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राज्य सहकारी कर्मचारी संघ ने किया ऋण वितरण कार्यक्रम का विरोध जारी रखने का फैसला

राज्य सहकारी कर्मचारी संघ ने किया ऋण वितरण कार्यक्रम का विरोध जारी रखने का फैसला

जयपुर: राज्य सहकारी कर्मचारी संघ ने आज प्रांत स्तरीय बैठक बुलाकर सहकारिता विभाग के ऋण वितरण कार्यक्रम का विरोध जारी रखने का फैसला किया है. राजस्थान सहकारी कर्मचारी संघ का सरकार और बैंक की ओर से थोपी गई अल्पकालीन ऑनलाइन पंजीयन एवं फसली ऋण वितरण योजना का एक जून 2019 के निरंतर विरोध जारी है. 

खरीफ की बुवाई का समय नजदीक आ गया किंतु नहीं मिल रहा ऋण 
खरीफ की बुवाई का समय नजदीक आ गया है किंतु बैंक और सरकार अपनी हठधर्मिता के कारण किसानों को ऋण नहीं दिलवा पा रही है और पैक्स कर्मचारियों का अस्तित्व समाप्त करने पर अड़ी हुई है. जबकि ग्राम सेवा सहकारी समिति में कार्यरत व्यवस्थापक और उसका कर्मचारी गांव गांव ढाणी ढाणी में सरकार की जारी महत्वाकांक्षी योजनाओं को लागू करने जी जान से लगा रहता है और ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक वित्तीय संसाधनों को उपलब्ध करवाने की ग्रामीणों से सीधी पकड़ है. ऐसी महत्वपूर्ण कड़ी पैक्स कर्मचारियों को अभी तक नियोक्ता निर्धारण नहीं किया हुआ है और पैक्स कर्मचारियों को छठा वेतनमान तो जारी कर दिया गया किंतु इन्हें सातवें वेतनमान के परीलाभो से वंचित किया हुआ है. विभागीय अधिकारी मनमर्जी से नियम बना लेते हैं और मन मर्जी से ही उसे लागू कर देते हैं जिसका जीता जागता प्रमाण राज्य सरकार के कर्मचारियों को अधिकतम 300 पी एल जबकि पैक्स कर्मियों को अधिकतम अवकाश नकदी कर्ण 120 दिवस भी जारी किया हुआ है. पैक्स कर्मचारी ऑनलाइन की स्थान पर कंप्यूटराइजेशन के माध्यम से ऋण वितरण करवाना चाह रहे हैं. 

बैंक अधिकारियों के निर्देशन में पैक्स का अस्तित्व समाप्त करने की बन रही योजना
साथ ही गत वर्ष ऋण माफी हुई उसी प्रक्रिया को पुनः ऋण वितरण में लागू करवाने के पक्ष में है जबकि सरकार अपनी मनमर्जी करके और बैंक अधिकारियों के निर्देशन में पैक्स का अस्तित्व समाप्त करने की पूरी योजना है. यह बिजनेस कॉरस्पॉडेंट का दूसरा विकल्प निकालकर समितियों का अस्तित्व समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है जबकि जोधपुर हाईकोर्ट द्वारा बिजनेस कॉरस्पॉडेंट पर स्टे दिया हुआ है और संगठन द्वारा उस पर कोर्ट आफ कंटम लगाया हुआ है. इसके बावजूद बैंक अपनी मनमर्जी से इस नई योजना को लागू कर अंजाम दे रहे हैं जिसका असर ले देकर किसानों को भुगतना पड़ रहा है और पैक्स का अस्तित्व समाप्त होने से पैक्स कर्मचारियों के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह अंकित हो गया है.         

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