कुछ इस तरह है उदयपुर लोकसभा सीट का इतिहास

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/16 03:50

उदयपुर। भले ही विधानसभा चुनावों में इस बार उदयपुर जिले में काग्रेंस का प्रर्दशन आशानुकुल नही रहा हो लेकिन देश के सबसे बडे सदन यानि लोकसभा के लिहाज से उदयपुर संसदीय सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। 1951 से लेकर अब तक पिछले करीब 7 दशक के इतिहास में हुये कुल 16 चुनावो में 10 बार काग्रेंस,4 भाजपा और दो बार अन्य दलों के प्रत्याशी विजयी हुए। हालांकि तब से लेकर अब तक कई बार परिसीमन भी हुयें औऱ उदयपुर संसदीय सीट 2004 के बाद सामान्य से अनूसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गई। 

आदिवासी बाहुल्य दक्षिणांचल के 28 विधानसभा सीटों वाले उदयपुर संभाग में कुल 4 लोकसभा सीटें हैं। इनमें सें सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाली एक सीट हैं उदयपुर। उदयपुर संसदीय क्षैत्र जिले की आठ में सें 6 सीटों के अलावा प्रतापगढ की धऱियावाद और डूंगरपुर की आसपुर विधानसभा सीट को मिलाकर पूरा होता हैं। उदयपुर लोकसभा सीट इसलिए भी बेहद महत्वपू्ण हो जाती हैं क्योंकि इस  सीट से प्रदेश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले मोहनलाल सुखाडिया,कांग्रेस की कद्दावर नेता डाँ.गिरिजा व्यास और भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया नें प्रतिनिधीत्व किया हैं। दरअसल वर्ष 1951 से लेकर अब तक हुये कुल 16 चुनावो में सें 10 बार काग्रेंस,4 बार भाजपा औऱ दो बार अन्य को यहाँ विजयश्री हासिल हुई।इस सीट से मोहनलाल सुखाडिया,उनकी पत्नि इन्दुबाला सुखाडिया,जनसंघ के दिग्गज नेता भानुकुमार शास्त्री,डाँ.गिरिजा व्यास,गुलाबचंद कटारिया,किरण माहेश्वरी और रधुवीर मीणा जैसे दिग्गज देश के सबसे बडे सदन में जा चुके हैं।

उदयपुर लोकसभा सीट का इतिहास एक नजर में--
वर्ष          प्रत्याशी               पार्टी
1951     बंलवतसिंह मेहता          कांग्रेस
1957    माणिक्यलाल वर्मा           कांग्रेस
1962   धूलेश्ववर                  कांग्रेस
1967    धूलेश्वर                  कांग्रेस
1971     लालिया                स्वतंत्र पार्टी
1977   भानुकुमार शास्त्री           जनसंघ
1980     मोहनलाल सुखाडिया      कांग्रेस
1984     इन्दुबाला सुखाडिया       कांग्रेस
1989     गुलाबचंद कटारिया       भाजपा
1991     डाँ.गिरिजा व्यास        कांग्रेस
1996     डाँ.गिरिजा व्यास      कांग्रेस
1998     शांतिलाल चपलोत     भाजपा
1999    डाँ.गिरिजा व्यास       कांग्रेस
2004    किरण माहेश्वरी        भाजपा
2009    रधुवीर मीणा          कांग्रेस
2013    अर्जुनलाल मीणा       भाजपा

दरअसल वर्ष 2004 से पहले तक उदयपुर लोकसभा सीट सामान्य थी लेकिन 2004 में हुये परिसीमान के बाद यह सीट अनूसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गई। उदयपुर लोकसभा सीट से सबसे ज्यादा तीन बार सांसद बनने का मौका काग्रेंस की दिग्गज नेता डाँ.गिरिजा व्यास को मिला। बहरहाल इस बार विधानसभा चुनावों के जनादेश नें ना केवल पूरे मेवाड के राजनैतिक समीकरणों को अजब निराला कर दिया बल्कि उदयपुर लोकसभा सीट के भावी परिणाम को भी दिलचस्प बना दिया हैं।
रवि कुमार शर्मा,फस्ट इंडिया न्यूज,उदयपुर

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