कुछ इस तरह है रामगढ़ विधानसभा की सियासत

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/10/15 09:50

रामगढ़(अलवर)। अलवर की रामगढ़ विधानसभा सीट पर भारतीय लोकतंत्र के पहले चुनाव से ही यहां जाति गठबंधन के आधार पर ना तो टिकट बांटे गए और ना ही धर्म के आधार पर हार और जीत तय हुई । लेकिन 1990 के बाद से होने वाले चुनाव में धर्म के आधार पर ना केवल टिकट दिए गए बल्कि हार और जीत भी उसी आधार पर तय होने लगी। 1990 में 14561 मतों से कांग्रेस के जुबेर खान ने रघुवर दयाल गोयल को पटखनी दी और 1993 में जुबेर खान के खिलाफ ज्ञानदेव आहूजा ने चुनाव लड़ा । 

लेकिन आज खुद को हिंदूवादी कहने वाले ज्ञानदेव आहूजा उस वक्त मजदूर संघ की राजनीति करते थे और जुबेर खान के सामने टिक नहीं पाए। 8075 मतों से जुबेर खान ने रामगढ़ से दुबारा जीत दर्ज कर दी लेकिन 1998 के चुनाव में हिंदू मुस्लिम का ध्रुवीकरण हुआ और ज्ञान देव अहूजा 4224 मतों के साथ विजयी हुए और इस तरह आहूजा ने पहली सफल राजनीतिक चुनाव लड़े। अब धीरे-धीरे ज्ञानदेव आहूजा मजदूर संघों से दूर हो गए और 2003 के चुनाव में ज्ञानदेव आहूजा को फिर से जुबेर खान ने कुल 783 मतों से हरा दिया। 

2008 के चुनाव में ज्ञान देव आहूजा जुबेर खान को 16082 मतों से हराकर जीत दर्ज की। 2013 के चुनाव में जुबेर खान ने करीब 2008 से 18 हजार मत ज्यादा हासिल किए लेकिन बावजूद उसके ज्ञानदेव आहूजा ने लगातार दूसरी बार उन्हें 4647 मतों से हरा दिया। 2013 में जीतने के बाद से ही ज्ञान देव आहूजा सुर्खियों में रहे हैं खुद को राष्ट्रीय स्तर पर हिंदूवादी नेता के तौर पर पेश किया है । आहूजा ने कोई भी मौका नहीं गंवाया जहां वह मुस्लिम धर्म के खिलाफ बोल सकते थे या फिर कांग्रेस के खिलाफ हिंदू विरोधी होने का आरोप लगा सकते थे। 

सुर्खियों में रहना पसंद
जेएनयू में कंडोम के बयान को लेकर सुर्खियों में रहे आहूजा गौ तस्करी को आतंकवाद से भी बड़ा बता चुके हैं । वही गौ तस्करी करने वालों से मोबलीचिंग और हत्या का समर्थन भी आहूजा कर चुके हैं। हनुमान जी को दुनिया का पहला दलित नेता कहकर और लव जिहाद को लेकर बयान देकर भी आहूजा सुर्खियों में रहे हैं । रामगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले आहूजा अलवर के मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र में मजदूर संघों की राजनीति करते थे और अलवर में बंद हुए उद्योगों में आहूजा के आंदोलनों की बड़ी भूमिका रही है। 

अलवर में उद्योग भले ही ने पनप सके हों लेकिन आहूजा की राजनीति खूब पनपी । कभी वसुंधरा राजे का खुलकर समर्थन करने वाले आहूजा मंत्री न बनाए जाने से नाराज दिखे ऐसे में इस बार सरकार को खूब आड़े हाथों लिया। अलवर में पुलिस अधीक्षक द्वारा थानेदारों से वसूली करने, अपराधों में कमी नहीं आने को लेकर भी सरकार को घेर चुके हैं । आहूजा आज भी खुद को पत्रकार कहते हैं और विधानसभा में दी गई सूचना के आधार पर खुद को जर्नलिस्ट ही बताया है । बीच में दिए गए बयानों पर आहूजा ने कहा था कि वह विज्ञापनों से भी अच्छा पैसा कमा लेते हैं। 

