सिरोही मदर मिल्क बैंक ने 5 महीने में ही बनाया रिकॉर्ड

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/11 07:59

सिरोही। सिरोही जिला अस्पताल में खुले मदर मिल्क बैंक ने पांच महीने में ही प्रदेश की 18 मदर मिल्क बैंकों में से अबतक का सर्वाधिक 2 हजार यूनिट दूध राज्य स्तरीय स्टोरेज सेंटर अजमेर को भेजने का रिकॉर्ड बनाया। सिरोही मदर मिल्क बैंक में स्टोर दूध को लेने के लिए राज्य स्तरीय स्टोरेज सेंटर अजमेर से वाहन यहां पहुंचा। सिरोही जिला अस्पताल के मातृ शिशु कल्याण केंद्र में नवनिर्मित आंचल मदर मिल्क बैंक 6 अगस्त 2018 में शुरू हुआ था।  प्रदेश का 18 वां मदर मिल्क बैंक, सिरोही अस्पताल में भर्ती बच्चों के अलावा बाहरी बच्चों को भी दिया जा रहा है दूध । 

अबतक यहां 86,670 यूनिट मां दूध हुआ एकत्रित हुआ, जिसमें से 450 यूनिट दूध जरूरतमंद बच्चों को मुहैया कराया गया। इसमें से 2 हजार यूनिट दूध को राज्य स्तरीय स्टोरेज सेंटर अजमेर भेजा गया, जबकि 253 यूनिट का स्टॉक अभी भी है। मदर मिल्क बैंक में एकत्रित होने वाले मां के दूध को यहां भर्ती नहीं होने वाले बच्चों के अलावा बाहरी जरूतमंद बच्चों को भी निशुल्क दूध मुहैया कराया जा रहा है। मदर मिल्क बैंक में धात्री माताएं स्वेच्छा से अपना दूध दान करती है। ऐसी माताओं को उनके बच्चों को स्तनपान करवाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। ऐसे नवजात जिनकी माताएं किन्हीं कारणों से स्तनपान नहीं करवा पाती। उन्हें बैंक से मां का दूध उपलब्ध करवाया जाता है। मां का दूध मशीनों से संग्रहित व आवश्यक जांच के बाद मिल्क बैंक में सुरक्षित रखा जाता है। 

सिरोही मदर मिल्क बैंक के स्टोर में बड़ी मात्रा में एकत्रित मां के दूध को लेने के लिए राज्य स्तरीय स्टोरेज सेंटर अजमेर से वैन यहां पहुंची। बोतलों में पैक दो हजार यूनिट दूध वैन में भरकर अजमेर के लिए रवाना किया। मदर मिल्क बैंक प्रभारी डॉ. दिलराज मीणा व मैनेजर नीलम जोशी ने बताया कि शुरू से ही जिले की महिलाएं दूसरों के बच्चों के लिए दूध दान करने में चलकर आगे आ रही है। उनके योगदान से ही यहां क्षमता से अधिक दूध संग्रहित होने पर अजमेर चिकित्सा महाविद्यालय के जनाना अस्पताल में स्थापित आंचल मदर मिल्क बैंक स्टोरेज व डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के लिए दो हजार यूनिट दूध भेजा गया। 

सिरोही में मदर मिल्क बैंक खुलने के बाद चिकित्सा विभाग ने जिले में जरूरतमंद बच्चों को डिब्बाबंद दूध पिलाने पर रोक लगा दी है। चिकित्सा निदेशक ने अक्टूबर माह निकाले एक आदेश में अस्पताल में भर्ती शिशुओं या प्रसूताओं के नवजातों को मां के दूध के अलावा फार्मूला (डिब्बा), डेयरी (थैली), गाय, बकरी या अन्य दूध को पिलाने पर पूर्ण प्रतिबंधित लगाया है। कम्यूनिटी में किसी भी जरूरतमंद नवजात को आंचल मदर मिल्क बैंक एवं आंचल मदर मिल्क बैंक स्टोरेज एवं डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर से निशुल्क दूध उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी है। 

जानिए, क्या है मदर मिल्क बैंक और उसके फायदे 
मदर मिल्क बैंक चिकित्सा विभाग का ही एक उपक्रम है, जहां धात्री माताएं स्वेच्छा से अपना दूध दान कर सकती है। मदर मिल्क बैंक में एकत्रित होने वाले मां के दूध को अस्पताल के एसएनआईसीयू वार्ड में भर्ती कुपोषित और किन्हीं चिकित्सकीय कारणों से मां का दूध नहीं मिलने वाले बच्चों को ये दूध निशुल्क दिया जाता है, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। 

यह हो रहा फायदा 
एसएनआईसीयू वार्ड में भर्ती कुपोषित बच्चों को मदर मिल्क बैंक के दूध पिलाकर उनकी सेहत को सुधारा जा रहा है। इसके साथ ही बाहरी बच्चों को भी दूध मुहैया कराया जा रहा है। इससे कुपोषित बच्चों की रिकवरी की संभावना 6 से 8 गुणा तक बढ़ जाती है। रिकवरी 40 प्रतिशत तेजी से होती है यानी दस दिन भर्ती रहने वाला बच्चा छह दिन में ठीक हो जाता है। इस बैंक में धात्री माताएं अपने दूध का दान कर सकती है, ताकि कमजोर बच्चों की जान बचाई जा सकें। 
सिरोही से कमलेश प्रजापत की रिपोर्ट

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in