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कोरोना वायरस के चलते अष्टमी पर पसरा मंदिरों में सन्नाटा, वीरानी आई नजर

कोरोना वायरस के चलते अष्टमी पर पसरा मंदिरों में सन्नाटा, वीरानी आई नजर

भरतपुर: कोरोनावायरस के खौफ से जहां पूरा विश्व भयभीत है तो वहीं भगवान के मंदिरों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है. नवरात्रा के तहत आज अष्टमी पर्व है और दुर्गा मंदिरों में जहां आज के दिन भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता था वहां आज वीरानी नजर आई. 

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राजराजेश्वरी देवी मंदिर में पसरा सन्नाटा:     
फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की टीम ने भरतपुर के प्राचीन श्री राजराजेश्वरी देवी मंदिर का जायजा लिया तो देखा कि जिस मंदिर में आज मेले जैसा नजारा होना चाहिए था वहां सन्नाटा पसरा हुआ था. माता रानी के दर्शन करने के लिए इक्का-दुक्का भक्त ही मंदिर आ रहे थे और दरवाजे से ही माता रानी को दंडवत कर वापस लौट रहे थे. 

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माता रानी जल्दी ही पूरे विश्व को वायरस से मुक्त करेगी:
फर्स्ट इंडिया न्यूज़ के जरिए आप भी श्री राजराजेश्वरी देवी के दर्शन कर सकते हैं. मंदिर के महंत अजय शर्मा ने फर्स्ट इंडिया न्यूज़ को बताया की कोरोना वायरस के खौफ ने जिंदगी की रफ्तार को रोक दिया है लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद है की माता रानी जल्दी ही पूरे विश्व व भारत को इस वायरस से मुक्त करेंगी. महंत अजय शर्मा ने आमजन से अपील की है कि इस गंभीर महामारी से सतर्क व सावधान रहने की आवश्यकता है और इससे बचने के लिए सभी अपने घरों में ही रहे. 

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जयपुर: आज रात साल का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने वाला है. यह ग्रहण वास्तविक चंद्र ग्रहण ना होकर एक उपछाया चंद्र ग्रहण होगा. इस ग्रहण का कोई अशुभ प्रभाव नहीं माना गया. इसके साथ ही उप छाया ग्रहण का कोई सूतक भी नहीं लगता है. आज लगने वाला उपछाया चंद्र ग्रहण रात में 11 बजकर 11 मिनट से शुरू होगा और रात में 2 बजकर 34 मिनट पर खत्म होगा. ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जो चंद्रग्रहण के बाद करना शुभ माने जाते हैं.

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- चंद्रग्रहण के बाद मंदिर को साफ-सुथरा करके यदि आपके घर में भगवान की प्रतिमा है तो उन्‍हें गंगाजल से स्नान करके नए वस्त्र पहनाएं. उसके बाद पूजा करके भोग लगाएं और खुद भी अन्न और जल ग्रहण करें. 

- चंद्रग्रहण के बाद सफेद वस्‍तुओं का दान करना मंगलकारी होता है. ग्रहण के बाद गुरुजनों, ब्राह्मणों और पुरोहितों एवं जरूरतमंदों को दान करना चाहिए. 

- राणों में चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण के बाद स्‍नान को बेहद आवश्‍यक बताया गया है. एक बात का ध्‍यान रखें कि स्‍नान कपड़े पहनकर करें. शास्‍त्रों में नग्‍न होकर स्‍नान करना वर्जित बताया गया है. 

- ग्रहण के बाद घर में हर जगह गंगाजल का छिड़काव करें. साथ ही पूजा स्‍थल को भी पवित्र करें और सभी मूर्तियों पर गंगाजल छिड़कें. 

- चंद्रग्रहण के बाद रात के बचे हुए पके भोजन को न खाएं. आप चाहें तो इसे सुबह पशुओं को खिला सकते हैं. 

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गुरुवार को भूलकर भी नहीं करने चाहिए ये 4 काम, जानिए क्यों?

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जयपुर: घर के बड़े बुजुर्ग कुछ काम गुरुवार के दिन नहीं करने की सलाह देते है, ब्रह्मांड में स्थित नौ ग्रहों में से गुरु वजन में सबसे भारी ग्रह है इसलिए गुरुवार का विशेष महत्व है. इस दिन हर वो काम जिससे कि शरीर या घर में हल्कापन आता हो, ऐसे कामों को करने से मना किया जाता है क्योंकि ऐसा करने से गुरु ग्रह हल्का होता है. तो आइये जानते है कोनसे हे वो 4 काम जो गुरुवार को कतई नहीं करने चाहिए...

