भोपाल CM शिवराज सिंह चौहान ने अपने पैतृक गांव में पेयजल कमी की शिकायतें मिलने पर अधिकारियों को लगाई फटकार

CM शिवराज सिंह चौहान ने अपने पैतृक गांव में पेयजल कमी की शिकायतें मिलने पर अधिकारियों को लगाई फटकार

CM शिवराज सिंह चौहान ने अपने पैतृक गांव में पेयजल कमी की शिकायतें मिलने पर अधिकारियों को लगाई फटकार

भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 40 किलोमीटर दूर सीहोर जिले में अपने पैतृक जैत गांव के दौरे के दौरान पेयजल की कमी की ढे़र सारी शिकायतें मिलने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्थानीय अधिकारियों पर बिफर गये और उन्हें फटकार लगाई. अपनी यात्रा के दौरान नाराजगी जताते हुए चौहान का एक वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके तुरंत बाद विपक्षी कांग्रेस ने दावा किया कि अगर 17 साल से मुख्यमंत्री रहे किसी व्यक्ति का पैतृक गांव पेयजल संकट का सामना कर रहा है, तो बाकी प्रदेश की स्थिति समझी जा सकती है.

वीडियो में दिख रहा है कि रहवासियों से पेयजल की ढे़र सारी शिकायतें मिलने के बाद चौहान ने वहां मौजूद स्थानीय अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि जल निगम कर क्या रहा है? मेरे क्षेत्र में ही पानी नहीं जा रहा है. जैत (मुख्यमंत्री चौहान का पैतृक गांव) में भी पानी सब जगह नहीं दिया. एक-एक आवेदन हम कहां तक देखेंगे. ये मेरा काम है क्या? एक साथ आवेदन दे रहा हूं और 15 दिनों के बाद पूछूंगा. अगर एक जगह भी शिकायत आ गई तो तुम (अधिकारी) यहां नहीं रहोगे. उन्होंने आगे कहा कि ये कोई तरीका थोड़ी होता है. क्या यह देखना मुख्यमंत्री का काम है कि हर टोंटी में पानी आ रहा है या नहीं? क्या इसके लिए लोग मेरे पास आएंगे? 15 दिन के बाद कलेक्टर और आयुक्त खुद चेक करेंगे और जहां गड़बड़ मिल गई, तो उनकी (अधिकारी-कर्मचारियों) खैर नहीं. चौहान ने कहा कि क्या अब मुख्यमंत्री हम्माली करेगा?

भाजपा नीत प्रदेश सरकार पर तंज कसते हुए दिग्विजय ने रविवार को ट्वीट किया, ‘‘हर नल की टोंटी की जांच करेंगे अधिकारी. मामू के गृह ग्राम जैत में नल टोंटी टूटी मिली. मामू आपके गांव में यह हाल है तो प्रदेश में क्या होगा? वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने चौहान का वीडियो साझा करते हुए ट्वीट किया कि यह स्थिति है 17 वर्ष के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी के ख़ुद के क्षेत्र व जैत गांव की. लोगों को पीने का पानी ही नहीं मिल पा रहा है. इतनी सारी शिकायतें? बाकी प्रदेश की स्थिति समझी जा सकती है. सोर्स- भाषा
 

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