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शत्रुघ्न सिन्हा ने इंदिरा गांधी से की प्रियंका की तुलना, कहा- पार्टी सुप्रीमो की कमान संभालें

शत्रुघ्न सिन्हा ने इंदिरा गांधी से की प्रियंका की तुलना, कहा- पार्टी सुप्रीमो की कमान संभालें

पटना: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने की मांग एक बार फिर तूल पकड़ने लगी है. दरअसल यूपी के सोनभद्र में हुए नरसंहार को लेकर प्रियंका ने जिस तरह से योगी सरकार के खिलाफ धावा बोला, उससे पार्टी के नेताओं को उनमें इंदिरा गांधी की झलक दिखाई देने लगी है. प्रियंका गांधी ने सोनभद्र में पीड़ित परिवारों से नहीं मिलने पर धरना दिया. इसके बाद पीड़ितों से उनकी मुलाकात कराई गई. प्रियंका के इसी तेवर को लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद शत्रुघ्न सिंहा ने कांग्रेस महासचिव की जमकर तारीफ की है. 

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की याद दिला दी: 
शत्रुघ्न सिन्हा ने आज एक के बाद एक कई ट्वीट कर लिखा कि प्रियंका ने उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की याद दिला दी. जिस तरह बेलछी मामले के दौरान इंदिरा गांधी हाथी पर सवार होकर पहुंची थीं, इस मामले में भी कुछ वैसा ही देखने को मिला है. अब उन्हें पार्टी सुप्रीमो की जिम्मेदारी संभाल लेनी चाहिए. 

पार्टी की कमान संभालने के सारे गुण मौजूद: 
इससे पहले भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नटवर सिंह ने प्रियंका गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग की थी. उन्होंने कहा था उनमें पार्टी की कमान संभालने के सारे गुण मौजूद हैं. इसके साथ ही उन्होंने आशंका जताई थी कि अगर कोई गैर-गांधी कांग्रेस का अध्यक्ष बना तो पार्टी 24 घंटे के अंदर बिखर जाएगी. 

योगी सरकार के खिलाफ किया था धरना-प्रदर्शन: 
गौरतलब है कि सोनभद्र में एक जमीनी विवाद के बाद 10 लोगों की हत्या कर दी गई थी. जिसके बाद प्रियंका गांधी की अगुवाई में कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर योगी सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया था. आखिरकार नरसंहार पीड़ितों के परिजन ही प्रियंका से मिलने आ गए. प्रियंका ने इस दौरान मृतकों के परिजनों को कांग्रेस की तरफ से 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की थी.

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जयपुर: प्रदेश में लगातार पैर पसार रहा कोरोना अब जनप्रतिनिधियों के लिए भी खतरा बनता जा रहा है. अजमेर दक्षिण से भाजपा विधायक अनीता भदेल भी कोरोना पॉजिटिव मिली है. कोरोना संक्रमण के लक्षण पाए जाने के बाद उन्होंने खुद को होम आइसोलेट कर लिया है. वहीं भदेल के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद भाजपाइयों में भी खलबली मच गई है. 

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2 दिन पहले भाजपा कार्यालय तक आयीं थीं अनिता भदेल: 
दरअसल, अनिता भदले 2 दिन पहले ही भाजपा कार्यालय तक आयीं थी. इसी बात को लेकर फिलहाल भाजपा प्रदेश कार्यालय में कई लोगों के चिंता की लकीरें हैं. सूत्रों की मानें तो दर्जनभर कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों से उनकी सामान्य मुलाकात हुई थी. हालांकि प्रेदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने मुलाकात नहीं हुई थी. लेकिन फिलहाल उनके संपर्क में आने वाला हर कोई खुद को क्वॉरंटीन कर रहा है. इससे पहले जितेन्द्र गोठवाल भी कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राजेंद्र राठौड़, रामचरण बोहरा, सुशील कटारा व अन्य लोगों से उनकी मुलाकात हुई थी. ऐेसे में उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने खुद की जांच भी करवाई है. सांसद रामचरण बोहरा भी जांच करवाएंगे. इससे पहले जितेन्द्र गोठवाल भी कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं. 

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कोरोना का शिकार होने वाली पहली जनप्रतिनिधि नहीं:
वहीं विधायक अनीता भदले से पहले भी कई जनप्रतिनिधि कोरोना की चपेट में आ चुके हैं. भदले से पहले पाली के सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक जोराराम कुमावत, पाली विधायक जेपी चंदेलिया और बाड़ी विधायक गिरिराज मलिंगा भी कोरोना की जद में आ चुके हैं. 

