कोलंबो EU द्वारा व्यापार योजना की समीक्षा के रूप में श्रीलंका ने आतंकवाद विरोधी कानून में संशोधन को दी मंजूरी

EU द्वारा व्यापार योजना की समीक्षा के रूप में श्रीलंका ने आतंकवाद विरोधी कानून में संशोधन को दी मंजूरी

EU द्वारा व्यापार योजना की समीक्षा के रूप में श्रीलंका ने आतंकवाद विरोधी कानून में संशोधन को दी मंजूरी

कोलंबो: श्रीलंका के सांसदों ने मंगलवार को आतंकवाद रोधी कानून में सुधारों को मंजूरी दे दी. बदतर आर्थिक संकट से गुजर रहे श्रीलंका ने यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापार संबंधों को बढ़ावा देने के मद्देनजर इस कानून में सुधार करने का निर्णय लिया है.

दरअसल पिछले साल पारित यूरोपीय संसद के प्रस्ताव में श्रीलंका के साथ एक तरजीही व्यापार योजना का आह्वान किया गया था, जिसका इस्तेमाल इस दक्षिण एशियाई देश में अधिकारों में सुधार के लिए किया जाएगा. सामान्यीकृत वरीयता योजना या जीएसपी प्लस के तहत चुनिंदा देशों से आयात होने पर पर्याप्त शुल्क रियायतें दी जाती हैं. यूरोपीय यूनियन जल्द ही संबंधित रियायतों की समीक्षा कर सकता है.

1979 के आतंकवाद रोधी कानून का व्यापक रूप से दुरुपयोग किया गया:

श्रीलंका के विपक्षी समूहों और सांसदों ने इन सुधारों को 'बनावटी' करार देते हुए कहा है कि अब भी आतंकवादी कानूनों में बिना वारंट के संदिग्ध की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती और अदालतें अक्सर यातना देकर लिये गए इकबालिया बयानों को सबूत के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देती रहेंगी. उन्होंने कहा कि 1979 के आतंकवाद रोधी कानून का व्यापक रूप से दुरुपयोग किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों को बिना मुकदमे के कई साल जेल में बिताने पड़े.

सुधार केवल एक प्रक्रिया की शुरुआत है और सरकार जल्द ही एक नया कानून पेश करेगी:

हालांकि न्याय मंत्री अली साबरी ने कहा कि सुधार पर्याप्त हैं और संदिग्धों को अदालत में अपनी नजरबंदी को चुनौती देने की अनुमति देते हैं. इसके अलावा इन सुधारों के जरिये मामलों की सुनवाई में तेजी लाई जा सकेगी, जिससे संदिग्धों को मुकदमा चलाए जाने से पहले लंबे समय तक हिरासत में रखने से बचा जा सकेगा. साबरी ने कहा कि सुधार केवल एक प्रक्रिया की शुरुआत है और सरकार जल्द ही एक नया कानून पेश करेगी. सोर्स-भाषा   

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