बाल धोना: बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है. शास्त्रों में गुरुवार को महिलाओं को बाल धोने से इसलिए मनाही की गई है क्योंकि महिलाओं की जन्म कुंडली में बृहस्पति पति का कारक होता है साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक होता है. बृहस्पतिवार को सिर धोने से बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी होती है. 

नेल कटिंग और शेविंग: शास्त्रों में गुरु ग्रह को जीव कहा गया है, जीव मतलब आयु. गुरुवार को नेल कटिंग और शेविंग करना गुरु ग्रह को कमज़ोर करता है, जिससे की आपकी आयु पर असर पड़ता है. 

घर में किए गए कार्य: बृहस्पति का प्रभाव घर और शरीर दोनों पर रहता है. वास्तु के अनुसार घर में ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है, ईशान कोण का संबंध परिवार के बच्चो से होता है. ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है, घर में अधिक वजन वाले कपड़ो को धोना, कबाड़ घर से बहार निकालना या घर को धोना ईशान कोण को कमजोर करता है. 

रुक सकती है तरक्की: जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से कामयाबी के रास्ते आसानी से खुलते है. किसी भी जन्म कुंडली में दूसरा और ग्यारहवां भाव धन के  स्थान होते हैं. गुरु ग्रह इन दोनों ही स्थानों का कारक ग्रह होता है, गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है. ऐसे में आपको सिर धोना, नेल कटिंग, शेविंग, अधिक वजन वाले कपड़ो को धोना, पोछा लगाने ऐसे कामो से बचना चाहिए.  

बुधवार के दिन करें यह 5 उपाय, दूर होंगे आपके सारे दोष

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जयपुर: बुधवार का दिन बुध देव को समर्पित है और यदि इस दिन भगवान गणेश की भी पूजा की जाए तो अत्‍यंत लाभ की प्राप्‍ति होती है. गणेश जी सभी देवता में प्रिय देवता माने जाते है.  प्रथम पूज्य गणेशजी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है, तो ऐसे में आप भी बुधवार के दिन ये 5 विशेष उपाय करके अपने सारे दोष दूर कर जीवन में सकारात्‍मकता ला सकते है. आइये जानते हे उन 5 विशेष उपाय के बारे में...

पहला उपाय: 
गाय को पूजनीय और पवित्र माना गया है. बुधवार के दिन गाय माता को हरी घास खिलानी चाहिए. माना जाता है कि गौ माता की सेवा से सभी देवी-देवताओं प्रसन होते है और उनकी कृपा बनी रहती है.

दूसरा उपाय: 
अगर आप जिस काम को करने की कोशिश करते हैं या फिर हर काम में आपको असफलता मिलती है, तो बुधवार के दिन गणेश के मंत्र 'ओम गं गणपतये नमः' का जाप विधि विधान से करें आपको सभी कष्टों से निजात मिल जायेगा.

तीसरा उपाय: 
किसी जरूरतमंद व्यक्ति को या किसी मंदिर में हरे मूंग का दान करें, मूंग बुध ग्रह से संबंधित अनाज है, इसका दान करने से बुध ग्रह के दोष शांत होते हैं. इसे आपके जीवन में समृद्धि आती है. 

चौथा उपाय: 
गणेश जी को मोदक बहुत ही प्रिय है, बुधवार को गणपति बप्पा की पूजा में मोदक का भोग अवश्य लगाए आपकी हर मनोकामना पूरी होगी.

पांचवा उपाय:
धन संबंधित समस्या के लिए बुधवार के दिन श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा करने के बाद गुड़ और घी का भोग लगाएं और थोडी देर बाद यह भोग गाय को खिला दें. इससे आपको काफी फायदा मिलेगा.

निर्जला एकादशी पर बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार, भक्तों के लिए पट रहे बंद

निर्जला एकादशी पर बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार, भक्तों के लिए पट रहे बंद

सीकर: आज निर्जला एकादशी का पर्व है, लेकिन कोरोना संकट के बीच सारे उत्सव रद्द है, तो ऐसे में लोग निर्जला एकादर्शी का पर्व घरों में ही मना रहे है. निर्जला एकादशी पर बाबा श्याम की विशेष पूजा आराधना हुई. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पुजारियों ने बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार के आराधना की. लेकिन श्याम प्रेमी इस बार निर्जला एकादशी पर दर्शन नहीं कर पाये. 

