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बहरोड़ क्षेत्र में आज दूसरे दिन भी छाया स्मॉग, लोगों को सांस लेने में आ रही दिक्कत
बहरोड़ क्षेत्र में आज दूसरे दिन भी छाया स्मॉग, लोगों को सांस लेने में आ रही दिक्कत

बहरोड़: एनसीआर में आज दूसरे दिन भी अत्यधिक स्मॉग छाया हुआ है. पिछले 24 घंटे से स्मॉग छाने से लोगों को सांस लेने में दिक्कत आ रही है. सबसे ज्यादा मुश्किलें सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों को हो रही है. लोगों की आंखों में जलन और चर्म रोग जैसी बीमारी होने की संभावना से लोगों में भय बना हुआ है. बहरोड़ एनसीआर क्षेत्र दिल्ली के नजदीक होने से यहां असर अत्यधिक देखा जा रहा है. 

कचरा जलाने से आबोहवा खराब:
स्मॉग को बढ़ाने में नगर पालिका के सफाई कर्मचारी, कबाड़ा कारोबारी तथा स्थानीय लोग अपनी अहम भूमिका निभाकर आबोहवा को खराब कर रहे हैं. यहां शाम होते ही फल और सब्जी विक्रेताओं के द्वारा निकाले गए कचरे की होली जलाई जाती है. बहरोड़ के हाई सेकेंडरी स्कूल के पास नगर पालिका के द्वारा लगाए गए कचरा पात्र में कचरा डालकर जलाया जाता है, जो रात भर जलता है. अलसुबह सफाई करने वाले नगर पालिका के सफाई कर्मचारी झाड़ू निकलने के बाद एकत्र कचरे में आग लगा देते हैं. वहीं हाईवे किनारे दर्जनभर कबाड़ा कारोबारी प्लास्टिक, रेगजीन ओर रबर जलाकर बहरोड़ क्षेत्र की आबोहवा को खराब कर रहे हैं. 

स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़:
बहरोड़ नगर पालिका के द्वारा कचरा जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए नियम बनाए गए हैं, लेकिन नगरपालिका अपने ही सफाई कर्मचारियों से नियमों की पालना करवाने में नाकाम बनी हुई है. भले ही राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के द्वारा क्रेशर और हॉट मिक्स प्लांट पर 5 नवंबर तक रोक लगाई गई हो, लेकिन बहरोड़ के उद्योगों की चिमनिया काला धुआं उगल रही है या यूं कहा जाए कि स्टेट पोलूशन कंट्रोल बोर्ड के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है. वहीं लोगों के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है. बहरोड़ एनसीआर में भले ही एनजीटी के विभिन्न नियम- कायदे - कानून लागू हो, लेकिन उन्हें उद्यमियों और कारोबारियों के द्वारा पूरा नहीं किया जा रहा. अलवर जिले का बहरोड़ क्षेत्र पड़ोसी राज्य हरियाणा से लगा होने के कारण राजस्थान में सबसे अधिक स्मॉग का असर यहां देखा जा रहा है. राजस्थान और अलवर जिले का सिंहद्वार कहे जाने वाले बहरोड़- भिवाड़ी क्षेत्र में स्टेट पोलूशन कंट्रोल बोर्ड और एनजीटी को सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है. जिससे यहां की आबोहवा दूषित होने से बचाने के साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को रोका जा सके. 

... बहरोड़ अलवर से जितेंद्र नरूका की रिपोर्ट 

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