बगावत आई खुलकर सामने
आगामी चुनाव में आहूजा एक बार फिर से टिकट मांग रहे हैं लेकिन अब आहूजा के विरोधी सक्रिय हो गए हैं खुद उनके शिष्य रहे अलवर शहर विधायक बनवारी लाल सिंघल भी अब खुलकर उनकी बगावत कर रहे हैं। पिछले 25 साल से जुबेर खान और ज्ञान देव आहूजा रामगढ़ की राजनीति में आमने-सामने है लेकिन इस बार दोनों तरफ ही संकट है। हालांकि जुबेर खान कांग्रेस में आला पद पर है लेकिन लगातार दो बार चुनाव हारना उनके खिलाफ जाता है। 

वहीं ज्ञानदेव आहूजा विवादित चेहरा बन चुके हैं वसुंधरा राजे से पटरी नहीं बैठना और लगातार खिलाफ बोलना उनकी टिकट पर संकट ला सकता है । यही कारण है कि रामगढ़ में कई दूसरे भाजपा नेता भी अपना भाग्य आजमाने भाजपा के प्रदेश से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक चक्कर लगा रहे हैं। आहूजा अलवर लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी की हार को लेकर भी मुख्यमंत्री राजे के खिलाफ बयान दे चुके हैं। बाहुबली का छवि बनाने वाले ज्ञानदेव आहूजा का जन्मस्थान ब्यावर है लेकिन बचपन श्री गंगानगर मे बीता।  

आहूजा 1958 में आरएसएस से जुड़ गये थे और 1963 में अलवर आ गये। आरएसएस मे विभिन्न पदों पर दायित्व रहा और 1975 में आपातकाल के दौरान गिरफ्तार होकर जेल भी गये। हिंदू जागरण मंच में क्षेत्रीय संगठन मंत्री रहे और 1993 में पहला टिकिट मिला।  आहूजा की बाहूबली होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे खुद कहते हैं, मुझ पर 250 से 300 मुकदमे दर्ज हुए लेकिन अभी सभी मुकदमे बंद हो चुके हैं। उनमें एफ आर लग चुकी है। वे कहते हैं कि 13 बार जेल गये हैं लेकिन एक भी बार व्यक्तिगत जीवन पर कोई आरोप नहीं लगा। 

बब्बर शेर कहलाना पसंद
परम्परागत चुनाव लड़ने वालों और नेताओं के खिलाफ जाना व उद्योगपतियों के खिलाफ आंदोलनों नें उन्हें बाहुबली बना दिया और राजस्थान मे उन्हें बब्बर शेर कहा जाने लगा। आहूजा को बब्बर शेर कहलाना अच्छा लगताहै। वे कहते है कि लास्ट केस जो उन्हें याद है वो चौधरी चरणसिंह की मूर्ती लगाने के लिए किया गया आंदोलन और उसमें पुलिस की ओर से मामला दर्ज किया गया था। 

खुद को गांधी नेहरु परिवार के विरोधी बताने वाले आहूजा मीडिया की सुर्खियों में बने रहना पसन्द करते हैं। पिछले दिनों रिश्वत का पैसा मन्दिरों और गुरुद्वारों में खर्च करने के बयान के बाद पार्टी ने कोई भी बयान नहीं देने के लिए कह दिया है। लेकिन आहूजा कहते हैं कि वे साफ बोलते हैं और कहे बिना नहीं रह सकते हैं। बड़ी मूंछें रखने उन्हें समय पर रंगने का ख्याल हमेशा रखते हैं। जब कोई बयान देते हैं और अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया उन्हें फोन करता है तो काफी खुश दिखते हैं। पाकिस्तान से आये हिन्दुओं को लेकर आंदोलन चला रहे हैं कि उन्हें भारत में नागरिकता मिल जाये। खुद भले ही बब्बर शेर कहलाना पसन्द करते हों लेकिन राजस्थान के लोग उन्हें लंकेश कहने से नहीं चूकते। 
 

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in

BJP ने 182 लोकसभा उम्मीदवारों की पहली सूची की जारी

BJP थोड़ी देर में जारी करेगी उम्मीदवारों की पहली सूची
देश के 3 प्रमुख मंदिरों की होली
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने देशवासियों को दी होली की शुभकामनाएँ
PM नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को दी होली की शुभकामनाएँ
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने देशवासियों को दी होली की शुभकामनाएँ
होली पर खास उपायों से जीवन में आएगी खुशहाली| Good Luck Tips
इस होली पर करें ये उपाय और संकटो से मुक्ति पाएं | GOOD LUCK TIPS