SMS अस्पताल कोरोना फ्री ! सोशल डिस्टेंसिंग के साथ नॉन COVID मरीजों का इलाज शुरू

श्याम प्रेमियों को नहीं हुए दर्शन:
निर्जला एकादशी पर जहां बाबा श्याम के दरबार में लाखों लोगों की भीड़ रहती थी, लेकिन कोरोना के चलते इस बार श्याम के भक्तों को निराश रहना पडा .मंगलवार को बाबा श्याम के भक्त दीदार नहीं कर पाए, कोरोना संक्रमण के चलते बाबा का दरबार बंद रहा. निर्जला एकादशी के दिन पुजारियों ने सिर्फ बाबा श्याम की सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूजा आराधना की और पट बंद कर दिए. 

निर्जला एकादशी का पौराणिक बड़ा महत्व:
निर्जला एकादशी का पौराणिक बड़ा महत्व है, आज के दिन बाबा श्याम के दरबार में लाखों भक्त अपनी हाजिरी लगाते हैं. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ और मंदिर 3 माह से पूरी तरह बंद चल रहा है. राज्य सरकार के आदेश के बाद ही भक्तों के लिए मंदिर खोला जाएगा. पहली बार ऐसा हुआ है कि निर्जला एकादशी के दिन बाबा श्याम के दर्शन भक्तों को नहीं हुए. 

निजी अस्पतालों के लिए एडवाइजरी जारी, कोरोना मरीजों का फ्री इलाज, अन्यथा होगी सख्त कार्रवाई 

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निर्जला एकादशी का पौराणिक बड़ा महत्व:
निर्जला एकादशी का पौराणिक बड़ा महत्व है, आज के दिन बाबा श्याम के दरबार में लाखों भक्त अपनी हाजिरी लगाते हैं. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ और मंदिर 3 माह से पूरी तरह बंद चल रहा है. राज्य सरकार के आदेश के बाद ही भक्तों के लिए मंदिर खोला जाएगा. पहली बार ऐसा हुआ है कि निर्जला एकादशी के दिन बाबा श्याम के दर्शन भक्तों को नहीं हुए. 

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निर्जला एकादशी पर आज दिन भर चलेगा दान-पुण्य का कार्यक्रम, महिलाओं में भारी उत्साह

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जैसलमेर: निर्जला एकादशी के लिए सीमावर्ती जिले जैसलमेर में धूम-धाम से मनाया जा रहा है.  विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा बाजारों में मीठे पानी की छबीलें लगे हुए हैं. साल की सभी चौबीस एकादशियों में से निर्जला एकादशी सबसे अधिक महत्वपूर्ण एकादशी है. कोरोना के कारण आज एकादशी के अवसर पर सोनार दुर्ग पर स्तिथ लक्ष्मीनाथ जी मंदिर और रामदेव जी मंदिर, गणेश जी का मंदिर  सत्यनारायण भगवान, सहित सभी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का आज तांता नहीं लगा.

RCA अध्यक्ष वैभव गहलोत का जन्मदिवस आज, अन्य जिलों की तरह जोधपुर में भी आयोजित किए जा रहे कार्यक्रम

निर्जला एकादशी पर आज श्रद्धालु उपवास कर रहे:  
निर्जला एकादशी पर आज श्रद्धालु उपवास कर रहे हैं. कोरोना के कारण पहली बार मंदिरों के पट बंद रहने से भक्त ग्यारस माता के दर्शन कर कथाएं नहीं सुन पाए.  इस दिन माताजी को ठंडे जल से भरी मटकी, फल आदि अर्पित किए जाते गए, लेकिन इस बार मन्दिर खोलने की अनुमति नहीं होने से श्रद्धालुओं को घर मे ही रहना पड़ा. इस अवसर पर लोगों ने परंपरागत रूप से सिंगाड़े की सेव, आम, मावे के पेठे, खजूर की पंखियां, ठण्डाई व मटकियों का वितरण कर दान पुण्य किया जा रहा है.

