अब तक सात में से केवल चार राष्ट्रीय पार्टियों ने दिया लेखा जोखा!

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/10/15 11:30

जयपुर (विमल कोठारी)। कहते हैं राजनीति अब सेवा नहीं कमाई का माध्यम बन चुका है। चुनाव में न केवल नेता अपने परिचितों व शुभचिंतकों से चंदे की उगाही करते हैं, बल्कि राजनीतिक दलों पर भी चंदे के रूप में धन की बरसात होती है। भारतीय निर्वाचन आयोग के पास पहुंची सूचनाओं के अनुसार देश की दो प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों में से एक भाजपा ने अपने दानदाताओं की सूची ही नहीं सौंपी। जबकि कांग्रेस ने 26.66 करोड़ का चंदा प्राप्त करने की जानकारी पेश की है। इसमें दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के खजाने में दान देने वाले भामाशाहों में सर्वाधिक राशि देने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राज्य गुजरात के अहमदाबाद के हैं। पेश है फर्स्ट इण्डिया न्यूज की विश्लेषणात्मक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट। 

राजनेताओं को चंदा देने की बात नई नहीं है। सालों पहले कांग्रेस के कद्दावर नेता राजेश पायलट ने पहली बार यह कबूला था कि मुझे दौसा के एक संसदीय चुनाव में लड़ने के लिए चंदा दिया गया, जिसे मैंने स्वीकारा। राजेश पायलट ने साफगोही के साथ कहा था कि चुनाव में राजनेता चंदा लेकर प्रचार व प्रसार में खर्च करते हैं। लेकिन इसे किसी भी तरह करप्शन से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। यह बात तब की है, जब चंदे को लेकर कोई भी सख्त कायदे कानून नहीं बने थे। चंदे को लेकर अब भी राजनेताओं की नहीं आम आदमी में भी उत्सुकता रहती है कि चुनावों में होने वाला करोड़ों रुपए का खर्च आखिर आता कहां से हैं। जो पैसा खर्च होता है वह काला धन है या सफेद। इसके बाद राजनीतिक पार्टियों के लिए 20 हजार रुपए से अधिक की राशि प्राप्त करने की दशा में इसकी जानकारी सार्वजनिक करने के नियम बनें। पर फिर भी राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत राजनीतिक दल भी इसकी आधी अधूरी पालना ही कर रहे हैं। इसका प्रमाण निर्वाचन आयोग की ओर से 4 अक्टूबर 2018 को जारी अधिकारिक सूचना हैं, जिसमें से सात राष्ट्रीय दलों में से केवल तीन ने 20 हजार से अधिक राशि प्राप्त करने की बात स्वीकारी, चंदा देने वालों का विवरण भी उपलब्ध कराया। एक राष्ट्रीय पार्टी ने कहा उनकी पार्टी को 20 हजार से अधिक चंदा ही नहीं मिला। भाजपा सहित तीन पार्टियों ने चंदा राशि के बारे में सूचना देने की ही जरूरत नहीं समझी। ऐसे में आयाेग के पास पंजीकृत राज्य स्तरीय 59 राजनीतिक दलों से भला क्या उम्मीद की जा सकती है। 

वित्तीय वर्ष 2017-18 में 20 हजार रुपए से अधिक राशि का चंदा देने वालाें की सूचना आयोग को देने की अंतिम तिथि 30 सितम्बर 2018 को बीत चुकी है। 4 अक्टूबर को जारी भारतीय निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार पार्टी विथ डिफरेंस का नारा देने वाली सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी ने ही निर्वाचन आयोग को चंदा देने वालों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की। उधर, हाथ के चिंह पर चुनाव लड़ने वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अर्थात कांग्रेस ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में 26,65,88,621 रुपए का चंदा प्राप्त करने की जानकारी दी है। जबकि बहुजन समाज पार्टी ने इस श्रेणी में शून्य राशि प्राप्त होना दिखाया। उधर, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया ने एक करोड़ 14 लाख 65 हजार 990 रुपए प्राप्त होने व शरद पंवार की राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी अर्थात NCP ने दो करोड़ 8 लाख 74 हजार 988 रुपए चंदे के रूप में प्राप्त करने की जानकारी साझा की है। अब चर्चा कांग्रेस को 26.66 करोड़ का चंदा देने वाले 777 भामाशाहों की। जिनकी 66 पेज की पूरी सूची फर्स्ट इण्डिया के पास मौजूद है। 

कांग्रेस का खजाना भरने वाले भामाशाहों की बात करें तो इसमें कम्पनियों का नाम सबसे ऊपर हैं। रिकॉर्ड के अनुसार कांग्रेस को सर्वाधिक चंदा गुजरात से मिला है। इसमें अहमदाबाद की केडिला हैल्थ केयर लिमिटेड और उसकी सहयोगी ज्यूडस हैल्थ केयर लिमिटेड 2.50 करोड़ का चंदा देकर सूची में सबसे उपर है। इसके बाद एक करोड़ रुपए का चंदा देने वाली अहमदाबाद की निरमा लिमिटेड दूसरे स्थान पर रही है। गुजरात के बाद चंदा देने वाली कम्पनियों में 50 लाख रुपए का चंदा देने वाली हरियाणा गुड़गावं की PI इण्डस्ट्रीज लिमिटेड है। अन्य कम्पनियों ने 20 लाख रुपए से लेकर एक लाख रुपए चंदे के रूप में कांग्रेस के खजाने में जमा कराए। 

आयोग की सूचनाओं के अनुसार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी फण्ड में 54 हजार रुपए का HDFC बैंक का चेक नम्बर 000097 फरवरी 2018 में जमा कराया, राहुल गांधी की तर्ज पर ही UPA की चेयरपर्सन रही व पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी 54 हजार रुपए की राशि जुलाई 2017 में UCO बैंक के चैक नम्बर 000004 के माध्यम से जमा कराई। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष की तुलना में अधिक राशि जमा कराने वालों की सूची स्वभाविक रूप से काफी लम्बी है। राजस्थान की बात करें तो राजस्थान से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दो बार में एक लाख 30 हजार जमा कराए, जबकि उनके पुत्र वैभव गहलोत सहित करीब 40 लोग हैं, जिन्होंने ढ़ाई लाख से लेकर 21 हजार रुपए कांग्रेस के खाते में जमा कराए। राजस्थान में कांग्रेस के खजाने में  सर्वाधिक राशि देने वालों में पाली के खेतसिंह मेड़तिया का नाम है, जिन्होंने 2.50 लाख रुपए पार्टी को जमा कराए। 

राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग को अब तक 31.03.2018 तक मिले चंदे की जानकारी दी है, ऐसे में जरूरत इस बात की भी है कि दिसम्बर 2018 में पांच राज्यों में प्रस्तावित चुनावों में नवम्बर तक इन सभी राष्ट्रीय दलों को कितना चंदा मिला, कि जानकारी भी सार्वजनिक हो। जिससे यह पता चल सके कि बाजार में चल रही मंदी का शिकार केवल आम कारोबारी व उद्यमी ही है, या फिर राजनीतिक दलों को भी मंदी ने अपनी चपेट में लिया हैं। 

 

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