चुनावी समर में अभी से शह-मात का खेल, दिग्गजों की शिफ्टिंग ने गर्माया सियासी पारा

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/14 11:51

जयपुर। चुनावी समर में शह और मात का खेल शुरु हो गया है। दिग्गजों की शिफ्टिंग ने पूरे चुनावों के समीकरणों को उलझा कर रख दिया है। दौसा सांसद हरीश मीना और नागौर विधायक हबीबबुर्ररहमान का हाथ के साथ जाना बड़ा सियासी घटनाक्रम है। पलटवार के तहत बीजेपी भी किसी बड़े कांग्रेसी क्षत्रप को कमल से जोड़ सकती है। 

कांग्रेस पार्टी ने चुनावी समर में पहला सबसे बड़ा झटका बीजेपी को आज दिया। दो बीजेपी के जनप्रतिनिधियों को शामिल करते ही जैसे राजस्थान का सियासी पारा उफान पर आ गया। कमल से कांग्रेस में आते ही हरीश मीना और हबीबबुर्ररहमान दोनों ने खुद को खानदानी कांग्रेसी कह दिया। 

दौसा से बीजेपी के टिकट पर सांसद बने हरीश चंद्र मीना अब कांग्रेस में है। राजस्थान पुलिस के डीजीपी रह चुके इस IPSअधिकारी का पारिवारिक बैकग्राउंड कांग्रेसी रहा है। बड़े भाई नमोनारायण मीना कांग्रेस के दिग्गज नेता और केन्द्रीय मंत्री रह चुके है। हरीश मीना के कांग्रेस में आने के क्या सियासी मायने होंगे, एक रिपोर्ट... 

हरीश मीना को कांग्रेस का साथ
-पूर्वी राजस्थान की मीना बेल्ट में कांग्रेस को लाभ
-मीना पॉलिटिक्स में कांग्रेस को मानसिक बढत मिली
-हरीश को शामिल करा पायलट ने मास्टर स्ट्रोक खेला
-मीना - गुर्जर गैप को पाटने के लिये ये पायलट का दांव था
-गहलोत ने मीना को अपने राज में डीजीपी बनाया था
-दौसा, सवाई माधोपुर जिलों पर हरीश का विशेष प्रभाव 
-डॉ किरोड़ी के सामने अहम रणनीतिक चेहरे हो सकते है

नागौर से लगातार दो बार हबीबबुर्ररहमान विधायक रह चुके है। बीजेपी के मुस्लिम चेहरे के तौर पर उन्हें ख्याति मिली। गैर जाट चेहरे के तौर पर हबीबबुर्ररहमान मारवाड़ की राजनीति में अब तक सफल साबित हुये है। हबीबबुर्ररहमान के आने के सियासी मायने क्या रहेंगे, एक रिपोर्ट.. 

कांग्रेस में हबीब की एंट्री
-हबीबबुर्ररहमान पुराने कांग्रेसी रहे है
-उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि कांग्रेसी रही
-नागौर में गैर जाट समीकरण में वो चुनाव जीतते रहे है
-कांग्रेस को यहां मुस्लिम फेस की तलाश
-हबीब के कांग्रेस में वापसी से वो कमी पूरी होगी
-हबीब का लाभ पूरे अजमेर संभाग में कांग्रेस को मिलेगा 

हरीश मीना को विधायक का चुनाव लडाये जाने की चर्चाएं। उन्हें उनके गृह क्षेत्र बामनवास भेजा जा सकता है। वहीं हबीबबुर्ररहमान की चाहत है नागौर के चुनाव लड़ना.. तय करने का काम कांग्रेस आलाकमान का है। यह जरुर है कि कांग्रेस ने दोनों को अपने कुनबे में लेकर शतरंजी सियासी बिसात पर जोरदार दांव खेला है। 

दिनेश डांगी, नरेश शर्मा के साथ योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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