गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार की बड़ी तैयारी

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/03/21 10:13

जयपुर (अभिषेक श्रीवास्तव)। शहरों को साफ रखने और कचरा व गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार बड़ी तैयारी कर रही है। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से नए सिरे से तैयार ठोस कचरा प्रबंधन उप विधियां लागू की जाएंगी। इन उप विधियों के तहत शहरी निकाय शहरों को स्वच्छ रखने के लिए कानूनन अधिक मुस्तैदी से काम कर सकेंगे। खास रिपोर्ट--

प्रदेश में वर्ष 2015 में जारी ठोस कचरा प्रबंधन उप विधियां लागू हैं। लेकिन केन्द्र सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2016 में ठोस कचरा प्रबंधन के नए नियम जारी किए गए थे। इन नियमों को आगे क्रियान्वित करने के लिए सभी राज्यों को उप विधियां बनानी थी। प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार में इन उप विधियों को तैयार करने के लिहाज से खास कारगर काम नहीं हुआ। प्रदेश में गहलोत सरकार के गठन के बाद ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 के तहत ठोस कचरा प्रबंधन उपविधियां लागू करने का काम शुरू हो गया। स्वायत्त शासन विभाग ने इन ठोस कचरा प्रबंधन उपविधियां का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। यह ड्राफ्ट स्वीकृति के लिए मंत्री शांति धारीवाल को भेजा गया है।  

इन उप विधियों में नया क्या है

-पहली बार इन उपविधियों में प्लास्टिक कचरा फैलाने वालों के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान किया गया है
-सड़क पर फैलाया प्लास्टिक कचरा जब तक हटाया तक तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है
-नगर निगम क्षेत्र में 500 रुपए प्रतिदिन,नगर परिषद क्षेत्र में 200 रुपए प्रतिदिन और नगरपालिका क्षेत्र 100 रुपए प्रतिदिन जुर्माने का प्रावधान किया गया है
-इसी तरह प्लास्टिक कैरी बेग के इस्तेमाल पर भी जुर्माने का प्रावधान किया गया है
-कचरा संग्रहण के लिए पहली बार सरकारी व निजी हॉस्टल दोनों की अलग-अलग दर तय की गई है
-होटल रेस्टोरेंट की नई श्रेणी जोड़ते हुए वहां से कचरा संग्रहण की दर तय की गई है
-वाणिज्यक गतिविधियों में सरकारी कार्यालय,बैंक,बीमा कार्यालय और सरकारी शिक्षण संस्थानों को भी शामिल किया गया है
-इन सभी परिसरों से भी कचरा संग्रहण शुल्क वसूला जाएगा
-निजी शैक्षणिक संस्थान,निजी कोचिंग सस्थान और निजी कोचिंग क्लासेज से कचरा संग्रहण का शुल्क अलग-अलग रखा गया है
-निजी छोटे क्लिनिक से भी कचरा संग्रहण का इन उप विधियों में शुल्क निर्धारित किया गया है।

स्वायत्त शासन विभाग की ओर से तैयार की गई इन उपविधियों में कचरे के प्रबंधन और निस्तारण के भी पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। आपको बताते हैं कि शहरों में एकत्र कचरे के प्रबंधन और उसके वैज्ञानिक निस्तारण के लिए इन उप विधियों के तहत पहली बार क्या प्रावधान लागू किए जाएंगे-

-नगर नियोजन विभाग सुनिश्चित करेगा कि सभी शहरों के मास्टरप्लान में ठोस अपशिष्ट के प्रबंधन का प्रावधान किया जाए
-जिला कलक्टर संबंधित निकाय को ठोस अपशिष्ट  प्रसंस्करण और निस्तारण के लिए भूमि उपलब्ध कराएंगे
-इसके लिए निकाय भूमि चिहिन्त कर प्रस्ताव नगर नियोजन विभाग को भेजेंगे
-200 से अधिक मकान या 5 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल की किसी भी योजना में कचरे के पृथक्करण,भंडारण व प्रसंस्करण के लिए अलग स्थान चिहिन्त होगा
-ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 के प्रावधानों को टाउनशिप पॉलिसी और एकीकृत भवन विनियमों में शामिल किया जाएगा

नई लागू की जाने वाली उपविधियों में शहरों को पूरी तरह से साफ रखने के लिए लिहाज से कई प्रावधान जोड़े गए हैं, लेकिन इन्हें सख्ती से लागू करने की जिम्मेदारी केवल निकायों पर छोड़ी गई तो इनका उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा। यह जरूरी है कि राज्य सरकार इन उप विधियों के क्रियान्वयन की पूरी मॉनिटरिंग करे और  इन उपविधियों के तहत की गई कार्यवाही की साप्ताहिक या मासिक रिपोर्ट निकायों से मांगे।
 

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