प्रदेश को जल्द मिलेगी तीन महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं की सौगात 

Naresh Sharma Published Date 2019/06/29 05:41

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि प्रदेश की तीन महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं यथा डूंगरपुर-रतलाम वाया बांसवाड़ा, अजमेर-नसीराबाद-सवाईमाधोपुर वाया टोंक एवं सरमथुरा-गंगापुर वाया करौली को प्रारम्भ करने के लिए केन्द्र सरकार से आग्रह किया जाएगा. राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक होने पर ही परियोजना के लिए पूर्व में प्रस्तावित राज्य द्वारा 50 प्रतिशत निर्माण लागत राशि दिए जाने पर विचार किया जा सकेगा. 

सीएम ने पूरक प्रश्नों के जवाब में दिया आश्वासन:
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान विद्यायकों की ओर से पूछे गये पूरक प्रश्नों के जवाब पर हस्तक्षेप करते हुए यह आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में इन रेल परियोजनाओं के लिए राज्य द्वारा निःशुल्क भूमि एवं परियोजना निर्माण लागत का 50 प्रतिशत दिए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई थी. तब प्रदेश सरकार देश की उन गिनी-चुनी सरकारों में थी जो ऐसी परियोजनाओं के लिए आर्थिक सहभागिता देने को तैयार थी, लेकिन वर्ष 2016 में तत्कालीन सरकार द्वारा राज्य की खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए सम्पूर्ण परियोजना निर्माण लागत रेल मंत्रालय द्वारा वहन किए जाने का पत्र केन्द्र को लिखा. जिसमेें केन्द्र सरकार द्वारा असमर्थता जाहिर की गई.  

सांसदोें से मांगा सहयोग:
सीएम गहलोत ने कहा कि ये रेल परियोजनाएं राज्य एवं प्रदेशवासियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे रेल सुविधा से वंचित तीन जिला मुख्यालय रेलवे से जुड़ जाएंगे और वहां के लोगों को रेल सुविधा मिल सकेगी. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार केन्द्र सरकार से इन रेल परियोजनाओं का काम प्रारम्भ करने का आग्रह करेगी. उन्होंने इस कार्य में प्रदेश के सभी सांसदोें से सहयोग मांगा. 

केन्द्र की स्वीकृति के बाद भी नहीं मिला पैसा:
इससे पहले परिवहन मंत्री प्रताप खाचरियावास ने विधायक कन्हैयालाल के मूल प्रश्न के जवाब में बताया कि विधानसभा क्षेत्र मालपुरा से गुजरने वाली अजमेर वाया टोडारायसिंह, टोंक होते हुये सवाईमाधोपुर रेलवे लाईन केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकृत की जा चुकी है, परन्तु आधा पैसा केन्द्र सरकार ने नहीं दिया है. वर्ष 2013 में राज्य सरकार ने निःशुल्क भूमि उपलब्ध कराने तथा परियोजना लागत 50 प्रतिशत राशि वहन करने की शर्त को स्वीकार किया था. परन्तु वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने निर्माण लागत की 50 प्रतिशत सहभागिता देने में असमर्थता व्यक्त की एवं रेलवे को अपने स्तर से परियोजना क्रियान्वित करने का आग्रह किया था. 

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