जयपुर VIDEO: सौर ऊर्जा से रोशन होगा 'बॉर्डर', फ्लड लाइटों को ग्रीन एनर्जी से जोड़ने का बन रहा प्लान

VIDEO: सौर ऊर्जा से रोशन होगा 'बॉर्डर', फ्लड लाइटों को ग्रीन एनर्जी से जोड़ने का बन रहा प्लान

VIDEO: सौर ऊर्जा से रोशन होगा 'बॉर्डर', फ्लड लाइटों को ग्रीन एनर्जी से जोड़ने का बन रहा प्लान

जयपुर: पाकिस्तान से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जल्द ही सोलर की बिजली से सरहद "चकाचौंध" होती नजर आएगी. सीमावर्ती इलाकों में इसके लिए बकायदा सोलर प्लांट विकसित किए जाएंगे, जहां से बिजली पैदा कर सीधे डेडिकेटेड फीडरों के जरिए फ्लड लाइटों को "करंट" मिलेगा. रिन्यूबल एनर्जी को बढ़ावा देने और बिजली के भारी भरकम खर्च को कम करने के लिए केन्द्र सरकार ने सीमावर्ती इलाकों के राज्यों के साथ मिलकर इस दिशा में मंथन शुरू कर दिया है. एक रिपोर्ट:

हर माह 3 करोड़ रुपए की बिजली खर्च:
विश्व की सबसे संवेदनशील अन्तरराष्ट्रीय बोर्डर, कमोबेश हर समय तनाव की स्थित, ऐसे में बोर्डर पर सुरक्षा में किसी भी तरह का समझौता नहीं हो सकता. इसीलिए अकेले राजस्थान की बात की जाए तो यहां 1070 किमी एरिए में फैले बॉर्डर इलाके को रोशन करने के लिए हर माह 3 करोड़ रुपए की बिजली खर्च होती है. यानी सालाना 36 करोड़ रुपए का खर्चा. इसी खर्च को कम करने व रिन्यूबल एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार ने सोलर प्लांट विकसित करने का मानस बनाया है. हाल ही में ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में केन्द्र ऊर्जा राज्य मंत्री आर के सिंह ने सीमावर्ती इलाकों वाले राज्यों के मंत्रियों से इस बारे में संवाद किया. बकायदा अधिकारियों ने अलग से बैठक लेकर कार्ययोजना पर विस्तार से मंथन किया. 

राजस्थान के सीमावर्ती इलाके का "पॉवर डेटा":
—सोलर से रोशन होगा 1070 किमी में फैला बॉर्डर इलाका
—फिलहाल जोधपुर डिस्कॉम प्रशासन दे रहा सीमावर्ती इलाके में बिजली
—राजस्थान के चार जिलों से गुजरती सीमा पर रोशनी व अन्य जरूरत के लिए हर माह 40 लाख यूनिट के आसपास बिजली होती है खर्च
—33 केवी के 10 डेडिकेटेड सब स्टेशन और पांच दूसरे सब स्टेशनों से फ्लड लाइटों को पहुंचाई जाती है बिजली
—अकेले राजस्थान में हर माह करीब 3 करोड़ की बिजली होती है फ्लड लाइटों पर खर्च

सौर ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश की उम्मीद:
केन्द्र सरकार के प्रस्ताव से राजस्थान को सौर ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश की उम्मीद जगी है. इसके पीछे का कारण ये है कि सोलर रेडियेशन के लिए राजस्थान पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. ऐसे में बॉर्डर की फ्लड लाइटों के लिए प्लांट लगाए जाते है, तो उसमें राजस्थान का पहली प्राथमिकता मिलेगी. खुद ऊर्जा मंत्री बी डी कल्ला ने केन्द्र सरकार की मंशा का स्वागत किया है. साथ ही ये भी कहा कि यदि राजस्थान में सोलर प्लांट लगाए जाएंगे तो राज्य सरकार जमीन समेत हर संभव सहयोग करेगी. 

रिन्यूबल एनर्जी को बढ़ावा देने का केन्द्र व राज्य सरकार का प्रयास स्वागत योग्य है. सर्वविदित है कि राजस्थान में सोलर की अपार संभावना है. ऐसे में उम्मीद ये ही की जा रही है कि जिस तरह से बोर्डर एरिया के लिए ग्रीन एनर्जी का प्लान बना है, उसी तर्ज पर दूसरे बड़े उपक्रमों के लिए भी सोलर को पहली प्राथमिकता पर रखा जाए. ऐसा हुआ तो ग्रीन एनर्जी, क्लीन एनर्जी की अवधारणा जल्द साकार होगी. 

... संवाददाता विकास शर्मा की रिपोर्ट


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