HARYANA : सीएम मनोहर लाल खट्टर ने की पीएम मोदी से मुलाकात, कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

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नई दिल्ली: हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर दिल्ली दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे. इस दौरान बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष और प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर अहम चर्चा हुई. मुख्यमंत्री खट्टर ने पहले ही प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का समय ले रखा था. जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष पद के नाम की घोषणा कर सकती है. 

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जेपी नड्‌डा से भी की थी मुलाकात:
हरियाणा में प्रदेशाध्यक्ष के नाम पर पेंच फंसा हुआ है. इससे पहले गुरुवार को सीएम मनोहर लाल खट्टर ने दिल्ली में ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा से मुलाकात की थी. सीएम खट्टर ने नए प्रदेशाध्यक्ष और बरौदा उप चुनाव को लेकर चर्चा की थी.

नई नियुक्तियों को लेकर भी हुआ गहन मंथन:
जानकारी के मुताबिक इसके अलावा प्रदेश में नई नियुक्तियों को लेकर गहन मंथन हुआ था. राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ बातचीत के बाद सीएम खट्टर ने कहा कि जल्द ही नए प्रदेशाध्यक्ष का ऐलान किया जाएगा. इसमें अब देरी नहीं होनी चाहिए. मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उन्होंने साफ किया कि फिलहाल ऐसी कोई योजना ही नहीं है. 

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राज्यसभा चुनाव के बाद परवान चढ़ती आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स, अब मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का आरोप

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जयपुर: राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के बाद भी आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स परवान चढ़ती नजर आ रही है. अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ भाजपा विधायक अशोक लाहोटी, सुभाष पूनिया, रामलाल शर्मा और निर्मल कुमावत ने विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया है. विधायकों ने इसको लेकर विधानसभा सचिव को पत्र सौंपा है. इस पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के भी हस्ताक्षर है. 

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मुख्यमंत्री के 35 करोड़ वाले बयान को किया गया कोट: 
ऐसे में अब आखिर विशेषाधिकार हनन बनता है या नहीं इस पर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को फैसला करना है. आरोप में मुख्यमंत्री के 35 करोड़ वाले बयान को कोट किया गया है. इस बारे में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कटारिया के कक्ष में एक बड़ी बैठक भी हुई है. 

संयम लोढ़ा ने सतीश पूनिया पर लगाया था विशेषाधिकार हनन का आरोप:
वहीं इससे पहले निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने भी बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया पर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया. लोढ़ा ने शिकायत में कहा है कि, सतीश पूनिया ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस की बाड़ेबंदी के दौरान 23 विधायकों को वोट के बदले खान, रिको प्लॉट देने और कैश ट्रांजैक्शन से लाभान्वित किया गया है.

21 जून को विधानसभा में दी थी शिकायत:
दरअसल, कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय संयम लोढ़ा ने पूनिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत 21 जून को विधानसभा में दी थी. विधानसभा सचिवालय ने अध्यक्ष के समक्ष फाइल पुटअप किया था. ऐसे में अब दोनों ही मामलों में विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को फैसला करना है. 

क्या है विशेषाधिकार हनन?
देश में विधानसभा, विधानपरिषद और संसद के सदस्यों के पास कुछ विशेष अधिकार होते हैं, ताकि वे प्रभावी ढंग से अपने कर्तव्यों को पूरा कर सके. जब सदन में इन विशेषाधिकारों का हनन होता है या इन अधिकारों के खिलाफ कोई कार्य किया जाता है, तो उसे विशेषाधिकार हनन कहते हैं. इसकी स्पीकर को की गई लिखित शिकायत को विशेषाधिकार हनन नोटिस कहते हैं.

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कैसे लाया जा सकता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव?
नोटिस के आधार पर स्पीकर की मंजूरी से सदन में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जा सकता है. विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव संसद के किसी सदस्य द्वारा पेश किया जाता है, जब उसे लगता है कि सदन में झूठे तथ्य पेश करके सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया गया है या किया जा रहा है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए सुनिल शर्मा रिपोर्ट

अखिलेश, प्रियंका, दिग्विजय और सुरजेवाला ने उठाए विकास दुबे के एनकाउंटर पर सवाल, जमकर साधा निशाना

अखिलेश, प्रियंका, दिग्विजय और सुरजेवाला ने उठाए विकास दुबे के एनकाउंटर पर सवाल, जमकर साधा निशाना

लखनऊ: विकास दुबे के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद विपक्ष की ओर से लगातार एक के बाद एक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है. सबसे पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इसको लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज़ खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है. 

वहीं विकास दुबे के मारे जाने की खबर के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं. प्रियंका ने ट्वीट कर कहा कि अपराधी का अंत हो गया, अपराध और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों का क्या?

