो सबसे बड़ा सवाल तो यह खड़ा होता है कि अब आखिर क्या होगा पायलट कैंप के मुद्दों के निपटारे का? ऐसे में अब माना जा रहा है कि अहमद पटले के निधन के बाद 3 सदस्य कमेटी का भी अब पुनर्गठन होगा. अहमद भाई के स्थान पर किसी नए वरिष्ठ नेता का चयन होगा. फिलहाल गांधी परिवार में एक VACUUM बन गया है. 

मंत्रिमंडल फेरबदल के प्रस्ताव अहमद भाई के समय ही तैयार हो चुके थे: 
अलबत्ता मंत्रिमंडल फेरबदल के प्रस्ताव अहमद भाई के समय ही तैयार हो चुके थे और इन प्रस्तावों पर केवल सोनिया की मंजूरी का इंतजार था. इन प्रस्तावों के अनुसार 15 विधायकों को संसदीय सचिव और 10 विधायकों को निगमों और बोर्डों में चेयरमैन बनना था. इसके साथ ही नए मंत्रियों की लिस्ट में आधा दर्जन से ज्यादा नाम थे. इनमें महेश जोशी, हेमाराम चौधरी, बृजेंद्र ओला, रामलाल जाट, राजेंद्र गुढ़ा, महेंद्र चौधरी, संयम लोढ़ा और मुरारी मीणा के नाम शामिल थे. 

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मंत्री अशोक चांदना का भी प्रमोशन होना था:
इसके साथ ही पायलट कैंप के दो पुराने बर्खास्त विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा की मंत्री पद पर वापसी होनी थी. साथ ही दीपेंद्र सिंह शेखावत, दानिश अबरार, रोहित बोहरा का भी मंत्री बनना लगभग तय था. वहीं मंत्री अशोक चांदना का भी प्रमोशन होना था. चांदना को अपनी परफॉर्मेंस के लिए पुरस्कार मिलना था. दूसरी ओर 2-3 नॉन परफॉर्मर मंत्रियों की भी छुट्टी होनी थी. लेकिन अब अहमद पटेल के चले जाने के बाद सबकुछ उल्टा-पुल्टा हो गया. अब मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों पर नए सिरे से पूरी कवायद होगी और नए समीकरण बनेंगे. इन नए 'समीकरणों' से पायलट कैंप उत्साहित है. उन्हें अब ज्यादा महत्व मिलने की उम्मीद है. लेकिन अंततः राजस्थान में सब कुछ सीएम गहलोत की इच्छा से ही होगा. क्योंकि एक तरह से कांग्रेस ने राजस्थान को गहलोत को ठेके पर दे रखा है और ऐसे में सरकार और संगठन में भी आज केवल गहलोत की ही आवाज सुनाई देती है.  

मंत्री बनने के इच्छुक और खासतौर पर पायलट कैंप के लोगों में बेचैनी: 
अलबत्ता थोड़ा बहुत SAY अजय माकन का जरूर है. फिलहाल अजय माकन भी एक तरह से दिल्ली में अपने घर में ही कैद हैं. खुद एक माह तक कोरोना से पीड़ित रहने के बाद उनकी पत्नी और पुत्र भी कोरोना संक्रमित हुए हैं और इसलिए माकन का पूरा फोकस परिवार की देखभाल पर है. अब इन सारे हालातों के चलते मंत्री बनने के इच्छुक और खासतौर पर पायलट कैंप के लोगों में बेचैनी है. दूसरी ओर राजस्थान के हालात पर भाजपा आलाकमान की पूरी नजर है. क्योंकि अब महाराष्ट्र और राजस्थान की गैर भाजपा सरकारें निशाने पर है.  

