VIDEO: DAP नहीं तो SSP सही ! पूर्वी राजस्थान में सरसों बुवाई के लिए DAP की कमी, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: DAP नहीं तो SSP सही ! पूर्वी राजस्थान में सरसों बुवाई के लिए DAP की कमी, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राज्य में सरसों और चना की बुवाई जोरों पर है. राज्य सरकार ने किसानों के लिए बीज के तो पर्याप्त इंतजाम कर दिए हैं, लेकिन उर्वरकों की कमी किसानों को झेलनी पड़ रही है. इसमें सबसे ज्यादा कमी डीएपी खाद की देखने को मिल रही है. कितनी है डीएपी की उपलब्धता, कितनी है कमी और कृषि विभाग क्या कर रहा है वैकल्पिक इंतजाम. प्रदेश में रबी फसलों की बुवाई शुरू हो चुकी है. 10 अक्टूबर से सरसों और चना की बुवाई शुरू हो चुकी है. प्रदेश में करीब 30 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में सरसों और 20 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में चना की बुवाई की जाती है. इस बार दोनों ही फसलों के लिए कृषि विभाग ने बीजों की तो पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की है, लेकिन खाद की कमी देखने को मिल रही है.

सरसों की बुवाई पूर्वी राजस्थान के कुछ जिलों में बहुतायत में की जाती है. इनमें भरतपुर, अलवर, करौली, सवाईमाधोपुर, धौलपुर, दौसा आदि जिले प्रमुख हैं. सरसों की बुवाई के लिए पर्याप्त मात्रा में डीएपी और यूरिया होना जरूरी है, इसके लिए किसानों की मांग के अनुरूप खाद नहीं मिल पा रहा है. कृषि विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक डीएपी की कमी केन्द्र सरकार द्वारा पर्याप्त सप्लाई नहीं देने की वजह से है. डीएपी की कमी को देखते हुए किसानों से सिंगल सुपरफॉस्फेट उपयोग करने की सलाह दी गई है. जिन जिलों में डीएपी की कमी है, वहां ब्लैकमार्केटिंग और व्यापारियों द्वारा स्टॉक किए जाने की प्रवृत्ति पर रोक के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है.

डीएपी की कितनी कमी:
- राज्य सरकार ने इस साल सितंबर तक 4.50 लाख मैट्रिक टन डीएपी मांगा
- केन्द्र से केवल 3.07 लाख मैट्रिक टन डीएपी ही मिल सका
- अक्टूबर में राज्य सरकार ने 1.50 लाख मैट्रिक टन डीएपी मांगा
- केन्द्र सरकार ने 68 हजार मैट्रिक टन डीएपी स्वीकृत किया
- इसमें से भी अभी तक 43 हजार मैट्रिक टन डीएपी ही मिल सका
- अभी भी स्वीकृत कोटे में से 25 हजार मैट्रिक टन डीएपी मिलना बाकी

अभी खपत कितनी:
- रोज 7 से 8 हजार मैट्रिक टन एसएसपी की खपत
- 5 से 6 हजार मैट्रिक टन डीएपी और 9 से 10 हजार मैट्रिक टन यूरिया की खपत  

डीएपी की कमी को देखते हुए कृषि विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि किसान यदि सिंगल सुपरफॉस्फेट का उपयाेग करें तो यह फसलों के लिए ज्यादा असरकारक साबित होगा. डीएपी के 1 कट्टे के बजाय एसएसपी के 3 कट्टे और यूरिया के 1 कट्टे को मिलाकर यदि खेतों में उपयोग में लिया जाए तो सभी उपयोगी तत्वों की आपूर्ति हो सकेगी. साथ ही सुपरफॉस्फेट में मौजूद तत्व सल्फर से सरसों में तेल की मात्रा भी बढ़ती है. सुपरफॉस्फेट और यूरिया को मिलकर देने के बावजूद लागत में यह डीएपी से सस्ता पड़ता है.

डीएपी नहीं मिल रहा तो सुपरफॉस्फेट उपयोग करें:
- सुपरफॉस्फेट में 18% फास्फोरस और 11% सल्फर की मात्रा मौजूद
- डीएपी के 1 कट्टे में 23 किलो फास्फोरस और 9 किलो नाइट्रोजन
- यदि 3 कट्टे एसएसपी और 1 कट्टा यूरिया मिलाकर प्रयोग करें
- तो 24 किलो फास्फोरस, 20 किलो नाइट्रोजन और 16 किलो सल्फर मिलेगा
- डीएपी के एक कट्टे की कीमत है 1200 रुपए
- जबकि एसएसपी और यूरिया मिलाकर चारों कट्टे की कीमत होगी 1166 रुपए

बीज कितना उपलब्ध कराया गया:
- 2.10 लाख किसानों को 2-2 किलो सरसों के मिनी किट दिए गए
- 2 किलो बीज से 0.4 हैक्टेयर क्षेत्रफल में सरसों की बुवाई संभव
- भरतपुर के 7 हजार किसानों को शंकर किस्म के सरसों के मिनी किट दिए
- यदि इन शंकर बीज से उत्पादन बढ़ा तो अगले साल और वितरण बढ़ाएंगे

डीएपी, यूरिया व सिंगल सुपरफॉस्फेट का सही तरीके से वितरण करने के लिए कृषि विभाग ने गुण नियंत्रण अभियान भी शुरू किया है. इस अभियान में कृषि विभाग के 425 निरीक्षक लगातार निरीक्षण में लगे हैं और व्यापारियों के पास सैम्पलिंग भी ले रहे हैं. हाल ही में शिकायतों के आधार पर धौलपुर, भरतपुर व कोटा में कार्रवाई भी की गई है. कृषि मंत्री लालचंद कटारिया और कृषि आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश भी लगातार मॉनीटरिंग कर रहे हैं.

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

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