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महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा:
इस पर्व को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है. निर्जला एकादशी के अवसर पर दान-पुण्य की परम्परा में बहन-बेटियों के ससुराल में ‘फळियार भेजने की परम्परा रही है. ‘फळियार में पांच किलोग्राम से लेकर इक्कीस किलोग्राम तक मिठाईयां शर्बत की बोतले, आम, ओळा, सेंवईया, चीनी, मटकी, स्टील बर्तन इत्यादि भेजने की परम्परा के क्रम में ‘फळियार  पहुंचने शुरू हो गए है. शहर में महिलाएं व युवतियां सामूहिक रूप से हर गली-मौहल्ले शहर में ‘फळियार के साथ निकल रही हैं. बच्चे सरबत पीकर खूब मजे कर रहे है और तेज गर्मी से लोगों को शरबत पीकर गर्मी से निजात नही मिल रहा है. 

8 जून से धार्मिक स्थलों को शर्तों के साथ खोलने की मंजूरी, गृह मंत्रालय की गाइडलाइन जारी

नई दिल्ली: देशभर में 1 जून से 30 जून तक अनलॉक 1 का ऐलान कर दिया गया. गृह मंत्रालय की ओर से गाइडलाइन्स जारी की गई. इसके तहत कंटेनमेंट जोन के बाहर चरणबद्ध तरीके से छूट मिलेगी, लेकिन फिलहाल कंटेनमेंट जोन में पूरी पाबंदी रहेगी. हालांकि, जरूरी गतिविधियों को मंजूरी दी जाएंगी. अनलॉक 1 की यह गाइडलाइन्स 1 जून से जारी रहेगी. चलिए जानते है इस गाइडलाइन्स के बारे में...

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कंटेनमेंट जोन के अंदर सब कुछ बंद
इस गाइडलाइन के मुताबिक कंटेनमेंट जोन के अंदर सब कुछ बंद रहेगा, लेकिन कंटेनमेंट जोन के बाहर चरणबद्ध तरीके से सब कुछ खोलने की अनु​मति होगी. 

प्रथम चरण: 8 जून से धार्मिक स्थल, होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल खोलने की अनुमति दी जाएगी. हालांकि, यह सब शर्तों के साथ ही खोले जाएंगे.

द्वितीय चरण: इसमें स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान खोलने जाएंगे. लेकिन इसकी अनुमति राज्य सरकार की ओर से दी जाएगी. अभी जुलाई माह से स्कूलों को खोलने का प्रयास किया जाएगा. 

तृतीय चरण: इसमें अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, मेट्रो रेल, सिनेमा हॉल, जिम, स्वीमिंग पूल, एंटरटेनमेंट पार्क, थिएटर, बार और ऑडिटोरियम, असेंबली हॉल जैसी जगहें आदि को खोलने पर विचार होगा.

कर्फ्यू जारी रहेगा:  
रात 9 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू जारी रहेगा. इमरजेंसी सेवाओं को इसमें छूट दी गई है. स्कूल-कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान खोले जाने पर फैसला सरकार बाद में लेगी.

मनरेगा श्रमिकों का कार्य समय कम किया जाये, डिप्टी CM सचिन पायलट ने लिखा केन्द्र को पत्र

पहली बार देश में घरों में हुई ईद की नमाज, जयपुर में कई परिवारों ने की एक साथ नमाज अदा

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जयपुर: राजधानी सहित प्रदेशभर में आज ईदुलफितर की नमाज अदा की गयी. लॉकडाउन के चलते केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार मस्जिदों और ईदगाह में नमाज की इजाजत नहीं दी गयी है. ऐसे में प्रदेश में भी मुस्लिम समाज के लोगों ने अपने अपने घरों में ईद की नमाज अदा की. 

300 साल में पहली बार ईद पर नहीं हुई सामूहिक नमाज, ईदगाह और जामा मस्जिद में 5-5 नमाजियों ने अदा की नमाज 

ईद की नमाज में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हुए: 
पहली बार घरों में हो रही ईद की नमाज में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हुए. लॉकडाउन के चलते इस बार घरों में भी रंग रोगन नहीं करवाए गये और ना नए कपड़ों, जूतों और अन्य सामान की खरीदारी हुई. लेकिन तमाम दिक्कतों के बीच ईद-उल-फितर पर सेवइयों की मिठास के साथ ही दस्तरख्वान पर परोसे जाने वाले व्यंजनों की फेहरिस्त जरूर तैयार हो गई है.   

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