इसके साथ ही कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिसका शक था वह हो गया. विकास दुबे का किन किन राजनैतिक लोगों से, पुलिस व अन्य शासकीय अधिकारियों से उसका संपर्क था, अब उजागर नहीं हो पाएगा. पिछले 3-4 दिनों में विकास दुबे के 2 अन्य साथियों का भी एनकाउंटर हुआ है लेकिन तीनों एनकाउंटर का पैटर्न एक समान क्यों है?

विकास दुबे के मारे जाने की खबर के बाद ऱणदीप सुरजेवाला ने कहा कि विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया. कई लोगों ने पहले ही ये आशंका जताई थी. पर अनेकों सवाल छूट गए. उन्होंने पूछा- अगर उसे भागना ही था, तो उज्जैन में सरेंडर ही क्यों किया? उस अपराधी के पास क्या राज थे जो सत्ता-शासन से गठजोड़ को उजागर करते? पिछले 10 दिनों की कॉल डिटेल्ज़ जारी क्यों नहीं?

दूसरी ओर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कल जब विकास को जिंदा पकड़ा गया तो भी विपक्ष सवाल उठा रहा था आज जब मारा गया तब भी विपक्ष सवाल उठा रहा है.

विकास दुबे एनकाउंटर को लेकर अखिलेश यादव ने कसा तंज, कहा- कार नहीं पलटी, सरकार पलटने से बचाई गयी

विकास दुबे एनकाउंटर को लेकर अखिलेश यादव ने कसा तंज, कहा- कार नहीं पलटी, सरकार पलटने से बचाई गयी

लखनऊ: आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मास्टरमाइंड विकास दुबे का एनकाउंटर में अंत हो गया है. विकास दुबे का एनकाउंटर होते ही अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आना शुरू हो गई है. सबसे पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इसको लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज़ खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है. 

विकास दुबे ने की थी पुलिसकर्मी की पिस्‍टल छीनने की कोशिश, पुलिस वैन पलटी और फिर खेल खत्म 

गिरफ्तारी पर खड़े किए थे सवाल: 
इससे पहले भी अखिलेश यादव ने गुरुवार को विकास दुबे की गिरफ्तारी पर सवाल खड़े किए थे. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा था कि ख़बर आ रही है कि ‘कानपुर-काण्ड’ का मुख्य अपराधी पुलिस की हिरासत में है. अगर ये सच है तो सरकार साफ़ करे कि ये आत्मसमर्पण है या गिरफ़्तारी. साथ ही उसके मोबाइल की CDR सार्वजनिक करे जिससे सच्ची मिलीभगत का भंडाफोड़ हो सके.

कांग्रेस का 'मिशन पंचायत '! अदालती आदेशों के बाद पायलट कैंप सक्रिय 

विकास दुबे ने पुलिस के एक जवान से हथियार छिनने का किया प्रयास: 
बता दें कि आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मास्टरमाइंड विकास दुबे का एनकाउंटर में अंत हो गया है. विकास को कमर में गोली लगी है जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. एनकाउंटर में STF के दो जवान भी घायल हुए हैं. दरअसल, कानपुर आते ही पुलिस के गाड़ी रास्ते में पलट गई. इसी दौरान विकास दुबे ने पुलिस के एक जवान से हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसे 3 गोलियां लगीं. 


 

कांग्रेस का 'मिशन पंचायत '! अदालती आदेशों के बाद पायलट कैंप सक्रिय

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जयपुर: पंचायत चुनावों को लेकर अदालती आदेश ने कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को उफान पर ला दिया है. पहले से ही पंचायत चुनाव समय पर कराने की सोच रखने वाले डिप्टी सी एम और पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने सक्रियता बढ़ा दी है, वे ग्रामीण विकास और पंचायती राज महकमे के मंत्री भी है. गांव की राजनीति करने की पसंद रखने वाले पायलट की शायद ये सोच है कि उनके प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहते हुये पंचायत चुनाव भी हो जाये. 

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कांग्रेस के अंदर की सियासत को उफान पर:
अक्टूबर तक पंचायत चुनाव कराये जाने के सर्वोच्च अदालत के फरमान ने राज्य की कांग्रेस के अंदर की सियासत को उफान पर ला दिया. डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट पक्ष धर रहे है पंचायत चुनाव सही वक्त पर कराने के लेकिन कोविड के कारण ऐसा नहीं हो पाया था. जाहिर है पायलट कैम्प की सोच है कि पीसीसी अध्यक्ष पद पर काबिज रहते हुये पंचायत ओर निकाय दोनों चुनाव संपन्न हो जाये.