 


 

पड़ोस में रहने वाले युवक ने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर युवती से किया देह शोषण, गिरफ्तार

पड़ोस में रहने वाले युवक ने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर युवती से किया देह शोषण, गिरफ्तार

जयपुर: राजधानी के रेनवाल थाना इलाके के हरनाथपुरा गांव में एक युवती को कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर देह शोषण करने का मामला सामने आया है. थाना प्रभारी कैलाश चंद मीणा ने बताया कि हरनाथपुरा गांव की एक युवती जिसके पड़ोस में रहने वाला राजेन्द्र वर्मा नाम का एक युवक उसे कोल्डड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ देह शोषण किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दे डाली.

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अश्लील फोटो वायरल करने की धमकियां देकर करता रहा देह शोषण:
उन्होंने बताया कि आरोपी राजेन्द्र वर्मा पीड़िता की अश्लील फोटो वायरल करने की धमकियां देकर लगातार उससे 2 वर्ष तक देहशोषण का शिकार करता रहा. आखिकार पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर अपनी मां को आपबीती सुनाई जिसके बाद मां अपनी बेटी को रेनवाल थाने लेकर पहुंची और आरोपी राजेन्द्र वर्मा के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया. इधर पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज कर आरोपी युवक को गिरफ्तार लिया और मामलें की गहनता से जांच शुरू कर दी. 

MLA पॉवरफुल! निकाय चुनाव टिकट चयन में भी चली कांग्रेस के विधायकों की

MLA पॉवरफुल! निकाय चुनाव टिकट चयन में भी चली कांग्रेस के विधायकों की

जयपुर: निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस की रणनीति साफ है. जनप्रतिनिधियों के भरोसे पर कांग्रेस ने टिकट वितरण को अमली जामा पहना दिया है. एक बार फिर कांग्रेस में जनप्रतिनिधियों की ही टिकट वितरण में चली है. विधायकों की बल्ले-बल्ले है प्रभारी अपने हाल पर.

निकाय चुनाव में भी जनप्रतिनिधियों के कहने से ही टिकट बांटे गए: 
जयपुर, जोधपुर और कोटा के निगम चुनाव में कांग्रेस में जनप्रतिनिधियों के कहने से ही टिकट बांटे गए ठीक वैसे ही परिपाटी 21 जगह होने वाले निकाय चुनाव को लेकर भी कमोबेश अपनाई गई. प्रदेश कांग्रेस ने टिकट टिकट चैन और वितरण को लेकर प्रभारी भी बनाए लेकिन मोटे तौर पर जिम्मा जनप्रतिनिधियों पर ही छोड़ दिया गया. एमएलए के कहने से टिकट वितरण को अंतिम रूप दे दिया गया, संगठन की कुछ खास नहीं चल पाई. 

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समर्थकों को टिकट देने में विधायकों की रुचि नजर आई:
लगता यही है की प्रदेश कांग्रेस ने बिना कोई जोखिम उठाएं जनप्रतिनिधियों को उनके कहे मुताबिक टिकट चयन में ताकतवर बना दिया. जनप्रतिनिधियों ने मनमर्जी के आधार पर टिकट बांटने के काम को अंतिम रूप दे दिया. समर्थकों को टिकट देने में विधायकों की रुचि नजर आई. जनप्रतिनिधि किसी प्रकार का कोई हस्तक्षेप चाहते भी नहीं थे. ये मन की बात उन्होंने जिला प्रभारियों को बता भी दी थी.

कांग्रेस में विधायकों की पूरी चवन्नी चल रही:
बीते कुछ महीनों से यह देखा जा रहा है कि कांग्रेस में विधायकों की पूरी चवन्नी चल रही है, स्थानीय संगठन पर भी वे हावी है. यूं कह सकते है कि विधायकों की पूरी चल रही है इसका कारण यह भी हो सकता है कि जिस तरह का घटनाक्रम कांग्रेस में कुछ दिनों पहले हुआ था उसके बाद से ही विधायकों की हर मांग को गंभीरता से सुना जा रहा है और जब बात खुद के क्षेत्र में चुनाव की हो तो फिर विधायक कहां पीछे रहने वाले है. 
...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट