जल है, तो कल है...! आज जल संकट पूरे विश्व की समस्या, जब तक रहेगा पानी, तब तक रहेगा जीवन

जल है, तो कल है...! आज जल संकट पूरे विश्व की समस्या, जब तक रहेगा पानी, तब तक रहेगा जीवन

जयपुर: आज पूरी दुनिया विश्व जल दिवस मना रही हैं, क्योंकि जल संकट पूरे विश्व की समस्या है. जल दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों के बीच में जल संरक्षण का महत्व साफ पीने योग्य जल का महत्व आदि बताना है. जब तक पानी रहेगा, तब तक जीवन रहेगा. पूरा देश पेयजल की समस्या से त्रस्त हैं, लेकिन अपने राज्य राजस्थान की बात करें, तो आज भी यहां पेयजल की समस्या विकट हैं. हालात यह है कि आज भी पानी के लिए संघर्ष हो रहे हैं. ऐसे में पानी बचाने की जिम्मेदारी हम सबके लिए कितनी अहम हो जाती है.

नदियों का पानी दूषित होने के साथ होता जा रहा है कम:
एक समय था जब जगह-जगह नदियां, तालाब, नहर, कुएं दिखाई देते थे, लेकिन औद्योगीकरण की राह पर चल पड़ी इस नई दुनिया ने इस दृश्य को काफी हद तक बदल दिया है. तालाब, कुएं, नहर वगैरह सूखते जा रहे हैं. नदियों का पानी दूषित होने के साथ कम होता जा रहा है. लोगों के बीच जल संकट गहराता जा रहा है. विश्वभर के लोगों को जल की महत्ता समझाने और लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए हर साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस (World Water Day 2021) मनाया जाता है, देखा जाए तो दुनिया में जल की किल्लत देखते हुए करीब 32 साल पहले ही ये भविष्यवाणी कर दी गई थी कि अगर समय रहते इंसानों ने जल की महत्ता को नहीं समझा तो अगला विश्वयुद्ध  जल को लेकर होगा. 

पानी के लिए होगी अगली शताब्दी की लड़ाई:
बताया जाता है कि ये भविष्यवाणी संयुक्त राष्ट्र के छठे महासचिव बुतरस घाली ने की थी. उनके अलावा 1995 में वर्ल्ड बैंक के इस्माइल सेराग्लेडिन ने भी विश्व में पानी के संकट की भयावहता को देखते हुए कहा था कि इस शताब्दी में तेल के लिए युद्ध हुआ लेकिन अगली शताब्दी की लड़ाई पानी के लिए होगी. वहीं एक बार संबोधन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लोगों को चेताते हुए कहा था कि ध्यान रहे कि आग पानी में भी लगती है और कहीं ऐसा न हो कि अगला विश्वयुद्ध पानी के मसले पर हो.

1993 में 22 मार्च को पहली बार हुआ विश्व जल दिवस का आयोजन:
ब्राजील में रियो डी जेनेरियो में वर्ष 1992 में आयोजित पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन कार्यक्रम में विश्व जल दिवस मनाने की पहल की गई थी. 1993 में 22 मार्च को पहली बार विश्व जल दिवस का आयोजन किया गया. इसका उद्देश्य विश्व के सभी विकसित देशों में स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है.पूरे विश्व आबादी में 400 करोड़ ऐसे लोग हैं जिन्हें आज भी पीने भर पर्याप्त पानी नहीं मिलती है और आपको जानकर हैरानी होगी कि इस आबादी का एक चौथाई लोग भारत के हैं.

कुल ग्राउंडवाटर का 24 प्रतिशत हम करते हैं इस्तेमाल:
एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के कुल ग्राउंडवाटर का 24 प्रतिशत हम इस्तेमाल करते हैं. पिछले दशक में इसमें 23 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई. आज विश्व में जल का संकट कोने-कोने में व्याप्त है।देश में 1170 मिमी औसत बारिश होती है, लेकिन हम इसका सिर्फ 6 फीसदी पानी ही सुरक्षित रख पाते हैं. एक रिपोर्ट में भारत को चेतावनी दी गई है कि यदि भूजल का दोहन नहीं रूका तो देश को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है. 75 फीसदी घरों में पीने के साफ पानी की पहुंच ही नहीं है. स्थिति काफी भयावह है. पानी हमारे बीच से लगातार गायब होता जा रहा है. 1951 में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता 5177 घन मीटर थी, जो वर्ष 2025 तक घटकर 1341 घन मीटर रह जाएगी. कुओं में पहले 15 से 20 फीट पर पानी उपलब्ध था, अब वह 200 फीट से नीचे चला गया है. राजस्थान में तो पानी 500 फीट तक नीचे चला गया है. आंकड़े बताते हैं कि देश की 275 नदियों में पानी तेजी से खत्म हो रहा है.

देश में 23 प्रतिशत बढ़ा 10 साल में पानी का दोहन:
-70 प्रतिशत ज्यादा पानी ले रहे हैं तय मात्रा से
-1170 मिमी औसत बारिश होती है देश में, पर इसका सिर्फ 6 प्रतिशत ही हम सहेज पाते हैं.
-91 प्रमुख जलाशयों में जलस्तर क्षमता के 25 प्रतिशत पर है.
21 शहर 2030 तक डे जीरो पर होंगे. यानी इनके पास पानी के स्रोत नहीं बचेंगे
75 प्रतिशत घरों में पीने के साफ पानी की पहुंच ही नहीं है.
भारत में महिलाएं पानी के लिए औसतन प्रतिदिन लगभग 6 किलोमीटर का सफर करती हैं.

आधा से अधिक पानी फ्लोराइड युक्त:
पूरी दुनिया पानी का संकट झेल रही है और इसके बचाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं. राजस्थान की अगर हम बात करे, तो देश की कुल जनसंख्या का 10 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में रहता है, लेकिन पानी की उपलब्धता के आंकड़े इसके उलट हैं. देश के मुकाबले राजस्थान में महज एक दशमलव एक फीसदी सतही जल है. भूजल का कुल प्रतिशत भी पांच दशमलव पांच ही है. राजस्थान में एक लाख 20 हजार के करीब गांव ढाणियां हैं, लेकिन इनमें से भी आधी से अधिक ऐसी है, जहां पर आसानी से पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा. आधा से अधिक पानी फ्लोराइड युक्त है, तो करीब 57 फीसदी पानी में नाइट्रेट हैं. आर ओ प्लांट व डी फ्लोराइड यूनिट के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के सरकारी प्रयास हो रहे हैं, लेकिन ये नाकाफी है. आंकड़े खुद इसे बयान कर रहे हैं.

राजस्थान में सतही जल महज 1.1 फीसदी:
-भूजल महज 5.5 फीसदी हैं राजस्थान में
-राजस्थान के दो तिहाई जिले मरुस्थली
-50 फीसदी फ्लोराइड युक्त पानी हैं राजस्थान में
-57 फीसदी पानी नाइट्रेट युक्त हैं
-1 लाख 20 हजार करीब गांव ढाणियां हैं राजस्थान में
-करीब 39 हजार गांव-ढाणियों में पानी की कमी है
-17 हजार गांव ढाणियों में स्थिति बहुत गंभीर है
-14 हजार गांव ढाणियों में पेयजल परिवहन की व्यवस्था नहीं
-हैडंपप से प्यास बुझाते हैं 50 फीसदी गांव-ढाणियां

जानिए, राजस्थान में पेयजल की स्थिति:
आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में पेयजल की स्थिति क्या हैं. ऐसे में आधी से अधिक जनता को अपने स्तर पर ही पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है. करीब 39 हजार गांव ढाणी ऐसी हैं, जहां की जनता एक या दो हैडंपप पर निर्भर है. सरकार अपने स्तर पर पेयजल के लिए कई प्रयास कर रही है. योजनां भी बनाई जा रही है, लेकिन आंकड़े व हालात बताते हैं कि राजस्थान में पेयजल के लिहाज से स्थिति काफी विकट है. जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं, हम सभी की है. ऐसे में समय रहते हम नहीं जगे, तो पानी की बूंद बूंद के लिए मोहताज हो जाएंगे.  जल है, तो कल है. इसी को ध्यान में रखते हुए हमें पानी को बर्बादी से रोकना होगा और बूंद बूंद पानी बचाना होगा.

अब सबसे बड़ी चुनौती पानी को जुटाने की:
मरती नदियां, खाली होते कुएं व सूखते तालाब को वर्षा ही जीवन दे सकती है. अब सबसे बड़ी चुनौती पानी को जुटाने की है. जिसे पानी चाहिए, उसे अब बचाने के लिए भी जुटना होगा.  इस बार विश्व जल दिवस की थीम वैल्यूइंग वॉटर निर्धारित की गई है.पंच तत्वों से निर्मित मानव शरीर और ब्रह्मांड की रचना में जल सबसे प्रमुख कारक है. इसी कारण पानी के महत्व और मोल की कद्र का भाव हर व्यक्ति की प्रकृति में नैसर्गिक रूप से विद्यमान है. जरूरत बस इस बात की है कि हम सभी अपने रोजमर्रा के जीवन में पानी को जिम्मेदारी से बरतते हुए इसके मितव्ययता से सदुपयोग की आदत डाले और इसके लिए घर, परिवार और समाज में आदर्श माहौल बनाए.

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