कांग्रेस के लिये यह सदैव पसंदीदा चुनाव कहे जाते रहे: 
सरपंच, पंच, पटेल, प्रधान और प्रमुख.. कांग्रेस के लिये यह सदैव पसंदीदा चुनाव कहे जाते रहे है. कांग्रेस पार्टी इन चुनावों को दमखम से साथ लड़ती है. पहला टारगेट होता है विचारधारा आधारित सरपंच और फिर प्रधान और जिला प्रमुख जीते. गांव और किसान की सियासत पर सदैव कांग्रेस का फोकस रहा है. पायलट कैम्प चाहता है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी जल्द ही पंचायतीराज चुनाव को लेकर जिला और पंचायत स्तर पर चुनाव पर्यवेक्षक या प्रभारी की नियुक्ति करेगी. सचिन पायलट कैम्प की गणित .

--- समय पर पंचायत चुनाव हो जाये 
---प्रदेश कांग्रेस की कमान सचिन पायलट के हाथों में रहे
---संगठन चीफ होने से टिकट वितरण में पूरा दखल रहे
----पंचायत चुनाव में जीत का क्रेडिट खाते में आये 
---समर्थक प्रमुख और प्रधान बनाने में मिले कामयाबी
--स्व जातीय वोटों का साथ मिलने का भरोसा 

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गहलोत सरकार में सचिन पायलट के पास ग्रामीण विकास और पंचायती राज महकमा है. पसंद के मुताबिक पायलट ने ये महकमा चुना था जिससे ग्रामीण राजनीति में धाक कायम रहे. जाहिर है सत्ता में होने के कारण और ग्रामीण इलाकों में पकड़ के कारण पंचायत चुनावों में कांग्रेस को बड़ी जीत मिल सकती है.  लिहाजा है जंग है इस विजय का श्रेय लेने की. सब कुछ टिका है पीसीसी के नये भविष्य पर.

... फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

VIDEO: नवाचारों में जुटे विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी, सालों बाद विधानसभा कार्मिकों को मिली सौगात

जयपुर: विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी नवाचारों में जुटे है. उन कामों को कर रहे जो वर्षों से नहीं हुये इन्हीं में से एक रहा विधानसभा के कार्मिकों की डीपीसी के जरिये प्रमोशन किया जाना, इनमें कुछ ऐसे रहे जिन्हें 30 सालों बाद सौगात मिली. नवाचारों की कड़ी में डॉ सीपी जोशी ने विधायकों को online प्रश्न लगाने की बड़ी पहल की है. 

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स्पीकर पद संभालने के बाद डॉ सीपी जोशी ने विधानसभा की कार्यप्रणाली में आमूल चूल परिवर्तन किये और कीर्तिमान बनाये. सबसे पहले उस पहल के बारे में बताते है जो जुड़ी विधानसभा के कार्मिकों से, बरसों बाद कार्मिकों की डीपीसी हुई और बरसों से एक सीट पर बैठे कार्मिकों के हुये तबादलें. 

विधानसभा में सालों से अटके पड़े कार्मिकों के तबादले किये:  

- ऐसे कार्मिक भी जो 30 सालों से एक ही सीट पर बैठे थे 

- 82 कार्मिकों के तबादलें किये गये

- वहीं 42 कार्मिकों की डीपीसी करके प्रमोशन किया गया

- विधानसभा सचिवालय ने कार्मिकों के हित में फैसले लिये 

विधानसभा स्पीकर डॉ सीपी जोशी ने ऑनलाइन पर्ची सिस्टम के बाद ऑनलाइन प्रश्न लगाने की सुविधा विधायकों को दी है. ये सुविधा अभी से चालू हो गई है. विधानसभा सचिव प्रमिल कुमार माथुर के निर्देशों पर विधानसभा को अत्याधुनिक बनाने से जुडी सेल काम कर रही है. 

विधानसभा की पहल: 

- Online प्रश्न लगा सकते है विधायक

- इंटर सेशन में भी सवाल लगा सकते है

- मेम्बर्स लॉग इन करना होगा

- फिर प्रश्न टाइप करके देने होंगे 

- मोबाइल नम्बर पर वेरिफिकेशन के लिये ओटीपी आयेगा

- विधायक को विस आकर सवाल लगाने की जरुरत नहीं पड़ेगी

- वे अपने घर बैठे ही सवाल लगा सकता है

- इंटर सेशन में सात दिन में एक सवाल दे सकते है

- पर्ची ऑनलाइन सिस्टम पहले ही चालू कर दिया था 

विकास दुबे के दो और साथियों का एनकाउंटर, कानपुर में प्रभात तो इटावा में रणबीर ढेर 

अब डॉ सीपी जोशी का ड्रीम प्रोजेक्ट है विधायकों के लिये बनने वाला बहुमंजिला अपार्टमेंट. इमारत खड़ी होने में समय लगेगा लेकिन नींव डॉ सीपी जोशी के कार्यकाल में रख दी जाएगी.

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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